*🌹संस्कारो पर नाज🌹*
🙏🙏🙏
*बेटा अब खुद कमाने वाला हो गया था इसलिए बात-बात पर अपनी माँ से झगड़ पड़ता था...ये वही माँ थी जो बेटे के लिए पति से भी लड़ जाती थी। मगर अब फाइनेसिअली इंडिपेंडेंट बेटा पिता के कई बार समझाने पर भी इग्नोर कर देता और कहता है, "यही तो उम्र है शौक की,खाने पहनने की, जब आपकी तरह मुँह में दाँत और पेट में आंत ही नहीं रहेगी तो क्या करूँगा।"**
*बहू खुशबू भी भरे पूरे परिवार से आई थी, इसलिए बेटे की गृहस्थी की खुशबू में रम गई थी। बेटे की नौकरी अच्छी थी तो फ्रेंड सर्किल उसी हिसाब से मॉडर्न थी। बहू को अक्सर वह पुराने स्टाइल के कपड़े छोड़ कर मॉडर्न बनने को कहता, मगर बहू मना कर देती...!!**
*वो कहता, "कमाल करती हो तुम, आजकल सारा ज़माना ऐसा करता है,मैं क्या कुछ नया कर रहा हूँ। तुम्हारे सुख के लिए सब कर रहा हूँ और तुम हो कि उन्हीं पुराने विचारों में अटकी हो, क्वालिटी लाइफ क्या होती है तुम्हें मालूम ही नहीं।"**
*और बहू कहती "क्वालिटी लाइफ क्या होती है, ये मुझे जानना भी नहीं है, क्योकि लाइफ की क्वालिटी क्या हो, मैं इस बात में विश्वास रखती हूँ।"**
*आज अचानक पापा आई. सी. यू. में एडमिट हुए थे। हार्ट अटैक आया था। डॉक्टर ने पर्चा पकड़ाया, तीन लाख और जमा करने थे। डेढ़ लाख का बिल तो पहले ही भर दिया था, मगर अब ये तीन लाख भारी लग रहे थे। वह बाहर बैठा हुआ सोच रहा था कि अब क्या करें...??**
*उसने कई दोस्तों को फ़ोन लगाया कि उसे मदद की जरुरत है, मगर किसी ने कुछ तो किसी ने कुछ बहाना कर दिया। आँखों में आँसू थे और वह उदास था...तभी खुशबू खाने का टिफिन लेकर आई और बोली, "अपना ख्याल रखना भी जरुरी है। ऐसे उदास होने से क्या होगा? हिम्मत से काम लो, बाबू जी को कुछ नहीं होगा आप चिन्ता मत करो। कुछ खा लो फिर पैसों का इंतजाम भी तो करना है...आपको मैं यहाँ बाबूजी के पास रोकती हूँ...आप खाना खाकर पैसों का इंतजाम कीजिये...!!"**
*पति की आँखों से टप-टप आँसू झरने लगे।**
*"कहा न आप चिन्ता मत कीजिये। जिन दोस्तों के साथ आप मॉडर्न पार्टियां करते हैं आप उनको फ़ोन कीजिये, देखिए तो सही, कौन कौन मदद को आता हैं...!!"**
*पति खामोश और सूनी निगाहों से जमीन की तरफ़ देख रहा था। कि खुशबू का हाथ उसकी पीठ पर आ गया। और वह पीठ को सहलाने लगी।**
*"सबने मना कर दिया। सबने कोई न कोई बहाना बना दिया खुशबू। आज पता चला कि ऐसी दोस्ती तब तक की है जब तक जेब में पैसा है। किसी ने भी हाँ नहीं कहा जबकि उनकी पार्टियों पर मैंने लाखों उड़ा दिये।"**
*"इसी दिन के लिए बचाने को तो माँ-बाबा कहते थे। खैर, कोई बात नहीं, आप चिंता न करो, हो जाएगा सब ठीक। कितना जमा कराना है?"**
*"अभी तो तनख्वाह मिलने में भी समय है, आखिर चिन्ता कैसे न करूँ खुशबू ?"**
*"तुम्हारी ख्वाहिशों को मैंने सम्हाल रखा है।"**
*"क्या मतलब....?"**
*"तुम जो नई नई तरह के कपड़ो और दूसरी चीजों के लिए मुझे पैसे देते थे...वो सब मैंने सम्हाल रखे हैं। माँ जी ने फ़ोन पर बताया था, तीन लाख जमा करने हैं। मेरे पास दो लाख थे। बाकी मैंने अपने भैया से मंगवा लिए हैं। टिफिन में सिर्फ़ एक ही डिब्बे में खाना है बाकी में पैसे हैं...!!"**
*खुशबू ने थैला टिफिन सहित उसके हाथों में थमा दिया।**
*"खुशबू ! तुम सचमुच अर्धांगिनी हो, मैं तुम्हें मॉडर्न बनाना चाहता था, हवा में उड़ रहा था। मगर तुमने अपने संस्कार नहीं छोड़े. आज वही काम आए हैं।"**
*सामने बैठी माँ के आँखो में आंसू थे...उसे आज खुद के नहीं बल्कि पराई माँ के संस्कारो पर नाज था और वो बहू के सर पर हाथ फेरती हुई ऊपरवाले का शुक्रिया अदा करने लगी...!!**
*सदैव प्रसन्न रहिये*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #🏠घर-परिवार #👍 डर के आगे जीत👌 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👌 आत्मविश्वास
🙏भगवान अमर नाथ की कृपा
जिस पर हो जाए,उसकी हर
मुश्किल आसान हो जाए।
हर हर महादेव 🙏🙏
ॐ नमः शिवाय
🪻🌸🌻🌼💐🌷🌹 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ सोमवार #🛕बाबा केदारनाथ📿
*🌹सिर्फ प्रभु ध्यान🌹*
🙏🙏🙏
*एक राजा सायंकाल में महल की छत पर टहल रहा था. अचानक उसकी दृष्टि महल के नीचे बाजार में घूमते हुए एक सन्त पर पड़ी। सन्त तो सन्त होते हैं, चाहे हाट बाजार में हों या मन्दिर में अपनी धुन में खोए चलते हैं।*
*राजा ने महूसस किया वह सन्त बाजार में इस प्रकार आनन्द में भरे चल रहे हैं जैसे वहाँ उनके अतिरिक्त और कोई है ही नहीं। न किसी के प्रति कोई राग दिखता है न द्वेष।*
*राजा को सन्त की यह मस्ती इतनी भा गई कि तत्काल उनसे मिलने को व्याकुल हो गए। उन्होंने सेवकों से कहा इन्हें तत्काल लेकर आओ।*
*सेवकों को कुछ न सूझा तो उन्होंने महल के ऊपर से ही रस्सा लटका दिया और उन सन्त को उस में फंसाकर ऊपर खींच लिया।*
*कुछ मिनटों में ही सन्त राजा के सामने थे। राजा ने सेवकों द्वारा इस प्रकार लाए जाने के लिए सन्त से क्षमा मांगी। सन्त ने सहज भाव से क्षमा कर दिया और पूछा–‘ऐसी क्या शीघ्रता आ पड़ी महाराज जो रस्सी में ही खिंचवा लिया ?’*
*राजा ने कहा–‘एक प्रश्न का उत्तर पाने के लिए मैं अचानक ऐसा बेचैन हो गया कि आपको यह कष्ट हुआ।’*
*सन्त मुस्कुराए और बोले–‘ऐसी व्याकुलता थी अर्थात कोई गूढ़ प्रश्न है। बताइए क्या प्रश्न है ?’*
*राजा ने कहा–‘प्रश्न यह है कि ’भगवान् शीघ्र कैसे मिलें’–मुझे लगता है कि आप ही इसका उत्तर देकर मुझे सन्तुष्ट कर सकते हैं ? कृपया मार्ग दिखाएं।’*
*सन्त ने कहा–‘राजन् ! इस प्रश्न का उत्तर तो तुम भली-भांति जानते ही हो, बस समझ नहीं पा रहे. दृष्टि बड़ी करके सोचो तुम्हें पलभर में उत्तर मिल जाएगा।’*
*राजा ने कहा–‘यदि मैं सचमुच इस प्रश्न का उत्तर जान रहा होता तो मैं इतना व्याकुल क्यों होता और आपको ऐसा कष्ट कैसे देता। मैं व्यग्र हूँ–आप सन्त हैं. सबको उचित राह बताते हैं।’*
*राजा एक प्रकार से गिड़गिड़ा रहा था और सन्त चुपचाप सुन रहे थे जैसे उन्हें उस पर दया ही न आ रही हो। फिर बोल पड़े सुनो अपने उलझन का*
*उत्तर*–
