#GodMorningThursday
गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में उस पूर्ण परमात्मा (सतपुरुष) की साधना का भी संकेत दिया है। कहा है कि उस पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति का तो केवल ॐ-तत्-सत इस तीन मंत्र के जाप का निर्देश है। यही साधना साधक जन सृष्टि के प्रारंभ में करते थे। #santrampaljimaharaj
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जेती लहर समुद्र की, तेती मन की दौर। सहजै हीरा नीपजे जो मन आवै ठौर।।
समुद्र की जितनी अनगिनत लहरें व तरंगें हैं उतनी ही मन की कामनाओं की दौड है यदि मन किसी प्रकार अपने आप शांत हो जाए, तो सहज भाव से ज्ञान रूपी अनमोल हीरे की प्राप्ति निश्चित ही है। इस जगत में सब परमात्मा के ज्ञान के अभाव में दुःखी और अशांत है। #santrampaljimaharaj
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पूर्ण परमात्मा
जिसने सर्व प्राणियों के रहने के लिए धरती, आकाश, अग्नि, पवन, पानी आदि पाँच तत्व रचे। वह अपने द्वारा रची सृष्टि का स्वयं ही मालिक है।
संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क नामदीक्षा व निःशुल्क पुस्तक प्राप्त करने के लिए संपर्क सूत्र:+917496801825 #santrampaljimaharaj
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सत्य साधना करने से परमात्मा के प्रति प्रेम उत्पन्न होता है आँखों में आसुओं की धारा बह चलती है इसे बिन बादल की बारिश कहते हैं सत्य साधना पापनाश करती है दिल रूपी दरिया स्वच्छ होती है यानी साधक नेक दिल का व्यक्ति हो जाता है।
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परमात्मा कबीर साहेब की वाणी
मन मैला तन ऊजरा, बगुला कपटी अंग!
तासौं तो कौवा भला, तन मन एकहि रंगी!
कबीर परमात्मा जी कहते हैं कि जो बगुले के समान कपटी हैं, जिनका मन मैला और तन उजला है, उनसे तो कौआ ही अच्छा है जो तन-मन से एक ही जैसा है। #santrampaljimaharaj
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कबीर,
क्षमा समान न तप,सुख नहीं संतोष समान। तृष्णा समान नहीं व्याधि कोई,धर्म न दया समान॥
परमेश्वर कबीरजी
ऐसा कहा गया है कि क्षमा करना सबसे बड़ा तप है, उसके समान कोई तप नहीं है। संतोष के बराबर कोई सुख नहीं है। #santrampaljimaharaj
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मुझसे बुरा न कोय
दूसरे में बुराई निकालने से पहले अपने अंदर झांकना चाहिए।
आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। #santrampaljimaharaj
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'कबीर वाणी'
पढ़ि पढ़ाबै कछु नहीं, ब्राह्मण भक्ति ना जान। ब्याहै, श्राधै कारनै, बैठा सुन्दा तान।।
अर्थात ब्राह्मण लोग गीता वेद आदि ग्रंथों से यथार्थ ज्ञान तो पढ़ते पढ़ाते भी नहीं हैं और भक्ति के विषय में कुछ भी नहीं जानते हैं। #santrampaljimaharaj
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ऊंचा धाम वह स्थान है जहाँ परमेश्वर कबीर जी का निवास बताया गया है। संत गरीबदास जी को स्वयं कबीर परमेश्वर मिले, उन्हें ब्रह्मांडों व सतलोक का ज्ञान कराया। उन्होंने बताया कि तीनों लोकों से ऊपर कबीर का सर्वोच्च धाम है।
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सांसारिक चीं-चूं में ही भक्ति करनी पड़ेगी
जैसे रहट की चीं-चूं आवाज बंद करने से पानी भी रुक जाता है, वैसे ही यदि हम संसार की हलचल से भागेंगे, तो भक्ति भी नहीं कर पाएंगे।
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इसलिए संसार के कार्य कभी शांत नहीं होंगे, इन्हीं के बीच भक्ति, स्मरण और सत्संग करना होगा। #santrampaljimaharaj




