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ഷെയര്‍ചാറ്റ് പൊളിച്ചു
#🕌 വാവർസ്വാമി #🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 #🙏🏻 മാളികപ്പുറത്തമ്മ #☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 #💒ക്രിസ്ത്യൻ പള്ളികൾ✝ विश्व शांति का संकल्प एक पावन निमंत्रण नफरत की आग को प्यार और ज्ञान से बुझाने की ओर एक कदम। संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में जुड़ें एक भव्य आयोजन सेः लक्ष्यःनशा मुक्त, बुराई मुक्त और युद्ध मुक्त विश्व। कार्यक्रमः 'विश्व शांति महा धार्मिक अनुष्ठान' दिनांक: 1, 2 और 3 मई 2026 आत्मा के कल्याण और विश्व शांति के इस महाकुंभ का हिस्सा बनें।
🕌 വാവർസ്വാമി - ४विश्र्व शाति धार्मिक अनुष्ठान महा जब दुनिया नफरत की आग में जल रही हो तब ऐसे महापुरुष की जरूरत होती है, जो अपने सच्चे ज्ञान से सबको एक कर दे। संतों की वाणी और भविष्यवाणियाँ यही संकेत देती हैं कि तत्वज्ञान से ही विश्व में स्थायी शांति आएगी | संत रामपाल जी महाराज का संदेशः जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा | हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।। आइए विश्व शांति के इस महा अनुष्ठान से जुड़ें 1, २, 3 मई २०२६  Visit: WWW JagatGuruRampal Ji org Sant Rampal Ji YOUTUBE Maharaj CHANNEL @SalntRampalJiMalaral ४विश्र्व शाति धार्मिक अनुष्ठान महा जब दुनिया नफरत की आग में जल रही हो तब ऐसे महापुरुष की जरूरत होती है, जो अपने सच्चे ज्ञान से सबको एक कर दे। संतों की वाणी और भविष्यवाणियाँ यही संकेत देती हैं कि तत्वज्ञान से ही विश्व में स्थायी शांति आएगी | संत रामपाल जी महाराज का संदेशः जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा | हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।। आइए विश्व शांति के इस महा अनुष्ठान से जुड़ें 1, २, 3 मई २०२६  Visit: WWW JagatGuruRampal Ji org Sant Rampal Ji YOUTUBE Maharaj CHANNEL @SalntRampalJiMalaral - ShareChat
#💒ക്രിസ്ത്യൻ പള്ളികൾ✝ #🙏🏻 മാളികപ്പുറത്തമ്മ #☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 #🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 #🕌 വാവർസ്വാമി #विश्वशांतिकेलिए_महाअनुष्ठान विश्व शांति महा धार्मिक अनुष्वाना मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे बढ़ते जा रहे हैं लेकिन शांति क्यों घटती जा रही है? क्योंकि हमने रास्ता तो चुना पर सही मार्गदर्शक नहीं चुना। संत रामपाल जी महाराज का तत्वज्ञान ही मानवता को एक सूत्र में बांध सकता है। आइए, विश्व शांति महा धार्मिक अनुष्ठान से जुड़ें 1, 2, 3 मई 2026 Guidance of Sant RampalJi
