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#🙏🏻गुरबानी #🙏गुरु महिमा😇 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #📗प्रेरक पुस्तकें📘
🙏🏻गुरबानी - सूक्ष्म वेद क्या है? सूक्ष्म वेद को कबीर साहेब ने कहा है। स्वसम वेद वर्तमान में इसे " कबीरसागर" के नाम से जाना जाता है। कबीर साहेब ने इसे " पाँचवाँ वेद ' संत रामपाल जी महाराज कबीर साहेब मुहम्मद बोध" में নথা "पाँचवाँ कलमा ' कहा है। कबीर सागर ( सूक्ष्म वेद) के सूक्ष्म वेद ११ भाग हैं॰ जिनमें ४० से अपिक विषय शनिल हैं। ~ற கfH) कबीरसागर ಫ 11 MT & নিনস 40 ম अधिक विषय शामिल हैं। (सूक्ष्म वेद ११ भाग विषय 40+ कबीर साहेब द्वारा धर्मदास जी को ज्ञान देते हुए तथा धर्मदास जी द्वारा लिपिबद्घ करते हुए सभी धर्म ग्रंथ सूक्ष्म वेद का ज्ञान सूक्ष्म वेद की विशेषताएं क्या सूक्ष्म वेद से निकले हैं? किसने बोला और लिखा? यह परम सत्य का ज्ञान है। कबीर साहेब कहते हैं कि सूक्ष्म वेद का ज्ञान स्वयं पूर्ण सूष्टि, आत्मा , यह संपूर्ण ' परमात्मा कबीर देव ने कबीर रुप चार वेद सूक्ष्म वेद की परमात्मा तथा मोक्ष का विज्ञान में प्रकट होकर अपनी प्रिय आत्मा छाल (पपड़ी ) है। धर्मदास चारों वेद तथा चारों কী বনাযা | यह सभी धर्मों का मूल आधार है को धर्मदास जी ने आसमानी किताबें इस ज्ञान लिपिबद्घ किया। মুঃসবব का टीका हैं। यह मानव जीवन का सच्चा मार्गदर्शक %eds चार वेद सूक्ष्मवेद নীযা इंजील यजुर्वेद कुरआन तथा चारों जबूर করা आस्मानी T t टीका हैं। सामवेद किताबें अथर्ववेद VOICE OF SAINTS सूक्ष्म वेद क्या है? सूक्ष्म वेद को कबीर साहेब ने कहा है। स्वसम वेद वर्तमान में इसे " कबीरसागर" के नाम से जाना जाता है। कबीर साहेब ने इसे " पाँचवाँ वेद ' संत रामपाल जी महाराज कबीर साहेब मुहम्मद बोध" में নথা "पाँचवाँ कलमा ' कहा है। कबीर सागर ( सूक्ष्म वेद) के सूक्ष्म वेद ११ भाग हैं॰ जिनमें ४० से अपिक विषय शनिल हैं। ~ற கfH) कबीरसागर ಫ 11 MT & নিনস 40 ম अधिक विषय शामिल हैं। (सूक्ष्म वेद ११ भाग विषय 40+ कबीर साहेब द्वारा धर्मदास जी को ज्ञान देते हुए तथा धर्मदास जी द्वारा लिपिबद्घ करते हुए सभी धर्म ग्रंथ सूक्ष्म वेद का ज्ञान सूक्ष्म वेद की विशेषताएं क्या सूक्ष्म वेद से निकले हैं? किसने बोला और लिखा? यह परम सत्य का ज्ञान है। कबीर साहेब कहते हैं कि सूक्ष्म वेद का ज्ञान स्वयं पूर्ण सूष्टि, आत्मा , यह संपूर्ण ' परमात्मा कबीर देव ने कबीर रुप चार वेद सूक्ष्म वेद की परमात्मा तथा मोक्ष का विज्ञान में प्रकट होकर अपनी प्रिय आत्मा छाल (पपड़ी ) है। धर्मदास चारों वेद तथा चारों কী বনাযা | यह सभी धर्मों का मूल आधार है को धर्मदास जी ने आसमानी किताबें इस ज्ञान लिपिबद्घ किया। মুঃসবব का टीका हैं। यह मानव जीवन का सच्चा मार्गदर्शक %eds चार वेद सूक्ष्मवेद নীযা इंजील यजुर्वेद कुरआन तथा चारों जबूर করা आस्मानी T t टीका हैं। सामवेद किताबें अथर्ववेद VOICE OF SAINTS - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏माँ लक्ष्मी महामंत्र🌺
