Yashpal Singh
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#🤘 My Status #😇ਸਿੱਖ ਧਰਮ 🙏 #🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ
🤘 My Status - वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह 418< वाहेगुरु वाहेगुरु जी वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह 418< वाहेगुरु वाहेगुरु जी - ShareChat
#🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ #😇ਸਿੱਖ ਧਰਮ 🙏 #🤘 My Status
🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ - Hukmnama 04/04/26 धन धन श्री गुरु रामदास जी 788 सलोक मः ३ II कामणि तउ सीगारु करि जा पहिलां कंतु मनाइ II मतु सेजै कंतु न आवई एवै बिरथा जाइ कामणि पिर मनु मानिआ तउ बणिआ सीगारु Il || कीआ तउ परवाणु है जा सहु धरे पिआरु 3 Il भोजनु सीगारु तबोल रसु भाउ करेइ II तनु मनु सउपे कंत कउ तउ नानक भोगु करेइ II१ Il अर्थः हे स्त्री! तब श्रृंगार कर जब पहले पति को रिझा ले, (नहीं तो) कहीं ऐसा ना हो कि पति सेज पर आए ही ना और (तेरा किया हुआ) श्रंरृगार ऐसे व्यर्थ चला जाए। हे किए हुए स्त्री! अगर पति का मन मान जाए तो ही श्रृंगार को सफल समझ। स्त्री का किया हुआ श्रृंगार तभी स्वीकार है अगर पति उसको प्यार करे। हे नानक! अगर जीव-स्त्री प्रभु के डर (में रहने) को श्रृंगार और पान का रस बनाती है, प्यार को भोजन ( भाव, जिंदगी का आधार) बनाती प्रभु के है, और अपना तन मन पति प्रभु के हवाले कर देती है (भाव, पूर्ण तौर पर प्रभु की रजा में चलती है) उसको ही ufd-qq मिलता है।१ | Hukmnama 04/04/26 धन धन श्री गुरु रामदास जी 788 सलोक मः ३ II कामणि तउ सीगारु करि जा पहिलां कंतु मनाइ II मतु सेजै कंतु न आवई एवै बिरथा जाइ कामणि पिर मनु मानिआ तउ बणिआ सीगारु Il || कीआ तउ परवाणु है जा सहु धरे पिआरु 3 Il भोजनु सीगारु तबोल रसु भाउ करेइ II तनु मनु सउपे कंत कउ तउ नानक भोगु करेइ II१ Il अर्थः हे स्त्री! तब श्रृंगार कर जब पहले पति को रिझा ले, (नहीं तो) कहीं ऐसा ना हो कि पति सेज पर आए ही ना और (तेरा किया हुआ) श्रंरृगार ऐसे व्यर्थ चला जाए। हे किए हुए स्त्री! अगर पति का मन मान जाए तो ही श्रृंगार को सफल समझ। स्त्री का किया हुआ श्रृंगार तभी स्वीकार है अगर पति उसको प्यार करे। हे नानक! अगर जीव-स्त्री प्रभु के डर (में रहने) को श्रृंगार और पान का रस बनाती है, प्यार को भोजन ( भाव, जिंदगी का आधार) बनाती प्रभु के है, और अपना तन मन पति प्रभु के हवाले कर देती है (भाव, पूर्ण तौर पर प्रभु की रजा में चलती है) उसको ही ufd-qq मिलता है।१ | - ShareChat
