Abhilas Chauhan
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+91 81038 40601 अपनी जन्म पत्रिका का संपूर्ण विशे
शिवलिंग पर चढ़ाने वाली चीजों के लाभ और उपाय 🌟 शिवलिंग पर चढ़ाने से कई लाभ मिलते हैं, आइए जानते हैं: - *सरसों का तेल*: - लाभ: शत्रुओं का नाश होता है, घर में सुख-शांति आती है। - उपाय: शिवलिंग पर सरसों का तेल चढ़ाने से पहले एक लाल फूल चढ़ाएं और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। - *लाल मसूर दाल*: - लाभ: कर्ज से मुक्ति मिलती है, आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। - उपाय: शिवलिंग पर लाल मसूर दाल चढ़ाने से पहले एक लाल रंग का कपड़ा चढ़ाएं और "ॐ ऋणमुक्तेश्वराय नमः" मंत्र का जाप करें। - *हरे मूंग दाल*: - लाभ: मनोकामना पूरी होती है, जीवन में सुख और समृद्धि आती है। - उपाय: शिवलिंग पर हरे मूंग दाल चढ़ाने से पहले एक हरा फूल चढ़ाएं और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। - *काली उड़द दाल*: - लाभ: शनि प्रकोप से मुक्ति मिलती है, जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। - उपाय: शिवलिंग पर काली उड़द दाल चढ़ाने से पहले एक काला फूल चढ़ाएं और "ॐ शनिश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें। - *चने की दाल*: - लाभ: भाग्य में वृद्धि होती है, जीवन में सफलता और उन्नति मिलती है। - उपाय: शिवलिंग पर चने की दाल चढ़ाने से पहले एक पीला फूल चढ़ाएं और "ॐ भगवते नमः" मंत्र का जाप करें। शिवलिंग पर चढ़ाने से पहले स्नान करें और शुद्ध मन से पूजा करें। #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - 3 3 नमः नमः Rq शिवाय 3 3 नमः नमः Rq शिवाय - ShareChat
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - केतु  ತತ೯ # भाव में का  द्वादश Tగ (12) जन्म प्रभाव व्यक्ति के जीवन కTHగT గే1  76I R इसे विस्तार से समझते हैंः आइए *दिशा   और qHIq* भाव में होने से व्यक्ति को কন্ু ব্রানথা आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रेरित करता है। त्याग से जुड़ा है॰ इसलिए भाव मोक्ष और যঙ శగె यहां भौतिक इच्छाओं से दूर करने में मदद है। करता व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है॰ लेकिन वैवाहिक जीवन और शारीरिक में  कमी सुखों आ सकती   है। *सकारात्मक पहलू* विकास और मोक्ष मार्ग पर जाने की आर्ध्यात्मेक प्रेरणा | अपने जीवन के उद्देश्य को समझने का मौका मिलता है। भौतिक इच्छाओं से मुक्ति। *नकारात्मक पहलू* वैवाहिक जीवन और शारीरिक 4 #il सुखों मानसिक और   अस्थिरता। ೫೯ और   नुकसान য্রব सकता মাসনা पड़ का करना है। *सुधार के उपाय * केतु के लिए उपयुक्त उपाय जैसे कि केतु की ஒR கg = 53 < पूजा, केतु मंत्र का जाप, ( लैसनीर ) उपयोग | का आध्यात्मिक विकास के लिए ध्यान और योग का अभ्यास करना।