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#santrampaljimaharaj #gita quotes #जीने की राह #viral #गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
santrampaljimaharaj - हालिया  की सूचीः  पुरस्कारों अनंत अंवानीः वन्यजीव संरक्षण के लिए ग्लोबल अवार्ड। इम्तिपाज अहमदः राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार २०२३  (राष्ट्रपति द्वारा)ा  शाहरुख खानः बेस्ट एक्टर (नेशनल फिल्म अवार्ड)| रानी बेस्ट एक्ट्रेस (नेशनल फिल्म अवार्ड)| मुखर्जीः मोहनलालः दादा साहेब फाल्के अवार्ड (नेशनल फिल्म 3aTs)  संत रामपाल जी महाराजः भारत गौरव अवार्ड। फ्लोरेस इटिंगेल पुरस्कार २०२५ः १५ विजेताओं को (TPT గడెTT)  पुरस्कारः  नहत्वपूर्ण  315 கரரிஎது எஎதன সাহন ল (2024): आडवाणीः चोधरी चरण सिहः पी॰वी॰ नरसिम्हा राव एम॰एस. स्वामीनाथन (सभी मरणोपरांत या जीवित)। विभूषण  ন এবসা पद्म भूषण ओर राष्ट्रपति " पय पुरस्कारः पदम श्री विजेताओं (२०२४) की घोषणा की॰ जो विभिन्न हालिया  की सूचीः  पुरस्कारों अनंत अंवानीः वन्यजीव संरक्षण के लिए ग्लोबल अवार्ड। इम्तिपाज अहमदः राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार २०२३  (राष्ट्रपति द्वारा)ा  शाहरुख खानः बेस्ट एक्टर (नेशनल फिल्म अवार्ड)| रानी बेस्ट एक्ट्रेस (नेशनल फिल्म अवार्ड)| मुखर्जीः मोहनलालः दादा साहेब फाल्के अवार्ड (नेशनल फिल्म 3aTs)  संत रामपाल जी महाराजः भारत गौरव अवार्ड। फ्लोरेस इटिंगेल पुरस्कार २०२५ः १५ विजेताओं को (TPT గడెTT)  पुरस्कारः  नहत्वपूर्ण  315 கரரிஎது எஎதன সাহন ল (2024): आडवाणीः चोधरी चरण सिहः पी॰वी॰ नरसिम्हा राव एम॰एस. स्वामीनाथन (सभी मरणोपरांत या जीवित)। विभूषण  ন এবসা पद्म भूषण ओर राष्ट्रपति " पय पुरस्कारः पदम श्री विजेताओं (२०२४) की घोषणा की॰ जो विभिन्न - ShareChat
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला #gita quotes #viral #santrampaljimaharaj #जीने की राह
गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला - V *4ll 75% 3.21 गीता अध्याय १८ श्लोक ६६ सर्वधर्मान परित्यज्य, माम् एकम्, शरणम व्रज, अहम् त्वा, सर्वपापेभ्यः, मोक्षयिष्यामि, থুণ:II&& T, )सभी धार्मिक  सर्वधर्मान् = मैं अहम् ।पूजाओं व को परित्यज्य = त्यागकर तुझे त्वा रमुझे (मुझको ) ர TT F फिर तू सर्वपापेभ्यः  (पापोंसे सर्व {হাক্ষিমান _ বকধম  ८परमेश्वर की   मोक्षयिष्यामि =२ मुक्त कर दूँगा, (तू) থাতো স शरणम् शोक मत मा, शुचः ಕ वज T कर। भावार्थः- सभी धार्मिक "  फिर तू एक  को o3if  मुझको  त्यागकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की शरण में जा। मै तुझे सर्व पापों से मुक्त  कर दूंगा तू शोक (चिंता ) मत कर V *4ll 75% 3.21 गीता अध्याय १८ श्लोक ६६ सर्वधर्मान परित्यज्य, माम् एकम्, शरणम व्रज, अहम् त्वा, सर्वपापेभ्यः, मोक्षयिष्यामि, থুণ:II&& T, )सभी धार्मिक  सर्वधर्मान् = मैं अहम् ।पूजाओं व को परित्यज्य = त्यागकर तुझे त्वा रमुझे (मुझको ) ர TT F फिर तू सर्वपापेभ्यः  (पापोंसे सर्व {হাক্ষিমান _ বকধম  ८परमेश्वर की   मोक्षयिष्यामि =२ मुक्त कर दूँगा, (तू) থাতো স शरणम् शोक मत मा, शुचः ಕ वज T कर। भावार्थः- सभी धार्मिक "  फिर तू एक  को o3if  मुझको  त्यागकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की शरण में जा। मै तुझे सर्व पापों से मुक्त  कर दूंगा तू शोक (चिंता ) मत कर - ShareChat
#santrampaljimaharaj #gita quotes #जीने की राह #गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला #viral
santrampaljimaharaj - जिस समय सतगुरू पृथ्वी पर आएगा, दिल्ली मण्डल में उस समय कागभुसण्ड बहुतःसे गंधर्व भी उस क्षेत्र में मानव जन्म प्राप्त करेंगे | वे उस सतगुरू की शरण  নথা आकर उनका सत्कार किया करेंगे| उनकी महिमा के गाने (भजन शब्द) गाएंगे। বুলাঠ |(112) उसके जुलूस में चलते समय राग  काग भुसण्ड छतर कै आगै , गंधर्व करत चलत है रागै अमर ग्रन्थ साहिब में ३०० साल पहले ही गरीबदास जी ने भविष्यवाणी कर दी थी। अब दिन प्रतिदिन संत रामपाल जी महाराज के लिए गीत बन रहे हैं जिस समय सतगुरू पृथ्वी पर आएगा, दिल्ली मण्डल में उस समय कागभुसण्ड बहुतःसे गंधर्व भी उस क्षेत्र में मानव जन्म प्राप्त करेंगे | वे उस सतगुरू की शरण  নথা आकर उनका सत्कार किया करेंगे| उनकी महिमा के गाने (भजन शब्द) गाएंगे। বুলাঠ |(112) उसके जुलूस में चलते समय राग  काग भुसण्ड छतर कै आगै , गंधर्व करत चलत है रागै अमर ग्रन्थ साहिब में ३०० साल पहले ही गरीबदास जी ने भविष्यवाणी कर दी थी। अब दिन प्रतिदिन संत रामपाल जी महाराज के लिए गीत बन रहे हैं - ShareChat
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला #gita quotes #viral #santrampaljimaharaj #जीने की राह
गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला - देवताओं की आयु ERgT| कवीर सहब विष्णुजी से सात गुणा शिवजी की सतयुग = १७ २८ ००० वर्ष  त्रेतायुग= १२ ९६ ००० वर्ष 31g೯ 50,40,00,000*7= থিবতী ZTr= 8,64,000 &d ব্রূলিঘ্রয=  4,32,000 4 3,52,80,00,000 चतुर्युग ४३ २०,००० वर्ष का एक चतुर्युग  ३ अरब ५२ करोड़ ८० लाख चतुर्युग চীনা ৪ ७२ चतुर्युग =१ मन्वंतर= १ ४ इंद्र की त्रिलोकिय शिवजीकी ७० ००० बार आयु १४ इंद्र की आयु= 1 सचि इंद्र की पत्नी   मृत्यु होने पर  विष्णु  शिवजी के पिता ज्योति ब्रह्मा की आयु निरंजन , क्षरब्रह्म(क्षरपुरुष ), काल की बह्मजी मृत्यु होती हे ब्रह्याजी का एक दिन १००० चतुर्युग ओर रात १००० चतुर्युग होता हे॰ क्षर पुरुष ब्रह्माजी की आयु 7 करोड़ २० लाख  क्षर पुरुष ) की ভন বক লম (কূাল / चतुर्युग हे मृत्यु हो जाती हे॰ तो वह परब्रह्म का विष्युजी एक युग होता है।  ब्रह्माजी से सात गुणा विष्णुजी की पखह् अक्षर पुरुष आयु हे 7,20,00,000x7= ५0,४0,00,0००   इस तरह के १००० युग पखह्म  (अक्षर पुरुष ) का एक दिन हे ओर  चतुर्युग  इतनी ही एक रात की अवधि होती हे॰ ५० करोड़ ४० लाख चतुर्युग हे देवताओं की आयु ERgT| कवीर सहब विष्णुजी से सात गुणा शिवजी की सतयुग = १७ २८ ००० वर्ष  त्रेतायुग= १२ ९६ ००० वर्ष 31g೯ 50,40,00,000*7= থিবতী ZTr= 8,64,000 &d ব্রূলিঘ্রয=  4,32,000 4 3,52,80,00,000 चतुर्युग ४३ २०,००० वर्ष का एक चतुर्युग  ३ अरब ५२ करोड़ ८० लाख चतुर्युग চীনা ৪ ७२ चतुर्युग =१ मन्वंतर= १ ४ इंद्र की त्रिलोकिय शिवजीकी ७० ००० बार आयु १४ इंद्र की आयु= 1 सचि इंद्र की पत्नी   मृत्यु होने पर  विष्णु  शिवजी के पिता ज्योति ब्रह्मा की आयु निरंजन , क्षरब्रह्म(क्षरपुरुष ), काल की बह्मजी मृत्यु होती हे ब्रह्याजी का एक दिन १००० चतुर्युग ओर रात १००० चतुर्युग होता हे॰ क्षर पुरुष ब्रह्माजी की आयु 7 करोड़ २० लाख  क्षर पुरुष ) की ভন বক লম (কূাল / चतुर्युग हे मृत्यु हो जाती हे॰ तो वह परब्रह्म का विष्युजी एक युग होता है।  ब्रह्माजी से सात गुणा विष्णुजी की पखह् अक्षर पुरुष आयु हे 7,20,00,000x7= ५0,४0,00,0००   इस तरह के १००० युग पखह्म  (अक्षर पुरुष ) का एक दिन हे ओर  चतुर्युग  इतनी ही एक रात की अवधि होती हे॰ ५० करोड़ ४० लाख चतुर्युग हे - ShareChat
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santrampaljimaharaj - @ कहते परमात्मा तुम कौन राम का जपते जापम। जिससे कटे न तीनों तापम ।। मनुष्य को तीन प्रकार के दुख होते है। ( ) आध्यात्मिक :-( दैहिक ताप ) शरीर के रोग जैसे बीमारियाँ | (२ )अधिदैव  (दैविक ताप दैविक कारणों से आने वाली आपत्तियाँ जैसे बाढ़, सूखा आदि। भूकंप, (३) अधिभूत তীব ক ক্রাংতা তীব ক্রী भूत प्रेत, दुख जैसे किसी इंसान का इंसान को सताना आदि। का एकमात्र निवारण संत दुखों হন সন रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सतभक्ति  से ही सम्भव है। देखे साधना चैनल शाम ७३० से 8 ३० लिए अधिक जानकारी के @ कहते परमात्मा तुम कौन राम का जपते जापम। जिससे कटे न तीनों तापम ।। मनुष्य को तीन प्रकार के दुख होते है। ( ) आध्यात्मिक :-( दैहिक ताप ) शरीर के रोग जैसे बीमारियाँ | (२ )अधिदैव  (दैविक ताप दैविक कारणों से आने वाली आपत्तियाँ जैसे बाढ़, सूखा आदि। भूकंप, (३) अधिभूत তীব ক ক্রাংতা তীব ক্রী भूत प्रेत, दुख जैसे किसी इंसान का इंसान को सताना आदि। का एकमात्र निवारण संत दुखों হন সন रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सतभक्ति  से ही सम्भव है। देखे साधना चैनल शाम ७३० से 8 ३० लिए अधिक जानकारी के - ShareChat
#जीने की राह #gita quotes #viral #गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला #santrampaljimaharaj
जीने की राह - मोक्ष के लिए गुरु बनाना ही पड़ेगा| १ गीता जी - उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ। [आ- 4 श्लोक - ३४] २.कुरान शरीफ जिसने आसमानों और जमीन और जो कुछ उनके बीच में है (सबको ) छः दिन में पैदा किया फिर तख्त पर जा विराजा, उसकी खबर किसी बाखबर से पूछ  (तत्वदर्शी संत) देखो। [सुरा २५ आयात ५९] ३.गुरु ग्रंथ साहिब  बिन सतगुरु सेवे जोग न होई। बिन सतगुरु भेटे मुक्ति न होई। 0 [गुरु ग्रन्थ साहिब पृष्ठ- ९४६] 4TTaTT S :- नहीं पाटै, खेल मंड्या है सिर के साटै। सतगुरु बिना सुरति सतगुरु भक्ति मुक्ति केदानी, सतगुरु बिना न छूटै खानी।। परमेश्वर कबीर - अधिक न कोई ठहरायी। गुरु ते 5. নিন্ত मोक्षपंथ नहिं गुरु ISII मोक्ष के लिए गुरु बनाना ही पड़ेगा| १ गीता जी - उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ। [आ- 4 श्लोक - ३४] २.कुरान शरीफ जिसने आसमानों और जमीन और जो कुछ उनके बीच में है (सबको ) छः दिन में पैदा किया फिर तख्त पर जा विराजा, उसकी खबर किसी बाखबर से पूछ  (तत्वदर्शी संत) देखो। [सुरा २५ आयात ५९] ३.गुरु ग्रंथ साहिब  बिन सतगुरु सेवे जोग न होई। बिन सतगुरु भेटे मुक्ति न होई। 0 [गुरु ग्रन्थ साहिब पृष्ठ- ९४६] 4TTaTT S :- नहीं पाटै, खेल मंड्या है सिर के साटै। सतगुरु बिना सुरति सतगुरु भक्ति मुक्ति केदानी, सतगुरु बिना न छूटै खानी।। परमेश्वर कबीर - अधिक न कोई ठहरायी। गुरु ते 5. নিন্ত मोक्षपंथ नहिं गुरु ISII - ShareChat