💒ക്രിസ്ത്യൻ പള്ളികൾ✝ - क्या कभी सोचा है ? इतनी प्रार्थनाओं के बाद भी में शांति क्यों नहींहै? g6u कारण सा़फ है . सही भक्ति और सही ज्ञान के बिना शांति संभव नहीं| संत रामपाल जी महाराज बताते हैंः सच्चा ज्ञान ही मानव को जोड़ता है, तोड़ता नहीं। अब समय आ गया है सत्य को जानने का 1,2,3352026 विश्व शांति के इस महा अनुष्ठान से जुड़ें Visit wwwJagatGuruRampalJiorg Sant Rampal Ji YOUTUBE Maharaj CHANNL @SainIRampalMahial क्या कभी सोचा है ? इतनी प्रार्थनाओं के बाद भी में शांति क्यों नहींहै? g6u कारण सा़फ है . सही भक्ति और सही ज्ञान के बिना शांति संभव नहीं| संत रामपाल जी महाराज बताते हैंः सच्चा ज्ञान ही मानव को जोड़ता है, तोड़ता नहीं। अब समय आ गया है सत्य को जानने का 1,2,3352026 विश्व शांति के इस महा अनुष्ठान से जुड़ें Visit wwwJagatGuruRampalJiorg Sant Rampal Ji YOUTUBE Maharaj CHANNL @SainIRampalMahial - ShareChat
#🕌 വാവർസ്വാമി #☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 #🙏🏻 മാളികപ്പുറത്തമ്മ #🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 #💒ക്രിസ്ത്യൻ പള്ളികൾ✝ #सत्य भक्ति संदेश संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पुस्तक जीने की राह पड़े साधना टीवी चैनल पर शाम 7:30 बजे सत्संग सुने
🕌 വാവർസ്വാമി - पटमट्मा भी न मिला धन भी यही च्ह गया। (स्त्री पुरुष) को নাল মানন সনয ন सुनने परमात्मा के विधान का ज्ञान नहीं होता। जिस कारण से उसको परमात्मा के विषय में चर्चा भी अच्छी नहीं लगती। धन संग्रह करना अच्छा लगता है। जिस कारण से उसको दोनों से हाथ धोने पडते हैं यानि बंदी  छोड़ उसे न तो परमात्मा मिलता है और मृत्यु के पश्चात् धन भी यहीं रह गया उसके दोनों ही निकल गए। কাথ सतगुरु रामपाल जी महाराज कबीर, रामनाम कड़वा लगै, मीठे लागें दाम। दुविधा में दोनों गए, माया मिली ना राम।| {5 SPIRITUAL LEADER SANT RAHPALJI @SAINTRAMPALIM SUPREMEGOD ORG RAHPAL JI MAHARA 1/7 पटमट्मा भी न मिला धन भी यही च्ह गया। (स्त्री पुरुष) को নাল মানন সনয ন सुनने परमात्मा के विधान का ज्ञान नहीं होता। जिस कारण से उसको परमात्मा के विषय में चर्चा भी अच्छी नहीं लगती। धन संग्रह करना अच्छा लगता है। जिस कारण से उसको दोनों से हाथ धोने पडते हैं यानि बंदी  छोड़ उसे न तो परमात्मा मिलता है और मृत्यु के पश्चात् धन भी यहीं रह गया उसके दोनों ही निकल गए। কাথ सतगुरु रामपाल जी महाराज कबीर, रामनाम कड़वा लगै, मीठे लागें दाम। दुविधा में दोनों गए, माया मिली ना राम।| {5 SPIRITUAL LEADER SANT RAHPALJI @SAINTRAMPALIM SUPREMEGOD ORG RAHPAL JI MAHARA 1/7 - ShareChat
#🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 #🙏🏻 മാളികപ്പുറത്തമ്മ #🕉️ഓം നമഃശിവായ #☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 #🕌 വാവർസ്വാമി अनमोल पुस्तक जीने की राह पढ़िए……………) 📖📖📖📖📖 जीने की राह पार्ट - 24 पृष्ठ: 59-62 दया-धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान। कह कबीर दयावान के पास रहे भगवान। शब्दार्थ :- धर्म वही करता है जिसके हृदय में दया है। दया धर्म की जड़ है तथा पाप वह करता है जिसमें अभिमान भरा है। अभिमान पाप की जड़ है। कबीर परमात्मा ने कहा है कि दयावान के साथ परमात्मा रहता है। अभिमानी के पास नहीं रहता। भक्त रामभक्त की पुत्रवधु जिस भक्तमति के पास बैठी थी, वह बोली कि