*सन्त बोले–‘सुनो, यदि मेरे मन में तुमसे मिलने का विचार आता तो कई अड़चनें आतीं और बहुत देर भी लगती। मैं आता, तुम्हारे दरबारियों को सूचित करता। वे तुम तक सन्देश लेकर जाते। तुम यदि फुर्सत में होते तो ही हम मिल पाते, और कोई जरूरी नहीं था कि हमारा मिलना सम्भव भी होता।*
*परन्तु जब तुम्हारे मन में मुझसे मिलने का विचार इतना प्रबल रूप से आया तो सोचो कितनी देर लगी मिलने में ? तुमने मुझे अपने सामने प्रस्तुत कर देने के पूरे प्रयास किए। इसका परिणाम यह रहा कि घड़ी भर से भी कम समय में तुमने मुझे प्राप्त कर लिया।’*
*राजा ने पूछा–‘परन्तु भगवान् के मन में हमसे मिलने का विचार आए तो कैसे आए और क्यों आए ?’*
*सन्त बोले–‘तुम्हारे मन में मुझसे मिलने का विचार कैसे आया ?’*
*राजा ने कहा–‘जब मैंने देखा कि आप एक ही धुन में चले जा रहे हैं और सड़क, बाजार, दूकानें, मकान, मनुष्य आदि किसी की भी तरफ आपका ध्यान नहीं है, उसे देखकर मैं इतना प्रभावित हुआ कि मेरे मन में आपसे तत्काल मिलने का विचार आया।’*
*सन्त बोले–‘यही तो तरीका है भगवान को प्राप्त करने का। राजन् ! ऐसे ही तुम एक ही धुन में भगवान् की तरफ लग जाओ, अन्य किसी की भी तरफ मत देखो, उनके बिना रह न सको, तो भगवान् के मन में तुमसे मिलने का विचार आ जायगा और वे तुरन्त मिल भी जायेंगे।*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम* #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
*ॐ घृणि सूर्य भाष्कराय नमः*
*उदित सूर्यदेवजी की समस्त किरणें आपको स्वस्थ,चिरायु और संपत्तिशाली बनाएं*।
*आपका दिन मंगलमय हो*🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव
🌹विनम्रता🌹
🙏🙏🙏
एक बार उज्जैन के राजा भोज अपने प्रिय मित्र और विद्वान माघ पंडित के साथ नगर से दूर सैर पर निकले। बातें करते-करते दोनों इतने मग्न हो गए कि लौटते समय रास्ता ही भूल बैठे। चारों ओर सुनसान रास्ते, ढलती शाम और मन में हल्की चिंता… तभी दूर खेत के किनारे एक बूढ़ी औरत दिखाई दी, जो गेहूँ की रखवाली कर रही थी। दोनों उसके पास पहुँचे और आदर से बोले — “राम-राम माता !”
बुढ़िया मुस्कुराई और बोली — “राम-राम बेटा, आओ बैठो। चेहरे देखकर लग रहा है कि रास्ता भटक गए हो।”
राजा भोज ने पूछा — “माता, यह रास्ता कहाँ जाता है ?”
बुढ़िया हल्का हँसकर बोली — “रास्ते कहीं नहीं जाते बेटा… रास्ते तो यहीं रहते हैं, चलने वाले अपनी मंज़िल तक पहुँचते हैं।”
दोनों उसकी बात सुनकर एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। फिर माघ पंडित बोले — “माता, हम तो मुसाफिर हैं।”
बुढ़िया बोली — “मुसाफिर भी दो ही होते हैं बेटा… एक सूरज, जो सुबह से शाम तक चलता रहता है… और दूसरा चाँद, जो रातभर सफर करता है। तुम उनमें से कौन हो ?”
दोनों थोड़े असहज हुए। राजा भोज बोले — “हम मेहमान हैं माता।”
बुढ़िया ने तुरंत जवाब दिया — “मेहमान भी दो ही दिन के अच्छे लगते हैं… एक धन और दूसरा जवानी। दोनों टिकते नहीं। अब सच-सच बताओ कौन हो ?”
माघ पंडित ने गर्व से कहा — “हम बड़े सामर्थ्यवान लोग हैं।”
बुढ़िया मुस्कुराई — “सामर्थ्यवान तो दो ही हैं बेटा… एक धरती, जो सबका बोझ सह लेती है… और दूसरी नारी, जो दुख सहकर भी परिवार संभालती है।”
अब दोनों पूरी तरह चुप पड़ चुके थे। राजा भोज ने बात सँभालते हुए कहा — “माता, हम साधु स्वभाव के लोग हैं।”
बुढ़िया बोली — “साधु भी दो प्रकार के होते हैं… एक शनि, जो इंसान को उसके कर्मों का फल देकर सुधरने का मौका देता है… और दूसरा संतोष, जो मिल जाए उसी में सुख सिखाता है।”
धीरे-धीरे दोनों का अभिमान टूटने लगा। अब वे समझ चुके थे कि सामने बैठी साधारण दिखने वाली औरत कोई साधारण बुद्धि की नहीं है।
आख़िरकार दोनों ने सिर झुकाकर कहा — “माता, अब हम मान गए… हम खुद को बहुत ज्ञानी समझते थे, लेकिन असली समझ तो आपके पास है।”
बुढ़िया हँस पड़ी और बोली — “राजा भोज… और साथ में माघ पंडित… इतना भी नहीं पहचानूँगी क्या ? जाओ, सामने जो पगडंडी दिख रही है, वही उज्जैन की ओर जाती है।”
दोनों ने आदर से उसके चरण छुए। जाते-जाते राजा भोज मन ही मन सोच रहे थे — “ज्ञान किताबों से नहीं, अनुभव और विनम्रता से बड़ा होता है।”
इसलिए कहते हैं…
इंसान कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए,
अगर उसके भीतर विनम्रता नहीं,
तो उसका ज्ञान अधूरा ही रहता है।
मंगल प्रभात
प्रणाम #👍 डर के आगे जीत👌 #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🏠घर-परिवार
जय शनिदेव जय हनुमानजी
🪻🌸🌻🌼🌹💐🌷
🙏🏻 ॐ भग भवाय विद्महे मृत्यु रूपाय धीमहि। तन्नो शनि: प्रचोदयात।।
आपके सभी सुखों की सहजता से प्राप्ति और कष्टों को निर्मूल करने के लिए शनि देव की वंदना करता हूं।
सुप्रभात,प्रणाम
🙏🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ शनिवार #✋भगवान भैरव🌸
*🌹रिश्ते में मित्रता🌹*
🙏🙏🙏
*मम्मी जी के चेहरे की चमक और किचन से आती पकवानों की महक दोनों की वजह एक ही है। आज लंच में उनकी एक फ्रेंड आने वाली हैं, कल ही बता दिया था उन्होंने।*
*कल ही मेरे साथ अपनी फ्रेंड को गिफ्ट में देने के लिए महंगी सी साड़ी भी ले आईं। आज मुझसे भी पहले किचन में घुस गई और बड़े जतन से खुद से तैयार की गई पकवानों की लिस्ट में से एक के बाद एक डिश बनानी भी शुरू कर दी।*
*खूब खुश नजर आ रही हैं पर मैं...... बेमन, बनावटी मुस्कान चेहरे पर सजाए काम में उनका हाथ बटा रही हूँ।*
*मायके में मेरी माँ का आज जन्मदिन है। शादी के बाद यह माँ का पहला जन्मदिन होगा जब कोई भी उनके साथ नहीं होगा। अब मैं यहाँ, पापा ऑफिस टूर पर और भाई तो है ही परदेस में।*
*मायके जाने के लिए कल मम्मी जी से बोलने ही वाली थी कि उन्होंने मेरे बोलने से पहले ही अपनी फ्रेंड के आने वाली बात सामने रख दी। दोपहर में लंच और शाम को हम सभी का उनके साथ फन सिटी जाने का प्रोग्राम तय हो चुका था।*
*क्या कहती मन मार कर रह गई। घर को सजाया और खुद को भी बेमन सी सँवर गई। कुछ ही देर में डोर बेल बजी उनका स्वागत करने के लिए मम्मी जी ने मुझे ही आगे कर दिया।*
*गेट खोला, बड़े से घने गुलदस्ते के पीछे छिपा चेहरा जब नजर आया तो मेरी आंखें फटी की फटी और मुँह खुला का खुला रह गया। सामने मेरी माँ खड़ीं थीं। माँ मुझे गुलदस्ता पकड़ाते हुए बोली, "सरप्राइज"*
*हैरान खड़ी मैं, अपनी माँ को निहार रही थी। "बर्थडे विश नहीं करोगी हमारी फ्रेंड को?" पीछे खड़ी मम्मी जी बोली।*
*"माँ.........आपकी फ्रेंड?"*
*"अरे भाई झूठ थोड़ी ना कहा था हमने और फिर किसने कहा कि समधिन-समधिन दोस्त नहीं हो सकती।"*
*"बिल्कुल हो सकती है जो अपनी बहू को बेटी जैसा लाड़ दुलार करें सिर्फ वही समधिन को दोस्त बना सकती है।" कहते हुए माँ ने आगे बढ़कर मम्मी जी को गले लगा लिया।*
*मेरे मुँह से एक शब्द भी ना निकल पाया बस मैंने मम्मी जी की हथेलियों को अपनी आंखों से स्पर्श करके होठों से चूम लिया। माँ हम दोनों को देखकर भीगी पलकों के साथ मुस्कुरा पड़ीं।*
*एक तरफ मेरी माँ खड़ी थी जिन्होंने मुझे रिश्तों की अहमियत बताई और दूसरी तरफ मम्मी जी जिनसे मैंने सीखा रिश्तों को दिल से निभाना। दोनों मुझे देखकर जहाँ मुस्कुरा रही थी वही मैं दोनों के बीच खड़ी अपनी किस्मत पर इतरा रही थी।*
*मंगलमय प्रभात*
*प्रणाम* #🏠घर-परिवार #👍 डर के आगे जीत👌 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #☝ मेरे विचार #😠कभी गुस्सा कभी प्यार🥰
🙏पावन सुबह में माता महालक्ष्मी के दिव्य दर्शन🙏
आपके घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे।
हर चिंता दूर हो और जीवन धन-धान्य से भर जाए।
ॐ महालक्ष्मी नमः
💐🌷🌹🪷🌼🌹 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शुक्रवार #🙏 माँ वैष्णो देवी
*🌹सोच🌹*
🙏🙏🙏
*प्राचीन समय की बात है : एक शहर में दो ब्राह्मण पुत्र रहते थे, एक गरीब था..दूसरा अमीर*
*दोनों पड़ोसी थे. गरीब ब्राम्हण की पत्नी उसे रोज़ ताने देती और झगड़ती*
*एकादशी के दिन गरीब ब्राह्मण पुत्र झगड़ों से तंग आकर जंगल की ओर चल पड़ता है, ये सोच कर कि जंगल में शेर या कोई जंगली जानवर उसे मार कर खा जायेगा, उसका पेट भर जायेगा और मरने से रोज की झिक- झिक से मुक्त हो जायेगा*
*जंगल में पहुंचते ही उसे एक गुफ़ा नज़र आती है; वो उस गुफ़ा की तरफ़ जाता है..गुफ़ा में एक शेर सोया हुआ था और शेर की नींद में ख़लल न पड़े इसके लिये हंस का पहरा था*
*हंस ज़ब दूर से ब्राह्मण पुत्र को आता देखता है तो चिंता में पड़कर सोचता है..ये ब्राह्मण आयेगा, शेर जागेगा और इसे मारकर खा जायेगा..एकादशी के दिन मुझे पाप लगेगा..इसे बचायें कैसे?*
*उसे उपाय सूझता है और वो शेर के भाग्य की तारीफ़ करते हुए कहता है..ओ जंगल के राजा! उठो,जागो आज आपके भाग खुले हैं, एकादशी के दिन खुद विप्र- देव आपके घर पधारे हैं, जल्दी उठें और इन्हें दक्षिणा दें; रवाना करें; आपका मोक्ष हो जायेगा..ये दिन दुबारा आपकी जिंदगी में शायद ही आये, आपको पशु-योनी से छुटकारा मिल जायेगा*
*शेर दहाड़ कर उठता है, हंस की बात उसे सही लगती है और पूर्व में शिकार मनुष्यों के गहने वो ब्राह्मण के पैरों में रखकर शीश नवाता है, जीभ से उनके पैर चाटता है*
