सत्ता का काल on Instagram: "सूरत स्टेशन पर आज फिर आँखों में आंसू और हाथों में खालीपन है। जिस शहर को अपना समझा था, आज गैस की किल्लत और बेरोज़गारी ने उसे बेगाना बना दिया। वादे तो बहुत हुए थे, पर वक्त पर कोई साथ खड़ा नहीं हो पाया। "अब नहीं आऊंगा दोस्त... कभी नहीं।" यह केवल एक पंक्ति नहीं, लाखों टूटे हुए भरोसे की आवाज़ है। शहर की चमक के बीच, आज फिर अंधेरा छा गया। विकास की बातें तो बहुत हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है। जब बुनियादी ज़रूरतें पूरी न हों, तो सपने टूटना लाज़मी है। गैस की कमी, बेरोज़गारी और फिर घर वापसी। क्या यही है विकास का नया रूप? सपनों के शहर सूरत में, आज हज़ारों सपने बिखर गए। खाली हाथ और नम आँखों के साथ, मज़दूरों का घर लौटना उनकी मजबूरी बन गया है। जब शहर रोज़गार नहीं दे सकता, तो ज़िम्मेदारी कौन लेगा? "अब नहीं आऊंगा दोस्त..." इस वाक्य में छिपे दर्द को महसूस करें। Song credit @saurabhkikalam [Surat Station, Surat, Surat Diaries, Surat City, Gas Crisis, GasShortage, Unemployment, Jobs, Migrant Workers, Migrant Crisis, Broken Trust, India, Hindi Quotes, Hindi Posts, Satire, Social Issues, Government Failure,Political Satire, Surat News, Gujarat.] #gascrisis #GasShortage #Suratstation #migration #ManojDoriaa"
5,645 likes, 178 comments - manojdoriaa on April 20, 2026: "सूरत स्टेशन पर आज फिर आँखों में आंसू और हाथों में खालीपन है। जिस शहर को अपना समझा था, आज गैस की किल्लत और बेरोज़गारी ने उसे बेगाना बना दिया। वादे तो बहुत हुए थे, पर वक्त पर कोई साथ खड़ा नहीं हो पाया।
"अब नहीं आऊंगा दोस्त... कभी नहीं।" यह केवल एक पंक्ति नहीं, लाखों टूटे हुए भरोसे की आवाज़ है।
शहर की चमक के बीच, आज फिर अंधेरा छा गया। विकास की बातें तो बहुत हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है। जब बुनियादी ज़रूरतें पूरी न हों, तो सपने टूटना लाज़मी है।
गैस की कमी, बेरोज़गारी और फिर घर वापसी। क्या यही है विकास का नया रूप?
सपनों के शहर सूरत में, आज हज़ारों सपने बिखर गए। खाली हाथ और नम आँखों के साथ, मज़दूरों का घर लौटना उनकी मजबूरी बन गया है। जब शहर रोज़गार नहीं दे सकता, तो ज़िम्मे