Govind Hashani
ShareChat
click to see wallet page
@124164570
124164570
Govind Hashani
@124164570
मुझे ShareChat पर फॉलो करें! Song writer and Forme
#dhan nirankar ji #धन निरंकार जी #धन -निरंकार-जी # #🙏🌹धन निरंकार जी🌹🙏
dhan nirankar ji - ஈிஎள#48 जब तुम भीतर से हल्के हो जाओ, पीड़ा को थो दो ত্রুযালী  अर बर्तमान क्षण को पूरे प्नेम और जागरूकता के साथ जी लो। ஈிஎள#48 जब तुम भीतर से हल्के हो जाओ, पीड़ा को थो दो ত্রুযালী  अर बर्तमान क्षण को पूरे प्नेम और जागरूकता के साथ जी लो। - ShareChat
🌸🌹🌸🌹🌸🌹🌸🌹🌸 निरंकार से सम्बन्ध ...... एक बार ऐसा हुआ कि एक पंडित जी थे। पंडित जी ने एक दुकानदार के पास पाँच सौ रुपये रख दिये। उन्होंने सोचा कि जब बच्ची की शादी होगी, तो पैसा ले लेंगे। थोड़े दिनों के बाद जब बच्ची सयानी हो गयी, तो पंडित जी उस दुकानदार के पास गये। उसने नकार दिया कि आपने कब हमें पैसा दिया था। उसने पंडित जी से कहा कि क्या हमने कुछ लिखकर दिया है। पंडित जी इस हरकत से परेशान हो गये और चिन्ता में डूब गये। थोड़े दिन के बाद उन्हें याद आया कि क्यों न राजा से इस बारे में शिकायत कर दें ताकि वे कुछ फैसला कर दें एवं मेरा पैसा कन्या के विवाह के लिए मिल जाये। वे राजा के पास पहुँचे तथा अपनी फरियाद सुनाई। राजा ने कहा-कल हमारी सवारी निकलेगी,तुम उस लालाजी की दुकान के पास खड़े रहना। राजा की सवारी निकली। सभी लोगों ने फूलमालाएँ पहनायीं, किसी ने आरती उतारी। पंडित जी लालाजी की दुकान के पास खड़े थे। राजा नेकहा-गुरुजी आप यहाँ कैसे, आप तो हमारे गुरु हैं ? आइये इस बग्घी में बैठ जाइये। लालाजी यह सब देख रहे थे। उन्होंने आरती उतारी, सवारी आगे बढ़ गयी। थोड़ी दूर चलने के बाद राजा ने पंडित जी को उतार दिया और कहा कि पंडित जी हमने आपका काम कर दिया। अब आगे आपका भाग्य। उधर लालाजी यह सब देखकर हैरान थे कि पंडित जी की तो राजा से अच्छी साँठ-गाँठ है। कहीं वे हमारा कबाड़ा न करा दें। लालाजी ने अपने मुनीम को पंडित जी को ढूँढ़कर लाने को कहा-पंडित जी एक पेड़ के नीचे बैठकर कुछ विचार कर रहे थे। मुनीम जी आदर के साथ उन्हें अपने साथ ले गये। लालाजी ने प्रणाम किया और बोले-पंडितजी हमने काफी श्रम किया तथा पुराने खाते को देखा, तो पाया कि हमारे खाते में आपका पाँच सौ रुपये जमा है। पंडित जी दस साल में ब्याज के बारह हजार रुपये हो गये। पंडित जी आपकी बेटी हमारी बेटी है। अत: एक हजार रुपये आप हमारी तरफ से ले जाइये तथा उसे लड़की की शादी में लगा देना। इस प्रकार लालाजी ने पंडित जी को तेरह हजार रुपये देकर प्रेम के साथ विदा किया। कहने का भावार्थ, -कि हम भी अगर इस दुनिया के राजा, जो निराकार ईश्वर है, उससे अगर अपना सम्बन्ध जोड़ लें उनकी शरण में आ जाय और निरंकार के नाम में रच पच जाय तो मजाल है कोई परेशानी भी आवे। हमारा जीवन एक दम शांति मय रहेगा, निरंकार प्रभु के चरणों में मन लगा रहे ये ही कामनाl।।। धन निरंकार जी 🙏🙏🙏🙏 🌸🌹🌸🌹🌸🌹🌸🌹🌸 #dhan nirankar ji
dhan nirankar ji - नही दूर है सतगुरू हमसे ना ही मिलने की है मजबूरी के रथ पर बैठ के देखो सुमिरण की दूरी है बस एक शब्द नही दूर है सतगुरू हमसे ना ही मिलने की है मजबूरी के रथ पर बैठ के देखो सुमिरण की दूरी है बस एक शब्द - ShareChat
#दोस्त #दोस्त #दोस्ती #यारी दोस्ती #दोस्ती का ग्रुप
दोस्त - नहीं पता, मैं 35 एक अच्छा 47 हूँ भी या नहीं, लेकिन जिनके साथ मेरी 8 वो बहुत अच्छे हैं नहीं पता, मैं 35 एक अच्छा 47 हूँ भी या नहीं, लेकिन जिनके साथ मेरी 8 वो बहुत अच्छे हैं - ShareChat
#jaijhulelal #जय झूलेलाल #🙏🌹🙏जय झूलेलाल जी🙏🌹🙏 #जय झूलेलाल साईं #आयो लाल सबई चयो जय झूलेलाल 🙏🙏जय झूलेलाल साहिब 🙏
jaijhulelal - लाख करो तुम नित नेम चाहे अरदास करो हजार जिय झूलेलाल नहीं कहा तो जीवन है बेकार जय श्री झूलेलाल लाख करो तुम नित नेम चाहे अरदास करो हजार जिय झूलेलाल नहीं कहा तो जीवन है बेकार जय श्री झूलेलाल - ShareChat
#dhan nirankar ji #dhan nirankar ji #dhan nirankar ji
dhan nirankar ji - कबोर जो कबीरा संगत साधु की, हरे और की व्याधि। संगत बुरी असाधु की, आठों पहर उपाधि।। सज्जन लोगों की संगति हमारी मानसिक परेशानियों को दूर करती है। जबकि बुरे लोगों की संगति दिन-रात केवल और क्लेश मुसीबत ही देती है। अपनी संगत सोच समझकर चुनें , क्योंकि आप वैसे ही बनते हैं जैसे लोगों के साथ आप रहते हैं। मेरी आध्यात्मिक यात्रा कबोर जो कबीरा संगत साधु की, हरे और की व्याधि। संगत बुरी असाधु की, आठों पहर उपाधि।। सज्जन लोगों की संगति हमारी मानसिक परेशानियों को दूर करती है। जबकि बुरे लोगों की संगति दिन-रात केवल और क्लेश मुसीबत ही देती है। अपनी संगत सोच समझकर चुनें , क्योंकि आप वैसे ही बनते हैं जैसे लोगों के साथ आप रहते हैं। मेरी आध्यात्मिक यात्रा - ShareChat
मेरी प्यारी पोती मान्या का जन्मदिन है, आशिर्वाद देवें🙏 #मेरी डायरी #जन्मदिन
मेरी डायरी - ShareChat
00:23
#मेरी डायरी #सुविचार
मेरी डायरी - भरोसा यदि खुद पर रखो तो यह ताकत बन पर खखो तो कमजोरी जाता है॰ और दूसरों बन जाता है। आष कब सही थे, यह कोई याद नहीं रखता; लेकिन आप कब गलत थे, यह सबको याद रहता है..!! जिंदगी अपनी है, इसे किसी के ख़ौफ़ से नहीं, अपने शौक 46 Govind Hashani. भरोसा यदि खुद पर रखो तो यह ताकत बन पर खखो तो कमजोरी जाता है॰ और दूसरों बन जाता है। आष कब सही थे, यह कोई याद नहीं रखता; लेकिन आप कब गलत थे, यह सबको याद रहता है..!! जिंदगी अपनी है, इसे किसी के ख़ौफ़ से नहीं, अपने शौक 46 Govind Hashani. - ShareChat