बहन! आप भी कुछ सेवा कर लो। "सत्संग वचन":- गुरूदेव जी बताते हैं कि जो सेवा-भक्ति करेगा, उसी को फल मिलेगा। मैं भोजन खाऊँगा तो मेरा पेट भरेगा। आप खाओगे तो आपका पेट भरेगा। सब प्राणी परमात्मा के बच्चे हैं। आप धनी के बच्चे समझकर सेवा करो। जैसे एक धनी की लड़की 8-9 वर्ष की थी। उसकी देखरेख के लिए एक नौकरानी रखी थी। वह उस लड़की को गर्मियों में स्कूल छोड़ने जाती थी तो उस लड़की के ऊपर छाते (छतरी) से छाया करके चलती थी, स्वयं धूप सहन करती थी जिससे धनी खुश रहता था और नौकरानी को तनख्वाह देता था। आप सब यह विचार करके अपने- परायों का ध्यान रखें। सास-ससुर की सेवा, छोटे- बड़े की सेवा, सबका सम्मान करना आप जी का परम कर्तव्य है। यदि आप- अपने सास- ससुर, माता- पिता या अन्य आश्रितों की सेवा करोगे तो परमात्मा आपकी सेवा का प्रबंध करेगा। आप अपने छोटे- बड़े बच्चों को भी सत्संग में साथ लाया करो। बच्चों में भी छोटे- बड़ों की सेवा करने, अच्छा व्यवहार करने के संस्कार पड़ेंगे। वे बच्चों बड़े होकर आपकी ( वृद्ध हो जाओगे, तब) सेवा ऐसे ही करेंगे। जैसे बेटी एक बाप-माँ को छोड़कर नए माता (सास)-पिता (ससुर) के पास आती है। अब जन्म के माता-पिता तो इतने साथी थे। उन्होंने पाल-पोसकर नए माता-पिता को सौंप दिया। सास-ससुर के कर्तव्य है कि आने वाली बेटी को अपनी बेटी की तरह प्यार दे। भेदभाव स्वपन में भी नई बेटी व अपनी जन्म की बेटी में न करे जो झगड़े की जड़ है। पुत्रवधु को चाहिए कि नए घर की परिस्थितियों के अनुसार अपने को ढ़ाले। माँ के घर वाले बर्ताव को कम प्रयोग करे। अब पुत्रवधु का घर-परिवार यही (ससुराल) है। शिक्षा कथा :- एक पुत्रवधु अपनी सास को बहुत दुःखी रखती थी। उसक फूटे हुए मिट्टी के घड़े के टुकड़े (ठीकरे) में भोजन खिलाती थी जैसे कुत्तों क खिलाते हैं। कभी-कभी साफ करती थी। उसके लड़के का विवाह हुआ। कुछ समय उपरांत सास की मृत्यु हो गई। तब वह अपनी पुत्रवधु से बोली कि इस ठीकरे को फोड़कर बाहर फेंक दो। वह पुत्रवधु बोली कि सास जी ! आपको भी इसी ठीकरे में भोजन दिया करूंगी। आपने बड़े जुल्म वृद्धा के साथ किए हैं। तब वह अपनी गलती को समझकर बहुत रोई। पुत्रवधु बुद्धिमान थी। शाम तक उस ठीकरे को नहीं फोड़ा। उसकी सास को वह ठीकरा दुःश्मन दिखाई देने लगा। पुत्रवधु ने कहा कि माता जी! मैंने सत्संग सुने हैं। मैं अपने कर्म खराब नहीं करूंगी। यह कहकर ठीकरा फोड़ दिया। पाप कर्म के कारण सास को कैंसर का रोग हो गया। सारा-सारा दिन चिल्लाए। पुत्रवधु उसकी सेवा करे, कोई कसर नहीं छोड़ती थी। परंतु कहती थी कि सासु माँ! सेवा तो मैं दिलोजान से करूंगी, परंतु तेरे पाप के मैं नहीं बाँट पाऊँगी। यह कष्ट तो आपको ही भोगना पड़ेगा। यदि सत्संग सुने होते तो यह दिन नहीं देखने पड़ते। तब उस जालिम औरत ने कहा कि बेटी! मैं महापापिनी हूँ। क्या मेरा भी उद्धार हो सकता है? मैं भी दीक्षा लेना चाहती हूँ? लड़की सत्संगी घर की थी। उसको पता था कि दीक्षा लेकर भक्ति करने से पाप कर्म नष्ट होते हैं। जिनके अधिक पाप हैं, भक्ति करने से लाभ ही होगा, पाप कम ही