Sachin Kumar
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#🆕 ताजा अपडेट
🆕 ताजा अपडेट - दिल्ली में मोमोज खाने से १० साल की बच्ची का फेल,  লিব छग में बिना जांच के बिक रहा खुलेआम ঐ৫ ক লিঙ हरिभूमि न्यूज Ml रायपुर आए दिन मोमोज खाने वाली १० नुकसानदायक साल की बच्ची का लिवर फेल हो दिल्ली में हुई इस घटना के आंबेडकर अस्पताल के T बाद एक बार मोमोज की गुणवत्ता  सीएमओ डॉ. विनय वर्मा के मुताबिक, मोमोज की ऊपरी  पर सवाल उठने लगे हैं। राजधानी  मैदे से बनाई जाती है जो समेत छत्तीसगढ़ के रेस्टोरेंट से परत पचने में समय लेती है और यह लेकर गली-मोहल्ले में सजने वाले आंतों को चिपचिपा बना देती मोमोज स्टॉल के जरिए इसका बड़े रेस्टोरेंट से लेकर हर लाखों का कारोबार हो रहा है। भारी है, जिससे कब्ज, गैस गली- मोहल्ले में मोमोज की एसिडिटी और भारीपन जैसी डिमांड वाले मोमोज को खाद्य एवं प्रशासन जांच दायरे में समस्याएं हो सकती हैं। रोजाना औषधि दुकान लाखों का कारोबार लाएगा। अभियान चलाकर इसके इसका सेवन बढ़ते वजन का मोमोज की गुणवत्ता परखने सैंपल लेकर जांच की जाएगी। कारण बन सकता है और सक्रिय होगा एफडीए, चलाया मैदे और पत्तागोभी से निर्मित मोटापा शरीर में कई गंभीर मोमोज चाइनीज फूड है और पिछले  जाएगा जांच अभियान बीमारियों का घर बन सकता है। कुछ सालों से इसका डिमांड काफी  मोमोज बनाने में उपयोग किए बढ़ी है। विभिन्न रेस्टोरेंट से लेकर दिए हैं। राजधानी के तमाम फूड जाने वाले तेल और साफ- राजधानी समेत प्रदेशभर में हर जोन के साथ चौक चौराहों गली- सफाई का अभाव संक्रमण का गली-्मोहल्ले में इसके स्टॉल सजते  मोहल्ले में मोमोज के स्टॉल और खतरा बढ़ा सकता है। हैं जहां चाव से लोग मोमोज खाते उसके सामने लोगों ٩؟ ٤ की हैं। हाल ही में दिल्ली के दिन नजर आती है। बुराड़ी  जांच कराई जाएगी হলান্ স 10 মাল ক্ষী নন্ী নান্া दिलचस्प बात ये है कि लाखों के मोमोज के अत्याधिक सेवन का कारोबार करने वाले इस मोमोज लोगों को गुणवत्तापूर्ण खाद्य साम्गी मिले, करने की वजह से लिवर फेलियर पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा इसके लिए समय-्समय पर अभियान गंभीरता नहीं दिखाई गई है। पूर्व में की घटना सामने आई है। लिवर के चलाया जाता है। मोमोज के कुछ जिलों  कुछ जिलों में सैंपल लेकर जांच हुई अलावा उसके दिमाग में सूजन और मे पहले मी रेपल लिए गए हे ओर जाच  थी। स्वास्थ्य पर होने वाले विपरीत याददाश्त कमजोर होने की बात भी के बाद आवश्यक कार्रवाई की गई है। असर की शिकायतों के बाद गुणवत्ता  विस्तृत  सामने आई है। तान्या नामक इस आने वाले दिनों मे इसे लेकर जांच की जाएगी।  