![santrampaljimaharaj - गीताअध्यायत] थ्लोक २३ मेउस पूर्षपयमान्मा ( सनपुरूष) कीसाधनाकाभीसकैनदियाहै। किहाहैकिउस पूर्ण परमात्माकीप्राप्तिकातौकचल &%@%=~!@6 33 इसतीन मँत्रकोजापकानिर्देशहै! यहीसाधना साधकजनसृष्टि कप्रारंभमे करतेथे। श्रीमद्गवदगीता ಬr तीन मंत्र केस्मरणकी विधि तत्वदर्शी ( पूर्ण ) सन्त बताएगा। गीताअध्यायत] थ्लोक २३ मेउस पूर्षपयमान्मा ( सनपुरूष) कीसाधनाकाभीसकैनदियाहै। किहाहैकिउस पूर्ण परमात्माकीप्राप्तिकातौकचल &%@%=~!@6 33 इसतीन मँत्रकोजापकानिर्देशहै! यहीसाधना साधकजनसृष्टि कप्रारंभमे करतेथे। श्रीमद्गवदगीता ಬr तीन मंत्र केस्मरणकी विधि तत्वदर्शी ( पूर्ण ) सन्त बताएगा। - ShareChat santrampaljimaharaj - गीताअध्यायत] थ्लोक २३ मेउस पूर्षपयमान्मा ( सनपुरूष) कीसाधनाकाभीसकैनदियाहै। किहाहैकिउस पूर्ण परमात्माकीप्राप्तिकातौकचल &%@%=~!@6 33 इसतीन मँत्रकोजापकानिर्देशहै! यहीसाधना साधकजनसृष्टि कप्रारंभमे करतेथे। श्रीमद्गवदगीता ಬr तीन मंत्र केस्मरणकी विधि तत्वदर्शी ( पूर्ण ) सन्त बताएगा। गीताअध्यायत] थ्लोक २३ मेउस पूर्षपयमान्मा ( सनपुरूष) कीसाधनाकाभीसकैनदियाहै। किहाहैकिउस पूर्ण परमात्माकीप्राप्तिकातौकचल &%@%=~!@6 33 इसतीन मँत्रकोजापकानिर्देशहै! यहीसाधना साधकजनसृष्टि कप्रारंभमे करतेथे। श्रीमद्गवदगीता ಬr तीन मंत्र केस्मरणकी विधि तत्वदर्शी ( पूर्ण ) सन्त बताएगा। - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_900344_3db9670_1777531887099_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=099_sc.jpg)
![santrampaljimaharaj - SATLOK ASHRAM MundKA जेती लहर समुद्र की, तेती मन की दौर। सहजै हीरा नीपजे , जो मन आवै ठौर।[ जितनी अनगिनत लहरें व तरंगें हैँ समुद्र उतनी ही मन की कामनाओं की दौड है। यदि किसी प्रकार अपने आप शांत हो जाए॰ तो मन रूपी अनमौल हीरे की से ज्ञान सहज भाव प्राप्ति निश्चित ही है। इस जगत में सब के अभाव मेँ ही दुःखी और பக ज्ञान अशांत हैँ। वह ज्ञान मन के शांत हौँने पर ही सुलभ होता है। SatlokAshramMundka] SADelhiMundka SatlokAshramMundkaOfficial SATLOK ASHRAM MundKA जेती लहर समुद्र की, तेती मन की दौर। सहजै हीरा नीपजे , जो मन आवै ठौर।[ जितनी अनगिनत लहरें व तरंगें हैँ समुद्र उतनी ही मन की कामनाओं की दौड है। यदि किसी प्रकार अपने आप शांत हो जाए॰ तो मन रूपी अनमौल हीरे की से ज्ञान सहज भाव प्राप्ति निश्चित ही है। इस जगत में सब के अभाव मेँ ही दुःखी और பக ज्ञान अशांत हैँ। वह ज्ञान मन के शांत हौँने पर ही सुलभ होता है। SatlokAshramMundka] SADelhiMundka SatlokAshramMundkaOfficial - ShareChat santrampaljimaharaj - SATLOK ASHRAM MundKA जेती लहर समुद्र की, तेती मन की दौर। सहजै हीरा नीपजे , जो मन आवै ठौर।[ जितनी अनगिनत लहरें व तरंगें हैँ समुद्र उतनी ही मन की कामनाओं की दौड है। यदि किसी प्रकार अपने आप शांत हो जाए॰ तो मन रूपी अनमौल हीरे की से ज्ञान सहज भाव प्राप्ति निश्चित ही है। इस जगत में सब के अभाव मेँ ही दुःखी और பக ज्ञान अशांत हैँ। वह ज्ञान मन के शांत हौँने पर ही सुलभ होता है। SatlokAshramMundka] SADelhiMundka SatlokAshramMundkaOfficial SATLOK ASHRAM MundKA जेती लहर समुद्र की, तेती मन की दौर। सहजै हीरा नीपजे , जो मन आवै ठौर।[ जितनी अनगिनत लहरें व तरंगें हैँ समुद्र उतनी ही मन की कामनाओं की दौड है। यदि किसी प्रकार अपने आप शांत हो जाए॰ तो मन रूपी अनमौल हीरे की से ज्ञान सहज भाव प्राप्ति निश्चित ही है। इस जगत में सब के अभाव मेँ ही दुःखी और பக ज्ञान अशांत हैँ। वह ज्ञान मन के शांत हौँने पर ही सुलभ होता है। SatlokAshramMundka] SADelhiMundka SatlokAshramMundkaOfficial - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_893347_69a53d9_1777531880383_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=383_sc.jpg)