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🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ - 22 33 धन धन श्री गुरु रामदास जी Apr 4 2026 বঁবী নবা শরব৮ সুী বাব বযমর সংঠিম লী eা সবধন্ত সুী ববিস্ব সাবিম্র ঔ শমিশা र्भूउ  হমহ শল eা ব্রবস'্ম gaon मलेव भः ३ Il HTUa gaபகH con वर्ग्भाट उठ्ठि मीगग्ठ र्वाठ HT ufui নন্তূ মত'হি Il মন্তূ মীনী নন্তূ ঠ সব্ষ্ী प्टेहै घिठघा नर्गष्ट Il वर्भाट fिठ भठु भर्गठभ्ा उठ्ठि ्घटम मीगग्ठ Il वीमा  ஈ ஈg 43 fபwg Il 38 uarತ೩ হিসখিশ ಕ ೊಗೆ೯' J fn3l! 32 fHara घटा नरें र्ग्लां भमभ ಹ ಸ೩ (ಸಾ' 3) AH AH 3 7= ச 5 3 भउां সিবাব "2 হিসবম্ বী বমা লষ্টী ঠ মিমন্ত্রী! ;ী 4সH হা 1೯ 17 T೬ 3ೆ ಪf fara ಣಞm TR, fE3ೆ ಈ faa वीउा ्गेष्टिशा उं गी वघल वै ने ठरम ठुं थिभग्ठ वठे। பHH 04-04-26 Owwwhukamnamasahibcom 16:-788 वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी 22 33 धन धन श्री गुरु रामदास जी Apr 4 2026 বঁবী নবা শরব৮ সুী বাব বযমর সংঠিম লী eা সবধন্ত সুী ববিস্ব সাবিম্র ঔ শমিশা र्भूउ  হমহ শল eা ব্রবস'্ম gaon मलेव भः ३ Il HTUa gaபகH con वर्ग्भाट उठ्ठि मीगग्ठ र्वाठ HT ufui নন্তূ মত'হি Il মন্তূ মীনী নন্তূ ঠ সব্ষ্ী प्टेहै घिठघा नर्गष्ट Il वर्भाट fिठ भठु भर्गठभ्ा उठ्ठि ्घटम मीगग्ठ Il वीमा  ஈ ஈg 43 fபwg Il 38 uarತ೩ হিসখিশ ಕ ೊಗೆ೯' J fn3l! 32 fHara घटा नरें र्ग्लां भमभ ಹ ಸ೩ (ಸಾ' 3) AH AH 3 7= ச 5 3 भउां সিবাব "2 হিসবম্ বী বমা লষ্টী ঠ মিমন্ত্রী! ;ী 4সH হা 1೯ 17 T೬ 3ೆ ಪf fara ಣಞm TR, fE3ೆ ಈ faa वीउा ्गेष्टिशा उं गी वघल वै ने ठरम ठुं थिभग्ठ वठे। பHH 04-04-26 Owwwhukamnamasahibcom 16:-788 वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी - ShareChat
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🤘 My Status - Hukmnama 03/0४ /२६ ೫ಶ೯' रामदासजी 643 धनधन মলীক্ত लिखिआ कमावणा जि करतै पूरबि : 3 I पाईअनु आपि   लिखिआसु ठगउली T1೯ I विसरिआ गुणतासु II आरम्भ सेजो अर्थः (पिछले किए कर्मों के अनुसार) और जो (संस्कार रूप लेख) लिखे (भाव, उकरे) हुए हैं कर्तार ने खुद लिख दिए हैं वे (अवश्य) कमाने पडते हैं; (उस लेख के अनुसार ही) मोह की ठगनबूटी (जिसे) मिल गई है उसे गुणों का खजाना हरि बिसर गया है। मतु जाणहु जगु जीवदा दूजै भाइ मुइआसु II जिनी गुरमुखि नामु न चेतिओ से बहणि न मिलनी पासि II अर्थः (उस) संसार को जीवित ना समझो (जो) माया के सतिगुरु " मोह में मरा पड़ा है; जिन्होंने के सन्मुख हो के नाम नहीं स्मरण किया, उन्हें प्रभु के पास बैठने को नहीं নিলনা| वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरुजी Hukmnama 03/0४ /२६ ೫ಶ೯' रामदासजी 643 धनधन মলীক্ত लिखिआ कमावणा जि करतै पूरबि : 3 I पाईअनु आपि   लिखिआसु ठगउली T1೯ I विसरिआ गुणतासु II आरम्भ सेजो अर्थः (पिछले किए कर्मों के अनुसार) और जो (संस्कार रूप लेख) लिखे (भाव, उकरे) हुए हैं कर्तार ने खुद लिख दिए हैं वे (अवश्य) कमाने पडते हैं; (उस लेख के अनुसार ही) मोह की ठगनबूटी (जिसे) मिल गई है उसे गुणों का खजाना हरि बिसर गया है। मतु जाणहु जगु जीवदा दूजै भाइ मुइआसु II जिनी गुरमुखि नामु न चेतिओ से बहणि न मिलनी पासि II अर्थः (उस) संसार को जीवित ना समझो (जो) माया के सतिगुरु " मोह में मरा पड़ा है; जिन्होंने के सन्मुख हो के नाम नहीं स्मरण किया, उन्हें प्रभु के पास बैठने को नहीं নিলনা| वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरुजी - ShareChat
