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#डॉBRअंबेडकरजी_की_बड़ीभूल कल्प और पुनर्जन्म की वास्तविक जानकारी जानने के लिए अवश्य देखिए डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल। भाग २ Factful Debates YtChannel पर। Factful Debates YtChannel #✝चर्च #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕌मस्जिद 🤲
✝चर्च - ভ্রুনচভি कल्पा ओर त्रिपिटक f1 dr 0R ग्रथ की वास्तविक பRL जानकारी " जी अबेडकर ப भग=2 जानने के लिए अवश्य देखिए भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल डॉ. ಭ[d] 2 - Factful Debates YouTube Channel पर| ভ্রুনচভি कल्पा ओर त्रिपिटक f1 dr 0R ग्रथ की वास्तविक பRL जानकारी जी अबेडकर ப भग=2 जानने के लिए अवश्य देखिए भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल डॉ. ಭ[d] 2 - Factful Debates YouTube Channel पर| - ShareChat
#डॉBRअंबेडकरजी_की_बड़ीभूल क्या गौतम बुद्ध को था कोई ज्ञान? जानने के लिए अवश्य देखिए डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल। भाग २ Factful Debates YtChannel पर। Factful Debates YtChannel #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕌मस्जिद 🤲 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #✝चर्च
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - Cu गौतम बुद्ध को या कोई ज्ञान ? बौदध२ के त्रिपिटक त्रिपिटक निणि 'du' बौद् u2 ग्रथपर ग्रथ महाखुलासा महाखुलासा E7nuaa  अंबेड़कर जी ujer s fuzid अंबेडकर जी भागा ी की बड़ी भूल alp 4 अवश्य  देखिए लिए তনন 3 भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी 50. भूल ச 2 Factful Debates YouTube Channel q Cu गौतम बुद्ध को या कोई ज्ञान ? बौदध२ के त्रिपिटक त्रिपिटक निणि 'du' बौद् u2 ग्रथपर ग्रथ महाखुलासा महाखुलासा E7nuaa  अंबेड़कर जी ujer s fuzid अंबेडकर जी भागा ी की बड़ी भूल alp 4 अवश्य  देखिए लिए তনন 3 भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी 50. भूल ச 2 Factful Debates YouTube Channel q - ShareChat
#डॉBRअंबेडकरजी_की_बड़ीभूल गौतम बुद्ध राजा के बेटे थे या जमींदार के? झूठ होगा बेनकाब अवश्य देखिए डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल | भाग - 1 Factful Debates YouTube Channel पर। #✝चर्च #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
✝चर्च - गतर्ण बुद्ंजाकिबिटे थ खघमोनए केर 3u Etfantim की बड़ी भूल  अवश्य देखिए डॉ॰ भीमराव अंबेडकर जी 1 Factful Debates यूट्यूब वैनल पर भाग Factful Debates YOUTUBE Hee Book : CHANNEL 7496801825 | @FacllulDebates  444K subscribers; 177 uide0s गतर्ण बुद्ंजाकिबिटे थ खघमोनए केर 3u Etfantim की बड़ी भूल  अवश्य देखिए डॉ॰ भीमराव अंबेडकर जी 1 Factful Debates यूट्यूब वैनल पर भाग Factful Debates YOUTUBE Hee Book : CHANNEL 7496801825 | @FacllulDebates  444K subscribers; 177 uide0s - ShareChat
#डॉBRअंबेडकरजी_की_बड़ीभूल गौतम बुद्ध को मानने वाले क्यों हुए नास्तिक? जानने के लिए अवश्य देखिए डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल | भाग - 1 Factful Debates YouTube Channel पर। Factful Debates YtChannel #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #✝चर्च
