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22 22 22 22 बे मतलब हाथ ना मल तू सच की राहो पर अब चल तू चहरे पर चहरे है सब के किसके कितने चहरे लिख तू दिखते सब इक जैसे ही है अब के सब से जुदा दिख तू क्यों करते हो दिल की बाते अल्फाज ग़ज़लों में लिख तू तरसे हो दीद को जिस के मिलन को उससे अब सज तू लिख डाले जज्बात अपने समझ अश आर ना पढ़ तू कर ना खुद से जुदा हमको लड़ना है हमसे तो लड़ तू सपनो में जीना ना सीखा खाब आँखों में ना मढ़ तू ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 8/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - खाब आँखों में ना چ मढ बे मतलब हाथ ना নু सच की राहो पर अब चल तू चहरे पर चहरे है सबके किसके कितने चहरे लिख तू दिखते सब इक जैसे ही है जुदा दिख तू 344 4 ग क्यों करते हो दिल की बाते में लिख तू अल्फाज ग़ज़लों ज़ तरसे हो दीद को जिस के मिलन को उससे अब सज तू ल लिख डाले जज्बात अपने समझ अशआरना पढत खुद से जुदा हमको करन लड़ना है हमसे तो लड़तू सपनो में जीना ना सीखा खाब आँखों में ना मढ ( लक्ष्मण दावार्नी pHotolewa coh खाब आँखों में ना چ मढ बे मतलब हाथ ना নু सच की राहो पर अब चल तू चहरे पर चहरे है सबके किसके कितने चहरे लिख तू दिखते सब इक जैसे ही है जुदा दिख तू 344 4 ग क्यों करते हो दिल की बाते में लिख तू अल्फाज ग़ज़लों ज़ तरसे हो दीद को जिस के मिलन को उससे अब सज तू ल लिख डाले जज्बात अपने समझ अशआरना पढत खुद से जुदा हमको करन लड़ना है हमसे तो लड़तू सपनो में जीना ना सीखा खाब आँखों में ना मढ ( लक्ष्मण दावार्नी pHotolewa coh - ShareChat
1222 1222 1222 न कोई अब मुझे मंजिल नज़र आये तेरे बिन कोई ना साहिल नजर आये मुकम्मल ना हुआ कोई मेरा अरमां सभी मरते हुऐ तिल तिल नजर आये कभी उफ ना किया दुख दर्द सह कर भी अकेले अब सफर मुश्किल नजर आये सुलगता है मेरा दिल , आँखे बहती है न कोई मुझे अब महफ़िल नजर आये करूँ क्या अब में इस दिल का बताओ तो मुझे जब मेरा दिल कातिल नज़र आये नज़र आता है मेरे आँसुओ में जो उसी को हम सदा बेदिल नज़र आये ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 4/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - अकेले अब सफर नजर आये সুহিকল न कोई अब॰ मुझे मंजिल नजर आये तेरे बिन कोईना साहिल नजर आये हुआ   कोई॰ मेरा 3Ri J [| सभी मरते हुऐ तिल तिल नजर आये य दुख दर्द सह कर भी कभी उफना किया दो मुश्किल नजर आये अक्ल -ப व ೯  fY3ira ह बहती सुलगत कोईमुझे अब महफ़िल नजरआये d ్న करूँ क्या अबरगइस दिल का बताओ तो मुझे जब मेरा दिल कातिल नज़़र आये घे आता है मेरे आँसुओ में जो - उसी का हम सदा बेदिल नज़र आये लक्ष्मण दावानी अकेले अब सफर नजर आये সুহিকল न कोई अब॰ मुझे मंजिल नजर आये तेरे बिन कोईना साहिल नजर आये हुआ   कोई॰ मेरा 3Ri J [| सभी मरते हुऐ तिल तिल नजर आये य दुख दर्द सह कर भी कभी उफना किया दो मुश्किल नजर आये अक्ल -ப व ೯  fY3ira ह बहती सुलगत कोईमुझे अब महफ़िल नजरआये d ్న करूँ क्या अबरगइस दिल का बताओ तो मुझे जब मेरा दिल कातिल नज़़र आये घे आता है मेरे आँसुओ में जो - उसी का हम सदा बेदिल नज़र आये लक्ष्मण दावानी - ShareChat
