#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
#पहचान_अविनाशी_प्रभु_की...
चार दाग से सतगुरू न्यारे,अजरो अमर शरीर!
कोई गाड़े कोई अग्नि जरावै,ढूंडा न पाया शरीर!!
🙏 508 वां कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 🙏
संत रामपाल जी महाराज जी के सान्निध्य में
परमेश्वर कबीर साहेब जी के 508 वें निर्वाण दिवस के पावन अवसर पर सतलोक आश्रम उड़दन,बैतूल (मध्यप्रदेश) में दिनांक
27, 28 व 29 जनवरी 2026 को होगा
विशाल भंडारा, अमरवाणी का अखंड पाठ, रक्तदान शिविर, दहेज-मुक्त विवाह
और आध्यात्मिक प्रदर्शनी।
📍 यह केवल आयोजन नहीं, सच्चे ज्ञान और मानवता का संदेश है।
आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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#सतगुरू_सेवा_की_आवश्यक्ता_क्यों_हैं_?
कबीर साहेब कहते हैं कि
कोटि कोटि तीरथ करे,कोटि कोटि करे धाम *
जब लग सन्त न सेवई,तब लग सरै न काम **
आशा बासा सन्त का,ब्रम्हा लखे न वेद *
षट् दर्शन खटपट करै,बिरला पावै भेद **
इन प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए सपरिवार देखिए साधना टीवी चैनल अभी...
#तत्वदर्शी सन्त के उपदेश
#भजन_करने_का_सहीं_ढंग...
भजन अर्थात् भक्ति करने का सहीं तरीका,सहीं विधि क्या हैं ?
पवित्र पांचवे वेद अर्थात् पवित्र #सुक्ष्मवेद में बताया गया हैं कि
काशी करौंत काहे लेही,बिना भजन नहीं ढंग रे।
कोटी ग्रंथ का योही अर्थ है,करो साध सत्संग रे।।
मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण और सच्चे संत की शरण में जाना अनिवार्य है।
इसी का समर्थन श्रीमद्भगवद्गीता भी करती है :-
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
इस संबंध में और अधिक जानकारी हेतु सपरिवार देखिए साधना टीवी चैनल अभी।
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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#ये_आपको_तय_करना_हैं
कि मरने के बाद आपको क्या बनना हैं ?
पवित्र श्री मद् भागवत गीता जी हमारे पवित्र चारों वेदों का सार हैं, निचोड़ हैं और सबसे बड़ी बात यह हैं यह ईश्वरीय संविधान हैं। इसमें बताया गया हैं कि जो जैसा कर्म करेगा उसे वैसा ही फल प्राप्त होता हैं,उनकी वैसी ही गति होती हैं।
आइये एक नजर डालें, पवित्र गीता जी के इस श्लोक पर...
{अध्याय 9 का श्लोक 25}
यान्ति, देवव्रताः, देवान्, पितृन्, यान्ति, पितृव्रताः।
भूतानि,यान्ति,भूतेज्याः,यान्ति, मद्याजिनः,अपि,माम्।।25।।
अनुवाद : - गीता जी का ज्ञान दाता प्रभू यह #ब्रम्ह/#क्षरपुरूष/#कालपुरूष अपने इस मृत्युलोक के जीव आत्माओं के लिए उन्होंने कर्म का जो संविधान बना रखा हैं, उनके विषय में बता रहा हैं कि...
(देवव्रताः) देवताओं को पूजने वाले (देवान्) देवताओं को (यान्ति) प्राप्त होते हैं
अर्थात् देवताओं के पुजारी अपने ईष्टदेव के लोक (जैसे ब्रम्हा जी के लोक, विष्णु जी के लोक, शिव जी के लोक आदि ) में चला जाता हैं,वहां उसे कोई गण या पार्षद आदि बना दिया जाता हैं जब तक कि उनके पुण्यकर्म सांथ रहेगा तब तक।
और
(पितृव्रताः) पितरों को पूजने वाले (पितृन्) पितरों को (यान्ति) प्राप्त होते हैं
अर्थात् जो अपने पितरों की आजीवन पूजा करते हैं वे मृत्यु के पश्चात् पितरलोक में चले जाते हैं और पितर बन जाते हैं।
और
(भूतेज्याः) भूतों को पूजने वाले (भूतानि) भूतों को (यान्ति) प्राप्त होते हैं
अर्थात् भूत प्रेत की साधना करने वाले अन्त में स्वयं भी भूत प्रेत बन जाते हैं और भटकते रहते हैं
और
(मद्याजिनः) इसी प्रकार से मेरे मत अनुसार जो मेरा (#ब्रम्ह का) पूजन करते हैं,मेरे ऐसे भक्तजन (माम्) मुझे (अपि) ही (यान्ति) प्राप्त होते हैं।
सार - उपरोक्त सभी प्रकार के साधक / भक्त उपरोक्त सभी प्रकार के साधनाओं को करने के कारण से देव दूर्लभ अपने अनमोल मानव जीवन के मूल उद्देश्य, मूल लक्ष्य (#पूर्ण_मोक्ष) से वंचित रह जाते हैं क्योंकि गीता जी के अध्याय 4 के श्लोक नम्बर 32,34 के अनुसार वह #तत्वदर्शी_सन्त की खोज नहीं करते हैं और इस कारण से #पूर्ण_परमात्मा (#Complete_GOD) की जानकारी इन्हें नहीं हो पाती हैं और कालपुरूष के द्वारा फैलाए गए मिथ्या/अधुरे ज्ञान का अवलंबन करके अपना जीवन को बरबाद करके चले जाते हैं क्योंकि जिस लोक में वह जाएगा,वहां का समय पूरा होने के बाद उन्हें नर्क में धकेल दिया जाएगा फिर उसके बाद वहां का समय पूरा होने होने के बाद चौरासी लाख योनियों में उन्हें और दंड दिया जाएगा।
✓✓✓ अब आप यह तय करें कि मरने के पश्चात् आप कहां जाना चाहते हैं, क्या बनना चाहते हैं ?
अथवा पूर्ण परमात्मा की भक्ति करके इस जन्म मरण के बखेड़ा से हमेशा हमेशा के लिए निकलना चाहते हैं ?
गरीब,तीन चरण चिंतामणि साहेब,सर्व बदन में छाए हैं *
माता पिता कूल न बंधु,न कीन्हें जननी जाये **
और अधिक जानकारी हेतु सपरिवार देखिए
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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#आओ_जाने_भगवान_को...
रियल आध्यात्मिक नॉलेज अर्थात् तत्वज्ञान में बताया गया हैं कि
कबीर,राम कृष्ण अवतार हैं, इनका नाहीं संसार *
जिन साहेब ने संसार रचा हैं,सो किन्हु ना जाया नार **
तीन देव को सब कोई ध्यावे,चौथे का कोई मर्म ना पावे *
चौथे को छोड़ पंचम को ध्यावे,कहे कबीर वो हम पर आवे **
कबीर,ओंकार निष्चय भया,यह कर्ता मत जान *
सांचा शब्द कबीर का,परदे मॉही पहचान **
अरबों तो ब्रम्हा गये,उन्चास कोटि कन्हैया *
सात करोड़ तेरे शम्भू मर गये,मेरी एक नहीं पलैया **
तो वह अजर अमर अविनाशी परमात्मा कौन हैं ? यह जानने के लिए सपरिवार देखिए
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#तत्वदर्शी सन्त के उपदेश
#क्या_आप_जानते_हैं_?
पांचवे वेद अर्थात् पवित्र #सुक्ष्मवेद में निर्णायक ज्ञान बताया गया हैं, सुक्ष्मवेद की वाणी हैं...
गरीब,राम सरीखे राम हैं,सन्त सरीखे सन्त *
नाम सरीखा नाम हैं,नहीं आदि नहीं अन्त **
अर्थात् काल लोक में हम अज्ञानवश अनेक शक्तियों को भगवान मान बैठे हैं और सभी भेषधारी,चमत्कारी,हठयोगी और बड़े मनमोहक कथा कहने वाले सन्त को हम सच्चा सन्त समझ बैठे हैं और उसी प्रकार से उनके द्वारा जो भी नाम अथवा मंत्र दिए जा रहे हैं उन्हें हम तारक मंत्र जानकर साधना कर रहे हैं जबकि ऐसा नहीं हैं।
सतगुरू देव जी बताते हैं कि
✓ जिस परमेश्वर की शक्ति की ना कोई आदि हैं ना कोई अन्त हैं केवल उस परमेश्वर (#Allmighty_GOD_KABIR) की भक्ति ही हमारे लिए कल्याणकारी हैं।
✓ समस्त सन्तों में शिरोमणि केवल तत्वदर्शी सन्त ही होता हैं, वही जगत उद्धारक सन्त होता हैं। अतएव हमें केवल तत्वदर्शी सन्त से ही नाम उपदेश लेना चाहिए।
✓ शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना के यथार्थ मंत्र/मूल मंत्र केवल #सत्यनाम और #सारनाम हैं और इससे ही जीव का मोक्ष हो सकता हैं,अन्य मंत्र शास्त्र सम्मत नहीं होने से जीवन नाशक हैं।
✓✓✓ आतमज्ञान और परमातम् ज्ञान के विषय में अपने सारे सवालों के जवाब पाने के लिए अवश्य पढ़ें
पुस्तक ज्ञानगंगा
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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#कर्मफंद_जग_फंदिया...
कर्म फंद जग फंदिया,जप तप पूजा ध्यान ।
जेहि शब्द तें मुक्ति होवे,सो न पड़ै पहिचान ।।
🔅🔅🔅परम् पूज्य गुरूदेव जी बताते हैं कि परमात्मा की प्राप्ति के लिए परमात्मा के भक्ति के नाम पर जप तप पूजा ध्यान,नाना प्रकार के कर्मकांडों के फंदे में सारा संसार फंदा पड़ा हैं क्योंकि यथार्थ भक्ति मार्ग का ज्ञान कराने वाला उन्हें अब तक सतगुरू नहीं मिल पाया हैं और इसी कारण से संसार को उस मोक्ष मंत्र की पहचान (जानकारी) नहीं हो पाया हैं जिनके मिलने के पश्चात् साधक को और किसी भी प्रकार से कर्मकांड करने की आवश्यकता ही नहीं रह जाती हैं।
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#KabirisGod #spirituality #SantRampalJiMaharaj
#तत्वदर्शी सन्त के उपदेश
#हंसा_अमरलोक_निज_देशा...
कबीर साहेब कहते हैं कि
हंसा_अमरलोक_निज_देशा *
ब्रम्हा विष्णु महेश्वर देवआ,पड़ै भरम के भेषा *
जूगन जूगन हम आए चेताए,सारशब्द उपदेशा **
शिव सनकादिक और नारद हैं,गये काल कर्म क्लेशा *
आदि अन्त से हमै न चीन्हे,धरत काल की भेषा **
कोई कोई हंसा शब्द विचारे,निर्गुण करै निबेरा *
सारशब्द हिरदे में झलकै,सुखसागर की आशा **
पान परवाना शब्द विचारै,नरियर लेखा पाये *
कहे कबीर सुखसागर पहुंचे,छुटै करम की फॉसा **
✓✓✓ आतमज्ञान और परमातम् ज्ञान के विषय में पवित्र सतग्रंथों (कबीर सागर, कबीर बीजक, कबीर शब्दावली,वेद गीता पुराण कूर्रान बाइबल गुरूग्रन्थ साहेब) के प्रमाणों के सांथ अपने सारे सवालों के जवाब पाने के लिए अवश्य पढ़ें
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#तत्वदर्शी सन्त के उपदेश
#कौन_हैं_यम_के_हलकारे_?
पवित्र पांचवे वेद अर्थात् पवित्र #सुक्ष्मवेद में बताया गया हैं कि
गरीब,पाती तोड़े वृक्ष की,जड़ देवा नहीं खाय *
इससे तो चौरासी भली,ऊंट अजा ले जाय **
गरीब,कनफूक्का गुरू काल हैं,गुरू का धरिया स्वरूप *
या मे मीन न मेख हैं,जैसे संभल रूख **
गरीब,हलकारे तहकीक हैं,फांसी हंस विध्वंस *
सतगुरू साहेब साक्षी हैं,डुबोत हैं कूल बंस **
यथार्थ भक्ति विधि क्या हैं,किस सन्त के पास हैं ?
यह जानने के लिए अवश्य पढ़ें
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
#मूल_ज्ञान_उपदेश...
सारशब्द से सोहम् खिरिया,ताते लख चौरासी फिरिया *
अलल पंख ज्यों करै विचारा,जाये मिले अपने परिवारा **
🔆🔆🔆 परम् पूज्य गुरूदेव जी बताते हैं कि जब से यह जीव आत्मा अपने परमात्मा सत्यपुरूष से बिछुड़ी हैं तब से इस काल लोक में चौरासी लाख योनियों में भ्रमण कर रही हैं लेकिन यदि कोई अनल पक्षी के बच्चे तरह अपने माता पिता अर्थात् से अर्थात् सत्यपुरूष से अगाध प्रेम करें और सतगुरू के चरणों में समर्पित हो करके अपना जीवन जिये तो निष्चय ही यह जीव आत्मा अपने परमपिता परमात्मा सत्यपुरूष के पास अपने लोक (सत्यलोक) को चलि जाएगी, इसमें कोई संशय नहीं हैं क्योंकि परमात्मा के प्रति प्रेम भी भक्ति का ही एक स्वरूप हैं।
दासा तन की अधिक महिमा,सेवा कुंड नहाइये *
प्रेम भक्ति पतिव्रत दृढ़ करि,बहूरि न भवजल आइये **
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