Abhilas Chauhan
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चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के माध्यम से इसे समझते हैं: *नवम भाव में गुरु* "चतुर्भूमिकं तद्गृहं तस्य भूमी-पतेर्वल्लभी वल्लभा भूमिदेवाः। गुरौ धर्मगे बान्धवाः स्युबिनीताः सदाऽऽलस्यता धर्मवैगुण्यकारा ॥" अर्थ: नवम भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर चार मंजिला हो, वह राजा का प्रिय हो, और भूमिदेव (ब्राह्मण) उसका सम्मान करें। उसके बंधु-बांधु-बांधव विनीत हों, और वह आलस्य से धर्म का पालन न करे। *दशम भाव में गुरु* "ध्वजा मण्डप मन्दिरं चित्रशालं पितुः पूर्वजेभ्योऽपि तेजोधिकत्वम्। न तुष्टो भवेच्छर्मणा पुत्रकाणां पचेत्प्रत्यहं प्रस्थसामुद्रमन्नम् ॥" अर्थ: दशम भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर ध्वजा से युक्त मंदिर एवं चित्रकारी से युक्त हो, वह पिता और पूर्वजों से भी अधिक तेजस्वी हो, पुत्र के सुख से प्रसन्न न हो, और वह बहुतों को भोजन कराने वाला हो। *एकादश भाव में गुरु* "अकुप्यं च लाभ गुरौ किन्न लभ्यं वदन्तीष्टधीमन्तमन्ये मुनीन्द्राः। पितुर्भारभृत्स्वांगजास्तस्य पञ्च परार्थस्तदधों न चेद्धेभवाय ॥" अर्थ: एकादश भाव में गुरु होने से व्यक्ति को अकुप्य (अक्षय) धन की प्राप्ति हो, वह पिता का भार उठाने वाला हो, और उसके पांच परमार्थ हों। यदि ऐसा न हो तो वह अधोगति को प्राप्त होता है। #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के  महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर माध्यम से इसे समझते हैः r में गुरु* *नवम भाव "चतुर्भूमिकं तद्नृहं तस्य भूमी पतेर्वल्लभी वल्लभा  भूमिदेवाः| गुरौ धर्मगे बान्धवाः स्युबिनीताः सदाडडलस्यता धर्मवैगुण्यकारा  Il" अर्थः नवम भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर चार मंजिला हो, वह राजा का प्रिय हो, और भूमिदेव (ब्राह्मण) उसका सम्मान करे। उसके बंधु-बांधु-बांधव विनीत हों, और वह  आलस्य से धर्म का पालन न करे। *दशम भाव में गुरु* "ध्वजा मण्डप मन्दिरं चित्रशालं पितुः पूर्वजेभ्योडपि तेजोधिकत्वम्। भवेच्छर्मणा पुत्रकाणां पचेत्प्रत्यहं प्रस्थसामुद्रमन्नम् न तुष्टो ध्वजा से युक्त अर्थः दशम भाव र्में गुरु होने से व्यक्ति का घर से युक्त  हो, वह पिता और पूर्वजों से भी मंदिर एवं चित्रकारी अधिक तेजस्वी हो, पुत्र के सुख से प्रसन्न न हो, और वह को भोजन कराने वाला हो। எளி : *एकादश भाव में गुरु* "अकुप्यं च लाभ गुरौ किन्न लभ्यं वदन्तीष्टधीमन्तमन्ये मुनीन्द्राः|  पितुर्भारभृत्स्वांगजास्तस्य पञ्च परार्थस्तदर्धों न चेद्धेभवाय अर्थः एकादश भाव ्में गुरु होने से व्यक्ति को अकुप्य (अक्षय) धन की प्राप्ति हो, वह पिता का भार उठाने वाला हो, ओर उसके पांच परमार्थ र्हों। यदि ऐसा न हो तो वह अधोगति को प्राप्त होता है। चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के  महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर माध्यम से इसे समझते हैः r में गुरु* *नवम भाव "चतुर्भूमिकं तद्नृहं तस्य भूमी पतेर्वल्लभी वल्लभा  भूमिदेवाः| गुरौ धर्मगे बान्धवाः स्युबिनीताः सदाडडलस्यता धर्मवैगुण्यकारा  Il" अर्थः नवम भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर चार मंजिला हो, वह राजा का प्रिय हो, और भूमिदेव (ब्राह्मण) उसका सम्मान करे। उसके बंधु-बांधु-बांधव विनीत हों, और वह  आलस्य से धर्म का पालन न करे। *दशम भाव में गुरु* "ध्वजा मण्डप मन्दिरं चित्रशालं पितुः पूर्वजेभ्योडपि तेजोधिकत्वम्। भवेच्छर्मणा पुत्रकाणां पचेत्प्रत्यहं प्रस्थसामुद्रमन्नम् न तुष्टो ध्वजा से युक्त अर्थः दशम भाव र्में गुरु होने से व्यक्ति का घर से युक्त  हो, वह पिता और पूर्वजों से भी मंदिर एवं चित्रकारी अधिक तेजस्वी हो, पुत्र के सुख से प्रसन्न न हो, और वह को भोजन कराने वाला हो। எளி : *एकादश भाव में गुरु* "अकुप्यं च लाभ गुरौ किन्न लभ्यं वदन्तीष्टधीमन्तमन्ये मुनीन्द्राः|  पितुर्भारभृत्स्वांगजास्तस्य पञ्च परार्थस्तदर्धों न चेद्धेभवाय अर्थः एकादश भाव ्में गुरु होने से व्यक्ति को अकुप्य (अक्षय) धन की प्राप्ति हो, वह पिता का भार उठाने वाला हो, ओर उसके पांच परमार्थ र्हों। यदि ऐसा न हो तो वह अधोगति को प्राप्त होता है। - ShareChat
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर माध्यम से इसे समझते हैंः శ]ా *सप्तम भाव "गुरुर्गर्वकृद्यस्य जामित्रभावे सपिण्डाथिकोडखंडकंदप एव পান স ঘুক होने से व्यक्ति तीक्ष्ण बुद्धिवाला, अर्थः सप्तम बहुत धनवान , स्त्रियों से स्वल्प प्रीति करनेवाला, अभिमान करनेवाला, अपनी जाति में श्रेष्ठ तथा कामदेव के तुल्य पर रूपवाला होता है। ম যুক*  *अष्टम भाव "चिरं नो वसेत्पैतृके चव गेहे चिरस्थायि नो तद्नृहं तस्य देहम्।  चिरं नो भवेत्तस्य नीरोगमङ्ग गुरुमृत्युगो यस्य वैकुण्ठगन्ता  भाव में गुरु होने से व्यक्ति बहुत काल तक अर्थः अष्टम पिता के घर में न बसे, उसका अंग रोगरहित न हो, और वह बहुत काल तक न जीवे। अंत समय में बैकुंठ को प्राप्त होवे। 14#35* *नवम चतुर्भूमिकं तद्नृहं तस्य भूमी पतेर्वल्लभी वल्लभा भूमिदेवाः | गुरौ धर्मगे बान्धवाः स्युबिनीताः सदाडड्लस्यता थर्मवैगुण्यकारा II" भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर चार मंजिला अर्थः नवम हो, वह राजा का प्रिय हो, और भूमिदेव (ब्राह्मण) उसका उसके बंधु-बांथव विनीत हों , और वह आलस्य सम्मान करें। से धर्म का पालन न करे। चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर माध्यम से इसे समझते हैंः శ]ా *सप्तम भाव "गुरुर्गर्वकृद्यस्य जामित्रभावे सपिण्डाथिकोडखंडकंदप एव পান স ঘুক होने से व्यक्ति तीक्ष्ण बुद्धिवाला, अर्थः सप्तम बहुत धनवान , स्त्रियों से स्वल्प प्रीति करनेवाला, अभिमान करनेवाला, अपनी जाति में श्रेष्ठ तथा कामदेव के तुल्य पर रूपवाला होता है। ম যুক*  *अष्टम भाव "चिरं नो वसेत्पैतृके चव गेहे चिरस्थायि नो तद्नृहं तस्य देहम्।  चिरं नो भवेत्तस्य नीरोगमङ्ग गुरुमृत्युगो यस्य वैकुण्ठगन्ता  भाव में गुरु होने से व्यक्ति बहुत काल तक अर्थः अष्टम पिता के घर में न बसे, उसका अंग रोगरहित न हो, और वह बहुत काल तक न जीवे। अंत समय में बैकुंठ को प्राप्त होवे। 14#35* *नवम चतुर्भूमिकं तद्नृहं तस्य भूमी पतेर्वल्लभी वल्लभा भूमिदेवाः | गुरौ धर्मगे बान्धवाः स्युबिनीताः सदाडड्लस्यता थर्मवैगुण्यकारा II" भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर चार मंजिला अर्थः नवम हो, वह राजा का प्रिय हो, और भूमिदेव (ब्राह्मण) उसका उसके बंधु-बांथव विनीत हों , और वह आलस्य सम्मान करें। से धर्म का पालन न करे। - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन माध्यम से इसे समझते हैंः में गुरु* *पंचम भाव "निदाने सुते विद्यमानेडतिभृतिः फलोपद्रवः पक्ककाले फलस्य अर्थः पंचम भाव में गुरु होने से व्यक्ति की रुचि भोगों में अथिक होती है, वह वक्ता, ताफिक (बहस करनेवाला ) अथवा लेखक होता है। कार्य का फल मिलने के काल में विश्न हो जाता है, परन्तु पुत्र विद्यमान होने पर धन की समृद्धि होती है। #ழ5* *षष्ठ भाव "रुजार्तों जनन्या रुजः संभवेय रिपों वाक्पर्तों शत्रुहन्तृत्वमेति।  बलादुद्धतः को रणे तम्य जेता महिष्यादिशर्मा न নন্সানুলানাম ll" भाव में गुरु होने से व्यक्ति स्वयं रोग से पीड़ित हो அ: 48 और उसकी माता भी रोग से पीड़ित हो। वह शत्रुओं का नाश करे तथा रण में किसी से जीता न जावे। उसको महिषी ( भैंस ) आदि से पूर्ण सुख प्राप्त हो परन्तु मामा का सुख न मिले।  चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन माध्यम से इसे समझते हैंः में गुरु* *पंचम भाव "निदाने सुते विद्यमानेडतिभृतिः फलोपद्रवः पक्ककाले फलस्य अर्थः पंचम भाव में गुरु होने से व्यक्ति की रुचि भोगों में अथिक होती है, वह वक्ता, ताफिक (बहस करनेवाला ) अथवा लेखक होता है। कार्य का फल मिलने के काल में विश्न हो जाता है, परन्तु पुत्र विद्यमान होने पर धन की समृद्धि होती है। #ழ5* *षष्ठ भाव "रुजार्तों जनन्या रुजः संभवेय रिपों वाक्पर्तों शत्रुहन्तृत्वमेति।  बलादुद्धतः को रणे तम्य जेता महिष्यादिशर्मा न নন্সানুলানাম ll" भाव में गुरु होने से व्यक्ति स्वयं रोग से पीड़ित हो அ: 48 और उसकी माता भी रोग से पीड़ित हो। वह शत्रुओं का नाश करे तथा रण में किसी से जीता न जावे। उसको महिषी ( भैंस ) आदि से पूर्ण सुख प्राप्त हो परन्तु मामा का सुख न मिले। - ShareChat
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर से इसे समझते ्हैः माथ्यम में गुरु* *्तृतीय भाव "भवेद्यस्य दुश्चिक्यगो देवमंत्री लघुनां लघीयान् सुखं सोदराणाम्। कृतर्घ्नों भवेन्मित्रसार्थे न मैत्री ललाटोदयेष्प्यर्थलाभो न तद्वत् Il भाव में गुरु होने से व्यक्ति तुच्छों के मध्य में अर्थः तृतीय " अति तुच्छ हो, सहोदर भ्राताओं के सुख से सम्पन्न हो, कृतघ्न हो, मिर्त्रों से मित्रता न हो, भाग्य का उदय और होने पर भी द्रव्य लाभ न हो। যাডযমান *चतुर्थ भाव में गुरु*  वाजिद्वेषा दिजोच्चारितो वेदघोषोडपि "गृहद्वारतः श्रूयते य గెకగ] प्रतिस्पर्द्धिनः  पारिचय्यं चतुर्थे गुरौ तप्तमन्तर्गतं च I१"म ತಾಸ" अर्थः चतुर्थ भाव र्में गुरु होने से व्यक्ति के द्वार से घोर्ड़ों का पड़ता है, शत्रु उसकी शुश्रूषा में शब्द और वेदघोष " सुनाई 1 रहते हैं, परन्तु असंतोष के कारण उसका मन तप्त रहता है। भाव में गुरु* *पंचम "विलासे मतिर्बुद्धिगे देवपूज्ये भवेज्जल्पकः कल्पको लेखको वा।" भाव में गुरु होने से व्यक्ति विलास में रुचि अर्थः पंचम रखता है, बुद्धिमान होता है, और लेखक या कल्पक होता 61 चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर से इसे समझते ्हैः माथ्यम में गुरु* *्तृतीय भाव "भवेद्यस्य दुश्चिक्यगो देवमंत्री लघुनां लघीयान् सुखं सोदराणाम्। कृतर्घ्नों भवेन्मित्रसार्थे न मैत्री ललाटोदयेष्प्यर्थलाभो न तद्वत् Il भाव में गुरु होने से व्यक्ति तुच्छों के मध्य में अर्थः तृतीय " अति तुच्छ हो, सहोदर भ्राताओं के सुख से सम्पन्न हो, कृतघ्न हो, मिर्त्रों से मित्रता न हो, भाग्य का उदय और होने पर भी द्रव्य लाभ न हो। যাডযমান *चतुर्थ भाव में गुरु*  वाजिद्वेषा दिजोच्चारितो वेदघोषोडपि "गृहद्वारतः श्रूयते य గెకగ] प्रतिस्पर्द्धिनः  पारिचय्यं चतुर्थे गुरौ तप्तमन्तर्गतं च I१"म ತಾಸ" अर्थः चतुर्थ भाव र्में गुरु होने से व्यक्ति के द्वार से घोर्ड़ों का पड़ता है, शत्रु उसकी शुश्रूषा में शब्द और वेदघोष " सुनाई 1 रहते हैं, परन्तु असंतोष के कारण उसका मन तप्त रहता है। भाव में गुरु* *पंचम "विलासे मतिर्बुद्धिगे देवपूज्ये भवेज्जल्पकः कल्पको लेखको वा।" भाव में गुरु होने से व्यक्ति विलास में रुचि अर्थः पंचम रखता है, बुद्धिमान होता है, और लेखक या कल्पक होता 61 - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - गुरुभावफल गुरुत्वं गुणैर्लग्नगे देवपूज्ये सुवेषी सुखी दिव्यदेहोडल्पवीय्यः । गतिर्भाविनी पारलौकी विचिन्त्या वसूनि व्ययं संबलेन व्रजन्ति Il १ Il जिस मनुष्य के लग्न ्में बृहस्पति हो वह मनुष्य सुन्दर वस्त्र-आभूषणों से भूषित तथा सुखी, दिव्य (सुंदर) शरीर और अल्प वीर्य वाला, कारण जर्नों का मान्य तथा তুণী ৯ परलोक में शुभगति पाने वाला और राह-खर्च में द्रव्य व्यय करने बाला होता है ।। १ ।l कवित्वे मतिर्दंडनेतृत्वशक्ति मुखे दोषधृकू शीघ्रभोगार्त एव कुटुम्बे गुरौ कष्टतो द्रव्यलब्धिः सदा नो धनं विश्रमेद्यबतोषपि Il ? यदि द्वितीय स्थान में गुरु हो तो वह मनुष्य काव्य रचना करने की शक्ति और राज्य प्रवन्ध करने की सामध्य रखता है और उसका मुख रोगग्रस्त होता है। वह अल्प वीर्यबाला , से द्रव्य लाभ करनेवाला, यत्न करने पर भी द्रव्यरहित कष्ट চীনা ট Il ২ Il गुरुभावफल गुरुत्वं गुणैर्लग्नगे देवपूज्ये सुवेषी सुखी दिव्यदेहोडल्पवीय्यः । गतिर्भाविनी पारलौकी विचिन्त्या वसूनि व्ययं संबलेन व्रजन्ति Il १ Il जिस मनुष्य के लग्न ्में बृहस्पति हो वह मनुष्य सुन्दर वस्त्र-आभूषणों से भूषित तथा सुखी, दिव्य (सुंदर) शरीर और अल्प वीर्य वाला, कारण जर्नों का मान्य तथा তুণী ৯ परलोक में शुभगति पाने वाला और राह-खर्च में द्रव्य व्यय करने बाला होता है ।। १ ।l कवित्वे मतिर्दंडनेतृत्वशक्ति मुखे दोषधृकू शीघ्रभोगार्त एव कुटुम्बे गुरौ कष्टतो द्रव्यलब्धिः सदा नो धनं विश्रमेद्यबतोषपि Il ? यदि द्वितीय स्थान में गुरु हो तो वह मनुष्य काव्य रचना करने की शक्ति और राज्य प्रवन्ध करने की सामध्य रखता है और उसका मुख रोगग्रस्त होता है। वह अल्प वीर्यबाला , से द्रव्य लाभ करनेवाला, यत्न करने पर भी द्रव्यरहित कष्ट চীনা ট Il ২ Il - ShareChat
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, बुध की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के से इसे समझते हैंः माथ्यम #ge* *एकादश भाव विना लाभभावे स्थितं भेशजातं न लाभो न लावण्यमानृण्यमस्ति। कुतः कन्यकोद्वाहदानं च देयं कथं भूसुरास्त्यक्ततृष्णा भवन्ति अर्थः एकादश भाव में बुध होने से व्यक्ति को द्रव्यादि का लाभ, मनोहर रूप, ऋणरहित होना, कन्यादान में देने योग्य द्रव्य , और द्रव्य देकर को प्रसन्न करने का फल ब्राह्म्णों - मिलता है। #gq* *द्वादश भाव "न चेदुद्वादशे यस्य शीतांशुजातः कथं तद्गृहं भूमिदेवा  भजन्ति। रणे वैरिणो भीतिमायान्ति कस्मा द्धिरण्यादिकोशं शठः कोडनुभूयात् II" भाव में बुध होने से व्यक्ति के घर में ब्राह्मण अर्थः द्वादश होते हैं, युद्ध में शत्रू भय से भागते हैं, और उसे प्राप्त सुवर्णादिकों का खजाना मिलता है।  चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, बुध की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के से इसे समझते हैंः माथ्यम #ge* *एकादश भाव विना लाभभावे स्थितं भेशजातं न लाभो न लावण्यमानृण्यमस्ति। कुतः कन्यकोद्वाहदानं च देयं कथं भूसुरास्त्यक्ततृष्णा भवन्ति अर्थः एकादश भाव में बुध होने से व्यक्ति को द्रव्यादि का लाभ, मनोहर रूप, ऋणरहित होना, कन्यादान में देने योग्य द्रव्य , और द्रव्य देकर को प्रसन्न करने का फल ब्राह्म्णों - मिलता है। #gq* *द्वादश भाव "न चेदुद्वादशे यस्य शीतांशुजातः कथं तद्गृहं भूमिदेवा  भजन्ति। रणे वैरिणो भीतिमायान्ति कस्मा द्धिरण्यादिकोशं शठः कोडनुभूयात् II" भाव में बुध होने से व्यक्ति के घर में ब्राह्मण अर्थः द्वादश होते हैं, युद्ध में शत्रू भय से भागते हैं, और उसे प्राप्त सुवर्णादिकों का खजाना मिलता है। - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, बुध की स्थिति व्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर से इसे समझते हैंः মাংয়ম ম ব্রুঃ* रनवम भाव "बुधे धर्मगे धर्मशीलोडतिधीमान् भवेद्दीक्षितः ব্তুলীলোনক্ধী য II कुलोद्योतकृद्भानुवद्भूमिपालात् प्रतापाधिको बाधको दुर्मुखानाम् II" भाव में बुध होने से व्यक्ति धर्मशील , बुद्धिमान, अर्थः नवम सोमयज्ञ तथा गंगा में स्नान करनेवाला, सूर्य के समान कुल को प्रकाशित