🙏गुरु महिमा😇 - १. ज्ञान यज्ञ 2. &|45 सभी यज्ञों में ज्ञान तत्वदर्शी संत से नामदीक्षा यज्ञ को श्रेष्ठ माना लेकर मन और पवन को हुए सुरति निरति गया है। तत्वदर्शी स्थिर करते संत द्वारा दिए गए ম পংসোনসা ক নাস কা सत्य ज्ञान को सुनना, जाप/ सुमिरन करना ध्यान समझना और दूसरों यज्ञ कहलाता है। यह भगत तक पहुँंचाना ही के मन को शुद्घ करता है ज्ञान यज्ञ है। यह तथा आत्मा का परमात्मा अज्ञान , अंधविश्र्वास से जोड़ने का माध्यम और श्रम को दूर करके बनता है। जीव को वास्तविक भक्ति मार्ग की पहचान कराता है। ४. हवन यज्ञ 8 451 3. সনিলি সান: সাঁং सायंकाल गाय के धर्म का वास्तविक संबंध शुद्घ धी से दीपक दया और मानवता से है। जलाकर ईश्वर की प्रत्येक जरुरतमंद जीव स्तुति करना हवन के दुःख को अपना यज्ञ कहलाता है। दुःख समझकर उसकी इससे वातावरण सहायता करना, भूखे शुद्ध होता है, কী মাতন ন্যা কী सकारात्मक ऊर्जा और दुखी को voice of saints d5 बदती है तथा साधक सहारा देना ही धर्म यज्ञ के भीतर पवित्रता और है। यही सच्चे धर्म की श्रद्धा का भाव जागृत पहचान है। होता है। ५. प्रणाम यज्ञ सत्यभक्ति मार्ग में प्रणाम यज्ञ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। विनम्र भाव से ईश्वर, गुरु और संतों को दण्डदत ' प्रणाम करना अहंकार का नाश करता है। यह भगत में दासभाव उत्पन्न करता है तथा उसे भक्ति मार्ग से विचलित होने से बचाता है। पाँच यज्ञ VOICE OF SAINTS १. ज्ञान यज्ञ 2. &|45 सभी यज्ञों में ज्ञान तत्वदर्शी संत से नामदीक्षा यज्ञ को श्रेष्ठ माना लेकर मन और पवन को हुए सुरति निरति गया है। तत्वदर्शी स्थिर करते संत द्वारा दिए गए ম পংসোনসা ক নাস কা सत्य ज्ञान को सुनना, जाप/ सुमिरन करना ध्यान समझना और दूसरों यज्ञ कहलाता है। यह भगत तक पहुँंचाना ही के मन को शुद्घ करता है ज्ञान यज्ञ है। यह तथा आत्मा का परमात्मा अज्ञान , अंधविश्र्वास से जोड़ने का माध्यम और श्रम को दूर करके बनता है। जीव को वास्तविक भक्ति मार्ग की पहचान कराता है। ४. हवन यज्ञ 8 451 3. সনিলি সান: সাঁং सायंकाल गाय के धर्म का वास्तविक संबंध शुद्घ धी से दीपक दया और मानवता से है। जलाकर ईश्वर की प्रत्येक जरुरतमंद जीव स्तुति करना हवन के दुःख को अपना यज्ञ कहलाता है। दुःख समझकर उसकी इससे वातावरण सहायता करना, भूखे शुद्ध होता है, কী মাতন ন্যা কী सकारात्मक ऊर्जा और दुखी को voice of saints d5 बदती है तथा साधक सहारा देना ही धर्म यज्ञ के भीतर पवित्रता और है। यही सच्चे धर्म की श्रद्धा का भाव जागृत पहचान है। होता है। ५. प्रणाम यज्ञ सत्यभक्ति मार्ग में प्रणाम यज्ञ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। विनम्र भाव से ईश्वर, गुरु और संतों को दण्डदत ' प्रणाम करना अहंकार का नाश करता है। यह भगत में दासभाव उत्पन्न करता है तथा उसे भक्ति मार्ग से विचलित होने से बचाता है। पाँच यज्ञ VOICE OF SAINTS - ShareChat
#🙏शाम की आरती🪔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏🏻गुरबानी
