प्रतीक यादव चला गया।
💔 एक सीधा साधा सा लड़का, जो कभी राजनीति के चक्रव्यूह में फँसा ही नहीं...
वो सीधा-सादा लड़का, जिसके अंदर न कोई महत्वाकांक्षा का भूत था, न सत्ता की लालसा। अखिलेश जी और परिवार के बड़े लोगों के प्रति उसका सम्मान इतना गहरा था कि वो शायद खुद कभी सोच भी नहीं सकता था कि उनके बराबर या उनसे आगे जाने की कोशिश करे। बस साथ निभाना, इज्जत करना और अपना फर्ज समझना — यही उसकी दुनिया थी।
वह अपनी मां के साथ मुलायम सिंह यादव के यहां आया था, उसे मुलायम परिवार ने अपनाया और गुप्ता सरनेम हटाकर यादव सरनेम दिया, अच्छी परवरिश और स्तरीय पढ़ाई करवाई....
दूसरी तरफ अपर्णा... राजनीति का भूत उसके सिर पर सवार था। अति महत्वाकांक्षी। शायद अखिलेश जी से भी बड़ा नेता बनने का सपना देख रही थी। सत्ता, पद, चमक-दमक — ये सब उसके लिए जीवन का मकसद बन चुके थे।
पर आज वही प्रतीक, जो कभी किसी को दुख नहीं पहुँचाया, जो हमेशा सर झुकाकर सम्मान देता था, वो हमारे बीच नहीं रहा।
महत्वाकांक्षा और सत्ता की दौड़ में इंसानियत खो जाती है...
काश! लोग समझ पाते कि राजनीति से ऊपर भी कुछ है — परिवार, रिश्ते, सादगी और वो प्यार जो प्रतीक जैसे लोग चुपचाप बाँटते रहते हैं।
प्रतीक भाई, आप जहां भी हैं, वहां शांति मिले। आपने जो सम्मान और सादगी दिखाई, वो याद रहेगी।
विनम्र श्रद्धांजलि 💐💐💐 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट