सुनील कुमार भल्ला
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सुनील कुमार भल्ला
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - == S 06 6 शप्रत्येक राष्ट्र को किसी न किसी दैव निर्दिष्ट उद्देश्य को पूरा करना होता है, प्रत्येक रराष्ट्र को संसार में एक संदेश देना होता है तथा प्रत्येक राष्ट्र को एक बिशेष ध्येय को प्राप्त करना होता है।" | स्वामी विवेकानन्द। 3ڈ * >~ == S 06 6 शप्रत्येक राष्ट्र को किसी न किसी दैव निर्दिष्ट उद्देश्य को पूरा करना होता है, प्रत्येक रराष्ट्र को संसार में एक संदेश देना होता है तथा प्रत्येक राष्ट्र को एक बिशेष ध्येय को प्राप्त करना होता है।" | स्वामी विवेकानन्द। 3ڈ * >~ - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - = S 06 संसार में संघर्ष से शायद सफलता मिल जफएलपतर तरसामर्मपाणमें से ही मिलेगी ।" క = S 06 संसार में संघर्ष से शायद सफलता मिल जफएलपतर तरसामर्मपाणमें से ही मिलेगी ।" క - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 3 मई 05 "जैसे प्रत्येक मनुष्य का एक् व्यक्तित्व होता है ठीक ్గి रष्ट्ी फ्राकभर अ्पनक एक  व्यक्तित्व होता है।" | स्वामी विवेकानन्द। 35 3ڈ * 3 मई 05 "जैसे प्रत्येक मनुष्य का एक् व्यक्तित्व होता है ठीक ్గి रष्ट्ी फ्राकभर अ्पनक एक  व्यक्तित्व होता है।" | स्वामी विवेकानन्द। 35 3ڈ * - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - एसकेबी  मई 05 "प्रभु की उपेक्षा करते ही हमारी दशा हो जाती है कि 1 ಕ್ವ तीनों और से त्रितापरूपी दावाग्नि हमें भस्म करने ব্ধী নীড়ী 3া ২৪্ী ৯1" | -{pehi एसकेबी  मई 05 "प्रभु की उपेक्षा करते ही हमारी दशा हो जाती है कि 1 ಕ್ವ तीनों और से त्रितापरूपी दावाग्नि हमें भस्म करने ব্ধী নীড়ী 3া ২৪্ী ৯1" | -{pehi - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - = मई 05 सम्मान किसी व्यक्तिका 3109 नही होता , HI केवल पद, प्रतिष्ठा, पैसा और आवश्यकता का होता हैम्मापरभ्ती समजप्ंसमाय्ही तो वर्तमान में समाज का स्वरूप है।" క = मई 05 सम्मान किसी व्यक्तिका 3109 नही होता , HI केवल पद, प्रतिष्ठा, पैसा और आवश्यकता का होता हैम्मापरभ्ती समजप्ंसमाय्ही तो वर्तमान में समाज का स्वरूप है।" క - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - E] S 04 "्यह सत्य है कि संसार को समयनसमय पर आलोचना की जरूरत हुआ करती है यहॉ तक ; कि कठोर ओलोचना की भी; पर वह केवल अल्प कालॅ के लिए ही होती है। हमेशा के लिए तो उन्नतिकारी और रचनात्मक कार्य ही वांछित होते हैं, आलोचनात्मकः याध्वंसात्मक नहीं I" स्वामी विवेकानन्द। * 35 < E] S 04 "्यह सत्य है कि संसार को समयनसमय पर आलोचना की जरूरत हुआ करती है यहॉ तक ; कि कठोर ओलोचना की भी; पर वह केवल अल्प कालॅ के लिए ही होती है। हमेशा के लिए तो उन्नतिकारी और रचनात्मक कार्य ही वांछित होते हैं, आलोचनात्मकः याध्वंसात्मक नहीं I" स्वामी विवेकानन्द। * 35 < - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - एसकेबी - S 04 अनेक प्रकार से समझाए और सिखाए जाने पर भी दुष्ट व्यक्ति अपनी कुटिलता को 1 ಕ್ವ नहीं छोड़ता , जिस प्रकार नीम का वृक्ष दूध और घी से सींचे जाने पर भी मधुरता को प्राप्त नहीं होता ।" 3 -{pehi एसकेबी - S 04 अनेक प्रकार से समझाए और सिखाए जाने पर भी दुष्ट व्यक्ति अपनी कुटिलता को 1 ಕ್ವ नहीं छोड़ता , जिस प्रकार नीम का वृक्ष दूध और घी से सींचे जाने पर भी मधुरता को प्राप्त नहीं होता ।" 3 -{pehi - ShareChat