🙏शाम की आरती🪔 - লু ল হাাাল எசஞஎ शंभाले जगन्नाथ sfiaflow संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान का प्रभाव उनके ज्ञान और सत्संग से लाखों लोगों का जीवन बदल रहा है। वे दे रहे हैं सच्चा ज्ञान और सच्चा मार्ग। सच्ची भक्ति, 5I ম্বী গকি ম ম্ী উমাসী मनुष्य जीवन सफल होता है। जीवन बदल दे उनके ज्ञान से समाज में ক্টত মুক रक्तदान और जाति पाति से HcqI 5எ, नशा मुक्त fddis सच्चा मार्ग अभियान मानव सेवा ऊपर उठकर  स्वास्थ्यपूर्ण दहेज के अभिशाप से मुक्ति, देहदान और जीवन की हर समस्या का नशा छोडकर सवको एक समान मानकर रफदान सरल और सच्चे विवाह| और खुशहाल जीवन। जरूरतमंदों की सहायता| भाईचारे का संदेश। समाधान उनके ज्ञान में। सतभक्ति अपनाओ , मानव जीवन सफल बनाओ आइए, संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान को अपनाएं और एक नैतिक, शांतिपूर्ण और खुशहाल समाज की स्थापना में योगदान दें। संत रामपाल जी महाराज अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें www jagatgururampalji org  +91 8222 880 541 जगतगुरु तत्वदर्शी संत লু ল হাাাল எசஞஎ शंभाले जगन्नाथ sfiaflow संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान का प्रभाव उनके ज्ञान और सत्संग से लाखों लोगों का जीवन बदल रहा है। वे दे रहे हैं सच्चा ज्ञान और सच्चा मार्ग। सच्ची भक्ति, 5I ম্বী গকি ম ম্ী উমাসী मनुष्य जीवन सफल होता है। जीवन बदल दे उनके ज्ञान से समाज में ক্টত মুক रक्तदान और जाति पाति से HcqI 5எ, नशा मुक्त fddis सच्चा मार्ग अभियान मानव सेवा ऊपर उठकर  स्वास्थ्यपूर्ण दहेज के अभिशाप से मुक्ति, देहदान और जीवन की हर समस्या का नशा छोडकर सवको एक समान मानकर रफदान सरल और सच्चे विवाह| और खुशहाल जीवन। जरूरतमंदों की सहायता| भाईचारे का संदेश। समाधान उनके ज्ञान में। सतभक्ति अपनाओ , मानव जीवन सफल बनाओ आइए, संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान को अपनाएं और एक नैतिक, शांतिपूर्ण और खुशहाल समाज की स्थापना में योगदान दें। संत रामपाल जी महाराज अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें www jagatgururampalji org  +91 8222 880 541 जगतगुरु तत्वदर्शी संत - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏माँ लक्ष्मी महामंत्र🌺 #🙏शाम की आरती🪔
🙏गीता ज्ञान🛕 - जो अक्सर शुरूआत में अकेला दिखता है, उसके साथ परमात्मा होते हैं। CNtm मीरा बाई नामदेव नरसी मेहता মনী धना भगत प्रहलाद मीरा बाई, भक्त प्रहलाद , धन्ना भगत , नामदेव , नरसी मेहता और संतों ने दुनिया की नहीं , भगवान की सुनी.. इसलिए आज भी उनका नाम श्रद्धा से लिया जाता है। सच्ची भक्ति करने वाला कभी अकेला नहीं होता, क्योंकि उसके साथ सतपुरुष की कृपा हर पल रहती है। जो लोग सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलते हैंँ, उन्हें दुनिया भले ही समझ न पाए, लेकिन परमात्मा उनका हाथ कभी नहीं छोड़ते। Il सत साहेब जी।l सतभक्ति अपनाडए. जीवन सफल बनाडए। जो अक्सर शुरूआत में अकेला दिखता है, उसके साथ परमात्मा होते हैं। CNtm मीरा बाई नामदेव नरसी मेहता মনী धना भगत प्रहलाद मीरा बाई, भक्त प्रहलाद , धन्ना भगत , नामदेव , नरसी मेहता और संतों ने दुनिया की नहीं , भगवान की सुनी.. इसलिए आज भी उनका नाम श्रद्धा से लिया जाता है। सच्ची भक्ति करने वाला कभी अकेला नहीं होता, क्योंकि उसके साथ सतपुरुष की कृपा हर पल रहती है। जो लोग सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलते हैंँ, उन्हें दुनिया भले ही समझ न पाए, लेकिन परमात्मा उनका हाथ कभी नहीं छोड़ते। Il सत साहेब जी।l सतभक्ति अपनाडए. जीवन सफल बनाडए। - ShareChat
