17.2.2026
दो व्यक्तियों का संबंध, चाहे पिता पुत्र का हो, चाहे माता पुत्री का हो, दो भाइयों का हो, दो बहनों का हो, भाई और बहन का हो, पति-पत्नी का हो, या दो मित्रों का हो। किन्हीं भी दो व्यक्तियों का पवित्र संबंध हो।
*"यदि दोनों का मन शुद्ध हो, दोनों ईमानदारी से परस्पर व्यवहार करते हों, एक दूसरे को सुख देते हों, तो यह पवित्र संबंध जैसे-जैसे पुराना होता जाता है, उसकी पवित्रता एवं दृढ़ता में अधिक अधिक निखार आता जाता है। दूसरे व्यक्ति के प्रति सम्मान बढ़ता जाता है। धीरे-धीरे उनकी आपसी समझ इतनी बढ़ जाती है, कि थोड़े ही शब्दों में काम चल जाता है। संकेत मात्र से ही एक व्यक्ति दूसरे के मन के भाव समझ जाता है। ऐसी स्थिति में उन दोनों को बहुत आनंद होता है। इसका परिणाम यह होता है, कि वह पवित्र संबंध बहुत सुदृढ़ हो जाता है, और जीवन भर सुख देता है।"*
*"आप भी यदि कुछ ऐसा प्रयत्न करें, तो आपके भी अन्यों के साथ संबंध पवित्र सुखमय एवं सुदृढ़ हो सकते हैं।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
14.2.2026
केवल भौतिक धन संपत्ति को ही धन नहीं कहते, और भी अनेक प्रकार के धन हैं।
यदि किसी का *"शरीर स्वस्थ"* है, तो यह एक बहुत बड़ी संपत्ति या धन है। यदि किसी के *"मन में शांति और स्थिरता"* है, तो यह भी बहुत बड़ा धन है। और यदि कोई व्यक्ति *"सच्चे लोगों के संपर्क में है, धार्मिक सदाचारी चरित्रवान बलवान बुद्धिमान एवं वैदिक विद्वान"* लोगों के संपर्क में है, तो यह भी एक बहुत बड़ा धन है।
यदि किसी के पास ये तीनों चीजें हों। अर्थात *"उसका शरीर भी स्वस्थ हो, उसके मन में शांति एवं स्थिरता भी हो, और वह किसी धार्मिक वैदिक विद्वान के संपर्क"* में भी हो, तो वह बहुत बड़ा धनवान व्यक्ति है। ऐसा समझना चाहिए।
*"आप भी यदि ऐसे धनवान बनना चाहें, तो ऊपर लिखी बातों से लाभ उठाएं, और ऐसे धनवान बनने का प्रयत्न करें।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
14.2.2026
केवल भौतिक धन संपत्ति को ही धन नहीं कहते, और भी अनेक प्रकार के धन हैं।
यदि किसी का *"शरीर स्वस्थ"* है, तो यह एक बहुत बड़ी संपत्ति या धन है। यदि किसी के *"मन में शांति और स्थिरता"* है, तो यह भी बहुत बड़ा धन है। और यदि कोई व्यक्ति *"सच्चे लोगों के संपर्क में है, धार्मिक सदाचारी चरित्रवान बलवान बुद्धिमान एवं वैदिक विद्वान"* लोगों के संपर्क में है, तो यह भी एक बहुत बड़ा धन है।
यदि किसी के पास ये तीनों चीजें हों। अर्थात *"उसका शरीर भी स्वस्थ हो, उसके मन में शांति एवं स्थिरता भी हो, और वह किसी धार्मिक वैदिक विद्वान के संपर्क"* में भी हो, तो वह बहुत बड़ा धनवान व्यक्ति है। ऐसा समझना चाहिए।
*"आप भी यदि ऐसे धनवान बनना चाहें, तो ऊपर लिखी बातों से लाभ उठाएं, और ऐसे धनवान बनने का प्रयत्न करें।"*
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13.2.2026
बहुत से लोग जीवन को जी नहीं रहे, बल्कि जैसे तैसे काट रहे हैं।
जब कोई व्यक्ति उनसे पूछता है, कि *"अरे भाई! बताओ, आप का जीवन कैसा चल रहा है?"* तो बहुत से लोग ऐसा उत्तर देते हैं कि *"बस, जिंदगी कट रही है।"*
जीवन जीने और उसे काटने में बहुत अंतर है। *"जीवन जीने का अर्थ है, प्रसन्नता आनंद उत्साह एवं निर्भयता से जीना।" और "जिंदगी काटने का मतलब है, मुसीबत परेशानी तनाव चिताओं आदि से घिरे रहते हुए, बस यूं ही टाइम पास करते रहना।"* तो बहुत से लोग जीवन को काट रहे हैं, जी नहीं रहे।
यदि आप जीवन को जीना चाहते हों, तो उसका उपाय है, कि *"अपने कार्यों को पूरी ईमानदारी समर्पण और स्थिरता के साथ करें। आपके अंदर झूठ छल कपट धोखा बेईमानी आदि दोष न हों। कार्य के प्रति आपकी पूरी लगन हो। बेमन से कार्य न करें, उत्साह से करें। आप के विचारों और निर्णय में स्थिरता हो। पहले तो सोच समझ कर निर्णय लेवें कि कौन सा काम ठीक है, किस काम को करना है? फिर जिस काम को करने का निर्णय कर लिया, तो उसको पूरा करने में पूरी शक्ति लगानी है।"*