122 122 122 12 बिना तेरे सूना मेरा घर यहाँ खुशी खो गई तुझे खो कर यहाँ मिटा कर मेरी आँख के तारे को अंधेरो से है भर दिया दर यहाँ अधूरी रही हर एक आरजू सदा ठोकरों में रहा सर यहाँ कहर ऐसे ढाया मेरे दिल पे अब तेरी याद में , मैं रहा मर यहाँ बझाये से बुझती नही प्यास ये रहें आँखे चाहे सदा तर यहाँ समय का चला चक्र कुछ ऐसे है बिलखता रहा खव्हिशे धर यहाँ ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 3/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - खो गई तुझे खुशी खो कर यहॉ बिना तेरे सूना मेरा घर यहाँ खो गई तुझे खो कर यहाँ खुशी جآ मिटा कर मेरी आँख के तारे को अंधेरो से है भरदिया दर यहा रही॰  हर एक आरजू अधूरी 9 सदा ठोकरों में रहा सर यहाँ چ कहर ऐसे ढाया मेरे दिल पे अब तेरी याद में , मैं रहा मर यहाँ # बझाये से बुझती नही प्यास ये रहें आँखे चाहे सदा तर यहा समय का चला चक्र कुछ ऐसे है बिलखता रहा खव्हिशे धर यहाँ ( लक्ष्मण दावानी खो गई तुझे खुशी खो कर यहॉ बिना तेरे सूना मेरा घर यहाँ खो गई तुझे खो कर यहाँ खुशी جآ मिटा कर मेरी आँख के तारे को अंधेरो से है भरदिया दर यहा रही॰  हर एक आरजू अधूरी 9 सदा ठोकरों में रहा सर यहाँ چ कहर ऐसे ढाया मेरे दिल पे अब तेरी याद में , मैं रहा मर यहाँ # बझाये से बुझती नही प्यास ये रहें आँखे चाहे सदा तर यहा समय का चला चक्र कुछ ऐसे है बिलखता रहा खव्हिशे धर यहाँ ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
22 22 22 22 खत्म न होंगे अब अंधेरे सदा रहेंगे हम को घेरे लौट न आएंगे अब वो दिन वो रातें और वो सवेरे करलूं चाहे में जितने जतन थमेंगे न आँसू ये मेरे खो गया नामों निशाँ मेरा वक्त ने इस कदर दिन फेरे इक तेरे चले जाने से अब जहाँ भी है आँखे ततेरे रब रूठा है या के नसीबा उजड़ गए खुशियों के डेरे अब भी आँखों पर हैं छाए खेल बचपन के वो तेरे मेरे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 17/10/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 22 22 22 22 अब अंधेरे होंगे खत्म न रहेंगे  हम को ೫ মমা लौट न अब वो दिन आएंगे d1 और वो सवेरे যন करलूं चाहे में जितने जतन 3R 4 4 थमेंगे न गया नामों निशाँ मेरा खो कदर दिन फेरे वक्त ने इस इक तेरे चले जाने से अब है आँखे 3767 9 ततेरे रूठा हैया के नसीबा q उजड़ गए खुशियों के डेरे अब भी आँखों पर हैं छाए खेल बचपन केवो तेरे मेरे ( लक्ष्मण दावानी Z ) 17/10/2018 22 22 22 22 अब अंधेरे होंगे खत्म न रहेंगे  हम को ೫ মমা लौट न अब वो दिन आएंगे d1 और वो सवेरे যন करलूं चाहे में जितने जतन 3R 4 4 थमेंगे न गया नामों निशाँ मेरा खो कदर दिन फेरे वक्त ने इस इक तेरे चले जाने से अब है आँखे 3767 9 ततेरे रूठा हैया के नसीबा q उजड़ गए खुशियों के डेरे अब भी आँखों पर हैं छाए खेल बचपन केवो तेरे मेरे ( लक्ष्मण दावानी Z ) 17/10/2018 - ShareChat