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला #gita quotes #santrampaljimaharaj #जीने की राह #viral
गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला - 00 3a 5 3a 0? [ 39 নননবধী সরিপা ! ] ३० तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः | ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यज्ञाश्च   विहिताः TTII ?3 I/ तत, सत्, इति, निर्देशः ब्रह्मणः त्रिविधः स्मृतः 3 fafarl:   gTIl 33 // वेदाः Maul:   71, यज्ञा : च च और हे अर्जुन! 1 3TT पुना सृष्टिके आदिकालमें  নন ससे ( यह )  बाहाणा : ताहाण तीोन प्रकारका और [ सच्चिदानन्दघन ননা: वेद uuul: লমান্ধা de निर्देशः यज्ञादि Hm यज्ञा : ಕ; fafrl:' रचे गये। रमत कही ননূমী ্ী लान, प्राप्त करलो गीता का ज्ञान APR 20 AT 12:47 00 3a 5 3a 0? [ 39 নননবধী সরিপা ! ] ३० तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः | ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यज्ञाश्च   विहिताः TTII ?3 I/ तत, सत्, इति, निर्देशः ब्रह्मणः त्रिविधः स्मृतः 3 fafarl:   gTIl 33 // वेदाः Maul:   71, यज्ञा : च च और हे अर्जुन! 1 3TT पुना सृष्टिके आदिकालमें  নন ससे ( यह )  बाहाणा : ताहाण तीोन प्रकारका और [ सच्चिदानन्दघन ননা: वेद uuul: লমান্ধা de निर्देशः यज्ञादि Hm यज्ञा : ಕ; fafrl:' रचे गये। रमत कही ননূমী ্ী लान, प्राप्त करलो गीता का ज्ञान APR 20 AT 12:47 - ShareChat
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला #जीने की राह #viral #gita quotes #santrampaljimaharaj
गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला - ब्रह्मा विष्णु महेश की जन्मन्मृत्यु होती है, प्रमाण देखें 3 विष्णु. महेश और इन्द्र आदिजो देवता  ब्रह्या तथा मुनिगण हेँ॰वे भी अपनी आयूके परिमाणकालतक रहते हैं।हे राजन्! अन्तकाल आनेपर " సౌufad जंगमात्मक यह जगत् भो विनष्ट हो जाता " रशावर इसमें कभी भी कुछ भी सन्देह नहीं करना चाहिये। हे भूपाल ! अपनी आयुका अन्त हो जानेपर ब्रह्या, विष्णु आदि देवता भी विनष्ट हो जाते हें और महशः इन्द्र पुनः ये उत्पन्न भी हो जाते ] [মৃচিকাল Il 33-29 ? Il ह ब्रह्मा विष्णु महेश की जन्मन्मृत्यु होती है, प्रमाण देखें 3 विष्णु. महेश और इन्द्र आदिजो देवता  ब्रह्या तथा मुनिगण हेँ॰वे भी अपनी आयूके परिमाणकालतक रहते हैं।हे राजन्! अन्तकाल आनेपर " సౌufad जंगमात्मक यह जगत् भो विनष्ट हो जाता " रशावर इसमें कभी भी कुछ भी सन्देह नहीं करना चाहिये। हे भूपाल ! अपनी आयुका अन्त हो जानेपर ब्रह्या, विष्णु आदि देवता भी विनष्ट हो जाते हें और महशः इन्द्र पुनः ये उत्पन्न भी हो जाते ] [মৃচিকাল Il 33-29 ? Il ह - ShareChat
#santrampaljimaharaj #गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला #जीने की राह #viral #gita quotes
