#📒 मेरी डायरी नेकी की जीत 🌸
नन्हीं सी वो लड़की थी, पर ऊँचे उसके विचार,
गरीबी में भी पलता था, सच्चाई का आधार।
रास्ते में जब मिला उसे, नोटों से भरा बटुआ,
मन में न आया लालच, न कदम उसका डिगा।
"पराई अमानत मेरी नहीं," ये बात उसे थी याद,
ईमानदारी की राह पर, वो चली बिना किसी फ़रियाद।
अमीर के दरवाज़े पर, जब लौटाया उसने धन,
उसकी सादगी देख चकित, रह गया सबका मन।
पैसों से तो पेट भरे, पर नेकी देती सुकून,
मेहनत की हो रोटी अपनी, यही था उसका जुनून।
मिला उसे इनाम बड़ा, खुशियों का आगाज़ हुआ,
सच की इस राह पर चलकर, हिमाद्रि का नाम हुआ।
सीख: दौलत आती-जाती है, पर किरदार (character) हमेशा साथ रहता है।