🕌मस्जिद 🤲 - गौतम बुद्घ को मानने वाले क्यौ हुए नास्तिक २य 5 Jபபa अबैडकर जी की पुस्तक ओर उनक धम्म बडा खुलासा लिए अवश्य देखिए डॉ. भीमर जानने के बड़ी भूल  अंबेडकर जी की | Factful Debates यूट्यूब चैनल पर HTT 1 ೆಕ  Factful Debates YOUTUBE fee Buuk CHANNEL 7496801825 @FactfulDebates 432k subscribers 165 videos गौतम बुद्घ को मानने वाले क्यौ हुए नास्तिक २य 5 Jபபa अबैडकर जी की पुस्तक ओर उनक धम्म बडा खुलासा लिए अवश्य देखिए डॉ. भीमर जानने के बड़ी भूल  अंबेडकर जी की | Factful Debates यूट्यूब चैनल पर HTT 1 ೆಕ  Factful Debates YOUTUBE fee Buuk CHANNEL 7496801825 @FactfulDebates 432k subscribers 165 videos - ShareChat
#डॉBRअंबेडकरजी_की_बड़ीभूल सिद्धार्थ को आखिर गौतम बुद्ध क्यों बनना पड़ा? इतिहास के सबसे बड़े झूठ का होगा पर्दाफाश अवश्य देखिए डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल | भाग - 1 Factful Debates YouTube Channel पर। Factful Debates YtChannel #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕌मस्जिद 🤲
🧘सदगुरु जी🙏 - आखिर को Rழf गौतम बुद्ध क्यों बनना पड़ा? पर्दाफाश बड़े झूठ का होगा ` सबसे के इतिहास अवश्य देखिए डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल 1 Factful Debates यूट्यूब चैनल पर भाग Factful Debates YOUTUBE fce Buuk Tಗ36au623 CHANNEL @lFactuDebaies  4~P8uDSPTIDPI 77dnos आखिर को Rழf गौतम बुद्ध क्यों बनना पड़ा? पर्दाफाश बड़े झूठ का होगा ` सबसे के इतिहास अवश्य देखिए डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल 1 Factful Debates यूट्यूब चैनल पर भाग Factful Debates YOUTUBE fce Buuk Tಗ36au623 CHANNEL @lFactuDebaies  4~P8uDSPTIDPI 77dnos - ShareChat
#SpiritualLeaderSaintRampalJi #tattvdarshisantrampalji #GreatestGuru_InTheWorld #TrueGuruSantRampalJiMaharaj #SantRampalJiMaharaj #AlmightyGodKabir #MustListen_Satsang Trailer | बाबा मस्तनाथ vs संत गरीबदास जी महाराज | कौन है शक्तिशाली? AI Video 18 अप्रैल https://www.facebook.com/share/v/1CQq4hkUDa/ #✝चर्च #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏
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अनमोल पुस्तक जीने की राह पढ़िए……………) 📖📖📖📖📖 जीने की राह पार्ट - 24 पृष्ठ: 59-62 दया-धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान। कह कबीर दयावान के पास रहे भगवान। शब्दार्थ :- धर्म वही करता है जिसके हृदय में दया है। दया धर्म की जड़ है तथा पाप वह करता है जिसमें अभिमान भरा है। अभिमान पाप की जड़ है। कबीर परमात्मा ने कहा है कि दयावान के साथ परमात्मा रहता है। अभिमानी के पास नहीं रहता। भक्त रामभक्त की पुत्रवधु जिस भक्तमति के पास बैठी थी, वह बोली कि बहन! आप भी कुछ सेवा कर लो। "सत्संग वचन":- गुरूदेव जी बताते हैं कि जो सेवा-भक्ति करेगा, उसी को फल मिलेगा। मैं भोजन खाऊँगा तो मेरा पेट भरेगा। आप खाओगे तो आपका पेट भरेगा। सब प्राणी परमात्मा के बच्चे हैं। आप धनी