| मानसिक शांति के लिए शांतिपूर्ण वातावरण बनाना। केतु  ತತ೯ # भाव में का  द्वादश Tగ (12) जन्म प्रभाव व्यक्ति के जीवन కTHగT గే1  76I R इसे विस्तार से समझते हैंः आइए *दिशा   और qHIq* भाव में होने से व्यक्ति को কন্ু ব্রানথা आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रेरित करता है। त्याग से जुड़ा है॰ इसलिए भाव मोक्ष और যঙ శగె यहां भौतिक इच्छाओं से दूर करने में मदद है। करता व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है॰ लेकिन वैवाहिक जीवन और शारीरिक में  कमी सुखों आ सकती   है। *सकारात्मक पहलू* विकास और मोक्ष मार्ग पर जाने की आर्ध्यात्मेक प्रेरणा | अपने जीवन के उद्देश्य को समझने का मौका मिलता है। भौतिक इच्छाओं से मुक्ति। *नकारात्मक पहलू* वैवाहिक जीवन और शारीरिक 4 #il सुखों मानसिक और   अस्थिरता। ೫೯ और   नुकसान য্রব सकता মাসনা पड़ का करना है। *सुधार के उपाय * केतु के लिए उपयुक्त उपाय जैसे कि केतु की ஒR கg = 53 < पूजा, केतु मंत्र का जाप, ( लैसनीर ) उपयोग | का आध्यात्मिक विकास के लिए ध्यान और योग का अभ्यास करना।| मानसिक शांति के लिए शांतिपूर्ण वातावरण बनाना। - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - कुंडली में केतु ग्रह का Hq # qH (9) ச है। प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर डालता आइए॰ इसे विस्तार से 8 समझते *दिशा   और प्रभाव* శగె में होने से व्यक्ति को नवम भाव रुझान और तीर्थों में रुचि होती है। आध्यात्मिक भाग्य से जुड़ा है॰ इसलिए धर्म   और a 46 கg 461் भाग्य को कमजोर सकता   है। कर যককি ক্রী তীবন স बदलाव   और अचानक भाग्य है। ಫ ೫ का सामना करना पड़ सकता *सकारात्मक पहलू* आध्यात्मिक विकास और मोक्ष मार्ग पर जाने की प्रेरणा| व्यक्ति को अपने जीवन के उद्देश्य को समझने का मौका मिलता है। तीर्थों और आध्यात्मिक स्थलों में रुचि। *नकारात्मक पहलू* भाग्य की कमी और जीवन में अचानक बदलाव गुरु या पिता से दूरी या मतभेद। जीवन में स्थिरता की कमी। *gR க 3qIq* केतु के लिए उपयुक्त उपाय जैसे कि केतु की और केतु से जुड़े रत्न পুতা; কনু সপ্প का जाप, ( लैसनीर ) उपयोग| का गुरु या पिता सम्मान और उनकी सलाह का লনা | विकास के लिए ध्यान और योग 31ಖ ನಫ का अभ्यास करना। कुंडली में केतु ग्रह का Hq # qH (9) ச है। प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर डालता आइए॰ इसे विस्तार से 8 समझते *दिशा   और प्रभाव* శగె में होने से व्यक्ति को नवम भाव रुझान और तीर्थों में रुचि होती है। आध्यात्मिक भाग्य से जुड़ा है॰ इसलिए धर्म   और a 46 கg 461் भाग्य को कमजोर सकता   है। कर যককি ক্রী তীবন স बदलाव   और अचानक भाग्य है। ಫ ೫ का सामना करना पड़ सकता *सकारात्मक पहलू* आध्यात्मिक विकास और मोक्ष मार्ग पर जाने की प्रेरणा| व्यक्ति को अपने जीवन के उद्देश्य को समझने का मौका मिलता है। तीर्थों और आध्यात्मिक स्थलों में रुचि। *नकारात्मक पहलू* भाग्य की कमी और जीवन में अचानक बदलाव गुरु या पिता से दूरी या मतभेद। जीवन में स्थिरता की कमी। *gR க 3qIq* केतु के लिए उपयुक्त उपाय जैसे कि केतु की और केतु से जुड़े रत्न পুতা; কনু সপ্প का जाप, ( लैसनीर ) उपयोग| का गुरु या पिता सम्मान और उनकी सलाह का লনা | विकास के लिए ध्यान और योग 31ಖ ನಫ का अभ्यास करना। - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - कुंडली में केतु ग्रह HIq # अष्टम (8 ) जन्म का है। प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर ভালনা आइए॰  इसे विस्तार से समझते हैंः *दिशा   और प्रभाव* भाव में होने से व्यक्ति को तंत्र, केतु अष्टम ज्योतिष, और रहस्यमय विद्या में गहरी रुचि होती / गूढ़ विषयों का MN & आध्यात्मिक भाव নিক্কাম লানা ট1 व्यक्ति को अपने जीवन के रहस्यों को समझने क्षमता मिलती है। की *सकारात्मक पहलू* गूढ़ विज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान में रुचि। व्यक्ति को अपने अंदर की दुनिया को समझने का मौका मिलता है। व्यक्ति को अपने लक्ष्यों को प्राप्त   करने 46 भाव के लिए प्रेरित है। करता *नकारात्मक पहलू* मृत्यु और परिवर्तन M qా గ్ే अष्टम भाव का इसलिए केतु यहां जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तन  ला सकता   है। व्यक्ति को अपने जीवन में गहराई से जुड़े रहस्यों है। का सामना करना पड़ सकता *सुधार के उपाय+ శగె उपाय जैसे कि केतु की के लिए उपयुक्त और केतु से जुड़े रत्न পুতা; ফনু সপ্স ক্া जाप, ( लैसनीर ) उपयोग | का आध्यात्मिक विकास के लिए ध्यान और योग का अभ्यास करना। गूढ़ विषयों अध्ययन  और কা সাদ ज्ञान करना। कुंडली में केतु ग्रह HIq # अष्टम (8 ) जन्म का है। प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर ভালনা आइए॰  इसे विस्तार से समझते हैंः *दिशा   और प्रभाव* भाव में होने से व्यक्ति को तंत्र, केतु अष्टम ज्योतिष, और रहस्यमय विद्या में गहरी रुचि होती / गूढ़ विषयों का MN & आध्यात्मिक भाव নিক্কাম লানা ট1 व्यक्ति को अपने जीवन के रहस्यों को समझने क्षमता मिलती है। की *सकारात्मक पहलू* गूढ़ विज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान में रुचि। व्यक्ति को अपने अंदर की दुनिया को समझने का मौका मिलता है। व्यक्ति को अपने लक्ष्यों को प्राप्त   करने 46 भाव के लिए प्रेरित है। करता *नकारात्मक पहलू* मृत्यु और परिवर्तन M qా గ్ే अष्टम भाव का इसलिए केतु यहां जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तन  ला सकता   है। व्यक्ति को अपने जीवन में गहराई से जुड़े रहस्यों है। का सामना करना पड़ सकता *सुधार के उपाय+ శగె उपाय जैसे कि केतु की के लिए उपयुक्त और केतु से जुड़े रत्न পুতা; ফনু সপ্স ক্া जाप, ( लैसनीर ) उपयोग | का आध्यात्मिक विकास के लिए ध्यान और योग का अभ्यास करना। गूढ़ विषयों अध्ययन  और কা সাদ ज्ञान करना। - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - 4 & " HIq # कुंडली का মদস ( 7) जन्म प्रभाव व्यक्ति के जीवन कई तरह से असर पर है। आइए॰ इसे विस्तार से समझते हैंः डालता *दिशा और प्रभाव* भाव में होने से वैवाहिक जीवन में ఇగ్ె सप्तम और रिश्तों में  दूरी आ सकती है। अस्थिरता जीवनसाथी چ और मानसिक साथ   मनमुटाव 3344 } है। T का सकता साझेदारी और सार्वजनिक संबंधों में भी समस्याएं 3 ஈகசி 81 *सकारात्मक पहलू* अपने रिश्तों को समझने और   सुधारने व्यक्ति को मौका मिलता है। করা भाव व्यक्ति