करनेवाला , राजा से भी अधिक प्रतापवाला और दुर्जनों का दमन करने वाला होता है। *दशम भाव र्में बुध* "मितं संवदेन्नो मितं संलभेत प्रसादादिवैकारिसौराजवृत्तिः| विशेषात् पितुः संपदो बुधे कर्मगे 1 पूजनीयो 1 नीतिदंडाधिकारात् II अर्थः दशम भाव में बुध होने से व्यक्ति पिता की संपत्ति विशेष प्राप्त करता है, लोक में मान्य होता है, और राजा की कचहरी का अधिकार मिलने से राजा के समान क्षमा और दंड प्रदान करने वाला होता है। वह थोड़ा बोलनेवाला परन्तु दिव्यवस्त्र, अश्व आदि महान् ऐश्वर्य से सम्पन्न होता है। चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, बुध की स्थिति व्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर से इसे समझते हैंः মাংয়ম ম ব্রুঃ* रनवम भाव "बुधे धर्मगे धर्मशीलोडतिधीमान् भवेद्दीक्षितः ব্তুলীলোনক্ধী য II कुलोद्योतकृद्भानुवद्भूमिपालात् प्रतापाधिको बाधको दुर्मुखानाम् II" भाव में बुध होने से व्यक्ति धर्मशील , बुद्धिमान, अर्थः नवम सोमयज्ञ तथा गंगा में स्नान करनेवाला, सूर्य के समान कुल को प्रकाशित करनेवाला , राजा से भी अधिक प्रतापवाला और दुर्जनों का दमन करने वाला होता है। *दशम भाव र्में बुध* "मितं संवदेन्नो मितं संलभेत प्रसादादिवैकारिसौराजवृत्तिः| विशेषात् पितुः संपदो बुधे कर्मगे 1 पूजनीयो 1 नीतिदंडाधिकारात् II अर्थः दशम भाव में बुध होने से व्यक्ति पिता की संपत्ति विशेष प्राप्त करता है, लोक में मान्य होता है, और राजा की कचहरी का अधिकार मिलने से राजा के समान क्षमा और दंड प्रदान करने वाला होता है। वह थोड़ा बोलनेवाला परन्तु दिव्यवस्त्र, अश्व आदि महान् ऐश्वर्य से सम्पन्न होता है। - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, बुध की स्थिति व्यक्ति के  महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर माध्यम से इसे समझते हैंः #3* *सप्तम भाव "सुतः शीतगोः सप्तमे शं युवत्त्या विधने तथा तुच्छवीर्य च भोगे। अनस्तंगतो हेमवद्देहशोभां न शक्नोति तत्संपदो वानुकर्तुम होने से व्यक्ति को स्त्री का पूर्ण में बुध 7 अर्थः सप्तम भाव सुख मिलता है, परंतु मैथुनसमय में वह स्वल्प वीर्य स्थापन करता है। उसके शरीर की कांति स्वर्णतुल्य होती है, और यदि बुध  उसकी संपदा की बराबरी दूसरा नर्हीं कर सकता| अस्त हो तो इससे विपरीत फल होता है। #కరాా *अष्टम भाव "शतं जीविनो रन्ध्रगे राजपुत्रे भवन्तीह देशान्तरे विश्रुतास्ते। निधानं नृपादिक्रयाद्धा लभन्ते युवत्युङ्गवं क्रीडनं प्रीतिमन्तः भाव में बुध होने से व्यक्ति की सौ वर्ष की आयु अर्थः अष्टम होती है, देशान्तरों में विख्याति मिलती है, राजा से या व्यवहार से द्रव्य की प्राप्ति होती है, और जवान स्त्रियों की क्रीड़ा का सुख मिलता है। वह सदा प्रसन्न रहता है। चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, बुध की स्थिति व्यक्ति के  महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर माध्यम से इसे समझते हैंः #3* *सप्तम भाव "सुतः शीतगोः सप्तमे शं युवत्त्या विधने तथा तुच्छवीर्य च भोगे। अनस्तंगतो हेमवद्देहशोभां न शक्नोति तत्संपदो वानुकर्तुम होने से व्यक्ति को स्त्री का पूर्ण में बुध 7 अर्थः सप्तम भाव सुख मिलता है, परंतु मैथुनसमय में वह स्वल्प वीर्य स्थापन करता है। उसके शरीर की कांति स्वर्णतुल्य होती है, और यदि बुध  उसकी संपदा की बराबरी दूसरा नर्हीं कर सकता| अस्त हो तो इससे विपरीत फल होता है। #కరాా *अष्टम भाव "शतं जीविनो रन्ध्रगे राजपुत्रे भवन्तीह देशान्तरे विश्रुतास्ते। निधानं नृपादिक्रयाद्धा लभन्ते युवत्युङ्गवं क्रीडनं प्रीतिमन्तः भाव में बुध होने से व्यक्ति की सौ वर्ष की आयु अर्थः अष्टम होती है, देशान्तरों में विख्याति मिलती है, राजा से या व्यवहार से द्रव्य की प्राप्ति होती है, और जवान स्त्रियों की क्रीड़ा का सुख मिलता है। वह सदा प्रसन्न रहता है। - ShareChat
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - बुध की स्थिति व्यक्ति के चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के माध्यम से इसे समझते हैंः में बुध*  *पंचम भाव "वयस्यादिमे पुत्रगर्भों न तिष्ठे ङ्गवेत्तस्य मेधाडर्थसंपादयित्री।  बुधैर्भण्यते पंचमे रौहिणेये कि.यदिद्यते कैतवस्याभिचारम् भाव में बुध होने से व्यक्ति के पुत्रगर्भ में ठहराव अर्थः पंचम नर्हीं होता, और यदि ठहर भी जावे तो जन्म होकर उसकी मृत्यु हो जावे। उसकी बुद्धि द्रव्यसंचय करनेवाली हो, और वह मारण , मोहन, उच्चाटन आदि छल ्कपट जानने वाला हा। में बुध*  *षष्ठ 9٩ "विरोधो जनानां निरोधो रिपूणां प्रबोधो यतीनां च रोधोडनिलानाम्। बुधे सद्व्यये व्यावहारो निधीनां बलादर्थकृत्संभवेच्छत्रुभावे भाव में बुध होने से व्यक्ति मनुर्ष्यों के साथ विरोध अर्थः षष्ठ और रिपुओं का निरोध करे, संन्यासियों से ज्ञान की प्राप्ति करे, नीरोग शरीरवाला हो, उत्तम कार्य में द्रव्य खर्च करे और अपने पुरुषार्थ से द्रव्य का संचय करनेवाला हो।  बुध की स्थिति व्यक्ति के चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के माध्यम से इसे समझते हैंः में बुध*  *पंचम भाव "वयस्यादिमे पुत्रगर्भों न तिष्ठे ङ्गवेत्तस्य मेधाडर्थसंपादयित्री।  बुधैर्भण्यते पंचमे रौहिणेये कि.यदिद्यते कैतवस्याभिचारम् भाव में बुध होने से व्यक्ति के पुत्रगर्भ में ठहराव अर्थः पंचम नर्हीं होता, और यदि ठहर भी जावे तो जन्म होकर उसकी मृत्यु हो जावे। उसकी बुद्धि द्रव्यसंचय करनेवाली हो, और वह मारण , मोहन, उच्चाटन आदि छल ्कपट जानने वाला हा। में बुध*  *षष्ठ 9٩ "विरोधो जनानां निरोधो रिपूणां प्रबोधो यतीनां च रोधोडनिलानाम्। बुधे सद्व्यये व्यावहारो निधीनां बलादर्थकृत्संभवेच्छत्रुभावे भाव में बुध होने से व्यक्ति मनुर्ष्यों के साथ विरोध अर्थः षष्ठ और रिपुओं का निरोध करे, संन्यासियों से ज्ञान की प्राप्ति करे, नीरोग शरीरवाला हो, उत्तम कार्य में द्रव्य खर्च करे और अपने पुरुषार्थ से द्रव्य का संचय करनेवाला हो। - ShareChat