के बच्चे समझकर सेवा करो। जैसे एक धनी की लड़की 8-9 वर्ष की थी। उसकी देखरेख के लिए एक नौकरानी रखी थी। वह उस लड़की को गर्मियों में स्कूल छोड़ने जाती थी तो उस लड़की के ऊपर छाते (छतरी) से छाया करके चलती थी, स्वयं धूप सहन करती थी जिससे धनी खुश रहता था और नौकरानी को तनख्वाह देता था। आप सब यह विचार करके अपने- परायों का ध्यान रखें। सास-ससुर की सेवा, छोटे- बड़े की सेवा, सबका सम्मान करना आप जी का परम कर्तव्य है। यदि आप- अपने सास- ससुर, माता- पिता या अन्य आश्रितों की सेवा करोगे तो परमात्मा आपकी सेवा का प्रबंध करेगा। आप अपने छोटे- बड़े बच्चों को भी सत्संग में साथ लाया करो। बच्चों में भी छोटे- बड़ों की सेवा करने, अच्छा व्यवहार करने के संस्कार पड़ेंगे। वे बच्चों बड़े होकर आपकी ( वृद्ध हो जाओगे, तब) सेवा ऐसे ही करेंगे। जैसे बेटी एक बाप-माँ को छोड़कर नए माता (सास)-पिता (ससुर) के पास आती है। अब जन्म के माता-पिता तो इतने साथी थे। उन्होंने पाल-पोसकर नए माता-पिता को सौंप दिया। सास-ससुर के कर्तव्य है कि आने वाली बेटी को अपनी बेटी की तरह प्यार दे। भेदभाव स्वपन में भी नई बेटी व अपनी जन्म की बेटी में न करे जो झगड़े की जड़ है। पुत्रवधु को चाहिए कि नए घर की परिस्थितियों के अनुसार अपने को ढ़ाले। माँ के घर वाले बर्ताव को कम प्रयोग करे। अब पुत्रवधु का घर-परिवार यही (ससुराल) है। शिक्षा कथा :- एक पुत्रवधु अपनी सास को बहुत दुःखी रखती थी। उसक फूटे हुए मिट्टी के घड़े के टुकड़े (ठीकरे) में भोजन खिलाती थी जैसे कुत्तों क खिलाते हैं। कभी-कभी साफ करती थी। उसके लड़के का विवाह हुआ। कुछ समय उपरांत सास की मृत्यु हो गई। तब वह अपनी पुत्रवधु से बोली कि इस ठीकरे को फोड़कर बाहर फेंक दो। वह पुत्रवधु बोली कि सास जी ! आपको भी इसी ठीकरे में भोजन दिया करूंगी। आपने बड़े जुल्म वृद्धा के साथ किए हैं। तब वह अपनी गलती को समझकर बहुत रोई। पुत्रवधु बुद्धिमान थी। शाम तक उस ठीकरे को नहीं फोड़ा। उसकी सास को वह ठीकरा दुःश्मन दिखाई देने लगा। पुत्रवधु ने कहा कि माता जी! मैंने सत्संग सुने हैं। मैं अपने कर्म खराब नहीं करूंगी। यह कहकर ठीकरा फोड़ दिया। पाप कर्म के कारण सास को कैंसर का रोग हो गया। सारा-सारा दिन चिल्लाए। पुत्रवधु उसकी सेवा करे, कोई कसर नहीं छोड़ती थी। परंतु कहती थी कि सासु माँ! सेवा तो मैं दिलोजान से करूंगी, परंतु तेरे पाप के मैं नहीं बाँट पाऊँगी। यह कष्ट तो आपको ही भोगना पड़ेगा। यदि सत्संग सुने होते तो यह दिन नहीं देखने पड़ते। तब उस जालिम औरत ने कहा कि बेटी! मैं महापापिनी हूँ। क्या मेरा भी उद्धार हो सकता है? मैं भी दीक्षा लेना चाहती हूँ? लड़की सत्संगी घर की थी। उसको पता था कि दीक्षा लेकर भक्ति करने से पाप कर्म नष्ट होते हैं। जिनके अधिक पाप हैं, भक्ति करने से लाभ ही होगा, पाप कम ही होंगे तथा भविष्य में मानव जन्म भी मिल जाता है यदि मर्यादा में रहकर अंतिम श्वांस तक साधना करता रहे। सत्संग में गुरूदेव जी उदाहरण देकर समझाते है कि जैसे किसी का वस्त्र कम मैला है तो थोड़े प्रयास से ही निर्मल हो जाता है। यदि अधिक मैला है तो दो-तीन बार साबुन-पानी से धोने से निर्मल हो जाता है। जिसने अधिक मैला कर रखा है तथा अन्य दाग भी लगाए हैं तो ड्राईक्लीन से साफ हो जाता है। यदि साफ करने का इरादा दृढ़ हो तो मिस्त्री का काला हुआ वस्त्र भी साफ हो सकता है। लड़की (पुत्रवधु) को पता था कि सास जी ने तो मिस्त्री वाली दशा कर ली। फिर भी परमात्मा की शरण से अवश्य लाभ ही होता है। इस उद्देश्य से अपनी सासू माँ को दीक्षा दिला दी। कुछ समय पश्चात् कैंसर में कुछ पीड़ा कम हो गई। सत्संग सुनकर उसे रोना आया कि माता-पिता की बहू-बेटों से क्या आकांक्षा होती है? मुझ पापिन ने अपनी सासू जी के साथ क्या बर्ताव किया। मुझे तो यह रोग होना ही था। यदि पहले यह ज्ञान सुनने को मिल जाता तो मैं क्यों यह पाप करती? निर्मल जीवन जीती। सासू माँ की आत्मा भी खुश करती। अपना जीवन सफल कर लेती। उपरोक्त वचन सुनकर रामभक्त जी की पुत्रवधु उस अपनी सहेली (पुरानी भक्तमति) से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी। आधा घंटे तो अपने को रोक नहीं सकी। अधिक सांत्वना के पश्चात् सुबकी रूकी और अपने ससुर पिता के साथ किए बर्ताव का उल्लेख रोते-रोते किया। अपने ससुर जी की इंसानियत भी बताई कि कभी अपने बेटे से भी नहीं बताया कि तेरी बहू मेरे साथ ऐसा बुरा बर्ताव कर रही है। बेटे के पूछने पर यही कहता था कि बेटा किसी प्रकार की सेवा में कमी नहीं है। बड़े अच्छे घर की बेटी है, समझदार है। हमारा सौभाग्य है कि यह अपने घर आ गई। हमारा तो इस बेटी ने घर बसा दिया है। मैं पापिन ये शब्द सुनकर भी नरम नहीं पड़ी क्योंकि मेरी आत्मा पर पाप कर्मों की परत चढ़ चुकी थी जो दो-तीन बार सत्संग सुनने के पश्चात् पाप की परत उतरी है। आत्मा में अच्छे संस्कार उठने लगे हैं। तीन दिन सत्संग सुनकर भक्त रामभक्त, पोता-पोती तथा पुत्रवधु के साथ घर पर आ गया। बच्चों ने भी वहाँ छोटे बच्चों को खाना खिलाने, पानी पिलाने की सेवा करते अन्य पुराने सत्संगी बच्चों को देखा तो वे भी सेवा करने लगे। घर पर आकर अपने दादा जी के लिए पानी की बाल्टी भरकर दोनों भाई-बहन लटका लाए और बोले, दादा जी! स्नान कर लो। रामभक्त जी ने कहा कि बच्चो! तुम्हारे पेट में दर्द हो जाएगा। इतना भार मत उठाओ। मैं अपने आप ले आऊँगा। बच्चे बोले कि दादा जी! सत्संग में गुरू जी ने बताया था कि सेवा करने से लाभ ही लाभ मिलता है, कोई कष्ट नहीं होता। हम रोटी खाऐंगे तो हमारा पेट भरेगा। हम सेवा करेंगे तो हमें पुण्य मिलेगा। यदि रोग भी हो तो भक्ति और सेवा से समाप्त हो जाता है। वहाँ आश्रम में अनेकों माई-भक्त बता रहे थे कि हम बीमार रहते थे। नाम लेने के पश्चात् जैसी सेवा कर सके, करने लगे। हम स्वस्थ हो गए। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। देखो! हमारी दवाईयों की पर्चियाँ, चार वर्ष से उपचार चल रहा था। अब कोई दवाई नहीं खाते। (ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 में भी यही प्रमाण है कि यदि रोगी मृत्यु के निकट पहुँच गया है यानि उसको असाध्य रोग भी हो गया हो। यदि वह भक्ति पर लग जाए तो परमात्मा उसको मृत्यु के मुख से निकालकर ले आए। उसे स्वस्थ करके शत प्रतिशत यानि पूरी आयु जीवन दे देता है। -लेखक) इतनी देर में पुत्रवधु आई और कहा, पिता जी! स्नान कर लो। धोती यहीं छोड़ देना। मैं आप साफ कर दूंगी। रामभक्त जी ने कहा कि बेटी! आपको घर का बहुत कार्य करना होता है, खाना बनाना, पानी लाना, पशु संभालना है। मैं आप धो लूंगा । मेरी टाँग भी अब ठीक हो गई है। बस थोडा-सा लंग रहता है। रामभक्त स्नान करके धोती बदलकर धोती धोने लगा। उसी समय बच्चों ने आकर धोती छीन ली और लेकर अंदर भाग गए और अपनी माता जी को दे दी। फिर कुर्ता ले गए। दूसरा कुर्ता लाकर दे दिया। लड़का खेत से पशुओं का चारा लेकर आया और पहले की तरह पिता को देखा और बिना बोले आगे घर में चला गया। उसने देखा कि पत्नी निर्मला हलवा बना रही थी। उसने सोचा कोई त्यौहार होगा। फिर सब्जी-रोटी बनाई। सर्वप्रथम गुरू भगवान को दो कटोरियों में भोग लगाया तथा फिर एक थाल में रोटी, कटोरियों में हलवा तथा सब्जी डालकर अपने ससुर जी के पास लेकर गई और बोली, पिता जी! भोजन खा लो। भूख लगी होगी, दूर से आए हैं। रामभक्त बोला, बेटी! मेरे को यह हजम नहीं होता। सूखी रोटियाँ ला दे मैं बीमार हो जाऊँगा। रामभक्त जी ने सोचा था कि भावना में बहकर बेटी आज तो सब सेवा कर देगी, परंतु लड़का इसको धमकाएगा क्योंकि उसको सत्संग का ज्ञान नहीं है। कहीं घर में झगड़ा ना हो जाए। इतने में लड़का भी आ गया। अपनी पत्नी को बोला, पिता जी ठीक कह रहे हैं, ले चल अंदर। पिता का कमरा गली पर था। बच्चों का रहने का अंदर को था। पत्नी बोली, चुप रह, मैंने बहुत पाप इकट्ठे कर लिये। अब पिता जी की सेवा मैं स्वयं करूंगी। लड़का चुप हो गया। रामभक्त ने दोनों बच्चों को थोड़ा-थोड़ा हलवा दिया। पुत्रवधु को देने लगा तो बोली कि आप क्या खाओगे? घर पर और भी बहुत सारा हलवा प्रसाद बचा है। पिता जी आप खाओ। नहीं खाओगे तो मेरी आत्मा रोएगी। भक्त रामभक्त जी ने गुरूदेव भगवान का स्मरण किया और भोजन खाया। प्रतिदिन पुत्रवधु स्वयं नरम-नरम रोटियाँ गर्म-गर्म लाकर अपने हाथों खिलाए। प्रतिदिन वस्त्र साफ करे और कहे, पिता जी! भजन कर लो। एक दिन रामभक्त जी की बूआ का लड़का भक्त रामनिवास आया। रामभक्त जी ने उसको सीने से लगा लिया और बोला रै भाई! हमारा घर तो तेरी कृपा से स्वर्ग बन गया। भक्त रामनिवास बोला कि मामा के बेटे रामनिवास से कुछ ना हुआ गुरूदेव जी की शब्द-शक्ति का करिश्मा है। आप और मैं तो पहले इकट्ठे बत्ती-डण्डा खेला करते। मेरे करने से होता तो पहले ही हो जाता। गुरु जी कह रहे थे कि रामभक्त पिछले जन्मों में भक्त था। इससे घर के मोह के कारण मर्यादा में चूक बनी थी। उसके कारण इतना कष्ट उठाया है। अब यह महादुःखी हो चुक था। तब तेरे साथ आया है। नहीं तो आप कितनी बार रामभक्त से पहले कह चुके थे कि सत्संग में चल, परंतु मोह-माया में अन्धा हो चुका था। यह कष्ट और पुत्र-पुत्रवधु का व्यवहार इसके लिए वरदान बन गया है। कबीर जी ने कहा है कि :- कबीर, सुख के माथे पत्थर पड़ो, जो नाम हृदय से जाय। बलिहारी वा दुःख के, जो पल-पल राम रटाय ।। भावार्थ :- हे परमात्मा! इतना सुख भी ना देना जिससे तेरी भूल पड़े। जिस दुःख से परमात्मा की पल-पल याद बनी रहे, वैसे दुःख सदा देते रहना। मैं बलिहारी जाऊँ उस दुःख को जिसके कारण परमात्मा की शरण मिली। भक्त रामभक्त जी ने भक्त रामनिवास जी से कहा कि अब के सत्संग में बेटे प्रेम सिंह को ले जाना। इसका उद्धार हो जाएगा। अगले सत्संग में जो एक महीने पश्चात् होना था। भक्त रामनिवास जी आए और प्रेम सिंह को अपने घर ले जाने के बहाने ले गए। घर से सत्संग में ले गए। तीन दिन तक आश्रम में रहे, सत्संग सुना। अन्य पुराने भक्तों से उनकी आप-बीती सुनी तो सत्संग के रंग में रंग गया। भक्त रामभक्त जी का परिवार एकदम बदल गया। भक्ति-सेवा करके कल्याण को प्राप्त हुआ। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕌मस्जिद 🤲 #✝चर्च
🙏गुरु महिमा😇 - CகL दया धर्म का मूल है , पाप मूल अभिमान | कह कबीर दयावान के पास रहे भगवान । | धर्म वही करता है जिसके हृदय में दया है। तथा पाप वह करता है जिसमें अभिमान भरा है। कबीर परमात्मा ने कहा है दयावान के पास परमात्मा रहता है। अभिमानी के पास नहीं रहता | जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji SUPREMEGODORG  @SAINTRAMPAUIM SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ CகL दया धर्म का मूल है , पाप मूल अभिमान | कह कबीर दयावान के पास रहे भगवान । | धर्म वही करता है जिसके हृदय में दया है। तथा पाप वह करता है जिसमें अभिमान भरा है। कबीर परमात्मा ने कहा है दयावान के पास परमात्मा रहता है। अभिमानी के पास नहीं रहता | जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji SUPREMEGODORG  @SAINTRAMPAUIM SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat
#सत_भक्ति_संदेश "परम पिता" परमपिता जैसे रखें ऐसे ही रहना होगा हमें। - परमसंत रामपाल जी महाराज #✝चर्च #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇
✝चर्च - परम पिता परमपिता जैसे रखे ऐसे ही रहना होगा हमको। बंदीछोड़ सतगुरू रामपाल जी महाराज SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl 0 SUPREMEGODORG @SAINTRAMPALJIM MAHARAJ SAINT RAMPAL JI परम पिता परमपिता जैसे रखे ऐसे ही रहना होगा हमको। बंदीछोड़ सतगुरू रामपाल जी महाराज SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl 0 SUPREMEGODORG @SAINTRAMPALJIM MAHARAJ SAINT RAMPAL JI - ShareChat
#SaintRampalJiQuotes "Almighty" We should dwell in whatever state the Almighty Father chooses for us - Sant Rampal Ji Maharaj #✝चर्च #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏
✝चर्च - Supreme Sant Rampal Ji Maharaj] Altoigkly | ತ چ 8 4 8 should dwell in whatever sraue We Father chooses for us Almighfy the JogotGuruRompolJi.org @SaintRampalJiM Supreme Sant Rampal Ji Maharaj] Altoigkly | ತ چ 8 4 8 should dwell in whatever sraue We Father chooses for us Almighfy the JogotGuruRompolJi.org @SaintRampalJiM - ShareChat
#SpiritualLeaderSaintRampalJi #tattvdarshisantrampalji #TrueGuruSantRampalJiMaharaj #GreatestGuru_InTheWorld #SantRampalJiMaharaj #SaintRampalJiMaharaj #AlmightyGodKabir #MustListen_Satsang Shraddha TV Satsang ll 14-04-2026 ll Episode 3260 ll Sant Rampal Ji Maharaj Live Satsang https://youtube.com/live/HvEc5UYfv9g?si=DWhN9YJT8ZND1dbp #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕌मस्जिद 🤲 #✝चर्च
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