को अपने जीवनसाथी ৯ মাথ 4 जुड़ने के नए तरीके खोजने के लिए प्रेरित करता है। *नकारात्मक পমলু* वैवाहिक जीवन में अस्थिरता और रिश्तों में  दूरी। मनमुटाव और मानसिक जीवनसाथी के साथ तनाव। साझेदारी और सार्वजनिक संबंधों में   समस्याएं। *सुधार के उपाय* केतु केतु के लिए उपयुक्त उपाय जैसे कि की जाप, और केतु से जुड़े रत्न पूजा,  केतु मंत्र का ( लैसनीर ) 47  3447/ जीवनसाथी के साथ संवाद और बढ़ाने समझ का प्रयास करना। मानसिक शांति के लिए और  योग का ध्यान अभ्यास XHII 4 & " HIq # कुंडली का মদস ( 7) जन्म प्रभाव व्यक्ति के जीवन कई तरह से असर पर है। आइए॰ इसे विस्तार से समझते हैंः डालता *दिशा और प्रभाव* भाव में होने से वैवाहिक जीवन में ఇగ్ె सप्तम और रिश्तों में  दूरी आ सकती है। अस्थिरता जीवनसाथी چ और मानसिक साथ   मनमुटाव 3344 } है। T का सकता साझेदारी और सार्वजनिक संबंधों में भी समस्याएं 3 ஈகசி 81 *सकारात्मक पहलू* अपने रिश्तों को समझने और   सुधारने व्यक्ति को मौका मिलता है। করা भाव व्यक्ति को अपने जीवनसाथी ৯ মাথ 4 जुड़ने के नए तरीके खोजने के लिए प्रेरित करता है। *नकारात्मक পমলু* वैवाहिक जीवन में अस्थिरता और रिश्तों में  दूरी। मनमुटाव और मानसिक जीवनसाथी के साथ तनाव। साझेदारी और सार्वजनिक संबंधों में   समस्याएं। *सुधार के उपाय* केतु केतु के लिए उपयुक्त उपाय जैसे कि की जाप, और केतु से जुड़े रत्न पूजा,  केतु मंत्र का ( लैसनीर ) 47  3447/ जीवनसाथी के साथ संवाद और बढ़ाने समझ का प्रयास करना। मानसिक शांति के लिए और  योग का ध्यान अभ्यास XHII - ShareChat
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - केतु  ক্রভলী  ম পান ম এম ನಗ ग्रह का (5) कई तरह से प्रभाव व्यक्ति के जीवन 0 3 इसे विस्तार से समझते हैंः గే1 आइए डालता *दिशा और प्रभाव* केतु भाव में होने से व्यक्ति को गूढ़ और पंचम रहस्यमयी विषयों में रुचि होती है॰ जैसे कि ज्योतिष , या आध्यात्मिक तंत्र मंत्र , ज्ञान। विद्या और संतान सुख से जुड़ा है, 46 भाव इसलिए केतु की उपस्थिति संतान सुख में कमी या संतान से दूरी का संकेत दे सकती है। मानसिक शांति में कमी और चिंता का अनुभव हो सकता है। * सकारात्मक 466* विज्ञान और आध्यात्मिक  # sfi गूढ़ व्यक्ति को अपने अंदर की दुनिया को  समझने मौका मिलता है। का भाव व्यक्ति को अपने लक्ष्यों को करने यह সাদ ৯ লিৎ ঐহিল கள 81 * नकारात्मक 466[* संतान सुख में  कमी या संतान से   दूरी। और   चिंता मानसिक तनाव का अनुभव। शिक्षा में  बाधाएं आ सकती हैं। faa যা *सुधार के उपाय * केतु के लिए उपयुक्त जैसे कि केतु की उपाय और केतु से जुड़े रत्न पूजा , केतु मंत्र का जाप, ( लैसनीर ) का   उपयोग। संतान के लिए विशेष পুতা যা उपाय करना। मानसिक शांति के लिए ध्यान और योग का 3ಖ करना। केतु  ক্রভলী  ম পান ম এম ನಗ ग्रह का (5) कई तरह से प्रभाव व्यक्ति के जीवन 0 3 इसे विस्तार से समझते हैंः గే1 आइए डालता *दिशा और प्रभाव* केतु भाव में होने से व्यक्ति को गूढ़ और पंचम रहस्यमयी विषयों में रुचि होती है॰ जैसे कि ज्योतिष , या आध्यात्मिक