https://youtu.be/2lmaCLSDtiE?si=n5gPdRhSpq6uiu9M #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻गुरबानी #🙏गुरु महिमा😇 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏शाम की आरती🪔
🙏गीता ज्ञान🛕 - एक से अनेक हुए & मुस्लिम , सिख, ईसाई f% कैसे होंगे एक ? जानने के लिए देखिए মী कलयुग सतयुग विश्व में शांति तथा आपसी भाईचारा की शुरुआत कैसे स्थापित होगा? भाग 6 0 న | MMpl ln [ Factful Debates युट्यूब चैनल पर वीडियो देखें Factful Debates YOUTUBE CHANNEL @FactfulDebates '1. एक से अनेक हुए & मुस्लिम , सिख, ईसाई f% कैसे होंगे एक ? जानने के लिए देखिए মী कलयुग सतयुग विश्व में शांति तथा आपसी भाईचारा की शुरुआत कैसे स्थापित होगा? भाग 6 0 న | MMpl ln [ Factful Debates युट्यूब चैनल पर वीडियो देखें Factful Debates YOUTUBE CHANNEL @FactfulDebates '1. - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🙏शाम की आरती🪔 #🙏🏻गुरबानी #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏गीता ज्ञान🛕
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - सृष्टि रचना जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज श्रीमदभागवत गीते अध्याय १५, श्लोक कबीर साहेब की वाणी ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्र्वत्थं अक्षर पुरूष एक पेड़ है, प्राहुरव्ययम् निरंजन वाकी डार। छन्दांसि यस्य पर्णानि तीनो देवा शाखा है, यस्तं वेद स वेदवित् Il पात रूप संसार।। भावार्थः इस संसार रूपी अश्वत्थ (पीपल ) वृक्ष की जड़ ऊपर ( परमात्मा में) है और सूक्ष्म जड (ऊपर ) शाखाऐं नीचे फैली हुई हैं। इसके पत्ते वेद कबीर साहेब वेद हैं। जो इस वृक्ष के स्वरूप को (परम अक्षर पुरूव ) जान लेता है, वही वास्ततिक ज्ञान (वेदों का सार ) जानने वाला तत्वदर्शी संत होता हैं। I श्रीमद्भगवद अक्षर पुरूष गीता यथारूप श्रीमद्नगवद गीता সমমোদনন गीता মদহোনন गीता - शाखा SIRET2 SIRCT 3 ब्रह्मा जी विष्णु ' जी হািন তী (सूष्टि के कर्ता ) (संहारकती ) (पालनकर्ता ) वाणी और गीता का 3iaie कबीर साहेब की वाणी और श्रीमदभगवद गीता का यह श्लोक दोनों एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं कि यह संसार वृक्ष है, एक उल्टा लटका हुआ जिसकी जड़ परम अक्षर पुरुष कबीर साहेब हैं, तना अक्षर पुरुष, (44) पात तीन शाखाएं त्रिदेव हैं और रुप संसार इसके पत्ते यह सम्पूर्ण संसार हैं। जो इस रहस्य को जानता है, (समस्त जीव जंतु , प्रकृति वही सच्चा ज्ञानी. तत्वदर्शी संत मानव जीवन भौतिक जगत) और मोक्ष का अधिकारी होता है। voice of saints सृष्टि रचना जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज श्रीमदभागवत गीते अध्याय १५, श्लोक कबीर साहेब की वाणी ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्र्वत्थं अक्षर पुरूष एक पेड़ है, प्राहुरव्ययम् निरंजन वाकी डार। छन्दांसि यस्य पर्णानि तीनो देवा शाखा है, यस्तं वेद स वेदवित् Il पात रूप संसार।। भावार्थः इस संसार रूपी अश्वत्थ (पीपल ) वृक्ष की जड़ ऊपर ( परमात्मा में) है और सूक्ष्म जड (ऊपर ) शाखाऐं नीचे फैली हुई हैं। इसके पत्ते वेद कबीर साहेब वेद हैं। जो इस वृक्ष के स्वरूप को (परम अक्षर पुरूव ) जान लेता है, वही वास्ततिक ज्ञान (वेदों का सार ) जानने वाला तत्वदर्शी