मंत्र साधकों के लिए आवश्यक निर्देश
किसी भी मंत्र अथवा यंत्र साधना से पहले साधकों को नीचे लिखी बातों पर अमल करना जरुरी है।
1. यदि 'मंत्र' को गुरु मुख से ग्रहण किया जाए, तो सफलता मिलनी निश्चित है क्योंकि इस प्रकार साधक के पीछे गुरु का हाथ एवं आशीर्वाद होता है।
2. किसी भी मंत्र अथवा यंत्र की साधना श्रद्धा और विश्वास से करें।
3. मंत्र की जप संख्या निश्चित होती है। किसी की ग्यारह हजार, इक्कीस हजार, किसी की इक्यावन हजार अथवा सवा लाख होती है।
4. मंत्र गुप्त रखकर एकाग्रचित होकर साधना करें।
रखें। 5. साधना के समय, बताए गए देवी देवता या इष्ट देव की प्रतिमा या फोटो सामने
6. मंत्र साधना में आरम्भ से अन्त तक रोजाना दीपक जलाएं और धूप, अगरबती दिखाएं।
7. साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन, भूमि, शयन सात्विक भोजन व शुद्ध वस्त्रों का उपयोग करें।
8. साधना का प्रारम्भ किसी शुभ नक्षत्र, शुभ दिन, शुभ तिथि या ग्रहण तथा नवरात्रों में करें तो अच्छा है।
9. मंत्र जप के पश्चात्, भोग लगाएं तथा उसी मंत्र से ग्यारह बार आहुतियां डालकर छोटा सा हवन करें।
10. साधना के समय गुरु का चित्र सामने रखें, गुरु कौन और कैसा होना चाहिए आगे बताया गया है।
11. मंत्र साधना का स्थान एकान्त हो, साफ तथा पवित्र हो। वहां कोई दूसरा न आए जाए और न ही वहां कोई शब्दादि हो।
12. अपने यहां आने जाने वालों को सूचित कर दो कि वह आपकी साधना में रुकावट अथवा साधना के दौरान खलल न डालें।
13. अनुष्ठान के मध्य में आहार हमेशा साधारण होना चाहिए। फलों का प्रयोग अधिक करें।
14. यदि शरीर में कोई रोग पीड़ा अथवा उसके लक्षण हों तो आपको शिथिल नहीं होना चाहिए। सब रोगादि तथा पीड़ा स्वयं ही आपसे दूर भाग जाएंगे।
महामाया
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