तंत्र मंत्र , ज्ञान। विद्या और संतान सुख से जुड़ा है, 46 भाव इसलिए केतु की उपस्थिति संतान सुख में कमी या संतान से दूरी का संकेत दे सकती है। मानसिक शांति में कमी और चिंता का अनुभव हो सकता है। * सकारात्मक 466* विज्ञान और आध्यात्मिक  # sfi गूढ़ व्यक्ति को अपने अंदर की दुनिया को  समझने मौका मिलता है। का भाव व्यक्ति को अपने लक्ष्यों को करने यह সাদ ৯ লিৎ ঐহিল கள 81 * नकारात्मक 466[* संतान सुख में  कमी या संतान से   दूरी। और   चिंता मानसिक तनाव का अनुभव। शिक्षा में  बाधाएं आ सकती हैं। faa যা *सुधार के उपाय * केतु के लिए उपयुक्त जैसे कि केतु की उपाय और केतु से जुड़े रत्न पूजा , केतु मंत्र का जाप, ( लैसनीर ) का   उपयोग। संतान के लिए विशेष পুতা যা उपाय करना। मानसिक शांति के लिए ध्यान और योग का 3ಖ करना। - ShareChat
मंत्र साधकों के लिए आवश्यक निर्देश किसी भी मंत्र अथवा यंत्र साधना से पहले साधकों को नीचे लिखी बातों पर अमल करना जरुरी है। 1. यदि 'मंत्र' को गुरु मुख से ग्रहण किया जाए, तो सफलता मिलनी निश्चित है क्योंकि इस प्रकार साधक के पीछे गुरु का हाथ एवं आशीर्वाद होता है। 2. किसी भी मंत्र अथवा यंत्र की साधना श्रद्धा और विश्वास से करें। 3. मंत्र की जप संख्या निश्चित होती है। किसी की ग्यारह हजार, इक्कीस हजार, किसी की इक्यावन हजार अथवा सवा लाख होती है। 4. मंत्र गुप्त रखकर एकाग्रचित होकर साधना करें। रखें। 5. साधना के समय, बताए गए देवी देवता या इष्ट देव की प्रतिमा या फोटो सामने 6. मंत्र साधना में आरम्भ से अन्त तक रोजाना दीपक जलाएं और धूप, अगरबती दिखाएं। 7. साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन, भूमि, शयन सात्विक भोजन व शुद्ध वस्त्रों का उपयोग करें। 8. साधना का प्रारम्भ किसी शुभ नक्षत्र, शुभ दिन, शुभ तिथि या ग्रहण तथा नवरात्रों में करें तो अच्छा है। 9. मंत्र जप के पश्चात्, भोग लगाएं तथा उसी मंत्र से ग्यारह बार आहुतियां डालकर छोटा सा हवन करें। 10. साधना के समय गुरु का चित्र सामने रखें, गुरु कौन और कैसा होना चाहिए आगे बताया गया है। 11. मंत्र साधना का स्थान एकान्त हो, साफ तथा पवित्र हो। वहां कोई दूसरा न आए जाए और न ही वहां कोई शब्दादि हो। 12. अपने यहां आने जाने वालों को सूचित कर दो कि वह आपकी साधना में रुकावट अथवा साधना के दौरान खलल न डालें। 13. अनुष्ठान के मध्य में आहार हमेशा साधारण होना चाहिए। फलों का प्रयोग अधिक करें। 14. यदि शरीर में कोई रोग पीड़ा अथवा उसके लक्षण हों तो आपको शिथिल नहीं होना चाहिए। सब रोगादि तथा पीड़ा स्वयं ही आपसे दूर भाग जाएंगे। महामाया (8) #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - मंत्र बोध मन्त्र का अर्थ है किसी भी देवता को सम्बोधित किया गया वैदिक सूक्त। जैसे हम बोलते हैं " ओ३म नमो शिवाय " तो इस मन्त्र के द्वारा हम अपने प्रिय देव "शिव जी" को सम्बोधित करते हुए नमस्कार करते हैं। ऐसे ही सभी मन्त्र किसी न किसी देवी देवता को सम्बोथित करते हैं और मन्त्र बोलने वाले की मनोकामना को व्यक्त करते हैं। वैसे तो मन्त्र शब्द व्यापक अर्थ को अपने में संजोए हुए है।  