संत होता हैं। I श्रीमद्भगवद अक्षर पुरूष गीता यथारूप श्रीमद्नगवद गीता সমমোদনন गीता মদহোনন गीता - शाखा SIRET2 SIRCT 3 ब्रह्मा जी विष्णु ' जी হািন তী (सूष्टि के कर्ता ) (संहारकती ) (पालनकर्ता ) वाणी और गीता का 3iaie कबीर साहेब की वाणी और श्रीमदभगवद गीता का यह श्लोक दोनों एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं कि यह संसार वृक्ष है, एक उल्टा लटका हुआ जिसकी जड़ परम अक्षर पुरुष कबीर साहेब हैं, तना अक्षर पुरुष, (44) पात तीन शाखाएं त्रिदेव हैं और रुप संसार इसके पत्ते यह सम्पूर्ण संसार हैं। जो इस रहस्य को जानता है, (समस्त जीव जंतु , प्रकृति वही सच्चा ज्ञानी. तत्वदर्शी संत मानव जीवन भौतिक जगत) और मोक्ष का अधिकारी होता है। voice of saints - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏शाम की आरती🪔 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - १. ज्ञान यज्ञ 2. &|45 सभी यज्ञों में ज्ञान तत्वदर्शी संत से नामदीक्षा यज्ञ को श्रेष्ठ माना लेकर मन और पवन को हुए सुरति निरति गया है। तत्वदर्शी स्थिर करते संत द्वारा दिए गए ম পংসোনসা ক নাস কা सत्य ज्ञान को सुनना, जाप/ सुमिरन करना ध्यान समझना और दूसरों यज्ञ कहलाता है। यह भगत तक पहुँंचाना ही के मन को शुद्घ करता है ज्ञान यज्ञ है। यह तथा आत्मा का परमात्मा अज्ञान , अंधविश्र्वास से जोड़ने का माध्यम और श्रम को दूर करके बनता है। जीव को वास्तविक भक्ति मार्ग की पहचान कराता है। ४. हवन यज्ञ 8 451 3. সনিলি সান: সাঁং सायंकाल गाय के धर्म का वास्तविक संबंध शुद्घ धी से दीपक दया और मानवता से है। जलाकर ईश्वर की प्रत्येक जरुरतमंद जीव स्तुति करना हवन के दुःख को अपना यज्ञ कहलाता है। दुःख समझकर उसकी इससे वातावरण सहायता करना, भूखे शुद्ध होता है, কী মাতন ন্যা কী सकारात्मक ऊर्जा और दुखी को voice of saints d5 बदती है तथा साधक सहारा देना ही धर्म यज्ञ के भीतर पवित्रता और है। यही सच्चे धर्म की श्रद्धा का भाव जागृत पहचान है। होता है। ५. प्रणाम यज्ञ सत्यभक्ति मार्ग में प्रणाम यज्ञ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। विनम्र भाव से ईश्वर, गुरु और संतों को दण्डदत ' प्रणाम करना अहंकार का नाश करता है। यह भगत में दासभाव उत्पन्न करता है तथा उसे भक्ति मार्ग से विचलित होने से बचाता है। पाँच यज्ञ VOICE OF SAINTS १. ज्ञान यज्ञ 2. &|45 सभी यज्ञों में ज्ञान तत्वदर्शी संत से नामदीक्षा यज्ञ को श्रेष्ठ माना लेकर मन और पवन को हुए सुरति निरति गया है। तत्वदर्शी स्थिर करते संत द्वारा दिए गए ম পংসোনসা ক নাস কা सत्य ज्ञान को सुनना, जाप/ सुमिरन करना ध्यान समझना और दूसरों यज्ञ कहलाता है। यह भगत तक पहुँंचाना ही के मन को शुद्घ करता है ज्ञान यज्ञ है। यह तथा आत्मा का परमात्मा अज्ञान , अंधविश्र्वास से जोड़ने का माध्यम और श्रम को दूर करके बनता है। जीव को वास्तविक भक्ति मार्ग की पहचान कराता है। ४. हवन यज्ञ 8 451 3. সনিলি সান: সাঁং सायंकाल गाय के धर्म का वास्तविक संबंध शुद्घ धी से दीपक दया और मानवता से है। जलाकर ईश्वर की प्रत्येक जरुरतमंद जीव स्तुति करना हवन के दुःख को अपना यज्ञ कहलाता है। दुःख समझकर उसकी इससे वातावरण सहायता करना, भूखे शुद्ध होता है, কী মাতন ন্যা