2122 2122 2122 खो दिया है जिसको पाना चाहता हूँ फिर गले उस को लगाना चाहता हूँ रात उतरा शाख पर जो फूल मेरी अपने आँगन में सजाना चाहता हूँ बस गई है जो महक अहसास में वो फिर से पा कर मुस्कराना चाहता हूँ वो तेरा इतराना , रातों को मचलना उन लबो का वो तराना चाहता हूँ जो चमन वीराँ है बिन खुश्बू के तेरी उस चमन को फिर बसाना चाहता हूँ शाखजो जख्मी है बिन गुलाब के अब फूल फिर उस पे खिलाना चाहता हूँ ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 31/1/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - फिर गले उसको ٤ लगाना चाहता हूँ खो दिया है जिसको पाना चाहता फिर गले उसको लगाना चाहता पर जो फूल मेरी रात उतरा शाख अपने आँगन में सजाना हूँ चाहता बस गई है जो महक अहसास में वो फिर से पा कर मुस्कराना चाहता हूँ নী নয হনযনা रातों को मचलना ٤ उन लबो का రా तराना चाहता जो चमन वीराँ है बिन खुश्बू के तेरी उस चमन कोरफिर बसाना चाहता हूँ शाखजो जख्मी है बिन गुलाब के अब खिलाना चाहता हूँ फूल फिर उसःपें ( लक्ष्मण दावानी फिर गले उसको ٤ लगाना चाहता हूँ खो दिया है जिसको पाना चाहता फिर गले उसको लगाना चाहता पर जो फूल मेरी रात उतरा शाख अपने आँगन में सजाना हूँ चाहता बस गई है जो महक अहसास में वो फिर से पा कर मुस्कराना चाहता हूँ নী নয হনযনা रातों को मचलना ٤ उन लबो का రా तराना चाहता जो चमन वीराँ है बिन खुश्बू के तेरी उस चमन कोरफिर बसाना चाहता हूँ शाखजो जख्मी है बिन गुलाब के अब खिलाना चाहता हूँ फूल फिर उसःपें ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
2122 1212 22/112 छोड़ कर चल दिये जो घर तन्हा देखता हूँ में अब वो दर तन्हा आज बे हद सता रहीं यादें अब नजर से दिल में उतर तन्हा चाँद छत पे बुला रहा तुमको रह न जाये ये रात भर तन्हा नींद आती नहीं है रातों में काटे कटता नही पहर तन्हा रंग ऐसे दिखाए जीवन ने अब उमर हो रही गुजर तन्हा जिस हवेली में यादें हैं तेरी इक दिया जल रहा उधर तन्हा ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 14/10/2018 गिरह ज़िन्दगी बन गई कटी पतंग बीत जाए न ये सफर तन्हा #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 2122 1212 22/112 छोड़ कर चल दिये जो घर तन्हा देखता हूँ में अब वो दर तन्हा  4} आज बे हद HI अब नजर से दिल में उतर तन्हा चाँद छत पे बुला रहा तुमको न जाये ये रात भर तन्हा 6 नींद नहीं ৯ যনী ম 3T नही काटे पहर तन्हा क र ऐसे= दिखाए   जीवन ने अब्उमर हो रही गुजर तन्हा यादें हैं तेरी # जिस हवेली इक दिया जल रहा उधर तन्हा ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 14/10/2018 गिरह ஓி कटी पतंग बन गई 7 4 d सफर तन्हा जाए 2122 1212 22/112 छोड़ कर चल दिये जो घर तन्हा देखता हूँ में अब वो दर तन्हा  4} आज बे हद HI अब नजर से दिल में उतर तन्हा चाँद छत पे बुला रहा तुमको न जाये ये रात भर तन्हा 6 नींद नहीं ৯ যনী ম 3T नही काटे पहर तन्हा क र ऐसे= दिखाए   जीवन ने अब्उमर हो रही गुजर तन्हा यादें हैं तेरी # जिस हवेली इक दिया जल रहा उधर तन्हा ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 14/10/2018 गिरह ஓி कटी पतंग बन गई 7 4 d सफर तन्हा जाए - ShareChat
