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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - उस सरल हृदय शान्त सरोवर का... भाग्य क्या हो सकता है..? जो बहता है माँ गंगा की पवित्र निर्मल धारा की तरह... उगता है स्वर्णिम तेज प्रकाशित सूर्य की तरह.  हैे शुभ समय की चलता धार की तरह... महकता है सुवासित सुंदर पुष्प की तरह... गिरता है सावन की झर झर फुहार की तरह... ढलता है अंबर में बिछी लालिमा की तरह. शायद एकदम श्वेत आलोकित पुंज की तरह... जो बसता हो आत्म भीतर भगवत धर्म अंश की तरह... स्वाती छीपा उस सरल हृदय शान्त सरोवर का... भाग्य क्या हो सकता है..? जो बहता है माँ गंगा की पवित्र निर्मल धारा की तरह... उगता है स्वर्णिम तेज प्रकाशित सूर्य की तरह.  हैे शुभ समय की चलता धार की तरह... महकता है सुवासित सुंदर पुष्प की तरह... गिरता है सावन की झर झर फुहार की तरह... ढलता है अंबर में बिछी लालिमा की तरह. शायद एकदम श्वेत आलोकित पुंज की तरह... जो बसता हो आत्म भीतर भगवत धर्म अंश की तरह... स्वाती छीपा - ShareChat