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गहरे अल्फाज़ - Author on ShareChat
गहरे अल्फाज़
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#hindipoetry #lyrics #contentcreater #nature #hindi
पत्ते ने कहा ಕ 42 एक पत्ता, हवाओं के संग डोला था, शाख ज़मीं पर गिरने से पहले, वो रोते रोते बोला था। जिस पेड़ ने उसे पाला था, हरी ओढ़नी पहनाई थी, आज विदा की उस बेला में, उसने अपनी बात उठाई थी। गिरते पत्ते ने पेड़ से पूछाः "मुझसे ऐसी क्या खता हुई? जो हरी-भरी इस दुनिया से, आज मेरी विदा हुई? मैंने तो हर मौसम झेला, धूप और बरसात सही, तुम्हारी छांव को गहरा करने में ॰ मैंने कोई कसर न रखी। फिर आज हवा के एक झोंके ने, मुझे तुमसे दूर कर दिया, की धूल  में मिलने को, आखिर क्यों मजबूर कर दिया? " ज़मीं पेड़ ने अपनी शाखों को हिलाया, और गंभीर होकर कहाः "सुन मेरे प्रिय अंश! ना तू रूठ, ना दिल को छोटा कर, कोई सज़ा नहीं, इसे कुदरत का नियम मानकर चल। जुदाई 46 तेरा पीला पड़ना गवाह है, कि तूने अपना फ़र्ज़ निभाया है, मेरी उम्र को बढ़ाने में, तूने अपना यौवन गंवाया है। पत्ते शाख से, यूँ अलग न हो पाएंगे , अगर पुराने तो सोचो मेरी डालियों पर, नए कोंपल कैसे आएंगे?" पेड़ ने आगे तसल्ली देते हुए कहाः "तू ज़मीं पर गिरकर भी॰ कभी बेकार नहीं होगा, मिट्टी में मिलकर तू खाद बनेगा, मेरा ही आधार बनेगा। तेरा यह गिरना अंत नहीं, एक नई शुरुआत का इरादा है, तू फिर मुझमें लौट आएगा, मेरा यह अटूट वादा है।" -्लेखिका काजल पत्ते ने कहा ಕ 42 एक पत्ता, हवाओं के संग डोला था, शाख ज़मीं पर गिरने से पहले, वो रोते रोते बोला था। जिस पेड़ ने उसे पाला था, हरी ओढ़नी पहनाई थी, आज विदा की उस बेला में, उसने अपनी बात उठाई थी। गिरते पत्ते ने पेड़ से पूछाः "मुझसे ऐसी क्या खता हुई? जो हरी-भरी इस दुनिया से, आज मेरी विदा हुई? मैंने तो हर मौसम झेला, धूप और बरसात सही, तुम्हारी छांव को गहरा करने में ॰ मैंने कोई कसर न रखी। फिर आज हवा के एक झोंके ने, मुझे तुमसे दूर कर दिया, की धूल  में मिलने को, आखिर क्यों मजबूर कर दिया? " ज़मीं पेड़ ने अपनी शाखों को हिलाया, और गंभीर होकर कहाः "सुन मेरे प्रिय अंश! ना तू रूठ, ना दिल को छोटा कर, कोई सज़ा नहीं, इसे कुदरत का नियम मानकर चल। जुदाई 46 तेरा पीला पड़ना गवाह है, कि तूने अपना फ़र्ज़ निभाया है, मेरी उम्र को बढ़ाने में, तूने अपना यौवन गंवाया है। पत्ते शाख से, यूँ अलग न हो पाएंगे , अगर पुराने तो सोचो मेरी डालियों पर, नए कोंपल कैसे आएंगे?" पेड़ ने आगे तसल्ली देते हुए कहाः "तू ज़मीं पर गिरकर भी॰ कभी बेकार नहीं होगा, मिट्टी में मिलकर तू खाद बनेगा, मेरा ही आधार बनेगा। तेरा यह गिरना अंत नहीं, एक नई शुरुआत का इरादा है, तू फिर मुझमें लौट आएगा, मेरा यह अटूट वादा है।" -्लेखिका काजल
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