Abhilas Chauhan
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+91 81038 40601 अपनी जन्म पत्रिका का संपूर्ण विशे
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - *ज्योतिष जानकारी सूत्रः* लग्नेशे स्वोच्चमित्रांशे स्वनवांशगतेडपि वा शुभग्रहयुते दृष्टे देहसौख्यं विनिर्दिशेत् II *3&:* की कुण्डली में लग्नेश यदि स्वोच्च राशि, मित्र जिस किसी राशि, स्वनवांश राशि में से किसी में भी हो और शुभग्रह से अथवा दृष्ट हो, तो इस योग में मनुष्य को सदा ಶ೯೯ देहसौख्य प्राप्त होता है। *विस्तारः* लग्नेश का स्वोच्च राशि में होनाः लग्नेश का स्वोच्च राशि में होना व्यक्ति को आत्मविश्वास और स्वास्थ्य देता है। में होनाः लग्नेश का मित्र राशि में लग्नेश का मित्र राशि होना व्यक्ति को सुख और समृद्धि देता है। लग्नेश का स्वनवांश राशि में होनाः लग्नेश का स्वनवांश राशि में होना व्यक्ति को आत्म ्ज्ञान और आध्यात्मिकता देता है। शुभग्रह से युक्त या दृष्ट होनाः शुभग्रह से युक्त या दृष्ट होने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और सुख मिलता है। *ज्योतिष जानकारी सूत्रः* लग्नेशे स्वोच्चमित्रांशे स्वनवांशगतेडपि वा शुभग्रहयुते दृष्टे देहसौख्यं विनिर्दिशेत् II *3&:* की कुण्डली में लग्नेश यदि स्वोच्च राशि, मित्र जिस किसी राशि, स्वनवांश राशि में से किसी में भी हो और शुभग्रह से अथवा दृष्ट हो, तो इस योग में मनुष्य को सदा ಶ೯೯ देहसौख्य प्राप्त होता है। *विस्तारः* लग्नेश का स्वोच्च राशि में होनाः लग्नेश का स्वोच्च राशि में होना व्यक्ति को आत्मविश्वास और स्वास्थ्य देता है। में होनाः लग्नेश का मित्र राशि में लग्नेश का मित्र राशि होना व्यक्ति को सुख और समृद्धि देता है। लग्नेश का स्वनवांश राशि में होनाः लग्नेश का स्वनवांश राशि में होना व्यक्ति को आत्म ्ज्ञान और आध्यात्मिकता देता है। शुभग्रह से युक्त या दृष्ट होनाः शुभग्रह से युक्त या दृष्ट होने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और सुख मिलता है। - ShareChat
#✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 - *दूसरा श्लोकः* लग्नेशे बलसंयुक्ते केन्द्रकोणगते शुभे ఇఓకలా: पापग्रहैरसन्दृष्टे देहसौख्यं || *अर्थः* जिस-किसी की कुण्डली में लग्नेश बलवान होकर केन्द्र (१-४-७-१०) भाव और कोण (९-५) भाव में स्थित हो तथा शुभयुक्त दृष्ट हो और पापग्रहों से स्वयं शुभ ग्रह हो अथवा देखा जाता न हो, तो पण्डितों द्वारा मनुष्य को शरीर सुख मिलेगा| *विस्तारः* लग्नेश का बलवान होनाः लग्नेश का बलवान होना व्यक्ति को शक्ति और आत्मविश्वास देता है। केन्द्र या कोण भाव में होनाः केन्द्र या कोण भाव में होने से व्यक्ति को जीवन में सफलता और सुख मिलता है। शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट होनाः शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट और सुख  मिलता है। होने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा  पापग्रहों से न देखा जानाः पापग्रहों से न देखा जाने से व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है। *दूसरा श्लोकः* लग्नेशे बलसंयुक्ते केन्द्रकोणगते शुभे ఇఓకలా: पापग्रहैरसन्दृष्टे देहसौख्यं || *अर्थः* जिस-किसी की कुण्डली में लग्नेश बलवान होकर केन्द्र (१-४-७-१०) भाव और कोण (९-५) भाव में स्थित हो तथा शुभयुक्त दृष्ट हो और पापग्रहों से स्वयं शुभ ग्रह हो अथवा देखा जाता न हो, तो पण्डितों द्वारा मनुष्य को शरीर सुख मिलेगा| *विस्तारः* लग्नेश का बलवान होनाः लग्नेश का बलवान होना व्यक्ति को शक्ति और आत्मविश्वास देता है। केन्द्र या कोण भाव में होनाः केन्द्र या कोण भाव में होने से व्यक्ति को जीवन में सफलता और सुख मिलता है। शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट होनाः शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट और सुख  मिलता है। होने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा  पापग्रहों से न देखा जानाः पापग्रहों से न देखा जाने से व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है। - ShareChat
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - ज्योतिष जानकारीः *श्लोकः* देवलोकांशगे सूर्ये लग्नेशे बलसंयुते भाग्येशे स्वोच्चराशिस्थे बहुसद्भाग्यकीर्तिमान् I। *3থ:* जिस-किसी की कुण्डली में लग्नेश बलवान हो और सूर्य दशवर्गों में श्रेष्ठ देवलोकांश संज्ञक हो तथा भाग्येश अपनी उच्चराशि में (कर्हीं भी) स्थित हो, तो इस योग में मनुष्य  बहुकीर्त्तिवान होता है।  सौभाग्यशाली और  *विस्तारः* *लग्नेश बलवान होना*: लग्नेश का बलवान होना व्यक्ति को आत्मविश्वास , शक्ति और स्वास्थ्य देता है। *सूर्य देवलोकांश में होना*: सूर्य का देवलोकांश में होना व्यक्ति को उच्च पद, सम्मान और कीर्ति देता है। *भाग्येश उच्चराशि में होना*ः भाग्येश का उच्चराशि में होना व्यक्ति को सौभाग्य , सफलता और समृद्धि देता है। *फलः इस योग में मनुष्यः सौभाग्यशाली होता है बहुकीर्त्तिवान होता है उच्च पद और सम्मान प्राप्त करता है सफलता और समृद्धि प्राप्त करता है ज्योतिष जानकारीः *श्लोकः* देवलोकांशगे सूर्ये लग्नेशे बलसंयुते भाग्येशे स्वोच्चराशिस्थे बहुसद्भाग्यकीर्तिमान् I। *3থ:* जिस-किसी की कुण्डली में लग्नेश बलवान हो और सूर्य दशवर्गों में श्रेष्ठ देवलोकांश संज्ञक हो तथा भाग्येश अपनी उच्चराशि में (कर्हीं भी) स्थित हो, तो इस योग में मनुष्य  बहुकीर्त्तिवान होता है।  सौभाग्यशाली और  *विस्तारः* *लग्नेश बलवान होना*: लग्नेश का बलवान होना व्यक्ति को आत्मविश्वास , शक्ति और स्वास्थ्य देता है। *सूर्य देवलोकांश में होना*: सूर्य का देवलोकांश में होना व्यक्ति को उच्च पद, सम्मान और कीर्ति देता है। *भाग्येश उच्चराशि में होना*ः भाग्येश का उच्चराशि में होना व्यक्ति को सौभाग्य , सफलता और समृद्धि देता है। *फलः इस योग में मनुष्यः सौभाग्यशाली होता है बहुकीर्त्तिवान होता है उच्च पद और सम्मान प्राप्त करता है सफलता और समृद्धि प्राप्त करता है - ShareChat
#✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
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#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - *दूसरा श्लोकः*  बलसंयुक्ते केन्द्रकोणगते शुभे लग्नेशे पापग्रहैरसन्दृष्टे देहसौख्यं वदेद्बुधः *3&:* जिस-किसी की कुण्डली ्में लग्नेश बलवान होकर केन्द्र (१-४-७-१०) भाव और कोण (९-५) भाव में स्थित हो तथा स्वयं शुभ ग्रह हो अथवा शुभयुक्त दृष्ट हो और पापग्रहों से देखा जाता न हो, तो पण्डितों द्वारा मनुष्य को शरीर सुख मिलेगा| *विस्तारः* लग्नेश का बलवान होनाः लग्नेश का बलवान होना व्यक्ति को शक्ति और आत्मविश्वास देता है। केन्द्र या कोण भाव में होनाः केन्द्र या कोण भाव में होने से व्यक्ति को जीवन में सफलता और सुख मिलता है। शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट होनाः शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट होने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और सुख मिलता है।  