*"यदि आप ऐसा सोच कर सब कार्य करें। तो आप भी निश्चित रूप से आनंदित प्रसन्न उत्साहित और निर्भीक होकर जीवन जिएंगे। इसी का नाम वास्तव में जीवन जीना है। अतः जीवन को काटें नहीं, बल्कि उत्साह से जिएं।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
12.2.2026
जीवन में अनेक अवसर मिलते रहते हैं। यदि व्यक्ति उन अवसरों पर सावधान रहे और उनका लाभ उठा ले, तो वह अपने जीवन में बहुत अच्छी प्रगति कर जाता है।
लापरवाह लोग ऐसे अवसरों का लाभ नहीं लेते और बाद में पश्चाताप करते हैं, कि *"बहुत अच्छा अवसर मिला था, हमने अपनी मूर्खता से खो दिया।" "ऐसा पश्चाताप आपको न करना पड़े। इसके लिए सदा सावधान रहें। जब भी कोई अच्छा अवसर मिले, तभी उसका ठीक-ठीक लाभ उठावें। किसी अवसर का दुरुपयोग भी न करें, परंतु उस अवसर को व्यर्थ भी न जाने दें।"*
*"यदि आप इस प्रकार से अपना व्यवहार बनाएंगे, तो आप अपने जीवन में बहुत अच्छी प्रगति करेंगे। आपको अपने जीवन का मूल्य भी अच्छी तरह से समझ में आएगा, तथा आप उस मूल्य को समझ कर अवसरों का उचित लाभ लेकर अपने जीवन को सुखमय बना सकेंगे।"*
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12.2.2026
जीवन में अनेक अवसर मिलते रहते हैं। यदि व्यक्ति उन अवसरों पर सावधान रहे और उनका लाभ उठा ले, तो वह अपने जीवन में बहुत अच्छी प्रगति कर जाता है।
लापरवाह लोग ऐसे अवसरों का लाभ नहीं लेते और बाद में पश्चाताप करते हैं, कि *"बहुत अच्छा अवसर मिला था, हमने अपनी मूर्खता से खो दिया।" "ऐसा पश्चाताप आपको न करना पड़े। इसके लिए सदा सावधान रहें। जब भी कोई अच्छा अवसर मिले, तभी उसका ठीक-ठीक लाभ उठावें। किसी अवसर का दुरुपयोग भी न करें, परंतु उस अवसर को व्यर्थ भी न जाने दें।"*
*"यदि आप इस प्रकार से अपना व्यवहार बनाएंगे, तो आप अपने जीवन में बहुत अच्छी प्रगति करेंगे। आपको अपने जीवन का मूल्य भी अच्छी तरह से समझ में आएगा, तथा आप उस मूल्य को समझ कर अवसरों का उचित लाभ लेकर अपने जीवन को सुखमय बना सकेंगे।"*
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11.2.2026
यद्यपि संसार में देखा जाता है, कि अनिश्चितताएं तो बहुत हैं, कम ही क्षेत्रों में सफलता की गारंटी होती है। *"फिर भी जिस व्यक्ति में आत्मविश्वास होता है, वह बुद्धिमत्ता से अच्छे निर्णय लेता है, और ईश्वर की कृपा से तथा सभ्य समाज के सहयोग से उसकी योजनाएं सफल हो जाती हैं।"*
*"जैसे रात कितनी भी लंबी हो, तो भी उसका अंत हो ही जाता है, और अगले दिन सूर्योदय भी होता ही है।" "जो लोग ऐसा सोचते हैं, आत्मविश्वासी होते हैं, पुरुषार्थी होते हैं, ईश्वर पर भरोसा रखते हैं, अपना काम ईमानदारी बुद्धिमत्ता और पूरी मेहनत से करते हैं, वे लोग अपने जीवन में सफल हो जाते हैं।"*
*"आप भी विचार कीजिए, और उन जैसा बनने का प्रयत्न कीजिए। आपका जीवन भी सफल हो जाएगा।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
10.2.2026
बहुत से लोग निराशावादी होते हैं। *"क्योंकि उनकी योजनाएं बुद्धिमत्तापूर्ण नहीं होती। वे अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रखते। बिना अपनी क्षमता को जाने वे लोग अपने मन में बड़ी-बड़ी इच्छाएं कर लेते हैं, जिनकी पूर्ति नहीं हो पाती।" "क्योंकि उनकी इतनी क्षमता नहीं होती कि वे अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकें। इस कारण से वे निराशावादी बन जाते हैं, और उनका भविष्य बिगड़ जाता है।"*
परंतु कुछ लोग बुद्धिमान होते हैं। *"वे अपनी क्षमताओं को पहचानते हैं। उनके अनुसार ही वे अपनी इच्छाएं रखते और योजनाएं बनाते हैं। वे आशावादी होते हैं, और छोटे-छोटे अवसरों का भी बहुत सा लाभ उठा लेते हैं।"*
*"यदि आप भी बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से अपनी क्षमताओं का परीक्षण करें, और उसी हिसाब से अपनी इच्छाएं रखें एवं योजनाएं बनाएं, और छोटे-छोटे अवसरों का लाभ उठा लें, तो आपका भी भविष्य सुंदर एवं सुखमय बन सकता है।"*
*"यदि आप ऐसा करने में सफल हो गए, तो आपको लगेगा, कि जैसे आपके जीवन में चमत्कार हो रहे हैं।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓













