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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - वाक़िफ़ থ 457 हम फ़रेब से "साहब 15 हमें तो लगा था जो जैसा दिखता है वैसा ही होगा।| वाक़िफ़ থ 457 हम फ़रेब से "साहब 15 हमें तो लगा था जो जैसा दिखता है वैसा ही होगा।| - ShareChat