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🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ - वाहेगुरुजी का खालसा वाहेगुरु जीकी फतेह धंनु धंनु रामदास गुरु जिनि सिरिआ तिनै सवारिआ पूरी होई करामाति आपि सिरजणहारै धारिआ  ]| वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरुजी वाहेगुरुजी का खालसा वाहेगुरु जीकी फतेह धंनु धंनु रामदास गुरु जिनि सिरिआ तिनै सवारिआ पूरी होई करामाति आपि सिरजणहारै धारिआ  ]| वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरुजी - ShareChat
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🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ - Hukmnama 02/04/26 धन धन श्री गुरु रामदास जी 656 जोगु परापति किछु संतहु मन पवनै सुखु बनिआ Il गनिआ II रहाउ।l अर्थः हे संत जनो! (मेरे) पवन (जैसे चंचल) मन को (अब) सुख मिल गया है, (अब ये मन प्रभु का मिलाप) हासिल करने के लायक थोड़ा बहुत समझा जा सकता है। रहाउ। जितु गुरि दिखलाई मोरी II मिरग पड़त है चोरी Il मूंदि लीए दरवाजे II बाजीअले अनहद बाजे II१Il  अर्थः (क्योंकि) सतिगुरु ने (मुझे मेरी वह) कमजोरी दिखा दी है जिसके कारण (कामादिक) पशू अडोल ही (मुझे) आ दबाते थे; (सो॰ मैंने मेहर से शरीर के) दरवाजे गुरु की (ज्ञान इंद्रिय कोः पर निंदा, पर तन, पर धन आदि से) बँद कर लिया है और (मेरे अंदर महिमा के) बाजे एक॰ gகி रस बजने लग पडे़ हैं।१ | वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी Hukmnama 02/04/26 धन धन श्री गुरु रामदास जी 656 जोगु परापति किछु संतहु मन पवनै सुखु बनिआ Il गनिआ II रहाउ।l अर्थः हे संत जनो! (मेरे) पवन (जैसे चंचल) मन को (अब) सुख मिल गया है, (अब ये मन प्रभु का मिलाप) हासिल करने के लायक थोड़ा बहुत समझा जा सकता है। रहाउ। जितु गुरि दिखलाई मोरी II मिरग पड़त है चोरी Il मूंदि लीए दरवाजे II बाजीअले अनहद बाजे II१Il  अर्थः (क्योंकि) सतिगुरु ने (मुझे मेरी वह) कमजोरी दिखा दी है जिसके कारण (कामादिक) पशू अडोल ही (मुझे) आ दबाते थे; (सो॰ मैंने मेहर से शरीर के) दरवाजे गुरु की (ज्ञान इंद्रिय कोः पर निंदा, पर तन, पर धन आदि से) बँद कर लिया है और (मेरे अंदर महिमा के) बाजे एक॰ gகி रस बजने लग पडे़ हैं।१ | वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी - ShareChat
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🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ - वाहेगुरु जी का खालशा वाहेगुरु जी की फतेह भावै तिवै चलावै जिव होवै फुरमाणु II fg जिव ओहु वेखै ओना नदरि न आवै बहुता एहु विडाणु  वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी वाहेगुरु जी का खालशा वाहेगुरु जी की फतेह भावै तिवै चलावै जिव होवै फुरमाणु II fg जिव ओहु वेखै ओना नदरि न आवै बहुता एहु विडाणु  वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी - ShareChat