पापग्रहों से न देखा जानाः पापग्रहों से न देखा எ # व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है। *दूसरा श्लोकः*  बलसंयुक्ते केन्द्रकोणगते शुभे लग्नेशे पापग्रहैरसन्दृष्टे देहसौख्यं वदेद्बुधः *3&:* जिस-किसी की कुण्डली ्में लग्नेश बलवान होकर केन्द्र (१-४-७-१०) भाव और कोण (९-५) भाव में स्थित हो तथा स्वयं शुभ ग्रह हो अथवा शुभयुक्त दृष्ट हो और पापग्रहों से देखा जाता न हो, तो पण्डितों द्वारा मनुष्य को शरीर सुख मिलेगा| *विस्तारः* लग्नेश का बलवान होनाः लग्नेश का बलवान होना व्यक्ति को शक्ति और आत्मविश्वास देता है। केन्द्र या कोण भाव में होनाः केन्द्र या कोण भाव में होने से व्यक्ति को जीवन में सफलता और सुख मिलता है। शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट होनाः शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट होने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और सुख मिलता है।  पापग्रहों से न देखा जानाः पापग्रहों से न देखा எ # व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है। - ShareChat
केरल की 10 महीने की मासूम Aalin Sherin Abraham ने दुनिया को अलविदा कहते हुए मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया, लेकिन असहनीय दुख के बीच उनके माता-पिता ने लिवर, किडनी, हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान करने का फैसला लिया। इन अंगों का सफल प्रत्यारोपण कर पांच गंभीर रूप से बीमार बच्चों को नई जिंदगी मिली। #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और 230 किलोमीटर की दूरी कुछ ही घंटों में तय की गई। केरल सरकार ने राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी, जबकि मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan समेत कई प्रमुख हस्तियों ने इस फैसले को करुणा और साहस का अद्वितीय उदाहरण बताया। सत सत नमन भावपूर्ण श्रद्धांजलि
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - सबसे कम उम्र की अंगदाता को राजकीय सम्मान १० भहौने की आलिन शैरिन नै अंगदान कर 5 लोगों को दी नई जिंदगी सबसे कम उम्र की अंगदाता को राजकीय सम्मान १० भहौने की आलिन शैरिन नै अंगदान कर 5 लोगों को दी नई जिंदगी - ShareChat
#✡️सितारों की चाल🌠 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
✡️सितारों की चाल🌠 - १७ फरवरी २०२६ को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा सूर्य ग्रहण होगा। इसे रिंग ऑफ ತೆಳಾ` ফ্কা ট, वलयाकार भी कहा जाता है, क्योंकि इसर्में चंद्रमा  फायर सूरज को पूरी तरह नहीं ढँकता और किनारे पर रोशनी का एक दिखता है 2 3| छल्ला KGUT का समयः* ग्रहण शुरूः दोपहर ०३:२६ बजे ग्रहण का मध्यः शाम ०५:४२ बजे ग्रहण खत्मः रात ०७:५७ बजे *ग्रहण कहां दिखेगाः* यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका , दक्षिणी अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिरस्सों में दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण नहीं दिखेगा और इसका सूतक भी नहीं लगेगा ` २ 3 १७ फरवरी २०२६ को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा सूर्य ग्रहण होगा। इसे रिंग ऑफ ತೆಳಾ` ফ্কা ট, वलयाकार भी कहा जाता है, क्योंकि इसर्में चंद्रमा  फायर सूरज को पूरी तरह नहीं ढँकता और किनारे पर रोशनी का एक दिखता है 2 3| छल्ला KGUT का समयः* ग्रहण शुरूः दोपहर ०३:२६ बजे ग्रहण का मध्यः शाम ०५:४२ बजे ग्रहण खत्मः रात ०७:५७ बजे *ग्रहण कहां दिखेगाः* यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका , दक्षिणी अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिरस्सों में दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण नहीं दिखेगा और इसका सूतक भी नहीं लगेगा ` २ 3 - ShareChat
हथेली :- 84 की प्राप्ति होती है। व्यक्ति के हथेली में तिल हो तो उसे जीवन भर द्रव्यों जंघा :- यह तिल उस व्यक्ति के रसिक होने की निशानी है जो हर वक्त स्त्री संसर्ग पाने के लिए उतावला रहता है। हाथ के पीछे :- हाथ के पीछे का तिल उस व्यक्ति के कंजूस होने की कहावत को चरितार्थ करता है। निशानी होता है जो चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए वालो पैर :- सुख प्रदान करता है। व्यक्ति के पैर का तिल उसे हवाई जहाज की यात्रा का उपरोक्त तिलों के संकेत पुरुष के दाहिने अंग पर तथा स्त्री के बाएं अंग पर शुभा-शुभ फल प्रदान करते हैं इसके विपरीत होने पर अशुभ फल भी प्रदान करते हैं। कुछ विशेष अंगों पर दोनों तरफ के तिल शुभ लाभ भी प्रदान करते हैं। अतः पाठक गण उसी विचार से इनका आंकलन करें अन्यथा परिणाम उनकी सोच के विपरीत भी हो सकता है। #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️सितारों की चाल🌠
हथेली :- 84 की प्राप्ति होती है। व्यक्ति के हथेली में तिल हो तो उसे जीवन भर द्रव्यों जंघा :- यह तिल उस व्यक्ति के रसिक होने की निशानी है जो हर वक्त स्त्री संसर्ग पाने के लिए उतावला रहता है। हाथ के पीछे :- हाथ के पीछे का तिल उस व्यक्ति के कंजूस होने की कहावत को चरितार्थ करता है। निशानी होता है जो चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए वालो पैर :- सुख प्रदान करता है। व्यक्ति के पैर का तिल उसे हवाई जहाज की यात्रा का उपरोक्त तिलों के संकेत पुरुष के दाहिने अंग पर तथा स्त्री के बाएं अंग पर शुभा-शुभ फल प्रदान करते हैं इसके विपरीत होने पर अशुभ फल भी प्रदान करते हैं। कुछ विशेष अंगों पर दोनों तरफ के तिल शुभ लाभ भी प्रदान करते हैं। अतः पाठक गण उसी विचार से इनका आंकलन करें अन्यथा परिणाम उनकी सोच के विपरीत भी हो सकता है। #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
होंठ :- 82 व्यक्ति के होठों का तिल उसको अय्याश बनाता है और ऐसा व्यक्ति लोभी और लालची भी होता है। ठोड़ी :- व्यक्ति की ठोड़ी पर तिल होने से उस व्यक्ति को स्त्री सुख प्राप्त नहीं होता। वह जीवन भर स्त्री सुख से वंचित रहता है। गर्दन :- व्यक्ति के गर्दन का तिल उसको आलसी बना देता है। कंठ :- जिस व्यक्ति के कंठ पर तिल होता है। वह भगवान भक्त होता है। भुजा :- जिस व्यक्ति की दोनों भुजाओं पर तिल हो वह धनवान बन जाता है। उसकी बायीं भुजा का तिल पुत्र रत्न की प्राप्ति कराता है। नाक :- नाक का तिल व्यक्ति की पुष्टता का प्रतीक होता है। ऐसा व्यक्ति कलह करने वाला एवं एक जगह न टिकने वाला होता है। उसकी जिन्दगी खानाबदोशों जैसी होती है। हृदय :- व्यक्ति के हृदय का तिल उसके सौभाग्य की वृद्धि करता है। छाती :- व्यक्ति के दायीं ओर छाती पर तिल हो तो शुभ होता है #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