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👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP - चाहिए। स्वामी जी ! सत्संगी की दिनचर्या क्या होनी " सुबह चार बजे उठ जाओ और हाथ मुंह धोकर एक दो प्रार्थना करके सुमिरन करो। उसके बाद भजन में बैठ जाओ। दिन में जिस वक्त काम से फुरसत हो उस समय चाहिए। समय को व्यर्थ नही जाने ध्यान भजन करना देना चाहिए। जिस समय यह मन काम से फुरसत में रहता है तो पिछली बातों को याद करता रहता है। साथ ही पछतावा भी करता है कि अगर ये जानता तो ऐसा बातें है। जैसा होना करता ऐसा नहीं करता। ये सब ச था वो सब हो गया पछतावा करने से कोई फायदा नहीं| लोगों के सुख-दुख की चर्चा करो, निंदा करो तारिफ करो इन सबसे परमार्थ नहीं होता। जीवन की स्वांसे गिनी हुई मिली हैं। जो स्वांसे बाहर निकल गई फिर वापस नहीं मिलेगी। जिस काम कोई व्यवहार न हो, कोई परमार्थ न हो उसमें वक्त खराब नहीं करना चाहिए। दुनियां के काम करते हुए भी मन से मालिक को याद करते रहना काज चाहिए। किसी भी वक्त में नहीं आनी चाहिए। सुस्ती शब्द-धुन की की चाह बनाये रक्खो। शब्द हर हर वक्त वक्त मस्तक में गूंज रहा है, बुला रहा है पर तुम्हारा గౌగే दुनियां की तरफ रहता है इसिलिए उसे सुन नहीं ध्यान पाते। शब्द-धुन बहुत मिठी आवाज है। उसमें से हर वक्त अमृत चूता रहता है। उसे सुनते रहने से मन में निर्मलता आती है। चाहे प्रीति से या हठ से रोज रोज भजन करो, ऐसा वक्त दुबारा नहीं मिलेगा। शब्द-धुन को सुनो। भजन में नागा नहीं होना चाहिए। चाहिए। स्वामी जी ! सत्संगी की दिनचर्या क्या होनी " सुबह चार बजे उठ जाओ और हाथ मुंह धोकर एक दो प्रार्थना करके सुमिरन करो। उसके बाद भजन में बैठ जाओ। दिन में जिस वक्त काम से फुरसत हो उस समय चाहिए। समय को व्यर्थ नही जाने ध्यान भजन करना देना चाहिए। जिस समय यह मन काम से फुरसत में रहता है तो पिछली बातों को याद करता रहता है। साथ ही पछतावा भी करता है कि अगर ये जानता तो ऐसा बातें है। जैसा होना करता ऐसा नहीं करता। ये सब ச था वो सब हो गया पछतावा करने से कोई फायदा नहीं| लोगों के सुख-दुख की चर्चा करो, निंदा करो तारिफ करो इन सबसे परमार्थ नहीं होता। जीवन की स्वांसे गिनी हुई मिली हैं। जो स्वांसे बाहर निकल गई फिर वापस नहीं मिलेगी। जिस काम कोई व्यवहार न हो, कोई परमार्थ न हो उसमें वक्त खराब नहीं करना चाहिए। दुनियां के काम करते हुए भी मन से मालिक को याद करते रहना काज चाहिए। किसी भी वक्त में नहीं आनी चाहिए। सुस्ती शब्द-धुन की की चाह बनाये रक्खो। शब्द हर हर वक्त वक्त मस्तक में गूंज रहा है, बुला रहा है पर तुम्हारा గౌగే दुनियां की तरफ रहता है इसिलिए उसे सुन नहीं ध्यान पाते। शब्द-धुन बहुत मिठी आवाज है। उसमें से हर वक्त अमृत चूता रहता है। उसे सुनते रहने से मन में निर्मलता आती है। चाहे प्रीति से या हठ से रोज रोज भजन करो, ऐसा वक्त दुबारा नहीं मिलेगा। शब्द-धुन को सुनो। भजन में नागा नहीं होना चाहिए। - ShareChat
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👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP - बांट लिया करो अपना दर्द सतगुरु फिर दर्द जाने दवा जाने और सतगुरु जाने बांट लिया करो अपना दर्द सतगुरु फिर दर्द जाने दवा जाने और सतगुरु जाने - ShareChat
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