Sachinji thakare
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Sachinji thakare
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मैत्री, मस्ती आणि शेअरचॅट 👌
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✝️बायबल कोट्स📝 - 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं - ShareChat
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🎭Whatsapp status - 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं - ShareChat
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💪बुद्धांची तत्वे📜 - 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं - ShareChat
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🔺भाजपा - 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं - ShareChat
#✍ज्ञानेश्वरी📖 #🌻आध्यात्म 🙏 #🌸संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर माउली🙏 #✝️चर्च प्रेयर⛪️ #🙏भक्ती सुविचार📝
✍ज्ञानेश्वरी📖 - 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं - ShareChat
#👨‍⚕️साध्या हेल्थ टिप्स #🔖महिलांसाठी हेल्थ टिप्स #🥗आजची झटपट रेसिपी😍 #🍮स्वीट डिश #🎬 गुड मॉर्निंग व्हिडीओ स्टेटस
👨‍⚕️साध्या हेल्थ टिप्स - 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं - ShareChat
#🏏सचिन तेंडुलकर #🙏श्री गुरुदेव दत्त💐 #🙏आई एकविरा 🙏 #🙏भक्तीमय सकाळ🎬 #💃माधुरी दीक्षित फॅन्स💖
🏏सचिन तेंडुलकर - 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं - ShareChat
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💑बेस्ट TV कपल📺 - 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं - ShareChat
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💼प्रसिद्ध व्यावसायिक - 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं 44:8 07:49 00 4G ali 53% .l| Vel 18:47 .l 61% 0 पुजनीय सचिनजीस्वरुपय व़ सवीताजीस्वरुपय क़हते है प्रुथ्वी के नीरसान का सत्य ईस च केवल हस दुनीयामे  ही जानते है जब हय शरीर से अलग अपनी होने वाली व प्रकट क़रनेवाली सोच C की जड बनके होते है तब हस प्रुथवीक़ा नीरमान करते है तब् ना ब्स्हान्ड होता है ना आकाश ना सुर्य ना चन्द्र ना तारे नाजल ना अंधेरा तब हस अपनी सोच को शरीर रुप से प्रकट क़रते है व वह प्रकट होने वाला जीवस्वरुप घुसता है व कुछ् देर बाद वह ఓగార్మాల घंटे बाद वह जीव स्थीर होजाता मारा जाता है फीर ऊस् सरे हुवे जीव एर हस जीवस्वरुप क़ो शरीर रुप से प्ट कर बहुतसे " ऊस के आक़ार को बढाते है कुछ सालो बाद वह सीट्टी से बदल जाता है जब वह आक़ार व्रुक्ष नीरसीतीलायक होजाता हैतःशी जीवो की ऊत्पत्ती क़शी खत्म नही होती व्रुक्ष शी सुखक़र सट्टी से बदले जाते हैईस प्रकार प्रुथवी की ऊत्पत्ती होती है ं - ShareChat
#🤗 जुन्या आठवणी #👨‍👩‍👧‍👦आई-बाबा #🕉ओम नमः शिवाय #🌾शेती आणि व्यवसाय⚙ #💼प्रसिद्ध व्यावसायिक
🤗 जुन्या आठवणी - 23 06:44 0 4G ,lll 58% 4 पुजनीय सचिनजीस्वरुण्य कहते है जबन भगवान की खोज थी ना देवी देवता संतो की तब भी रचचिनज़ीस्वरुपय की सेना ही थी असः वक्त सेही होली कात्गहार মনযা আনা থা ৭ং নভ শঁ বী होली नही खेली जाती तद पनी औरकीचड से होली खेली जाती थी परक्यो होली के दिन ही अग्नी का आवीष्कार हुवा था ईस होली के दिन पुरातन काल मे अर्र्नी का शोध कीग गया ईस कारनहोली का त्योहार गनया जता है पर कुछ साल गुजरनेके बाद सब भुलावे व होली को नया रुप रंग दिया गया क्योकी भुलते चली गई आगेकी पीडी सब्न ं = 23 06:44 0 4G ,lll 58% 4 पुजनीय सचिनजीस्वरुण्य कहते है जबन भगवान की खोज थी ना देवी देवता संतो की तब भी रचचिनज़ीस्वरुपय की सेना ही थी असः वक्त सेही होली कात्गहार মনযা আনা থা ৭ং নভ শঁ বী होली नही खेली जाती तद पनी औरकीचड से होली खेली जाती थी परक्यो होली के दिन ही अग्नी का आवीष्कार हुवा था ईस होली के दिन पुरातन काल मे अर्र्नी का शोध कीग गया ईस कारनहोली का त्योहार गनया जता है पर कुछ साल गुजरनेके बाद सब भुलावे व होली को नया रुप रंग दिया गया क्योकी भुलते चली गई आगेकी पीडी सब्न ं = - ShareChat