Ravinder Bishnoi
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#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏 जय हनुमान #राम
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः रेख कुलिस ध्वज अंकुस सोहे। नूपुर धुनि सुनि मुनि मन मोहे।। कटि किंकिनी उदर त्रय रेखा | नाभि गभीर जान जेहि देखा। | १९८/२, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(श्रीराम जी के चरण तलों में) वज्र ध्वजा चिह्न शोभित हैं। नूपुर (पेंजनी) और अंकुश के ध्वनि सुनकर का भी मन मोहित हा जाता मुनियों है।कमर में करधनी और पेट पर तीन रेखाएं यानि त्रिवली हैं।नाभि की गंभीरता को तो वहीं जानते हैं जिन्होंने उसे देखा है। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः रेख कुलिस ध्वज अंकुस सोहे। नूपुर धुनि सुनि मुनि मन मोहे।। कटि किंकिनी उदर त्रय रेखा | नाभि गभीर जान जेहि देखा। | १९८/२, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(श्रीराम जी के चरण तलों में) वज्र ध्वजा चिह्न शोभित हैं। नूपुर (पेंजनी) और अंकुश के ध्वनि सुनकर का भी मन मोहित हा जाता मुनियों है।कमर में करधनी और पेट पर तीन रेखाएं यानि त्रिवली हैं।नाभि की गंभीरता को तो वहीं जानते हैं जिन्होंने उसे देखा है। - ShareChat
#🙏 जय हनुमान #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #राम #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏हनुमान चालीसा🏵
🙏 जय हनुमान - ऊँ श्री হামনুনায নম: हनुमते काम कोटि छबि स्याम सरीरा। नील कंज बारिद गंभीरा। | नअरुन चरन पंकज नख जोती। कमल दलन्हि बैठे जनु मोती। १९८/१ , बालकाण्डश्रीरामचरितमानस उनके (श्रीराम जी के) नीलकमल और भावार्थ गंभीर (जल से भरे मेघ के) समान श्याम शरीर में करोड़ों कामदेवों की शोभा है।लाल -लाल चरण कमलों के नखों की (शुभ्र) ज्योति ऐसे मालूम होती है , जैसे लाल कमल के पत्तों पर मोती स्थिर हो गये हों। ऊँ श्री হামনুনায নম: हनुमते काम कोटि छबि स्याम सरीरा। नील कंज बारिद गंभीरा। | नअरुन चरन पंकज नख जोती। कमल दलन्हि बैठे जनु मोती। १९८/१ , बालकाण्डश्रीरामचरितमानस उनके (श्रीराम जी के) नीलकमल और भावार्थ गंभीर (जल से भरे मेघ के) समान श्याम शरीर में करोड़ों कामदेवों की शोभा है।लाल -लाल चरण कमलों के नखों की (शुभ्र) ज्योति ऐसे मालूम होती है , जैसे लाल कमल के पत्तों पर मोती स्थिर हो गये हों। - ShareChat
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #राम #🙏 जय हनुमान
🙏हनुमान चालीसा🏵 - 53#7</#&7/4 =#: ತ 9 ब्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुन बिगत बिनोद। अज प्रेम भगति बस कौशल्या कें गोद। । १९८ , बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ - ब्रह्म ;जो कि सर्वव्यापी, निरंजन ( माया से रहित) , निर्गुण, विनोद रहित और अजन्मे हैं, वही ब्रह्म प्रेम और भक्ति के वश में होकर कौश- ल्या जी की गोद में खेल रहे हैं। 53#7</#&7/4 =#: ತ 9 ब्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुन बिगत बिनोद। अज प्रेम भगति बस कौशल्या कें गोद। । १९८ , बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ - ब्रह्म ;जो कि सर्वव्यापी, निरंजन ( माया से रहित) , निर्गुण, विनोद रहित और अजन्मे हैं, वही ब्रह्म प्रेम और भक्ति के वश में होकर कौश- ल्या जी की गोद में खेल रहे हैं। - ShareChat
#राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏हनुमान चालीसा🏵