কী सकारात्मक ऊर्जा और दुखी को voice of saints d5 बदती है तथा साधक सहारा देना ही धर्म यज्ञ के भीतर पवित्रता और है। यही सच्चे धर्म की श्रद्धा का भाव जागृत पहचान है। होता है। ५. प्रणाम यज्ञ सत्यभक्ति मार्ग में प्रणाम यज्ञ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। विनम्र भाव से ईश्वर, गुरु और संतों को दण्डदत ' प्रणाम करना अहंकार का नाश करता है। यह भगत में दासभाव उत्पन्न करता है तथा उसे भक्ति मार्ग से विचलित होने से बचाता है। पाँच यज्ञ VOICE OF SAINTS - ShareChat
#🙏🏻गुरबानी #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏शाम की आरती🪔 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻गुरबानी - सृष्टि रचना जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज श्रीमदभागवत गीते अध्याय १५, श्लोक कबीर साहेब की वाणी ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्र्वत्थं अक्षर पुरूष एक पेड़ है, प्राहुरव्ययम् निरंजन वाकी डार। छन्दांसि यस्य पर्णानि तीनो देवा शाखा है, यस्तं वेद स वेदवित् ।l पात रूप संसार। | भावार्थः इस संसार रूपी अश्वत्थ ( पीपल ) वृक्ष की जड़ ऊपर ( परमात्मा में) है और যুঃস Gక (Su) फैली हुई हैं। इसके पत्ते  शाखाऐं नीचे कबीर साहेब वेद वेद हैं। जो इस वृक्ष के स्वरूप को (परम अक्षर पुरूय ) जान लेता है॰ वही वास्ततिक ज्ञान (वेदों का सार ) जानने वाला तत्वदर्शी संत होता हैं। I श्रीमद्भगवद अक्षर पुरूष শীন[ यथारूप श्रीमद्नपवद गीता शीमदपंपवद  गीता মসযোবন (गीता  शाखा शाखा 2 शाखा 3 ब्रह्मा जी विष्णु ` जी হািন তী (सूष्टि के कर्ता ) (पालनकर्ता ) (संहारकती ) वाणी और गीता का अंतर्संम्बंध कबीर साहेब की वाणी और श्रीमदभगवद गीता का यह श्लोक दोनों एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं कि यह संसार एक उल्टा लटका हुआ वृक्ष है, जिसकी जड़ परम अक्षर पुरुष कबीर साहेब हैं, तना अक्षर पुरुष, (44) ٥ तीन शाखाऐं त्रिदेव हैं और रुप संसार इसके पत्ते यह सम्पूर्ण संसार हैं। जो इस रहस्य को जानता है, (समस्त जीव जंतु , प्रकृति , वही सच्चा ज्ञानी. तत्वदर्शी संत मानव जीवन, भौतिक जगत ) और मोक्ष का अधिकारी होता है। voice of saints सृष्टि रचना जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज श्रीमदभागवत गीते अध्याय १५, श्लोक कबीर साहेब की वाणी ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्र्वत्थं अक्षर पुरूष एक पेड़ है, प्राहुरव्ययम् निरंजन वाकी डार। छन्दांसि यस्य पर्णानि तीनो देवा शाखा है, यस्तं वेद स वेदवित् ।l पात रूप संसार। | भावार्थः इस संसार रूपी अश्वत्थ ( पीपल ) वृक्ष की जड़ ऊपर ( परमात्मा में) है और যুঃস Gక (Su) फैली हुई हैं। इसके पत्ते  शाखाऐं नीचे कबीर साहेब वेद वेद हैं। जो इस वृक्ष के स्वरूप को (परम अक्षर पुरूय ) जान लेता है॰ वही वास्ततिक ज्ञान (वेदों का सार ) जानने वाला तत्वदर्शी संत होता हैं। I श्रीमद्भगवद अक्षर पुरूष শীন[ यथारूप श्रीमद्नपवद गीता शीमदपंपवद  गीता মসযোবন (गीता  शाखा शाखा 2 शाखा 3 ब्रह्मा जी विष्णु ` जी হািন তী (सूष्टि के कर्ता ) (पालनकर्ता ) (संहारकती ) वाणी और गीता का अंतर्संम्बंध कबीर साहेब की वाणी और श्रीमदभगवद गीता का यह श्लोक दोनों एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं कि यह संसार एक उल्टा लटका हुआ वृक्ष है, जिसकी जड़ परम अक्षर पुरुष कबीर साहेब हैं, तना अक्षर पुरुष, (44) ٥ तीन शाखाऐं त्रिदेव हैं और रुप संसार इसके पत्ते यह सम्पूर्ण संसार हैं। जो इस रहस्य को जानता है, (समस्त जीव जंतु , प्रकृति , वही सच्चा ज्ञानी. तत्वदर्शी संत मानव जीवन, भौतिक जगत ) और मोक्ष का अधिकारी होता है। voice of saints - ShareChat