वैदिक ऋचाओं के छन्दों से लेकर, देवी देवताओं की स्तुति Aiga में प्रयुक्त किए जाने वाले  शब्द विधान को मन्त्र कहा है। दिव्य शक्तियों की प्राप्ति में प्रयुक्त शब्द भी जा सकता मंत्र हैं। विश्व र्में गुप्त शक्ति को जागृत करके अपने अनुकूल बनाने वाली विद्या भी मंत्र कहलाती है। रूप में कुछ विशिष्ट अक्षरों व शब्दों का समूह सारांश जिसका बारम्बार उच्चारण एवं संघर्षण , वातावरण ्में, faga  तरंर्गें उत्पन्न करके, साधक की নিংীণ সব্ধা কধী उद्देश्यों को पुष्ट करने लगे तो इच्छित भावनाओं व अभीष्ट मंत्र कहलाता है। मंत्रों की तेजोमय शक्ति को समुच्चय कहा गया है, इसके बीजाक्षर, शक्ति का पुंज कहलाते है। भारत के प्राचीन ऋषि मुनिर्यों ने मंत्रों की शक्ति को जाना  और तब से अब तक विभिन्न तपस्वियों और सर्न्तों ने मन्त्रों के बल पर मानव कल्याण के लिए कई कार्य किए हैं। मन्त्रों को किस प्रकार के कार्यो र्में उपयोग किया जाता है, इसको समझने के लिए षटकर्मों का विधान जानना जरुरी है। षटकर्मों की व्याख्या आगे दी आई है। मंत्र बोध मन्त्र का अर्थ है किसी भी देवता को सम्बोधित किया गया वैदिक सूक्त। जैसे हम बोलते हैं " ओ३म नमो शिवाय " तो इस मन्त्र के द्वारा हम अपने प्रिय देव "शिव जी" को सम्बोधित करते हुए नमस्कार करते हैं। ऐसे ही सभी मन्त्र किसी न किसी देवी देवता को सम्बोथित करते हैं और मन्त्र बोलने वाले की मनोकामना को व्यक्त करते हैं। वैसे तो मन्त्र शब्द व्यापक अर्थ को अपने में संजोए हुए है।  वैदिक ऋचाओं के छन्दों से लेकर, देवी देवताओं की स्तुति Aiga में प्रयुक्त किए जाने वाले  शब्द विधान को मन्त्र कहा है। दिव्य शक्तियों की प्राप्ति में प्रयुक्त शब्द भी जा सकता मंत्र हैं। विश्व र्में गुप्त शक्ति को जागृत करके अपने अनुकूल बनाने वाली विद्या भी मंत्र कहलाती है। रूप में कुछ विशिष्ट अक्षरों व शब्दों का समूह सारांश जिसका बारम्बार उच्चारण एवं संघर्षण , वातावरण ्में, faga  तरंर्गें उत्पन्न करके, साधक की নিংীণ সব্ধা কধী उद्देश्यों को पुष्ट करने लगे तो इच्छित भावनाओं व अभीष्ट मंत्र कहलाता है। मंत्रों की तेजोमय शक्ति को समुच्चय कहा गया है, इसके बीजाक्षर, शक्ति का पुंज कहलाते है। भारत के प्राचीन ऋषि मुनिर्यों ने मंत्रों की शक्ति को जाना  और तब से अब तक विभिन्न तपस्वियों और सर्न्तों ने मन्त्रों के बल पर मानव कल्याण के लिए कई कार्य किए हैं। मन्त्रों को किस प्रकार के कार्यो र्में उपयोग किया जाता है, इसको समझने के लिए षटकर्मों का विधान जानना जरुरी है। षटकर्मों की व्याख्या आगे दी आई है। - ShareChat
चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के माध्यम से इसे समझते हैं: *नवम भाव में गुरु* "चतुर्भूमिकं तद्गृहं तस्य भूमी-पतेर्वल्लभी वल्लभा भूमिदेवाः। गुरौ धर्मगे बान्धवाः स्युबिनीताः सदाऽऽलस्यता धर्मवैगुण्यकारा ॥" अर्थ: नवम भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर चार मंजिला हो, वह राजा का प्रिय हो, और भूमिदेव (ब्राह्मण) उसका सम्मान करें। उसके बंधु-बांधु-बांधव विनीत हों, और वह आलस्य से धर्म का पालन न करे। *दशम भाव में गुरु* "ध्वजा मण्डप मन्दिरं चित्रशालं पितुः पूर्वजेभ्योऽपि तेजोधिकत्वम्। न तुष्टो भवेच्छर्मणा पुत्रकाणां पचेत्प्रत्यहं प्रस्थसामुद्रमन्नम् ॥" अर्थ: दशम भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर ध्वजा से युक्त मंदिर एवं चित्रकारी से युक्त हो, वह पिता और पूर्वजों से भी अधिक तेजस्वी हो, पुत्र के सुख से प्रसन्न न हो, और वह बहुतों को भोजन कराने वाला हो। *एकादश भाव में गुरु* "अकुप्यं च लाभ गुरौ किन्न लभ्यं वदन्तीष्टधीमन्तमन्ये मुनीन्द्राः। पितुर्भारभृत्स्वांगजास्तस्य पञ्च परार्थस्तदधों न चेद्धेभवाय ॥" अर्थ: एकादश भाव में गुरु होने से व्यक्ति को अकुप्य (अक्षय) धन की प्राप्ति हो, वह पिता का भार उठाने वाला हो, और उसके पांच परमार्थ हों। यदि ऐसा न हो तो वह अधोगति को प्राप्त होता है। #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के  महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर माध्यम से इसे समझते हैः r में गुरु* *नवम भाव "चतुर्भूमिकं तद्नृहं तस्य भूमी पतेर्वल्लभी वल्लभा  भूमिदेवाः| गुरौ धर्मगे बान्धवाः स्युबिनीताः सदाडडलस्यता धर्मवैगुण्यकारा  Il" अर्थः नवम भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर चार मंजिला हो, वह राजा का प्रिय हो, और भूमिदेव (ब्राह्मण) उसका सम्मान करे। उसके बंधु-बांधु-बांधव विनीत हों, और वह  आलस्य से धर्म का पालन न करे। *दशम भाव में गुरु* "ध्वजा मण्डप मन्दिरं चित्रशालं पितुः पूर्वजेभ्योडपि तेजोधिकत्वम्। भवेच्छर्मणा पुत्रकाणां पचेत्प्रत्यहं प्रस्थसामुद्रमन्नम् न तुष्टो ध्वजा से युक्त अर्थः दशम भाव र्में गुरु होने से व्यक्ति का घर से युक्त  हो, वह पिता और पूर्वजों से भी मंदिर एवं चित्रकारी अधिक तेजस्वी हो, पुत्र के सुख से प्रसन्न न हो, और वह को भोजन कराने वाला हो। எளி : *एकादश भाव में गुरु* "अकुप्यं च लाभ गुरौ किन्न लभ्यं वदन्तीष्टधीमन्तमन्ये मुनीन्द्राः|  पितुर्भारभृत्स्वांगजास्तस्य पञ्च परार्थस्तदर्धों न चेद्धेभवाय अर्थः एकादश भाव ्में गुरु होने से व्यक्ति को अकुप्य (अक्षय) धन की प्राप्ति हो, वह पिता का भार उठाने वाला हो, ओर उसके पांच परमार्थ र्हों। यदि ऐसा न हो तो वह अधोगति को प्राप्त होता है। चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के  महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर माध्यम से इसे समझते हैः r में गुरु* *नवम भाव "चतुर्भूमिकं तद्नृहं तस्य भूमी पतेर्वल्लभी वल्लभा  भूमिदेवाः| गुरौ धर्मगे बान्धवाः स्युबिनीताः सदाडडलस्यता धर्मवैगुण्यकारा  Il" अर्थः नवम भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर चार मंजिला हो, वह राजा का प्रिय हो, और भूमिदेव (ब्राह्मण) उसका सम्मान करे। उसके बंधु-बांधु-बांधव विनीत हों, और वह  आलस्य से धर्म का पालन न करे। *दशम भाव में गुरु* "ध्वजा मण्डप मन्दिरं चित्रशालं पितुः पूर्वजेभ्योडपि तेजोधिकत्वम्। भवेच्छर्मणा पुत्रकाणां पचेत्प्रत्यहं