santrampaljimaharaj - करोड़ शिव जी मर गए I अविधू  अविगत से चल आया कोई भेद मरहम न पाया ।। ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा , बालक बन दिखलाया  काशी नगर जल कमल पे डेरा , वहां जुलाहे ने पाया ।। मातःपिता मेरे कछु नाही , ना मेरे घर दासी  जुलाहा का सूत आन कहाया , जगत करें मेरी हांसी ।। कोई जाने सतनाम उपासी লচু ন স২ , हाड चाम तारण तरण अभय पद दाता , में हूं कबीर अविनाशी अरबों तो ब्रह्मा गए , ऊंचास कोटि कन्हैया | सात करोड़ तेरे शंभू मर गय , मेरी एक नही पलैया  हम हे सत्यलोक के वासी दास कहाय प्रगट भय काशी थरि देह भवसागर आये , धर्मदास तोही नाम " सुनाये I করূলিত্ত में काशी चले आये हमारे तुम दर्शन पाये । जव तब हम नाम कबीर धराये काल देख तब रहे मुरझाये Il देह नहीं और दरसे देही , जग न चिन्हे पुरुष विदेही | नहीं बाप ना मात जाये , अविगत से हम चले आये ।। चारो जुग भवसागर आये , आदि नाम जग टेर सुनाये  नाम सुने शरणागत आवे , तीन्ही की हम बंध " छुड़ावे सतयुग सत्सुकृत कहाये , त्रेता नाम मुनींद्र धराये  द्वापर में करुणामय कहाये , कलयुग नाम कबीर रखाये ।। करोड़ शिव जी मर गए I अविधू  अविगत से चल आया कोई भेद मरहम न पाया ।। ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा , बालक बन दिखलाया  काशी नगर जल कमल पे डेरा , वहां जुलाहे ने पाया ।। मातःपिता मेरे कछु नाही , ना मेरे घर दासी  जुलाहा का सूत आन कहाया , जगत करें मेरी हांसी ।। कोई जाने सतनाम उपासी লচু ন স২ , हाड चाम तारण तरण अभय पद दाता , में हूं कबीर अविनाशी अरबों तो ब्रह्मा गए , ऊंचास कोटि कन्हैया | सात करोड़ तेरे शंभू मर गय , मेरी एक नही पलैया  हम हे सत्यलोक के वासी दास कहाय प्रगट भय काशी थरि देह भवसागर आये , धर्मदास तोही नाम " सुनाये I করূলিত্ত में काशी चले आये हमारे तुम दर्शन पाये । जव तब हम नाम कबीर धराये काल देख तब रहे मुरझाये Il देह नहीं और दरसे देही , जग न चिन्हे पुरुष विदेही | नहीं बाप ना मात जाये , अविगत से हम चले आये ।। चारो जुग भवसागर आये , आदि नाम जग टेर सुनाये  नाम सुने शरणागत आवे , तीन्ही की हम बंध " छुड़ावे सतयुग सत्सुकृत कहाये , त्रेता नाम मुनींद्र धराये  द्वापर में करुणामय कहाये , कलयुग नाम कबीर रखाये ।। - ShareChat
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viral - निहचल अविनासी মনা; কনা কু है, गगन मंडल धरि ध्यान अजपा जपत उस अविनाशी कर्ता ( सृष्टि रचनहार ) पर 8 কুনলি  निश्चल (स्थाई ) है। उसके नाम का अजपा जा जो यानी मन- मन में श्वांस द्वारा स्मरण कर (जाप कर ) और गगन मण्डल में ध्यान रख कि परमेश्वर (सतपुरूष ) ऊपर सतलोक में विराजमान है। मैने भी व्हीं जाना है। वह सुखदाई स्थान है। वहाँ जन्म - मरण  नहीं है। कोई राग-द्वेष नहीं है।सब प्रेम से रहते हैं। युवा रहते हैं। जगतगुरू तत्वदरशी संत रामपाल जी महाराज వగాగా संदेश निहचल अविनासी মনা; কনা কু है, गगन मंडल धरि ध्यान अजपा जपत उस अविनाशी कर्ता ( सृष्टि रचनहार ) पर 8 কুনলি  निश्चल (स्थाई ) है। उसके नाम का अजपा जा जो यानी मन- मन में श्वांस द्वारा स्मरण कर (जाप कर ) और गगन मण्डल में ध्यान रख कि परमेश्वर (सतपुरूष ) ऊपर सतलोक में विराजमान है। मैने भी व्हीं जाना है। वह सुखदाई स्थान है। वहाँ जन्म - मरण  नहीं है। कोई राग-द्वेष नहीं है।सब प्रेम से रहते हैं। युवा रहते हैं। जगतगुरू तत्वदरशी संत रामपाल जी महाराज వగాగా संदेश - ShareChat