1222 1222 1222 रही ना बिन तेरे कोई मेरी मंजिल तुम्हारी याद ने जीना किया मुश्किल लिखूँ मैं गीत या कोई गजल तुझ पे कलम भी बन के बैठी है मेरी बे दिल सुनी है राहें मेरी बाग भी उजड़े सजाऊँ कैसे दिल की अपने मैं महफ़िल जहाँ के बंदिशों ने घेर रख्खा है कभी तू ही यहाँ पर आ के हमसे मिल हैरा हूँ सिलवटें मैं देख बिस्तर की बनेहो इतने क्योँ आखिर तुम युँ संगदिल हयाते गम करूं क्या मैं शिकायत अब तेरी यादों में घुट के मर रहा तिल तिल ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 17/11/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - सजाऊँ कैसे दिल की अपने मैं महफ़िल रही ना बिन तेरे कोई मेरो मंजिल याद ने जीना किया मुश्किल तुम्हारी लिखूँ मैं गीत या कोई गजल 54 कलम भी बन गज अव केमेरी बे दिल 5=15 எ J53 सुनी सजाऊ कैस दिलकी अपने मैं महफ़िल de| रख्खा ह घेर जह फभी तही यहापर आ के ह्मसे मिल सिलवदे रमैं देख बिस्तर का हेरा हूँ बनेही इतने च्यों आखिर युँ तुम संगदिल ढयाते गम करू व्याःमैं शिकायत अब तेरी यादों में घुर के नररहा तिल तिल ( लक्ष्मण दावानी सजाऊँ कैसे दिल की अपने मैं महफ़िल रही ना बिन तेरे कोई मेरो मंजिल याद ने जीना किया मुश्किल तुम्हारी लिखूँ मैं गीत या कोई गजल 54 कलम भी बन गज अव केमेरी बे दिल 5=15 எ J53 सुनी सजाऊ कैस दिलकी अपने मैं महफ़िल de| रख्खा ह घेर जह फभी तही यहापर आ के ह्मसे मिल सिलवदे रमैं देख बिस्तर का हेरा हूँ बनेही इतने च्यों आखिर युँ तुम संगदिल ढयाते गम करू व्याःमैं शिकायत अब तेरी यादों में घुर के नररहा तिल तिल ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
2122 2122 212 हर तरफ आबो हवा खामोश है दूर तक ये रास्ता खामोश है जख्म देकर दिल पे तेरे हिज्र का आज मेरा वो खुदा खामोश है दिल के सुर सारे बिखर चुके मेरे इन लबो की हर दुआ खामोश है आँसुओ से प्यास बुझती ही नही दर्दे दिल की हर सदा खामोश है ढल गई अफसाने में ये ज़िन्दगी जो लुटाई थी वफ़ा खामोश है इस तरह से कर गया तन्हा मुझे जिस्मओ जाँ कीअता खामोश है देख कर लाशों के मंज़र को यहाँ जो हुआ वो हादसा खामोश है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 28/1/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - दूर तक ये रास्ता खामोश है हरतरफ आबो हवा खामोश है ये रास्ता खामोश है दूरतक जख्म देकर दिल पे तेरे हिज्र का आज मेरा बो खुदा खामोश है दिल के सुर सारे बिखर चुके मेरे इन लबो की हर दुआ खानीश है आँसुओ से प्यास ही नही बुझती दर्दे दिल की हर सदा खामोश ढलगई अफसाने में ये जिन्दगी थी चफ़ा खाफोशाह 5 बनई इस तरहःसे कर गया तन्हा मुझे जिरमओं जाँ कीअता खामीशहै देख करलाशों के मंजरको यहाँ जो हुआ वो हादसा खामोश है लक्ष्मण दावानी दूर तक ये रास्ता खामोश है हरतरफ आबो हवा खामोश है ये रास्ता खामोश है दूरतक जख्म देकर दिल पे तेरे हिज्र का आज मेरा बो खुदा खामोश है दिल के सुर सारे बिखर चुके मेरे इन लबो की हर दुआ खानीश है आँसुओ से प्यास ही नही बुझती दर्दे दिल की हर सदा खामोश ढलगई अफसाने में ये जिन्दगी थी चफ़ा खाफोशाह 5 बनई इस तरहःसे कर गया तन्हा मुझे जिरमओं जाँ कीअता खामीशहै देख करलाशों के मंजरको यहाँ जो हुआ वो हादसा खामोश है लक्ष्मण दावानी - ShareChat
2122 1212 22 हाथ जब दिल पे कोई रखता है नूर तेरा ही उसको मिलता है चोट ऐसी लगी कलेजे पर मुस्कराने से दिल ये डरता है रख दिया काँधे पर जनाजे को इक पिता से कहाँ वो उठता है सींच कर अपना खूँ जिसे पाला दर्द बन दिल से मेरे रिस्ता है हो गये कत्ल ख्वाब सब मेरे तेरे यादों में आहें भरता है लौट आती है हर दुआ खाली अब खुदा भी कहाँ वो सुनता है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 25/1/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - इक।पता स कहा वो उठता है हाथ जब दिल पे कोई रखता 8 ही उसको मिलता নুৎ নয लगी चोट   ऐसी कलेजे पर সুব্ধযন য নিল ঐ ভংনা ৪ जनाजे को रख दिया काँधे पर इक पिता से  कहाँ वो उठता है सींच कर अपना खूँ जिसे पाला दर्द बन दिल से मेरे रिस्ता है Hq # چ गये कत्ल ख्वाब 4 आहें भरता है যানী लौट आती है हर दुआ खाली अब खुदा भी कहाँ वो सुनता है लक्ष्मण दावानी इक।पता स कहा वो उठता है हाथ जब दिल पे कोई रखता 8 ही उसको मिलता নুৎ নয लगी चोट   ऐसी कलेजे पर সুব্ধযন য নিল ঐ ভংনা ৪ जनाजे को रख दिया काँधे पर इक पिता से  कहाँ वो उठता है सींच कर अपना खूँ जिसे पाला दर्द बन दिल से मेरे रिस्ता है Hq # چ गये कत्ल ख्वाब 4 आहें भरता है যানী लौट आती है हर दुआ खाली अब खुदा भी कहाँ वो सुनता है लक्ष्मण दावानी - ShareChat
2122 2122 2122 212 आज फिर यादों में तेरी रतजगा हो जाएगा ख्वाब आँखों मे पलेगा ओ हवा हो जाएगा गर्दिशे अय्याम में गुजर रही है ज़िन्दगी सर पे जो तुम हाथ रख दे तो दुआ हो जाएगा जैसे तैसे ज़िन्दगी कट जाएगी अपनी सनम वक़्त से पहले फ़ना हुए तो क्या हो जाएगा जिसके खुशबू से महकता था मेरा सारा जहाँ क्याखबर थी एक दिन वोभी जुदा हो जाएगा कब मिला हमको वफाओ कासिला मेरे खुदा दर्द दिल का एक दिन खुद ही दवा हो जाएगा कब किसी को है मिली दुश्वारियों से मंजिलें सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा जिदन कर ए दिल-ए-नादाँ चाँदको तू पानेकी सुन लिया जो चाँद ने वोभी खफा हो जाएगा ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 1/12/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - क्या खबर थी एक दिन वो भी जुदा हो जाएगा आजफिरयादों में तेरी तजगा हो जाएगा ख्वाब आँखों मे पलेगा भी हवा हो जाएगा गर्दिशे अय्याम में गुजर रहीः है ज़िन्दगी जो तुम सरपे हाथ रख दे तो दुआ हो जाएगा जैसे तैसे अपनी सनम எழரி कट 4474 फ़ना हुए तोक्या हो जाएगा पहल जिसके खुशबू से महकता था मेरा सारा जहाँ क्याखबर थी एक दिन वोभी जुदा हो जाएगा मेरे खुदा हमको ्वफाओ कासिला कब दिन खुद ही दवा हो जाएगा दर्द कएक किसी को है मिली से मंजिलें दुश्वारियों कब झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा सर जिदन कर ए दिल॰ए ्नादाँ चाँदको तू पानेकी सुन लिया जो चाँद ने वोभी खफा हो जाएगा ( লঃসতা নানানী क्या खबर थी एक दिन वो भी जुदा हो जाएगा आजफिरयादों में तेरी तजगा हो जाएगा ख्वाब आँखों मे पलेगा भी हवा हो जाएगा गर्दिशे अय्याम में गुजर रहीः है ज़िन्दगी जो तुम सरपे हाथ रख दे तो दुआ हो जाएगा जैसे तैसे अपनी सनम எழரி कट 4474 फ़ना हुए तोक्या हो जाएगा पहल जिसके खुशबू से महकता था मेरा सारा जहाँ क्याखबर थी एक दिन वोभी जुदा हो जाएगा मेरे खुदा हमको ्वफाओ कासिला कब दिन खुद ही दवा हो जाएगा दर्द कएक किसी को है मिली से मंजिलें दुश्वारियों कब झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा सर जिदन कर ए दिल॰ए ्नादाँ चाँदको तू पानेकी सुन लिया जो चाँद ने वोभी खफा हो जाएगा ( লঃসতা নানানী - ShareChat