गरुड़ जी को हुआ असली तत्वज्ञान गरुड़ जी को जब सच्चा तत्वज्ञान हुआ, तो उन्होंने समझा कि जन्म-मरण का चक्र एक बड़ा बंधन है, जिसका समाधान केवल पूर्ण परमात्मा ही दे सकता है। वे गरुड़ जी इस सत्य को लेकर ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और उन्हें अज्ञान से जगाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव भी जन्म-मरण के अधीन हैं। एक ही अविनाशी परमात्मा है, जो सबका सृजनकर्ता है और वही सच्चा मोक्ष देने वाला है। गरुड़ जी ने समझाया कि वही परमात्मा समय-समय पर पृथ्वी पर आकर सच्चा ज्ञान देता है और जीवों को सही भक्ति मार्ग दिखाता है। उन्होंने अहंकार छोड़कर उसी पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने का संदेश दिया। बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻गुरबानी
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - गरूड जी को हुआ असली तत्वज्ञान गरुड़ जी को जब सच्चा तत्वज्ञान हुआ , तो उन्होंने समझा कि जन्म - मरण का चक्र एक बड़ा बंधन है, जिसका समाधान केवल पूर्ण परमात्मा ही दे सकता वे गरुड़ जी इस सत्य को लेकर ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और उन्हें अज्ञान से विष्णु ' जगाने का प्रयास किया।उन्होंने बताया कि ब्रह्मा, और शिव भी जन्म- मरण के अधीन हैं। एक ही अविनाशी परमात्मा है, जो सबका सृजनकर्ता है और वही सच्चा मोक्ष देने वाला है। गरुड़ जी ने समझाया कि वही परमात्मा समय - समय पर पृथ्वी पर आकर सच्चा ज्ञान देता है और जीवों को सही भक्ति मार्ग दिखाता है। उन्होंने अहंकार छोड़कर उसी पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने का संदेश दिया। बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज SANT RAMPAL SPIRITUAL LEADER م गरूड जी को हुआ असली तत्वज्ञान गरुड़ जी को जब सच्चा तत्वज्ञान हुआ , तो उन्होंने समझा कि जन्म - मरण का चक्र एक बड़ा बंधन है, जिसका समाधान केवल पूर्ण परमात्मा ही दे सकता वे गरुड़ जी इस सत्य को लेकर ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और उन्हें अज्ञान से विष्णु ' जगाने का प्रयास किया।उन्होंने बताया कि ब्रह्मा, और शिव भी जन्म- मरण के अधीन हैं। एक ही अविनाशी परमात्मा है, जो सबका सृजनकर्ता है और वही सच्चा मोक्ष देने वाला है। गरुड़ जी ने समझाया कि वही परमात्मा समय - समय पर पृथ्वी पर आकर सच्चा ज्ञान देता है और जीवों को सही भक्ति मार्ग दिखाता है। उन्होंने अहंकार छोड़कर उसी पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने का संदेश दिया। बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज SANT RAMPAL SPIRITUAL LEADER م - ShareChat
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