होंगे तथा भविष्य में मानव जन्म भी मिल जाता है यदि मर्यादा में रहकर अंतिम श्वांस तक साधना करता रहे। सत्संग में गुरूदेव जी उदाहरण देकर समझाते है कि जैसे किसी का वस्त्र कम मैला है तो थोड़े प्रयास से ही निर्मल हो जाता है। यदि अधिक मैला है तो दो-तीन बार साबुन-पानी से धोने से निर्मल हो जाता है। जिसने अधिक मैला कर रखा है तथा अन्य दाग भी लगाए हैं तो ड्राईक्लीन से साफ हो जाता है। यदि साफ करने का इरादा दृढ़ हो तो मिस्त्री का काला हुआ वस्त्र भी साफ हो सकता है। लड़की (पुत्रवधु) को पता था कि सास जी ने तो मिस्त्री वाली दशा कर ली। फिर भी परमात्मा की शरण से अवश्य लाभ ही होता है। इस उद्देश्य से अपनी सासू माँ को दीक्षा दिला दी। कुछ समय पश्चात् कैंसर में कुछ पीड़ा कम हो गई। सत्संग सुनकर उसे रोना आया कि माता-पिता की बहू-बेटों से क्या आकांक्षा होती है? मुझ पापिन ने अपनी सासू जी के साथ क्या बर्ताव किया। मुझे तो यह रोग होना ही था। यदि पहले यह ज्ञान सुनने को मिल जाता तो मैं क्यों यह पाप करती? निर्मल जीवन जीती। सासू माँ की आत्मा भी खुश करती। अपना जीवन सफल कर लेती। उपरोक्त वचन सुनकर रामभक्त जी की पुत्रवधु उस अपनी सहेली (पुरानी भक्तमति) से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी। आधा घंटे तो अपने को रोक नहीं सकी। अधिक सांत्वना के पश्चात् सुबकी रूकी और अपने ससुर पिता के साथ किए बर्ताव का उल्लेख रोते-रोते किया। अपने ससुर जी की इंसानियत भी बताई कि कभी अपने बेटे से भी नहीं बताया कि तेरी बहू मेरे साथ ऐसा बुरा बर्ताव कर रही है। बेटे के पूछने पर यही कहता था कि बेटा किसी प्रकार की सेवा में कमी नहीं है। बड़े अच्छे घर की बेटी है, समझदार है। हमारा सौभाग्य है कि यह अपने घर आ गई। हमारा तो इस बेटी ने घर बसा दिया है। मैं पापिन ये शब्द सुनकर भी नरम नहीं पड़ी क्योंकि मेरी आत्मा पर पाप कर्मों की परत चढ़ चुकी थी जो दो-तीन बार सत्संग सुनने के पश्चात् पाप की परत उतरी है। आत्मा में अच्छे संस्कार उठने लगे हैं। तीन दिन सत्संग सुनकर भक्त रामभक्त, पोता-पोती तथा पुत्रवधु के साथ घर पर आ गया। बच्चों ने भी वहाँ छोटे बच्चों को खाना खिलाने, पानी पिलाने की सेवा करते अन्य पुराने सत्संगी बच्चों को देखा तो वे भी सेवा करने लगे। घर पर आकर अपने दादा जी के लिए पानी की बाल्टी भरकर दोनों भाई-बहन लटका लाए और बोले, दादा जी! स्नान कर लो। रामभक्त जी ने कहा कि बच्चो! तुम्हारे पेट में दर्द हो जाएगा। इतना भार मत उठाओ। मैं अपने आप ले आऊँगा। बच्चे बोले कि दादा जी! सत्संग में गुरू जी ने बताया था कि सेवा करने से लाभ ही लाभ मिलता है, कोई कष्ट नहीं होता। हम रोटी खाऐंगे तो हमारा पेट भरेगा। हम सेवा करेंगे तो हमें पुण्य मिलेगा। यदि रोग भी हो तो भक्ति और सेवा से समाप्त हो जाता है। वहाँ आश्रम में अनेकों माई-भक्त बता रहे थे कि हम बीमार रहते थे। नाम लेने के पश्चात् जैसी सेवा कर सके, करने लगे। हम स्वस्थ हो गए। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। देखो! हमारी दवाईयों की पर्चियाँ, चार वर्ष से उपचार चल रहा था। अब कोई दवाई नहीं खाते। (ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 में भी यही प्रमाण है कि यदि रोगी मृत्यु के निकट पहुँच गया है यानि उसको असाध्य रोग भी हो गया हो। यदि वह भक्ति पर लग जाए तो परमात्मा उसको मृत्यु के मुख से निकालकर ले आए। उसे स्वस्थ करके शत प्रतिशत यानि पूरी आयु जीवन दे देता है। -लेखक) इतनी देर में पुत्रवधु आई और कहा, पिता जी! स्नान कर लो। धोती यहीं छोड़ देना। मैं आप साफ कर दूंगी। रामभक्त जी ने कहा कि बेटी! आपको घर का बहुत कार्य करना होता है, खाना बनाना, पानी लाना, पशु संभालना है। मैं आप धो लूंगा । मेरी टाँग भी अब ठीक हो गई है। बस थोडा-सा लंग रहता है। रामभक्त स्नान करके धोती बदलकर धोती धोने लगा। उसी समय बच्चों ने आकर धोती छीन ली और लेकर अंदर भाग गए और अपनी माता जी को दे दी। फिर कुर्ता ले गए। दूसरा कुर्ता लाकर दे दिया। लड़का खेत से पशुओं का चारा लेकर आया और पहले की तरह पिता को देखा और बिना बोले आगे घर में चला गया। उसने देखा कि पत्नी निर्मला हलवा बना रही थी। उसने सोचा कोई त्यौहार होगा। फिर सब्जी-रोटी बनाई। सर्वप्रथम गुरू भगवान को दो कटोरियों में भोग लगाया तथा फिर एक थाल में रोटी, कटोरियों में हलवा तथा सब्जी डालकर अपने ससुर जी के पास लेकर गई और बोली, पिता जी! भोजन खा लो। भूख लगी होगी, दूर से आए हैं। रामभक्त बोला, बेटी! मेरे को यह हजम नहीं होता। सूखी रोटियाँ ला दे मैं बीमार हो जाऊँगा। रामभक्त जी ने सोचा था कि भावना में बहकर बेटी आज तो सब सेवा कर देगी, परंतु लड़का इसको धमकाएगा क्योंकि उसको सत्संग का ज्ञान नहीं है। कहीं घर में झगड़ा ना हो जाए। इतने में लड़का भी आ गया। अपनी पत्नी को बोला, पिता जी ठीक कह रहे हैं, ले चल अंदर। पिता का कमरा गली पर था। बच्चों का रहने का अंदर को था। पत्नी बोली, चुप रह, मैंने बहुत पाप इकट्ठे कर लिये। अब पिता जी की सेवा मैं स्वयं करूंगी। लड़का चुप हो गया। रामभक्त ने दोनों बच्चों को थोड़ा-थोड़ा हलवा दिया। पुत्रवधु को देने लगा तो बोली कि आप क्या खाओगे? घर पर और भी बहुत सारा हलवा प्रसाद बचा है। पिता जी आप खाओ। नहीं खाओगे तो मेरी आत्मा रोएगी। भक्त रामभक्त जी ने गुरूदेव भगवान का स्मरण किया और भोजन खाया। प्रतिदिन पुत्रवधु स्वयं नरम-नरम रोटियाँ गर्म-गर्म लाकर अपने हाथों खिलाए। प्रतिदिन वस्त्र साफ करे और कहे, पिता जी! भजन कर लो। एक दिन रामभक्त जी की बूआ का लड़का भक्त रामनिवास आया। रामभक्त जी ने उसको सीने से लगा लिया और बोला रै भाई! हमारा घर तो तेरी कृपा से स्वर्ग बन गया। भक्त रामनिवास बोला कि मामा के बेटे रामनिवास से कुछ ना हुआ गुरूदेव जी की शब्द-शक्ति का करिश्मा है। आप और मैं तो पहले इकट्ठे बत्ती-डण्डा खेला करते। मेरे करने से होता तो पहले ही हो जाता। गुरु जी कह रहे थे कि रामभक्त पिछले जन्मों में भक्त था। इससे घर के मोह के कारण मर्यादा में चूक बनी थी। उसके कारण इतना कष्ट उठाया है। अब यह महादुःखी हो चुक था। तब तेरे साथ आया है। नहीं तो आप कितनी बार रामभक्त से पहले कह चुके थे कि सत्संग में चल, परंतु मोह-माया में अन्धा हो चुका था। यह कष्ट और पुत्र-पुत्रवधु का व्यवहार इसके लिए वरदान बन गया है। कबीर जी ने कहा है कि :- कबीर, सुख के माथे पत्थर पड़ो, जो नाम हृदय से जाय। बलिहारी वा दुःख के, जो पल-पल राम रटाय ।। भावार्थ :- हे परमात्मा! इतना सुख भी ना देना जिससे तेरी भूल पड़े। जिस दुःख से परमात्मा की पल-पल याद बनी रहे, वैसे दुःख सदा देते रहना। मैं बलिहारी जाऊँ उस दुःख को जिसके कारण परमात्मा की शरण मिली। भक्त रामभक्त जी ने भक्त रामनिवास जी से कहा कि अब के सत्संग में बेटे प्रेम सिंह को ले जाना। इसका उद्धार हो जाएगा। अगले सत्संग में जो एक महीने पश्चात् होना था। भक्त रामनिवास जी आए और प्रेम सिंह को अपने घर ले जाने के बहाने ले गए। घर से सत्संग में ले गए। तीन दिन तक आश्रम में रहे, सत्संग सुना। अन्य पुराने भक्तों से उनकी आप-बीती सुनी तो सत्संग के रंग में रंग गया। भक्त रामभक्त जी का परिवार एकदम बदल गया। भक्ति-सेवा करके कल्याण को प्राप्त हुआ। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry
🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 - सतलोक आश्रम श्री धनाना धाम से १० अप्रैल २०२६ लाइव को सत्संग किया सभी भगत ज्यादा से ज्यादा शेयर करें सतलोक आश्रम श्री धनाना धाम से १० अप्रैल २०२६ लाइव को सत्संग किया सभी भगत ज्यादा से ज्यादा शेयर करें - ShareChat
#💒ക്രിസ്ത്യൻ പള്ളികൾ✝ #🕉️ഓം നമഃശിവായ #☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 #🙏🏻 മാളികപ്പുറത്തമ്മ #🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 #संतरामपालजी_का_विश्वको_संदेश परम् संत रामपाल जी महाराज जी का विश्व को संदेश हमारा लक्ष्य पूरे संसार को सुखी करना है। हम सब एक कबीर भगवान के बच्चे हैं, न कोई जाति अलग है, न कोई धर्म अलग है। पूरा वीडियो देखें Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैनल पर Sant RampalJi YtChannel ⤵️ https://youtu.be/7h78v5XexpQ
💒ക്രിസ്ത്യൻ പള്ളികൾ✝ - विशेष संदेश १२ अप्रैल परमु संत रामपाल जी महाराजाजी} का विश्वको संदेश करना है। पूरे संसार को सुखी हमारा लक्ष्य हम सब एक कबीर भगवान के बच्चे हैँ, न कोई जाति अलग है, न कोई धर्म अलग है। पूरा वीडियो देखें Sant Rampal Ji YOUTUBE Maharaj CHANNL @SaintRampalJiMaharaj विशेष संदेश १२ अप्रैल परमु संत रामपाल जी महाराजाजी} का विश्वको संदेश करना है। पूरे संसार को सुखी हमारा लक्ष्य हम सब एक कबीर भगवान के बच्चे हैँ, न कोई जाति अलग है, न कोई धर्म अलग है। पूरा वीडियो देखें Sant Rampal Ji YOUTUBE Maharaj CHANNL @SaintRampalJiMaharaj - ShareChat
#🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 #☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 #🕉️ഓം നമഃശിവായ #🙏🏻 മാളികപ്പുറത്തമ്മ #💒ക്രിസ്ത്യൻ പള്ളികൾ✝ #संतरामपालजी_का_विश्वको_संदेश आज के विशेष संदेश में संत रामपाल जी महाराज ने कहा, 'यदि भगवान को पाना है, तो सेवा और परमार्थ करो।' पूरा वीडियो देखें Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैनल पर Sant RampalJi YtChannel
🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 - विशेष संदेश १० अप्ैल அரசக िशेष संदेश में संत रामपाल जी महाराज ने कहा, श्यदि भगवान को पाना है, तो सेवा और परमार्थ करो। ॰ रामपाल जी   महाराज परम सत पूरा वीडियो देखें Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैनल qa पूरा वीडियो देखें Sant Rampal Ji YOUTUBE Maharaj CHANNEL @ Sain RaupalJiMaharal विशेष संदेश १० अप्ैल அரசக िशेष संदेश में संत रामपाल जी महाराज ने कहा, श्यदि भगवान को पाना है, तो सेवा और परमार्थ करो। ॰ रामपाल जी   महाराज परम सत पूरा वीडियो देखें Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैनल qa पूरा वीडियो देखें Sant Rampal Ji YOUTUBE Maharaj CHANNEL @ Sain RaupalJiMaharal - ShareChat
#☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 #🙏🏻 മാളികപ്പുറത്തമ്മ #🕉️ഓം നമഃശിവായ #🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 कबीरा खाई कोट की, पानी पिए न कोय। जाइ मिलै जब गंग में, तब सब गंगाजल होय॥ 🌊💧🌴
☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 - कबीर औच्चााछ्ञानिकबरका दोहा : ज्ञान कवीड़ कबीरा खाई कोट की, पानी पिए न कोय। जाइ मिलै जब गंग में, तब सब गंगाजल होय ।l अर्थ :- कबीर जी कहते हैं कि किले (कोट) की खाई पानी कोई नहीं पीता, क्योंकि वह अलग का और गंदा माना जाता है। लेकिन जब वही पानी गंगा में मिल जाता है, तो वह भी गंगाजल बन जाता है। इस दोहे का संदेश है कि जब मनुष्य मार्ग से जुड़  अच्छे लोगों और अच्छे আনা ট, নী उसका जीवन भी पवित्र और श्रेष्ठ बन जाता हैIZiZi कबीर औच्चााछ्ञानिकबरका दोहा : ज्ञान कवीड़ कबीरा खाई कोट की, पानी पिए न कोय। जाइ मिलै जब गंग में, तब सब गंगाजल होय ।l अर्थ :- कबीर जी कहते हैं कि किले (कोट) की खाई पानी कोई नहीं पीता, क्योंकि वह अलग का और गंदा माना जाता है। लेकिन जब वही पानी गंगा में मिल जाता है, तो वह भी गंगाजल बन जाता है। इस दोहे का संदेश है कि जब मनुष्य मार्ग से जुड़  अच्छे लोगों और अच्छे আনা ট, নী उसका जीवन भी पवित्र और श्रेष्ठ बन जाता हैIZiZi - ShareChat
#☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 #🙏🏻 മാളികപ്പുറത്തമ്മ #🕌 വാവർസ്വാമി #🕉️ഓം നമഃശിവായ #जैन_धर्म_की_सच्चाई जैनी मूर्ति पूजा में विश्वास रखते हैं। ये अपने तीर्थकंर को ही प्रभु मानते हैं, उन्हीं की मूर्ति मंदिरों में रखते हैं। जबकि मूर्ति पूजा का विधान किसी भी सद्ग्रंथ में नहीं है। शास्त्र अनुकूल साधना को जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैनल Sant RampalJi YtChannel
☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 - मूर्तिपूजा मे विश्वास र्खते है। ये अपने तीर्थकंर को ही प्रभु मानते हैं , उन्हीं की मूर्ति मंदिरों में रखते हैं। जबकि मूर्ति पूजा का विधान किसी भी सद्ग्रंथ में नहीं है। शास्त्र अनुकूल साधना को जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैनल Sant Rampal Ji YOUTUBE Fee Book Maharaj CHANNEL 7496801825 83"90 मूर्तिपूजा मे विश्वास र्खते है। ये अपने तीर्थकंर को ही प्रभु मानते हैं , उन्हीं की मूर्ति मंदिरों में रखते हैं। जबकि मूर्ति पूजा का विधान किसी भी सद्ग्रंथ में नहीं है। शास्त्र अनुकूल साधना को जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj यूट्यूब चैनल Sant Rampal Ji YOUTUBE Fee Book Maharaj CHANNEL 7496801825 83"90 - ShareChat
#🕉️ഓം നമഃശിവായ #🙏🏻 മാളികപ്പുറത്തമ്മ #🕌 വാവർസ്വാമി #🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 #☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙
🕉️ഓം നമഃശിവായ - मारीचि जी के जीव ने प्रथम तीर्थकंर ऋषभदेव जी से दीक्षा लेकर साधना की। उसके परिणामस्वरूप मारीचि जी के जीव ने गधा , कुत्ता आदि का जीवन भोगा और स्वर्ग-्नरक में भटका। ٦٩٨٤ CWI1 जिसका प्रमाण पुस्तक आओ जैन धार्म को जानें ` के पृष्ठ २९४ & २९६ में है। महावीर जी ने तो किसी से दीक्षा  भी नही ली थी। उन्होंने तो मनमाना आचरण करके साधना की। तो विचार करें, हुआ उनका क्या होगा ? Sant Rampal Ji YOUTUBE ft Buuk : CHANNEL 7496801825 Mahara 7-4 मारीचि जी के जीव ने प्रथम तीर्थकंर ऋषभदेव जी से दीक्षा लेकर साधना की। उसके परिणामस्वरूप मारीचि जी के जीव ने गधा , कुत्ता आदि का जीवन भोगा और स्वर्ग-्नरक में भटका। ٦٩٨٤ CWI1 जिसका प्रमाण पुस्तक आओ जैन धार्म को जानें ` के पृष्ठ २९४ & २९६ में है। महावीर जी ने तो किसी से दीक्षा  भी नही ली थी। उन्होंने तो मनमाना आचरण करके साधना की। तो विचार करें, हुआ उनका क्या होगा ? Sant Rampal Ji YOUTUBE ft Buuk : CHANNEL 7496801825 Mahara 7-4 - ShareChat
#☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 #🕋 ഇസ്ലാമിക് സ്റ്റാറ്റസ് 🟢 #🙏🏻 മാളികപ്പുറത്തമ്മ #🕌 വാവർസ്വാമി #🕉️ഓം നമഃശിവായ #रामनवमी_पर_जानें_आदिराम_कौन क्या वशिष्ठ ऋषि ने वेदों में वर्णित परमात्मा के गुणों के आधार पर राजा दशरथ के चारों पुत्रों का नामकरण किया था या श्रीरामचन्द्र स्वयं परमात्मा थे? जानने के लिए देखिए वशिष्ठ ऋषि ने किस गलतफहमी में रखा राम का नाम Factful Debates यूट्यूब चैनल पर Factful Debates YouTube
☪വെള്ളിയാഴ്ച രാവ് 🌙 - @ रामचरित मानस मे हुआ ಶ பUI बडाखुलासा कोनहै श्रीराम से भी बडा भगवान எி शनातनी पजा क அன்சச்சரச் ?@(-3 श्री रामचरितमानस के बालकाण्ड के दोहा १४३ में वर्णित द्वादशाक्षर मंत्र कौन सा है ? जानने के लिए देखिए असली रामायण 272 Factful Debates यूट्यूब चैनल पर Factful Debates YOUTUBE fe Buuk : CHANNEL TL96dll625 @Faclludabalest 165 udeds a @ रामचरित मानस मे हुआ ಶ பUI बडाखुलासा कोनहै श्रीराम से भी बडा भगवान எி शनातनी पजा क அன்சச்சரச் ?@(-3 श्री रामचरितमानस के बालकाण्ड के दोहा १४३ में वर्णित द्वादशाक्षर मंत्र कौन सा है ? जानने के लिए देखिए असली रामायण 272 Factful Debates यूट्यूब चैनल पर Factful Debates YOUTUBE fe Buuk : CHANNEL TL96dll625 @Faclludabalest 165 udeds a - ShareChat