परखने के लिए वृहद स्तर पर जांच  बच्ची की जान तो बचा ली गई घटना ने बिना जांच के बिकने के लिए अभियान चलाने की तैयारी दीपक अग्रवाल , नियंत्रक खाद्य एव मगर औषधि प्रशासन की जा रही है। वाले मोमोज पर सवाल खड़े कर दिल्ली में मोमोज खाने से १० साल की बच्ची का फेल,  লিব छग में बिना जांच के बिक रहा खुलेआम ঐ৫ ক লিঙ हरिभूमि न्यूज Ml रायपुर आए दिन मोमोज खाने वाली १० नुकसानदायक साल की बच्ची का लिवर फेल हो दिल्ली में हुई इस घटना के आंबेडकर अस्पताल के T बाद एक बार मोमोज की गुणवत्ता  सीएमओ डॉ. विनय वर्मा के मुताबिक, मोमोज की ऊपरी  पर सवाल उठने लगे हैं। राजधानी  मैदे से बनाई जाती है जो समेत छत्तीसगढ़ के रेस्टोरेंट से परत पचने में समय लेती है और यह लेकर गली-मोहल्ले में सजने वाले आंतों को चिपचिपा बना देती मोमोज स्टॉल के जरिए इसका बड़े रेस्टोरेंट से लेकर हर लाखों का कारोबार हो रहा है। भारी है, जिससे कब्ज, गैस गली- मोहल्ले में मोमोज की एसिडिटी और भारीपन जैसी डिमांड वाले मोमोज को खाद्य एवं प्रशासन जांच दायरे में समस्याएं हो सकती हैं। रोजाना औषधि दुकान लाखों का कारोबार लाएगा। अभियान चलाकर इसके इसका सेवन बढ़ते वजन का मोमोज की गुणवत्ता परखने सैंपल लेकर जांच की जाएगी। कारण बन सकता है और सक्रिय होगा एफडीए, चलाया मैदे और पत्तागोभी से निर्मित मोटापा शरीर में कई गंभीर मोमोज चाइनीज फूड है और पिछले  जाएगा जांच अभियान बीमारियों का घर बन सकता है। कुछ सालों से इसका डिमांड काफी  मोमोज बनाने में उपयोग किए बढ़ी है। विभिन्न रेस्टोरेंट से लेकर दिए हैं। राजधानी के तमाम फूड जाने वाले तेल और साफ- राजधानी समेत प्रदेशभर में हर जोन के साथ चौक चौराहों गली- सफाई का अभाव संक्रमण का गली-्मोहल्ले में इसके स्टॉल सजते  मोहल्ले में मोमोज के स्टॉल और खतरा बढ़ा सकता है। हैं जहां चाव से लोग मोमोज खाते उसके सामने लोगों ٩؟ ٤ की हैं। हाल ही में दिल्ली के दिन नजर आती है। बुराड़ी  जांच कराई जाएगी হলান্ স 10 মাল ক্ষী নন্ী নান্া दिलचस्प बात ये है कि लाखों के मोमोज के अत्याधिक सेवन का कारोबार करने वाले इस मोमोज लोगों को गुणवत्तापूर्ण खाद्य साम्गी मिले, करने की वजह से लिवर फेलियर पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा इसके लिए समय-्समय पर अभियान गंभीरता नहीं दिखाई गई है। पूर्व में की घटना सामने आई है। लिवर के चलाया जाता है। मोमोज के कुछ जिलों  कुछ जिलों में सैंपल लेकर जांच हुई अलावा उसके दिमाग में सूजन और मे पहले मी रेपल लिए गए हे ओर जाच  थी। स्वास्थ्य पर होने वाले विपरीत याददाश्त कमजोर होने की बात भी के बाद आवश्यक कार्रवाई की गई है। असर की शिकायतों के बाद गुणवत्ता  विस्तृत  सामने आई है। तान्या नामक इस आने वाले दिनों मे इसे लेकर जांच की जाएगी।  परखने के लिए वृहद स्तर पर जांच  बच्ची की जान तो बचा ली गई घटना ने बिना जांच के बिकने के लिए अभियान चलाने की तैयारी दीपक अग्रवाल , नियंत्रक खाद्य एव मगर औषधि प्रशासन की जा रही है। वाले मोमोज पर सवाल खड़े कर - ShareChat
#🆕 ताजा अपडेट