*हंस ब्राह्मण को इशारा करता है कि विप्रदेव! ये सब गहने उठाओ और जितना जल्दी हो सके, वापस अपने घर जाओ; ये शेर है; कब मन बदल जाय*
*ब्राह्मण बात समझकर घर लौट जाता है..पड़ोसी अमीर ब्राह्मण की पत्नी को जब सब पता चलता है तो वो भी अपने पति को जबरदस्ती अगली एकादशी को जंगल में उसी शेर की गुफा की ओर भेजती है*
*अब शेर का पहरेदार बदल जाता है..नया पहरेदार होता है ""कौवा""*
*जैसे कौवे की प्रवृति होती है वो सोचता है..बढ़िया है..ब्राह्मण आया है अब शेर को जगाऊं तो शेर की नींद में ख़लल पड़ेगी, गुस्साएगा, ब्राह्मण को मारेगा, तो कुछ मेरे भी हाथ लगेगा, मेरा पेट भर जायेगा*
*(कौवे की सोच)*
*ये सोचकर वो कांव-कांव- कांव चिल्लाता है..एक ओर तो शेर गुस्सा होकर जागता है.. और दूसरी ओर ब्राह्मण पर उसकी नज़र पड़ती है, उसे हंस की बात याद आ जाती है..वो समझ जाता है, कौवा क्यूं कांव- कांव कर रहा है*
*वो अपने पूर्व में हंस के कहने पर किये गये धर्म को खत्म नहीं करना चाहता..पर फिर भी; शेर, शेर होता है जंगल का राजा और दहाड़ कर ब्राह्मण को कहता है..*
*हंस उड़ सरवर गये और*
*अब काग भये प्रधान``*
*थे तो विप्र थांरे घरे जाओ,,*
*मैं किनाइनी जिजमान..*
*अर्थात हंस; जो अच्छी सोच वाले, अच्छी मनोवृत्ति वाले थे उड़कर सरोवर (यानि तालाब) को चले गये हैं और अब कौवा प्रधान पहरे- दार है जो मुझे तुम्हें मारने के लिये उकसा रहा है: मेरी बुद्धि घूमे; उससे पहले ही, हे ब्राह्मण यहां से चले जाओ: शेर किसी का जज मान नहीं हुआ है..वो तो हंस था जिसने मुझ (शेर) से भी पुण्य करवा दिया*
*दूसरी ओर; ब्राह्मण सारी बात समझ जाता है और डर के मारे तुरंत प्राण बचाकर अपने घर की ओर भाग जाता है*
*कहने का मतलब है कि हंस और कौवा कोई और नहीं,,हमारे ही चरित्र हैं*
*कोई किसी का दुख देखकर दुखी होता है औरउसका भला सोचता है; वो हंस है*
*और जो किसी को दु:खी देखना चाहता है,,किसी का सुख जिसे सहन नहीं होता; वो कौवा है...*
*जो आपस में मिल-जुल कर, भाईचारे से रहना चाहते हैं; वे हंस प्रवृत्ति के हैं..*
*जो झगड़े करके एक दूजे को मारने लूटने की प्रवृत्ति रखते हैं वे कौवे की प्रवृति के हैं...*
*घर, परिवार, स्कूल, संगठन अथवा आफिसों में जो भी किसी साथी कर्मी की गलती को बढ़ा चढ़ाकर बताते हैं, उसपर कार्यवाही करने के लिए उकसाते हैं..वे कौवे जैसे हैं और जो किसी साथी- कर्मी की गलती पर भी बड़ा-मन रख कर मांफ करने को कहते हैं..वे हंस प्रवृत्ति के है*
*अपने आस-पास छुपे बैठे शांतिदूत रूपी कौवौं को पहचानो, उनसे दूर रहो और जो हंस प्रवृत्ति के हैं, उनका साथ दो और सम्मान करो..इसी में सब का कल्याण छुपा है..!!*
*मंगलमय प्रभात*
*स्नेह वंदन*
*प्रणाम*
🌹🌹🌻🙏🌻🌹🌹 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #🏠घर-परिवार #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #📖जीवन का लक्ष्य🤔
संसार में कोई मित्र ओर शत्रु
नहीं है।
"व्यक्ति"
खुद के व्यवहार से ही इसको
पैदा करता हैं....
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
🪻🌺🌸💐🌻🌼🌹🌷 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु😇













