रामचरितमानस मुनि भावन।बिरचेउ।संभु सुहावन।। त्रिबिधि दोष दुख दारिद दावन।कलि कुचालि कुलि कलुष नसावन।। भावार्थ:-यह रामचरितमानस मुनियोंका प्रिय है,इस सुहावने और पवित्र मानसकी शिवाजीने रचना की यह तीनों प्रकार के दोषों, दुखों और दरिद्रताको तथा कलियुगकी कुचालों और सब पापोंका नाश करनेवाला है।।५।। सादर जय सियाराम 🙏 जय हर हर महादेव 🕉️।। #🙏🏻सीता राम