Jaydev Samal
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Jaydev Samal
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ଆଇ ଲଭ୍ ଶେୟରଚେଟ୍
#🪷देवी कात्यायनी🪔📿
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#😛 व्यंग्य 😛 #😛 व्यंग्य 😛
😛 व्यंग्य 😛 - लड़कियों से बहस करना मतलब नानी को आईफोन के फंक्शन समझाने के बराबर हैं! लड़कियों से बहस करना मतलब नानी को आईफोन के फंक्शन समझाने के बराबर हैं! - ShareChat
#🙏सुविचार📿
🙏सुविचार📿 - आप कल क्या थे उससे नहीं आप आज क्या हो इससे ज्यादा फर्क पड़ता है { आप कल क्या थे उससे नहीं आप आज क्या हो इससे ज्यादा फर्क पड़ता है { - ShareChat
#🙏सुविचार📿
🙏सुविचार📿 - जिंदगी की पिच पर जरा ध्यान से खेलना सबसे करीब खड़े लोग ही स्टंपिंग करते हें जिंदगी की पिच पर जरा ध्यान से खेलना सबसे करीब खड़े लोग ही स्टंपिंग करते हें - ShareChat
#🙏सुविचार📿
🙏सुविचार📿 - ज्विबकर्मोकी परते उखड़ूतीह्रै ढनोप्श्श्चाताप के आंसुओके सिवा कुछ नहीं मिलता४० ज्विबकर्मोकी परते उखड़ूतीह्रै ढनोप्श्श्चाताप के आंसुओके सिवा कुछ नहीं मिलता४० - ShareChat
#हिंदी कहानी *🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐बुढ़िया💐💐* कुछ दिन पहले मैं रघुवीर के घर गया था।ड्राइंग रूम में बैठा ही था कि उनकी कामवाली घर की सफाई में लगी हुई थी, रघुवीर किसी से फोन पर बात कर रहे थे और उनकी पत्नी रसोई में चाय बना रही थीं। तभी मेरी दृष्टि सामने वाले कमरे की ओर गई जहाँ वृद्धा माँ पलंग पर बैठी थीं और उसी क्षण मेरे कानों में एक कठोर स्वर पड़ा—“बुढ़िया, अभी ज़मीन पर पोछा लगा है, नीचे पाँव मत उतारना, मैं बार-बार यही नहीं करूँगी,” यह सुनकर मेरे भीतर कुछ टूट सा गया। मैंने रघुवीर से पूछा कि क्या माँ कमरे में हैं और चाय बनने तक उनसे मिलने की अनुमति लेकर मैं जानबूझकर गीले फर्श पर पाँव रखते हुए भीतर चला गया, टाइल्स पर उभरते मेरे पाँवों के निशान जैसे प्रश्न बनकर चमक रहे थे, मैंने माँ के चरण स्पर्श किए और उनसे आग्रह किया कि वे भी ड्राइंग रूम में आकर चाय पिएँ, पर वे घबरा गईं और बोलीं कि फर्श गीला है, उनके पाँवों के निशान पड़ जाएँगे, तब मेरे मुँह से अनायास निकल पड़ा कि उन निशानों की तो तस्वीर खिंचवाकर फ्रेम में लगवाना चाहिए, पर वे भयभीत होकर पलंग से नहीं उतरीं। रघुवीर भी आ गए और बोले कि माँ सुबह चाय पी चुकी हैं, पर मैंने कहा कि मैं माँ के साथ ही यहीं चाय लूँगा, बाहर चमकते फर्श पर मेरे जूतों के निशान देखकर रघुवीर ने कामवाली से उन्हें साफ करवाया, पर जैसे ही पोछा लगा मैं फिर उस पर चल पड़ा और नए निशान बना दिए, अब सब चकित थे, तभी मैंने रघुवीर की पत्नी से कहा कि ‘बुढ़िया’ के लिए चाय यहीं दे दीजिए। यह शब्द सुनते ही सन्नाटा छा गया, मैंने शांत स्वर में कहा कि कामवाली ने माँ को बुढ़िया यूँ ही नहीं कहा होगा, यह शब्द उसने यहीं से सीखा होगा—बेटे और बहू के मुँह से—यह सुनते ही जैसे समय ठहर गया, मुझे वही फर्श वर्षों पीछे ले गया जहाँ एक नन्हा बच्चा नंगे पाँव दौड़ता था और माँ उसके पाँवों के निशान देखकर आनंदित होती थीं, आज वही माँ अपने ही पाँवों के निशान से डर रही थी, रघुवीर की आँखों से अश्रुधारा बहने लगी, वे बोले कि उनसे बहुत बड़ी भूल हो गई, मैं बिना कुछ कहे चल पड़ा, बस इतना कहकर कि केवल आँखें ही नहीं, उस फर्श को भी चूम लेना चाहिए जिस पर माँ के पाँवों के निशान पड़ते हैं। *जय जय श्री राम 🙏🏻* *जय हिन्द 🇮🇳* *सदैव प्रसन्न रहिए 🙏🏻* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
#🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏
🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 - JAY BAJRANGBALI JAY BAJRANGBALI - ShareChat
#🪷देवी कात्यायनी🪔📿
🪷देवी कात्यायनी🪔📿 - माँकात्यायनी माँकात्यायनी - ShareChat