🆕 ताजा अपडेट - राहत की मांग अमित जोगी को सजा मामले में कोर्ट आज करेगा सुनवाई guld सुनवाई का कोई हरिभूमि न्यूज ) रायपुर अवसर नहीं दिया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा कोर्ट में मामले रामअवतार जग्गी हत्याकांड में सुप्रीम  की सुनवाई न्यायमूर्ति  उम्रकैद   की विक्रमनाथ और सजा   सुनाए न्यायमूर्ति संजीव जाने के बाद 6 की पीठ द्वारा अमित जोगी की गई। अमित जोगी ने इस फैसले की ओर से वरिष्ठ को gWTT अधिवक्ता कपिल सिब्बल मुकुल স कोर्ट रोहतगी विवेक दी है। उनकी याचिका ব্রুনীনী  तन्खा और सिद्धार्थ पर सोमवार २० अप्रैल को दवे उपस्थित हुए। सुनवाई निर्धारित है। अमित उन्होंने सर्वोच्च जोगी को 3 सप्ताह में सरेंडर न्यायालय को बताया करने का आदेश दिया गया था, कि उच्च न्यायालय जिसके  )शेष पेज १३ पर द्वारा )शेष पेज १३ पर राहत की मांग अमित जोगी को सजा मामले में कोर्ट आज करेगा सुनवाई guld सुनवाई का कोई हरिभूमि न्यूज ) रायपुर अवसर नहीं दिया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा कोर्ट में मामले रामअवतार जग्गी हत्याकांड में सुप्रीम  की सुनवाई न्यायमूर्ति  उम्रकैद   की विक्रमनाथ और सजा   सुनाए न्यायमूर्ति संजीव जाने के बाद 6 की पीठ द्वारा अमित जोगी की गई। अमित जोगी ने इस फैसले की ओर से वरिष्ठ को gWTT अधिवक्ता कपिल सिब्बल मुकुल স कोर्ट रोहतगी विवेक दी है। उनकी याचिका ব্রুনীনী  तन्खा और सिद्धार्थ पर सोमवार २० अप्रैल को दवे उपस्थित हुए। सुनवाई निर्धारित है। अमित उन्होंने सर्वोच्च जोगी को 3 सप्ताह में सरेंडर न्यायालय को बताया करने का आदेश दिया गया था, कि उच्च न्यायालय जिसके  )शेष पेज १३ पर द्वारा )शेष पेज १३ पर - ShareChat
#दर्दनाक #हादसा
दर्दनाक - सकरी नेशनल हाइवे पर संबलपुरी ओवरब्रिज के पास दुर्घटना दो ट्रेलर में टक्कर, आग लगने ) से ड्राइवर फंसकर जिंदा जला रायपुर की ओर एक ट्रेलर कोयला लेकर जा रहा  वाले ट्रेलर में शार्टसर्किट होने से आग लग गई बिलासपुर  हरिभूमि न्यूज ) था। नेशनल हाइवे सम्बलपुरी ओवरब्रिज के पास  और  ड्राइवर बिहार निवासी अरविंद भारद्वाज पीछे से रायपुर की ओर कोयला लेकर जा रहे सकरी संबलपुरी स्थित ओवरब्रिज पर रायपुर की इंजन में आग लगने से आग केबिन में फंस  गया। दूसरे ट्रेलर के ड्राइवर ने तेज गति से सामने चल  ओर जा रहे ट्रेलर को पीछे से कोयला से भरे ट्रेलर तेजी से फैली और पीछे कोयला लोड होने से दी। इससे टक्कर मारने के ड्ाइवर ने टक्कर मार दी॰ हादसे के शार्टसर्किट ट्रेलर जलने लगा। हादसे के बाद आसपास क्षेत्र मे रहे ट्रेलर को टक्कर मार  होने से ट्रेलर में आग लग गई और ड्राइवर केबिन  हड़कंप मच गया और लोगों की भीड़ लग गई। वाहनों की लगी कतार में फंस गया। ट्रक के साथ ड्राइवर की जिंदा इधर ट्रेलर के साथ केबिन में फंसा ड्राइवर जिंदा हादसे के बाद ट्रेैफिक जाम हो गया। नेशनल हाहवे जलकर मौत हो गई। भीषण आग के बाद मौके पर पर   सकरी पुलिस सूचना जल गया। ठोने से दोनो ओर वाहनो की लबी कतार लग गढ एसडीआरएफ को टीम मौके पर पहुंचं गई और  हड़कंप मच गया। पुलिस व एसडीआरएफ की  ओर भीषण गर्मी मे फसकर लोग हलाकान होते टीम दमकल लेकर मौके पर दमकल के पानी से आग बुझाने में जुट गई। काफी दमकल के पहुंची। रहे। एसडीआरएफ की टीम द्वारा आग बुझाने के पानी से आग पर काबू पाया गया है। मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया है। बाद गाडी को सड़क किनारे किया गया। उसके सकरी टीआई विजय कुमार चौधरी ने बताया,  भीषण आग से पूरा ट्रेलर जलकर खाक हो बाद आवागमन सामान्य ठ पाया। १९ अप्रैल की दोपहर १२१५ बजे बिलासपुर से गया है। सकरी नेशनल हाइवे पर संबलपुरी ओवरब्रिज के पास दुर्घटना दो ट्रेलर में टक्कर, आग लगने ) से ड्राइवर फंसकर जिंदा जला रायपुर की ओर एक ट्रेलर कोयला लेकर जा रहा  वाले ट्रेलर में शार्टसर्किट होने से आग लग गई बिलासपुर  हरिभूमि न्यूज ) था। नेशनल हाइवे सम्बलपुरी ओवरब्रिज के पास  और  ड्राइवर बिहार निवासी अरविंद भारद्वाज पीछे से रायपुर की ओर कोयला लेकर जा रहे सकरी संबलपुरी स्थित ओवरब्रिज पर रायपुर की इंजन में आग लगने से आग केबिन में फंस  गया। दूसरे ट्रेलर के ड्राइवर ने तेज गति से सामने चल  ओर जा रहे ट्रेलर को पीछे से कोयला से भरे ट्रेलर तेजी से फैली और पीछे कोयला लोड होने से दी। इससे टक्कर मारने के ड्ाइवर ने टक्कर मार दी॰ हादसे के शार्टसर्किट ट्रेलर जलने लगा। हादसे के बाद आसपास क्षेत्र मे रहे ट्रेलर को टक्कर मार  होने से ट्रेलर में आग लग गई और ड्राइवर केबिन  हड़कंप मच गया और लोगों की भीड़ लग गई। वाहनों की लगी कतार में फंस गया। ट्रक के साथ ड्राइवर की जिंदा इधर ट्रेलर के साथ केबिन में फंसा ड्राइवर जिंदा हादसे के बाद ट्रेैफिक जाम हो गया। नेशनल हाहवे जलकर मौत हो गई। भीषण आग के बाद मौके पर पर   सकरी पुलिस सूचना जल गया। ठोने से दोनो ओर वाहनो की लबी कतार लग गढ एसडीआरएफ को टीम मौके पर पहुंचं गई और  हड़कंप मच गया। पुलिस व एसडीआरएफ की  ओर भीषण गर्मी मे फसकर लोग हलाकान होते टीम दमकल लेकर मौके पर दमकल के पानी से आग बुझाने में जुट गई। काफी दमकल के पहुंची। रहे। एसडीआरएफ की टीम द्वारा आग बुझाने के पानी से आग पर काबू पाया गया है। मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया है। बाद गाडी को सड़क किनारे किया गया। उसके सकरी टीआई विजय कुमार चौधरी ने बताया,  भीषण आग से पूरा ट्रेलर जलकर खाक हो बाद आवागमन सामान्य ठ पाया। १९ अप्रैल की दोपहर १२१५ बजे बिलासपुर से गया है। - ShareChat
#अनोखी परम्परा
अनोखी परम्परा - मैनपाट के ग्राम सुपलगा में हुई अनोखी शादी बारात , विदाई में रोया दूल्हा दुल्हन लेकर पहुंची अंबिकापुर  ससुर ने कही यह बात. हरिभूमि न्यूज MI मोहन एक्का ने बताया कि वे अपने छत्तीसगढ़ के शिमला मैनपाट में जमाई को बेटे की तरह रखेंगे तथा हुई एक अनोखी शादी लोगों के सारी सुख सुविधाएं देंगे। दुल्हे बिलासुर के परिजन उर्मिला बरवा  बीच चर्चा का विषय बनी हुई वबर ने बताया कि विवाह पूर्व वर एव  है। मैनपाट के दूरस्थ ग्राम  qI{I कन्या पक्ष के बीच कई दौर की सुपलगा में ग्राम पैगा की दुल्हन चर्चाएं हुई। बिलासुस के घर जमाई बारात लेकर पहुंची एवं विवाह बनने से दुवमुनि के परिवार को उपरांत दूल्हे की विदाई के बाद बारात सहारा मिलेगा | चुमावन की परंपरा वर पक्ष देता है दहेज लेकर अपने घर लौटी। विदाई के महेश तिर्की ने बताया कि हमारे समाज में विवाह दौरान दुल्हा फूट-फूटकर रोया। ग्रामीण  समाज में कन्या पक्ष वर पक्ष বুযই  उपरांत चुमावन की परपरा हे।