Manvi  Dubey
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Manvi Dubey
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#मेरी डायरी के पन्नों से #कृष्ण भक्ति
कृष्ण - आराध्य मेरी कविता को तुम कहते हो संगीत, मैंने अपने दर्द से ली है प्रीत। मेरेगाआत्सू झैीप्रीतब तुम्हें लगने लगे हैं गीत। ৪ী গন த নদ্কী সীন; मेरे मेरी बातों का अब तुम समझते नहीं अर्थ मेरा रोना भी নুদ্কাঠী समझ में है व्यर्थ। 4 & sk तुम्हारे ম हाथों आराध्य, काम मेरे करो अब तुम ही साध्य। কাথী ম, है जीत तुम्हारे में  6R हाथों तुम्हारे मेरे अविनाशी, अच्युत, अक्षय, # पुकारती तुम्हारी - हर पल जय जय! आराध्य मेरी कविता को तुम कहते हो संगीत, मैंने अपने दर्द से ली है प्रीत। मेरेगाआत्सू झैीप्रीतब तुम्हें लगने लगे हैं गीत। ৪ী গন த নদ্কী সীন; मेरे मेरी बातों का अब तुम समझते नहीं अर्थ मेरा रोना भी নুদ্কাঠী समझ में है व्यर्थ। 4 & sk तुम्हारे ম हाथों आराध्य, काम मेरे करो अब तुम ही साध्य। কাথী ম, है जीत तुम्हारे में  6R हाथों तुम्हारे मेरे अविनाशी, अच्युत, अक्षय, # पुकारती तुम्हारी - हर पल जय जय! - ShareChat
#History ko repeat Kiya #History ko defeat Kiya #History ko create Kiya #🏏 सूर्यकुमार यादव India🇮🇳🇮🇳🏆🏆
🏏 सूर्यकुमार यादव - ShareChat
00:51
Favourite captains #hitman #msd
msd - ShareChat
00:20
#👩महिला दिवस की शुभकामनाएं🤩🤗T20 World Cup #🏏T20 अपडेट 📰 #🏏 सूर्यकुमार यादव
👩महिला दिवस की शुभकामनाएं🤩🤗 - ShareChat
00:10
#📲मेरा पहला पोस्ट😍 #👧महिला दिवस Status⏳ #👩नारी शक्ति💪🙎‍♀️ #👩महिला दिवस की शुभकामनाएं🤩🤗
📲मेरा पहला पोस्ट😍 - ி मैं जीवन से हारी "ಲ ಘ? क्योंकि हूँ मैं एक नारी। मैं ममता की मूरत मैं सौम्य सरल सरिता सी सूरत। पर समाज के बंधन पडे़ भारी 6   क्यों? क्योंकि हूँ मैं एक नारी। क्यों चुपचाप सब सहती हूँ मैं? क्यों कुछ भी न कहती हूँ मैं? दी जाती बचपन से यही सीख 'ব্রুণ ২্৪ী; নুম নাঠী কী," l' यही समाज की रीति और लीक। फैलाए  उड़ना चाहूँ, पंख मैं भी अब पढ़ना चाहूँ, 0 पर मेरे सपनों का वज़न है भारी। मैं हालातों से हारी  क्यों? क्योंकि हूँ मैं एक नारी उन सभी नारियों को हैप्पी वूमेंस डेजो समाजकी से लड़कर अपनी अलग और मजबूत पहचान बना चुनौतियों  day रही हैं। > Happywomens ி मैं जीवन से हारी "ಲ ಘ? क्योंकि हूँ मैं एक नारी। मैं ममता की मूरत मैं सौम्य सरल सरिता सी सूरत। पर समाज के बंधन पडे़ भारी 6   क्यों? क्योंकि हूँ मैं एक नारी। क्यों चुपचाप सब सहती हूँ मैं? क्यों कुछ भी न कहती हूँ मैं? दी जाती बचपन से यही सीख 'ব্রুণ ২্৪ী; নুম নাঠী কী," l' यही समाज की रीति और लीक। फैलाए  उड़ना चाहूँ, पंख मैं भी अब पढ़ना चाहूँ, 0 पर मेरे सपनों का वज़न है भारी। मैं हालातों से हारी  क्यों? क्योंकि हूँ मैं एक नारी उन सभी नारियों को हैप्पी वूमेंस डेजो समाजकी से लड़कर अपनी अलग और मजबूत पहचान बना चुनौतियों  day रही हैं। > Happywomens - ShareChat