ShareChat @gyanu singh
गुड्डा गुड्डी का खेल बंद करो, ढंग की पूजा करो
उत्तमः परमात्मेत्युदाहृतः । पुरुषस्त्वन्यः यो लोकत्रयमाविश्य बिभर्त्यव्यय ईश्वरः ॥ १७ ॥
उत्तमः, पुरुषः, तु, अन्यः, परमात्मा, इति, उदाहृतः, यः, लोकत्रयम्, आविश्य, बिभर्ति, अव्ययः, ईश्वरः ॥ १७ ॥
तथा इन दोनोंसे -
उत्तमः - उत्तम
पुरुषः
- पुरुष
तु
- तो
अन्यः - अन्य ही है,
यः
- जो
लोकत्रयम् तीनों लोकोंमें
#💓 मोहब्बत दिल से #🌞 Good Morning🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ प्रवेश करके
विभर्ति
अव्ययः - अविनाशी,
ईश्वरः
- परमेश्वर (और)
परमात्मा - परमात्मा
इति
इस प्रकार
उदाहृतः
- कहा गया है।
शिव जी भी जन्म-मृत्यु में आते हैं; जिसका प्रमाण श्रीमद्देवीभागवत, स्कंध 3, अध्याय 4-5 में ह