प्रस्थसामुद्रमन्नम् न तुष्टो ध्वजा से युक्त अर्थः दशम भाव र्में गुरु होने से व्यक्ति का घर से युक्त  हो, वह पिता और पूर्वजों से भी मंदिर एवं चित्रकारी अधिक तेजस्वी हो, पुत्र के सुख से प्रसन्न न हो, और वह को भोजन कराने वाला हो। எளி : *एकादश भाव में गुरु* "अकुप्यं च लाभ गुरौ किन्न लभ्यं वदन्तीष्टधीमन्तमन्ये मुनीन्द्राः|  पितुर्भारभृत्स्वांगजास्तस्य पञ्च परार्थस्तदर्धों न चेद्धेभवाय अर्थः एकादश भाव ्में गुरु होने से व्यक्ति को अकुप्य (अक्षय) धन की प्राप्ति हो, वह पिता का भार उठाने वाला हो, ओर उसके पांच परमार्थ र्हों। यदि ऐसा न हो तो वह अधोगति को प्राप्त होता है। - ShareChat
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर माध्यम से इसे समझते हैंः శ]ా *सप्तम भाव "गुरुर्गर्वकृद्यस्य जामित्रभावे सपिण्डाथिकोडखंडकंदप एव পান স ঘুক होने से व्यक्ति तीक्ष्ण बुद्धिवाला, अर्थः सप्तम बहुत धनवान , स्त्रियों से स्वल्प प्रीति करनेवाला, अभिमान करनेवाला, अपनी जाति में श्रेष्ठ तथा कामदेव के तुल्य पर रूपवाला होता है। ম যুক*  *अष्टम भाव "चिरं नो वसेत्पैतृके चव गेहे चिरस्थायि नो तद्नृहं तस्य देहम्।  चिरं नो भवेत्तस्य नीरोगमङ्ग गुरुमृत्युगो यस्य वैकुण्ठगन्ता  भाव में गुरु होने से व्यक्ति बहुत काल तक अर्थः अष्टम पिता के घर में न बसे, उसका अंग रोगरहित न हो, और वह बहुत काल तक न जीवे। अंत समय में बैकुंठ को प्राप्त होवे। 14#35* *नवम चतुर्भूमिकं तद्नृहं तस्य भूमी पतेर्वल्लभी वल्लभा भूमिदेवाः | गुरौ धर्मगे बान्धवाः स्युबिनीताः सदाडड्लस्यता थर्मवैगुण्यकारा II" भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर चार मंजिला अर्थः नवम हो, वह राजा का प्रिय हो, और भूमिदेव (ब्राह्मण) उसका उसके बंधु-बांथव विनीत हों , और वह आलस्य सम्मान करें। से धर्म का पालन न करे। चमत्कारचिन्तामणि के अनुसार, गुरु की स्थिति व्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के जीवन पर माध्यम से इसे समझते हैंः శ]ా *सप्तम भाव "गुरुर्गर्वकृद्यस्य जामित्रभावे सपिण्डाथिकोडखंडकंदप एव পান স ঘুক होने से व्यक्ति तीक्ष्ण बुद्धिवाला, अर्थः सप्तम बहुत धनवान , स्त्रियों से स्वल्प प्रीति करनेवाला, अभिमान करनेवाला, अपनी जाति में श्रेष्ठ तथा कामदेव के तुल्य पर रूपवाला होता है। ম যুক*  *अष्टम भाव "चिरं नो वसेत्पैतृके चव गेहे चिरस्थायि नो तद्नृहं तस्य देहम्।  चिरं नो भवेत्तस्य नीरोगमङ्ग गुरुमृत्युगो यस्य वैकुण्ठगन्ता  भाव में गुरु होने से व्यक्ति बहुत काल तक अर्थः अष्टम पिता के घर में न बसे, उसका अंग रोगरहित न हो, और वह बहुत काल तक न जीवे। अंत समय में बैकुंठ को प्राप्त होवे। 14#35* *नवम चतुर्भूमिकं तद्नृहं तस्य भूमी पतेर्वल्लभी वल्लभा भूमिदेवाः | गुरौ धर्मगे बान्धवाः स्युबिनीताः सदाडड्लस्यता थर्मवैगुण्यकारा II" भाव में गुरु होने से व्यक्ति का घर चार मंजिला अर्थः नवम हो, वह राजा का प्रिय हो, और भूमिदेव (ब्राह्मण) उसका उसके बंधु-बांथव विनीत हों , और वह आलस्य सम्मान करें। से धर्म का पालन न करे। - ShareChat