हमारा गौरव, हमारा समाजः ✨ एक अटूट बंधन ✨
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #🙏कर्म क्या है❓ #📚कविता-कहानी संग्रह
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - सुप्रभात निषाद समाज हमारा गौर हमारा समाज जय निषाद राज आपका दिन मगलमय हो समाज में प्रेम सम्मान और एकता बनी रहे सुप्रभात निषाद समाज हमारा गौर हमारा समाज जय निषाद राज आपका दिन मगलमय हो समाज में प्रेम सम्मान और एकता बनी रहे - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ।l ओम श्री निषाद राज नमः || हमारा गौरव हमारा समाज एक अटूट बंधन जय निषाद राज ।l ओम श्री निषाद राज नमः || हमारा गौरव हमारा समाज एक अटूट बंधन जय निषाद राज - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🙏कर्म क्या है❓ #📚कविता-कहानी संग्रह #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
✍मेरे पसंदीदा लेखक - सुप्रभात मित्रों ! जय श्री राम के परम मित्र , सत्य और साहस के प्रतीक निषाद राज महाराज का आशीर्वाद हम सब पर बना रहे। তিনব্ধী নিপ্সনা ম আ থা, जिनकी वाणी में सच्चाई थी, লিব ' और जिनके हृदय में समाज के ঈম থা - ऐसे महान निषाद राज को नमन। हमारा गौरव, గెHI पहचान - निषाद राज! जय आपका दिन मंगलमय हो। सुप्रभात मित्रों ! जय श्री राम के परम मित्र , सत्य और साहस के प्रतीक निषाद राज महाराज का आशीर्वाद हम सब पर बना रहे। তিনব্ধী নিপ্সনা ম আ থা, जिनकी वाणी में सच्चाई थी, লিব ' और जिनके हृदय में समाज के ঈম থা - ऐसे महान निषाद राज को नमन। हमारा गौरव, గెHI पहचान - निषाद राज! जय आपका दिन मंगलमय हो। - ShareChat
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📗प्रेरक पुस्तकें📘 - शुभ संध्या साथियों नदी की लहरों सा हमारा हौसला, विश्वास। नाविकों सा हमारा মঘণ पहचान है, SHR और एकता हमारी ताकत। गंगा-पुत्र निषाद समाज सदा सत्य , साहस और सम्मान के मार्ग पर चलता रहे। HRT vika हमारा समाज, एक अटूट बंधन। जय निषाद राज आप सभी को स्नेह भरी शुभ संध्या शुभ संध्या साथियों नदी की लहरों सा हमारा हौसला, विश्वास। नाविकों सा हमारा মঘণ पहचान है, SHR और एकता हमारी ताकत। गंगा-पुत्र निषाद समाज सदा सत्य , साहस और सम्मान के मार्ग पर चलता रहे। HRT vika हमारा समाज, एक अटूट बंधन। जय निषाद राज आप सभी को स्नेह भरी शुभ संध्या - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🙏कर्म क्या है❓ #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - हमारा गौरव, हमारा समाजः एक अटूट बंधन जय निषाद राज १८५७ के रण में गंगा-्घाट ర मल्लाह - निषादों ने अंग्रेजी हुकुमत की जड़ें हिला दीं गंगा के पुत्रों ने १८५७ में फिररंगियों को बता दिया था कि यह धरती वोरों की है॰ गुलामों की नहीं ! हमारा गौरव, हमारा समाजः एक अटूट बंधन जय निषाद राज १८५७ के रण में गंगा-्घाट ర मल्लाह - निषादों ने अंग्रेजी हुकुमत की जड़ें हिला दीं गंगा के पुत्रों ने १८५७ में फिररंगियों को बता दिया था कि यह धरती वोरों की है॰ गुलामों की नहीं ! - ShareChat
#📲मेरा पहला पोस्ट😍 #💝 शायराना इश्क़ #🙏कर्म क्या है❓ #📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘
📲मेरा पहला पोस्ट😍 - हमारा गौरव, हमारा समाजः एक अटूट बंधन गंगा तट के वीर संतानों, तुम श्रम-शक्ति की पहचान। साहस, सेवा, सत्य पथिक हो, रखो सदा समाज का मान। एकता डोर अटूट रहे, स्वाभिमान रहे प्राण समान। दीन-दुखी के बनो सहारा, यही निषादों की पहचान। जय निषाद राज! लेखक सूर्य प्रकाश निषाद हमारा गौरव, हमारा समाजः एक अटूट बंधन गंगा तट के वीर संतानों, तुम श्रम-शक्ति की पहचान। साहस, सेवा, सत्य पथिक हो, रखो सदा समाज का मान। एकता डोर अटूट रहे, स्वाभिमान रहे प्राण समान। दीन-दुखी के बनो सहारा, यही निषादों की पहचान। जय निषाद राज! लेखक सूर्य प्रकाश निषाद - ShareChat