#🌿आयुर्वेद
चोकर वाले आटे के 5 फायदे जानकर, आटे से चोकर अलग करना भूल जाएंगे*
अधिकांश लोग आटे में से चोकर अलग करके ही उसका भोजन पकाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। अगर आप भी ऐसा ही करते हैं तो ये जानकारी आपके काम की है। अब आपको आटे से चोकर अलग करने की जरूरत नहीं है क्योंकि चोकर मिला आटा खाना सेहत के लिए फायदेमंद है। आइए, जानें कैसे -
1 शोधकर्ताओं के अनुसार चोकर खून में इम्यूनोग्लोब्यूलीन्स की मात्रा को बढ़ाता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार है। यह टीबी जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने की ताकत रखता है।
2 यह बवासीर, अपेंडिसाइटिस, बड़ी आंत एवं मलाशय के कैंसर से बचाता है और पेट साफ करने में काफी मददगार साबित होता है।
3 फाइबर से भरपूर होने के कारण चोकर युक्त आटे का प्रयोग पाचन संबंधी समस्याओं को दूर कर कब्ज की समस्या में भी लाभकारी होता है। यह आंतों में जमा मल भी निकालने में मदद करता है।
4 चोकर युक्त आटे का प्रयोग कोलेस्ट्रॉल को कम करने में अहम भूमिका निभाता है, अत: मोटापे एवं हार्ट के मरीजों के लिए चोकर युक्त आटे का प्रयोग बेहद फायदेमंद साबित होता है।
5 वजन कम करने की चाहत रखने वालों के लिए तो यह एक प्राकृतिक उपाय है, जो आपके बढ़ते वजन पर नियंत्रण रखने में कारगर साबित होता है
#🌿आयुर्वेद
*खांसी कर रही है बहुत परेशान, तो ये देसी घरेलू नुस्खे आएंगे बहुत काम*
1. अदरक :- अदरक के टुकड़ों को शहद के साथ मिलाकर चबाएं। इसके अलावा अदरक का जूस निकालकर उसमें शहद की कुछ बूंदे मिलाकर पीना भी बहुत ही फायदेमंद रहेगा।
2. शहद :- सिर्फ शहद चाटना भी खांसी दूर करने का कारगर फॉर्मूला है। रात को सोने से पहले 1 चम्मच शहद पिएं। इसकी एंटी-बैक्टीरियल तत्व खांसी से जल्द राहत दिलाता है।
3. हल्दी :- रोजाना दिनभर में एक गिलास हल्दी वाला दूध पिएं। पानी में हल्दी, अजवाइन, काली मिर्च, दालचीनी और नमक एक साथ उबालें और हल्का गुनगुना होने पर इसे पिएं। हल्दी का एंटी-बैक्टीरियल गुण बहुत जल्द आराम दिलाता है।
4. लहसुन :- लहसुन की कलियों को कच्चा चबाएं या इसे पानी में उबालकर काढ़े के रूप में इसका इस्तेमाल करें। दोनों ही तरीकों से यह फायदेमंद है। कड़वेपन को दूर करने के लिए इसमें स्वादानुसार शहद की मात्रा मिलाई जा सकती है।
5. तुलसी :- तुलसी के पत्ते कई प्रकार की बीमारियों को दूर करते हैं। खांसी के साथ ही सर्दी-जुकाम की समस्या भी बनी हुई है तो लहसुन, अदरक, काली मिर्च, अजवाइन और तुलसी की पत्तियों को एक साथ उबालकर इसका काढ़ा बनाएं। बहुत ही असरदार इलाज है। यहां तक कि डॉक्टर भी इसे पीने की सलाह देते हैं।
#🌿आयुर्वेद
*कौन सी दाल कितनी देर भिगोनी चाहिए? जल्दी पकने के साथ ही सेहत को भी पहुंचाती है ढेरों फायदे*
दाल सेहत का खजाना है. प्रोटीन का मुख्य सोर्स है दाल. शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का बेस्ट सोर्स, जिसे खाने से मसल्स, आंखों, बालों, हड्डियों आदि को जबरदस्त लाभ होता है. घर में दाल बनाते समय कई लोग सीधे कुकर में दाल डालकर पकाते हैं, लेकिन दालों को पहले पानी में भिगोना अच्छा होता है. ये सिर्फ जल्दी पकाने के लिए नहीं, सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है.
भिगोई हुई दालें नर्म हो जाती हैं और आसानी से पच भी जाती हैं. इससे गैस, सूजन और अपच जैसी समस्याएं कम होती हैं. दालों में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो पोषक तत्वों के अवशोषण को कम कर देते हैं, लेकिन जब दालों को कुछ देर पानी में भिगोते हैं तो ये तत्व कम हो जाते हैं.
इससे प्रोटीन, आयरन और मिनरल्स जैसे पोषक तत्व आसानी से शरीर को मिल जाते हैं. साथ ही, भिगोई हुई दालें कम समय में पक जाती हैं, जिससे गैस भी बचती है. हर दाल को एक ही समय तक भिगोने की जरूरत नहीं होती.
छिलका निकली हुई मूंग दाल, तुअर दाल, उड़द दाल जैसी दालों को आधे घंटे से एक घंटे तक भिगोना काफी है. चना दाल या थोड़ी सख्त दालों को दो से चार घंटे तक भिगोना अच्छा रहता है. इस दौरान दाल पानी सोखकर नरम हो जाती है.
छिलके वाली मूंग, उड़द और कुल्थी जैसी दालों को कम से कम 6 से 8 घंटे तक भिगोना चाहिए. चना, राजमा, काबुली चना जैसी सख्त दालों को रात भर भिगोना सबसे अच्छा है. ऐसा करने से ये पूरी तरह नर्म हो जाती हैं और अच्छे से पकती हैं.
कुछ लोग दाल भिगोते समय पानी में एक लौंग, छोटी इलायची और तेजपत्ता डालते हैं. इससे दाल में अच्छी खुशबू आती है और पचाना भी आसान होता है. देखा जाए तो दाल भिगोना भले ही छोटी बात लगे, लेकिन सेहत के लिए फायदेमंद है. सही समय तक भिगोकर पकाने से दाल का स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाते हैं.