राम - ತೆ 9 हनुमते रामदूताय नमः हृदयँ अनुग्रह इंदु प्रकासा | सूचत किरन मनोहर हासा। | कबहुँ अछंग कबहुँ बर पालना। मातु दुलार कहि प्रिय ललना। | १९७/४, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ - उनके (श्रीराम जी) हृदय में कृपा रूपी वाली हँसी चंद्रमा प्रकाशित है।उनकी मन को हरने उस कृपा रूपी चंद्रमा को की किरणों को सूचित करती है।कभी गोद में लेकर कभी उत्तम पालने में कहकर दुलार करती है। लेटाकर 'प्यारे लाल ತೆ 9 हनुमते रामदूताय नमः हृदयँ अनुग्रह इंदु प्रकासा | सूचत किरन मनोहर हासा। | कबहुँ अछंग कबहुँ बर पालना। मातु दुलार कहि प्रिय ललना। | १९७/४, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ - उनके (श्रीराम जी) हृदय में कृपा रूपी वाली हँसी चंद्रमा प्रकाशित है।उनकी मन को हरने उस कृपा रूपी चंद्रमा को की किरणों को सूचित करती है।कभी गोद में लेकर कभी उत्तम पालने में कहकर दुलार करती है। लेटाकर 'प्यारे लाल - ShareChat
#🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #राम
🙏 जय हनुमान - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी। | चारिउ सील रूप गुन धामा| तदपि अधिक सुखसागर रामा। | १९७/३, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस श्याम और गौर शरीर वाली दोनों भावार्थ सुंदर जोड़ियों की शोभा देखकर माताएं तृण तोड़तीं हैं (जिसमें दीठ न लग जाए)| यों तो चारों ही पुत्र शील रूप और गुण के धाम हैं ,तो भी सुख के धाम श्री रामचन्द्र जी सबसे अधिक हैं। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी। | चारिउ सील रूप गुन धामा| तदपि अधिक सुखसागर रामा। | १९७/३, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस श्याम और गौर शरीर वाली दोनों भावार्थ सुंदर जोड़ियों की शोभा देखकर माताएं तृण तोड़तीं हैं (जिसमें दीठ न लग जाए)| यों तो चारों ही पुत्र शील रूप और गुण के धाम हैं ,तो भी सुख के धाम श्री रामचन्द्र जी सबसे अधिक हैं। - ShareChat
#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान
श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बारेहि ते निज हित पति जानी। लछिमन राम चरण रति मानी।| भरत सत्रूहन दूनउ भाई। प्रभु सेवक जसि प्रीति बड़ाई। | १९७/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ बचपन से ही श्री रामचन्द्र जी को अपना परम हितैषी स्वामी जानकर लक्ष्मण जी ने उनके चरणों में प्रीति जोड़ ली।भरत और शत्रुघ्न दोनों भाइयों में स्वामी और सेवक की जिस प्रीति की प्रशंसा है वैसा ही प्रेम हो गया। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बारेहि ते निज हित पति जानी। लछिमन राम चरण रति मानी।| भरत सत्रूहन दूनउ भाई। प्रभु सेवक जसि प्रीति बड़ाई। | १९७/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ बचपन से ही श्री रामचन्द्र जी को अपना परम हितैषी स्वामी जानकर लक्ष्मण जी ने उनके चरणों में प्रीति जोड़ ली।भरत और शत्रुघ्न दोनों भाइयों में स्वामी और सेवक की जिस प्रीति की प्रशंसा है वैसा ही प्रेम हो गया। - ShareChat
#🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #राम #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 - ತ 9 रामदूताय नमः মন্তুমন नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी। | मुनि धन जन सरबस सिव प्राना | बाल केलि रस तेहिं सुख माना। | १९७/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस ने हृदय में विचार कर ये नाम भावार्थ गुरुजी चारों पुत्र वेद रखे(और कहा -) हे राजन्! 5R के तत्व ( साक्षात परात्पर भगवान) हैं।जो मुनियों के धन , भक्तों के सर्वस्व और शिवजी के प्राण हैं उन्होंने (इस समय तुम लोगों के प्रेमवश)बाल लीला के रस में सुख माना है। ತ 9 रामदूताय नमः মন্তুমন नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी। | मुनि धन जन सरबस सिव प्राना | बाल केलि रस तेहिं सुख माना। | १९७/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस ने हृदय में विचार कर ये नाम भावार्थ गुरुजी चारों पुत्र वेद रखे(और कहा -) हे राजन्! 5R के तत्व ( साक्षात परात्पर भगवान) हैं।जो मुनियों के धन , भक्तों के सर्वस्व और शिवजी के प्राण हैं उन्होंने (इस समय तुम लोगों के प्रेमवश)बाल लीला के रस में सुख माना है। - ShareChat
#राम #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺
राम - 39 हनुमते रामदूताय नमः 3 लच्छन धाम रामप्रिय सकल जगत आधार। गुरु बशिष्ठ तेहि राखा लछिमन नाम उदार। | १९७, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस जो शुभ लक्षणों के धाम , श्रीराम जी के भावार्थ प्यारे और सारे जगत के आधार हैं , गुरु वशिष्ठ जी ने उनका 'लक्ष्मण 'एक श्रेष्ठ नाम रखा। 39 हनुमते रामदूताय नमः 3 लच्छन धाम रामप्रिय सकल जगत आधार। गुरु बशिष्ठ तेहि राखा लछिमन नाम उदार। | १९७, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस जो शुभ लक्षणों के धाम , श्रीराम जी के भावार्थ प्यारे और सारे जगत के आधार हैं , गुरु वशिष्ठ जी ने उनका 'लक्ष्मण 'एक श्रेष्ठ नाम रखा। - ShareChat
#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏 जय हनुमान #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम
श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - ऊँ श्री যামনুনায নম: हनुमते बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई। | Rg जाके सुमिरन ते IHII नाम सत्रुहन बेद प्रकासा। | १९६/४, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस जो संसार का भरण पोषण करते हैं भावार्थ उन ( राजा दशरथ के पुत्र) का नाम ' भरत' दूसरे होगा। जिनके स्मरण मात्र से शत्रु का नाश होता उनका वेदों में प्रसिद्ध नाम ' शत्रुघ्न 1 ऊँ श्री যামনুনায নম: हनुमते बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई। | Rg जाके सुमिरन ते IHII नाम सत्रुहन बेद प्रकासा। | १९६/४, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस जो संसार का भरण पोषण करते हैं भावार्थ उन ( राजा दशरथ के पुत्र) का नाम ' भरत' दूसरे होगा। जिनके स्मरण मात्र से शत्रु का नाश होता उनका वेदों में प्रसिद्ध नाम ' शत्रुघ्न 1 - ShareChat
#राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः रम रमसप ٦ रम যমমম राम - सम W जो आनंद सिंधु सुखरासी | 4 सीकर तें त्रैलोक सुपासी। | सुखधाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा। | १९६/३, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस ये जो आनंद के समुद्र और सुख की राशि भावार्थ हैं जिस आनंदसिंधु के एक कण से तीनों लोक सुखी होते हैं, उन ( सबसे बड़े दशरथ पुत्र) का नाम 'राम' है ,जो सुख का भवन और संपूर्ण लोकों को शांति देने वाला है। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः रम रमसप ٦ रम যমমম राम - सम W जो आनंद सिंधु सुखरासी | 4 सीकर तें त्रैलोक सुपासी। | सुखधाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा। | १९६/३, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस ये जो आनंद के समुद्र और सुख की राशि भावार्थ हैं जिस आनंदसिंधु के एक कण से तीनों लोक सुखी होते हैं, उन ( सबसे बड़े दशरथ पुत्र) का नाम 'राम' है ,जो सुख का भवन और संपूर्ण लोकों को शांति देने वाला है। - ShareChat