Yashpal Singh
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#🤘 My Status #😇ਸਿੱਖ ਧਰਮ 🙏 #🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ
🤘 My Status - वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी - ShareChat
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🤘 My Status - Hukmnama 09/03/26 धन धन श्री गुरु रामदास जी 731 भजिओ पुरखोतमु हरि हरि नामु सूही महला ४ I सभि बिनसे दालद মলঘা भउ जनम मरणा Il मेटिओ गुर सबदी हरि असथिरु सेवि सुखि समघा II ? Il अर्थः हे भाई! जिस मनुष्य ने परमात्मा का नाम जपा है, दरिद्र , दलों के हरि उत्तम पुरुख को जपा है, उसके सारे में जुड़  के उस मनुष्य के दल नाश होे गए हैं। गुरु के शब्द जनमन्मरण का डर भी खत्म कर लिया। सदा-स्थिर रहने वाले परमात्मा की सेवा-्भक्ति करके वह आनंद में लीन हो TTT/1 मेरे मन भजु राम नाम अति पिरघा  #3 =3 I अरपि धरिओ गुर आगै सिरु वेचि लीओ मुलि महघा II१Il रहाउ।। अर्थः हे मेरे मन! सदा परमात्मा का अति प्यारा नाम स्मरण किया कर। हे भाई! मैंने अपना सिर महँगे मूल्य पर बेच दिया है (मैंने सिर के बदले में कीमती हरि्नाम ले लिया है)I१ | रहाउ। वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु Hukmnama 09/03/26 धन धन श्री गुरु रामदास जी 731 भजिओ पुरखोतमु हरि हरि नामु सूही महला ४ I सभि बिनसे दालद মলঘা भउ जनम मरणा Il मेटिओ गुर सबदी हरि असथिरु सेवि सुखि समघा II ? Il अर्थः हे भाई! जिस मनुष्य ने परमात्मा का नाम जपा है, दरिद्र , दलों के हरि उत्तम पुरुख को जपा है, उसके सारे में जुड़  के उस मनुष्य के दल नाश होे गए हैं। गुरु के शब्द जनमन्मरण का डर भी खत्म कर लिया। सदा-स्थिर रहने वाले परमात्मा की सेवा-्भक्ति करके वह आनंद में लीन हो TTT/1 मेरे मन भजु राम नाम अति पिरघा  #3 =3 I अरपि धरिओ गुर आगै सिरु वेचि लीओ मुलि महघा II१Il रहाउ।। अर्थः हे मेरे मन! सदा परमात्मा का अति प्यारा नाम स्मरण किया कर। हे भाई! मैंने अपना सिर महँगे मूल्य पर बेच दिया है (मैंने सिर के बदले में कीमती हरि्नाम ले लिया है)I१ | रहाउ। वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु - ShareChat
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🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ - २६ ढॅगट धन धन श्री गुरु रामदास जी Mar 9 २०२६ ಗar Tar "ತ Hlag aja mfJa Hl er সবধন্ত সুী ববিসমব সবিম ও শমিশা Mf3 मॅत्त रा ढठ्भग्ट 88= jaon पगग्प्ठ मुगी भग्ष्ठग ४ gaபகW Con र्गठ र्गठ ठग्भ उत्तिउि धग्धेउभ र्माड घघिठमे रग्प्ठर उठ्ि तठभ भठटग भेटिछि गठ मघ्तरी र्गठ Eমu || नर्माघ्ठ र्मेादि र्माध मभध्धग II१ ।I भेठे भठ उत्त ग्ग्भ ঠ্স শত্তি fিবur Il স সত্ূ ন্তম্তূ শবuি এবি্ বাব  ஈசு ইবি মীচ্ স্র্মভি সবuা I/9 Il বষষ্টূ Il fg fmfum: IHH Hగa గెudN3HT रा ठग्भ नधिमाग चै, ग्ठी ऐँउभ धठध ठु र्नाधमग चै, ठम रे मग्ठे ररठॅद्र, रप्लां रे रप्त ठग्म चे गष्टे ग्ठ। गठ रे मप्तर दिच न३ वे म সর্ত৮্ ৯ নঠস সব৪ ২া বতব ন্তী সনা মিশ সমা-মিব ব০িষ হম্ ঐবস'ওস' eী সহা-ন্তবান্তী নব ন ৪্ব শ্৪e হিব মীম ঠ বািশয  /9I1 ঠ সব সম! সভা थठभग्उभा रा फॅउ धिमग्ठा ठग्भ मिर्भाठभा वठ। भैं मग्धटा भठ भग्धटा मठीठ 3 dg & nfal dufe 3r J1 M nrer fra xfJai g € 22 2 डेटा बठ रिॅउग चै(भैं मिठ चे ष्िदत्त वीभउी र्गठनठग्भ प्ै प्लि॰ा चै ) II१II ठग्ग्ठ 09-03-26 Owwwhukamnamasahibcom সবা:-731 वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु २६ ढॅगट धन धन श्री गुरु रामदास जी Mar 9 २०२६ ಗar Tar "ತ Hlag aja mfJa Hl er সবধন্ত সুী ববিসমব সবিম ও শমিশা Mf3 मॅत्त रा ढठ्भग्ट 88= jaon पगग्प्ठ मुगी भग्ष्ठग ४ gaபகW Con र्गठ र्गठ ठग्भ उत्तिउि धग्धेउभ र्माड घघिठमे रग्प्ठर उठ्ि तठभ भठटग भेटिछि गठ मघ्तरी र्गठ Eমu || नर्माघ्ठ र्मेादि र्माध मभध्धग II१ ।I भेठे भठ उत्त ग्ग्भ ঠ্স শত্তি fিবur Il স সত্ূ ন্তম্তূ শবuি এবি্ বাব  ஈசு ইবি মীচ্ স্র্মভি সবuা I/9 Il বষষ্টূ Il fg fmfum: IHH Hగa గెudN3HT रा ठग्भ नधिमाग चै, ग्ठी ऐँउभ धठध ठु र्नाधमग चै, ठम रे मग्ठे ररठॅद्र, रप्लां रे रप्त ठग्म चे गष्टे ग्ठ। गठ रे मप्तर दिच न३ वे म সর্ত৮্ ৯ নঠস সব৪ ২া বতব ন্তী সনা মিশ সমা-মিব ব০িষ হম্ ঐবস'ওস' eী সহা-ন্তবান্তী নব ন ৪্ব শ্৪e হিব মীম ঠ বািশয  /9I1 ঠ সব সম! সভা थठभग्उभा रा फॅउ धिमग्ठा ठग्भ मिर्भाठभा वठ। भैं मग्धटा भठ भग्धटा मठीठ 3 dg & nfal dufe 3r J1 M nrer fra xfJai g € 22 2 डेटा बठ रिॅउग चै(भैं मिठ चे ष्िदत्त वीभउी र्गठनठग्भ प्ै प्लि॰ा चै ) II१II ठग्ग्ठ 09-03-26 Owwwhukamnamasahibcom সবা:-731 वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु - ShareChat
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🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ - वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु எகி4d6 धंनु धंनु रामदास गुरु जिनि सिरिआ तिनै सवारिआ पूरी होई करामाति आपि सिरजणहारै धारिआ  | [( वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु எகி4d6 धंनु धंनु रामदास गुरु जिनि सिरिआ तिनै सवारिआ पूरी होई करामाति आपि सिरजणहारै धारिआ  | [( वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी - ShareChat
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🤘 My Status - Hukmnama 08/03/26 श्री गुरु रामदास जी 763 धन धन १९ सतिगुर रागु सूही छंत महला १ घरु १ प्रसादि II भरि जोबनि मै मत पेईअड़ै घरि " पाहुणी  बलि राम जीउ II मैली अवगणि चिति बिनु गुर गुण  न समावनी बलि राम जीउ II गुण सार न जाणी ತಾ? ?ాR बादि गवाइआ Il वरु घरु दरु ಖmfಿ ' दरसनु नही जाता पिर का सहजु न भाइआ II सतिगुर पूछि न मारगि चाली सूती रैणि विहाणी II बिनु पिर धन कुमलाणी Il नानक बालतणि राडेपा  Il सदके   हूँ (तूने   कैसी g ச! # 31*: గే 3$77 आश्चर्यजनक लीला रचाई है!) जीव-स्त्री (तेरी रची माया के प्रभाव तहत) जवानी के वक्त वह ऐसे मस्त है जैसे शराब पी के मदहोश है, (ये भी नहीं समझती कि) इस पेके घर में (इस जगत में) वह एक मेहमान ही है। विकारों की कमाई के कारण चिक्त से वह मैली रहती है (गुरु की शरण नहीं आती, और ) गुरु (की शरण पडे़) बिना (हृदय में) गुण टिक नहीं सकते। (माया की) भटकना में पड़ कर जीव-स्त्री ने (प्रभु के) गुणों की कीमत ना समझी, गलत रास्ते पर पड़ी रही, और जवानी का समय व्यर्थ गवा लिया। ना उसने पति-प्रभु  के साथ सांझ डाली, ना उसके दर ना उसके घर और ना ही उसके दर्शनों की कद्र पहचानी। ( भटकना में ही प्रभु-पति का सुभाव भी पसंद नहीं रह कर) जीव-स्त्री को आया। माया के मोह में सोई हुई जीव-स्त्री की जिंदगी की सारी रात बीत गई, सतिगुरु की शिक्षा ले के ठीक रास्ते पर कभी ना चली।हे नानक। ऐसी जीवस्त्री तो बाली उम में Hukmnama 08/03/26 श्री गुरु रामदास जी 763 धन धन १९ सतिगुर रागु सूही छंत महला १ घरु १ प्रसादि II भरि जोबनि मै मत पेईअड़ै घरि " पाहुणी  बलि राम जीउ II मैली अवगणि चिति बिनु गुर गुण  न समावनी बलि राम जीउ II गुण सार न जाणी ತಾ? ?ాR बादि गवाइआ Il वरु घरु दरु ಖmfಿ ' दरसनु नही जाता पिर का सहजु न भाइआ II सतिगुर पूछि न मारगि चाली सूती रैणि विहाणी II बिनु पिर धन कुमलाणी Il नानक बालतणि राडेपा  Il सदके   हूँ (तूने   कैसी g ச! # 31*: 3$77 आश्चर्यजनक लीला रचाई है!) जीव-स्त्री (तेरी रची माया के प्रभाव तहत) जवानी के वक्त वह ऐसे मस्त है जैसे शराब पी के मदहोश है, (ये भी नहीं समझती कि) इस पेके घर में (इस जगत में) वह एक मेहमान ही है। विकारों की कमाई के कारण चिक्त से वह मैली रहती है (गुरु की शरण नहीं आती, और ) गुरु (की शरण पडे़) बिना (हृदय में) गुण टिक नहीं सकते। (माया की) भटकना में पड़ कर जीव-स्त्री ने (प्रभु के) गुणों की कीमत ना समझी, गलत रास्ते पर पड़ी रही, और जवानी का समय व्यर्थ गवा लिया। ना उसने पति-प्रभु  के साथ सांझ डाली, ना उसके दर ना उसके घर और ना ही उसके दर्शनों की कद्र पहचानी। ( भटकना में ही प्रभु-पति का सुभाव भी पसंद नहीं रह कर) जीव-स्त्री को आया। माया के मोह में सोई हुई जीव-स्त्री की जिंदगी की सारी रात बीत गई, सतिगुरु की शिक्षा ले के ठीक रास्ते पर कभी ना चली।हे नानक। ऐसी जीवस्त्री तो बाली उम में - ShareChat
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🤘 My Status - वाहेगुरु वाहेगुरु जी का खालसा எகி4d6 धंनु धंनु रामदास गुरु जिनि सिरिआ तिनै सवारिआ  पूरी होई करामाति आपि सिरजणहारै धारिआ I१l ]| वाहेगुरु वाहेगुरु जी का खालसा எகி4d6 धंनु धंनु रामदास गुरु जिनि सिरिआ तिनै सवारिआ  पूरी होई करामाति आपि सिरजणहारै धारिआ I१l ]| - ShareChat
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🙏ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ - Hukmnama 07/03/26 श्री गुरु रामदास जी 636 धन धन सोरठि महला १ II जिन्ही सतिगुरु सेविआ पिआरे নিল্ক ৯ মাথ নং तिन्हा ठाक न पाईऐ पिआरे अम्रित रसन हरे II बूडे भारे भै बिना पिआरे तारे नदरि करे II१ Il अर्थः जिस लोगों ने सतिगुरु का पल्ला $ST 8, ೯ सज्जन! उनके संगीसाथी भी पार लांघ जाते हैं। जिनकी जीभ परमात्मा का नामनअमृत चखती है उनके (जीवन- यात्रा में विकार आदि की) रुकावटें नहीं पड़ती। हे सज्जन! जो लोग परमात्मा के डर ्अदब से वंचित रहते हैं वे विकारों के भार से लादे जाते हैं और संसार समुंदर में डूब जाते हैं। पर जब परमात्मा मेहर की निगाह करता है तो उनको भी पार लंघा लेता है।१ । विणु  भी तूहै सालाहणा पिआरे भी तेरी सालाह I बोहिथ भै डुबीऐ पिआरे कंधी पाइ II? II कहाह रहाउ।। अर्थः हे सज्जन प्रभु! सदा तुझे ही सलाहना चाहिए, हमेशा तेरी ही महिमा करनी चाहिए। (इस संसार समुंदर में से पार लांघने के लिए तेरी महिमा ही जीवों के लिए जहाज है, इस) जहाज के बिना भव-सागर में डूब जाते हैं। (कोई भी जीव समुंदर का) दूसरा छोर ढूँढ नहीं सकता। रहाउ। वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी Hukmnama 07/03/26 श्री गुरु रामदास जी 636 धन धन सोरठि महला १ II जिन्ही सतिगुरु सेविआ पिआरे নিল্ক ৯ মাথ নং तिन्हा ठाक न पाईऐ पिआरे अम्रित रसन हरे II बूडे भारे भै बिना पिआरे तारे नदरि करे II१ Il अर्थः जिस लोगों ने सतिगुरु का पल्ला $ST 8, ೯ सज्जन! उनके संगीसाथी भी पार लांघ जाते हैं। जिनकी जीभ परमात्मा का नामनअमृत चखती है उनके (जीवन- यात्रा में विकार आदि की) रुकावटें नहीं पड़ती। हे सज्जन! जो लोग परमात्मा के डर ्अदब से वंचित रहते हैं वे विकारों के भार से लादे जाते हैं और संसार समुंदर में डूब जाते हैं। पर जब परमात्मा मेहर की निगाह करता है तो उनको भी पार लंघा लेता है।१ । विणु  भी तूहै सालाहणा पिआरे भी तेरी सालाह I बोहिथ भै डुबीऐ पिआरे कंधी पाइ II? II कहाह रहाउ।। अर्थः हे सज्जन प्रभु! सदा तुझे ही सलाहना चाहिए, हमेशा तेरी ही महिमा करनी चाहिए। (इस संसार समुंदर में से पार लांघने के लिए तेरी महिमा ही जीवों के लिए जहाज है, इस) जहाज के बिना भव-सागर में डूब जाते हैं। (कोई भी जीव समुंदर का) दूसरा छोर ढूँढ नहीं सकता। रहाउ। वाहेगुरु वाहेगुरु वाहेगुरु जी - ShareChat