वर एवं कन्या क्षेत्रों में लोग अपनी परंपराओं का को दहेज देता है। दहेज को लेकर पक्ष के पारिवारिक सदस्य का बारी-बारी दुल्हन दृढ़ता के साथ करते हैं लेकिन कई बार विवाद की भी स्थिति पालन से उपहार देते है।वर पक्ष के लोग कन्या पक्ष निर्मित होती है तथा दहेज के कारण सुपलगा में प्राचीन परम्पराओं को को देते है। दहेज के लिए कोई भी किसी पर परिवार के बिखरने की भी घटनाएं चुनौती देकर दुल्हन देवमुनि एक्का  दबाव नहीं डालता है। दहेज को लेकर किसी होती है। इस परपरा से अलग  परिवार में कटुता भी नहीं आती तथा विवाह हसी- परिजन एवं रिश्तेदारों के साथ बारात आदिवासी समाज में दहेज की खुशी के बीच संपन्न होता है। लेकर दूल्हे )शेष पेज 5 पर  अलग परपराएं है। मैनपाट के ग्राम सुपलगा में हुई अनोखी शादी बारात , विदाई में रोया दूल्हा दुल्हन लेकर पहुंची अंबिकापुर  ससुर ने कही यह बात. हरिभूमि न्यूज MI मोहन एक्का ने बताया कि वे अपने छत्तीसगढ़ के शिमला मैनपाट में जमाई को बेटे की तरह रखेंगे तथा हुई एक अनोखी शादी लोगों के सारी सुख सुविधाएं देंगे। दुल्हे बिलासुर के परिजन उर्मिला बरवा  बीच चर्चा का विषय बनी हुई वबर ने बताया कि विवाह पूर्व वर एव  है। मैनपाट के दूरस्थ ग्राम  qI{I कन्या पक्ष के बीच कई दौर की सुपलगा में ग्राम पैगा की दुल्हन चर्चाएं हुई। बिलासुस के घर जमाई बारात लेकर पहुंची एवं विवाह बनने से दुवमुनि के परिवार को उपरांत दूल्हे की विदाई के बाद बारात सहारा मिलेगा | चुमावन की परंपरा वर पक्ष देता है दहेज लेकर अपने घर लौटी। विदाई के महेश तिर्की ने बताया कि हमारे समाज में विवाह दौरान दुल्हा फूट-फूटकर रोया। ग्रामीण  समाज में कन्या पक्ष वर पक्ष বুযই  उपरांत चुमावन की परपरा हे।वर एवं कन्या क्षेत्रों में लोग अपनी परंपराओं का को दहेज देता है। दहेज को लेकर पक्ष के पारिवारिक सदस्य का बारी-बारी दुल्हन दृढ़ता के साथ करते हैं लेकिन कई बार विवाद की भी स्थिति पालन से उपहार देते है।वर पक्ष के लोग कन्या पक्ष निर्मित होती है तथा दहेज के कारण सुपलगा में प्राचीन परम्पराओं को को देते है। दहेज के लिए कोई भी किसी पर परिवार के बिखरने की भी घटनाएं चुनौती देकर दुल्हन देवमुनि एक्का  दबाव नहीं डालता है। दहेज को लेकर किसी होती है। इस परपरा से अलग  परिवार में कटुता भी नहीं आती तथा विवाह हसी- परिजन एवं रिश्तेदारों के साथ बारात आदिवासी समाज में दहेज की खुशी के बीच संपन्न होता है। लेकर दूल्हे )शेष पेज 5 पर  अलग परपराएं है। - ShareChat
#🆕 ताजा अपडेट
🆕 ताजा अपडेट - सीईओ स्टाइल की राजनीति का चेहरा axaqas: %2r के पहले ` आईटी सीएम ' 6 नवभारत ब्यूरो। रायपुर। 1978 चंद्रबाबू   नायडू भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में हैं, স পমলী जिन्हों्ने प्रशासन को तकनीक और प्रबंधन से जोड़ने की कोशिश की। वे भीड़ को भावनाओं से नहीं , बल्कि योजनाओं बार और विकास के वादों से प्रभावित करने में विश्वास रखते हैं।  विधायक आंध्र प्रदेश की राजनीति में लंबी पारी खेलते चुने गए हुए लगातार खुद को प्रासंगिक  बॅनाए रखा है। टेक्नोलॉजी और विकास के एजेंडे के साथ राजनीति को आधुनिक रूप देने आज जन्मदिन वाले नायडू को अँक्सर ` आईटी  सीएम ' के रूप में भी जाना जाता feriy पर है। उन्होंने राजनीति को एक  कॉर्पोरेट मैनेजमेंट मॉडल ' की तरह भी पेश किया। उनका राजनीतिक करियर बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिए भी चर्चा में रहा है। टीडीपी में एंट्री से उठा करियर जन्म, शिक्षा और राजनीति में एंट्री चंद्रबाबू के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने टीडीपी का दामन f २० अप्रैल ११५० को आंध्र प्रदेश के जिले के थामा, जिसकी स्थापना उनके ससुर और दिग्गज  नरवरिपल्ले गांव में किसान परिवार में जन्मे चंद्रबाबू का अभिनेता राजनेता एनटी रामाराव ने की थी। बचपन गांव में ही बीता| उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर १९९५ में नायडू ने टीडीपी की कमान संभाली किया। छात्र जीवन से ही उनमें नेतृत्व के गुण दिखने लगे और और पहली बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। राजनीति में उनकी दिलचस्पी भी बढ़ी। शुरूआती दौर में वे तभी हैदराबाद को आईटी हब के रूप मे कांग्रेस से जुड़े और १९७८ में पहली बार विधायक चुने गए। विकसित करने की शुरुआत हुई। उन्होंने ई गवर्नेस, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेवाओं ননা दूरदर्शी कुशल प्रशासक, पर जोर दिया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था मे नेता को रही है। पारदर्शिता और दक्षता आई। हालांकि   २००४ नायड को छवि एक प्रशासक और 7 dT बदलते समय के साथ खुद को ढालने की उनकी क्षमता ही उन्हें ৭ ৭ সনা স নাম ৪ী য০ | দি 2014 ৭ बाको नेताओं से अलग बनाती है।वे देश के शुरुआती नेताओं में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद जब हैदराबाद तेलंगाना में चला गया तब नायड रहे, जिन्होंने प्रशासन को डिजिटल बनाने की दिशा में ठोस कदम ने अमरावती को नई राजधानी के रूप मे उठाए। उनकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत है और वे निवेशकों के बीच भरोसेमंद चेहरा माने जाते हें। वैश्विक सोच और राज्य को विकसित करने की योजना बनाई। २०१9 निवेश के लिए आकर्षक बनाने की उनकी क्षमता उन्हें अलग के चुनाव में हार के बाद २०२४ में पहचान देती है, हालांकि उनके आलोचक उन्हें अत्यधिक कॉर्पोरेट- जोरदार वापसी कर उन्होंने फिर सत्ता से दूर रहने  फ्रेंडली और ग्रामीण  वाला नेता भी बताते हैं। मुद्दों  हासिल की। सीईओ स्टाइल की राजनीति का चेहरा axaqas: %2r के पहले ` आईटी सीएम ' 6 नवभारत ब्यूरो। रायपुर। 1978 चंद्रबाबू   नायडू भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में हैं, স পমলী जिन्हों्ने प्रशासन को तकनीक और प्रबंधन से जोड़ने की कोशिश की। वे भीड़ को भावनाओं से नहीं , बल्कि योजनाओं बार और विकास के वादों से प्रभावित करने में विश्वास रखते हैं।  विधायक आंध्र प्रदेश की राजनीति में लंबी पारी खेलते चुने गए हुए लगातार खुद को प्रासंगिक  बॅनाए रखा है। टेक्नोलॉजी और विकास के एजेंडे के साथ राजनीति को आधुनिक रूप देने आज जन्मदिन वाले नायडू को अँक्सर ` आईटी  सीएम ' के रूप में भी जाना जाता feriy पर है। उन्होंने राजनीति को एक  कॉर्पोरेट मैनेजमेंट मॉडल ' की तरह भी पेश किया। उनका राजनीतिक करियर बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिए भी चर्चा में रहा है। टीडीपी में एंट्री से उठा करियर जन्म, शिक्षा और राजनीति में एंट्री चंद्रबाबू के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने टीडीपी का दामन f २० अप्रैल ११५० को आंध्र प्रदेश के जिले के थामा, जिसकी स्थापना उनके ससुर और दिग्गज  नरवरिपल्ले गांव में किसान परिवार में जन्मे चंद्रबाबू का अभिनेता राजनेता एनटी रामाराव ने की थी। बचपन गांव में ही बीता| उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर १९९५ में नायडू ने टीडीपी की कमान संभाली किया। छात्र जीवन से ही उनमें नेतृत्व के गुण दिखने लगे और और पहली बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। राजनीति में उनकी दिलचस्पी भी बढ़ी। शुरूआती दौर में वे तभी हैदराबाद को आईटी हब के रूप मे कांग्रेस से जुड़े और १९७८ में पहली बार विधायक चुने गए। विकसित करने की शुरुआत हुई। उन्होंने ई गवर्नेस, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेवाओं ননা दूरदर्शी कुशल प्रशासक, पर जोर दिया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था मे नेता को रही है। पारदर्शिता और दक्षता आई। हालांकि   २००४ नायड को छवि एक प्रशासक और 7 dT बदलते समय के साथ खुद को ढालने की उनकी क्षमता ही उन्हें ৭ ৭ সনা স নাম ৪ী য০ | দি 2014 ৭ बाको नेताओं से अलग बनाती है।वे देश के शुरुआती नेताओं में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद जब हैदराबाद तेलंगाना में चला गया तब नायड रहे, जिन्होंने प्रशासन को डिजिटल बनाने की दिशा में ठोस कदम ने अमरावती को नई राजधानी के रूप मे उठाए। उनकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत है और वे निवेशकों के बीच भरोसेमंद चेहरा माने जाते हें। वैश्विक सोच और राज्य को विकसित करने की योजना बनाई। २०१9 निवेश के लिए आकर्षक बनाने की उनकी क्षमता उन्हें अलग के चुनाव में हार के बाद २०२४ में पहचान देती है, हालांकि उनके आलोचक उन्हें अत्यधिक कॉर्पोरेट- जोरदार वापसी कर उन्होंने फिर सत्ता से दूर रहने  फ्रेंडली और ग्रामीण  वाला नेता भी बताते हैं। मुद्दों  हासिल की। - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞
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