Aman Yadav
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#📲मेरा पहला पोस्ट😍 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🕉 शिव भजन🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕
📲मेरा पहला पोस्ट😍 - निरासा और दुःख का अंत कैसे करें - ओशो ओशो के अनुसार निरासा और दुःख का मूल कारण है मन की पकड़, अपेक्षाऐं और अतीत ्भविष्य में भटकना| जब व्यक्ति जीवन को अपनी इच्छा के अनुसार चलाना चाहता है और ऐसा नहीं होता, तब भीतर दुःख जन्म लेता है १. जागरूकता ही मुक्ति का द्वार है दुःख कोई सजा नहीं है, दुःख एक संकेत है कि तुम अपने से दूर हो गए हो। जब तुम अपने विचारों, भावनाओं स्वभाव और पीड़ाओं को साक्षी भाव से देखना शुरू करते हो, तब धीरे-धीरे मन शांत होने लगता है और दुःख समाप्त होने लगता है। २. वर्तमान क्षण में जीओ भविष्य चिंता देता है, अतीत पछतावा देता है लेकिन जो अभी में जीता है उसके भीतर शांति और आशा का जन्म होता है वर्तमान क्षण ही जीवन है। इसी क्षण में 8, पूर्णता क्षण में आनंद है। इसी विरोध मृत करो ३. स्वीकार करो निरासा और दुःख से भागो मत, उन्हें दबाओ मत। उन्हें पूरी सजगता से स्वीकार करो।जो कुछ भी है, उसे हां' कहो स्वीकार करते ही ऊर्जा का विरोध समाप्त होता है और रूपांतरण शुरू हो जाता है। ४. ध्यान, मौन और अकेलापन 66 मौन और अकेले में स्वयं के साथ बैठना यही वह ध्यान दुःख को समझ लो, ध्यान से तुम आग है जिसमें दुःख जलकर राख हो जाता है। अपने भीतर उतरते हो, और वहीं तुम्हें शांति, प्रेम और आनंद तोड़ता नहीं, तुम्हें दुःख RedI 81 কা মান जागृत करता है। ব্তুঃস্র ক 3ন ক যল ওপায় समझ ही रूपांतरण है। 9१ स्वयं को और जीवन को स्वीकार करो। हर व्यक्ति अद्वितीय है। तुलना करना छोड़ दो प्रकूति के साथ समय बिताओ| OSHO प्रेन करो, क्षमा करो और कृतज्ञ रहो। ध्यान करो और साक्षी भाव में जियो। जब भीतर जागरूकता का दीपक जलता है॰ निरासा धीरे धीरे आनंद में बदल जाती है। নন निरासा और दुःख का अंत कैसे करें - ओशो ओशो के अनुसार निरासा और दुःख का मूल कारण है मन की पकड़, अपेक्षाऐं और अतीत ्भविष्य में भटकना| जब व्यक्ति जीवन को अपनी इच्छा के अनुसार चलाना चाहता है और ऐसा नहीं होता, तब भीतर दुःख जन्म लेता है १. जागरूकता ही मुक्ति का द्वार है दुःख कोई सजा नहीं है, दुःख एक संकेत है कि तुम अपने से दूर हो गए हो। जब तुम अपने विचारों, भावनाओं स्वभाव और पीड़ाओं को साक्षी भाव से देखना शुरू करते हो, तब धीरे-धीरे मन शांत होने लगता है और दुःख समाप्त होने लगता है। २. वर्तमान क्षण में जीओ भविष्य चिंता देता है, अतीत पछतावा देता है लेकिन जो अभी में जीता है उसके भीतर शांति और आशा का जन्म होता है वर्तमान क्षण ही जीवन है। इसी क्षण में 8, पूर्णता क्षण में आनंद है। इसी विरोध मृत करो ३. स्वीकार करो निरासा और दुःख से भागो मत, उन्हें दबाओ मत। उन्हें पूरी सजगता से स्वीकार करो।जो कुछ भी है, उसे हां' कहो स्वीकार करते ही ऊर्जा का विरोध समाप्त होता है और रूपांतरण शुरू हो जाता है। ४. ध्यान, मौन और अकेलापन 66 मौन और अकेले में स्वयं के साथ बैठना यही वह ध्यान दुःख को समझ लो, ध्यान से तुम आग है जिसमें दुःख जलकर राख हो जाता है। अपने भीतर उतरते हो, और वहीं तुम्हें शांति, प्रेम और आनंद तोड़ता नहीं, तुम्हें दुःख RedI 81 কা মান जागृत करता है। ব্তুঃস্র ক 3ন ক যল ওপায় समझ ही रूपांतरण है। 9१ स्वयं को और जीवन को स्वीकार करो। हर व्यक्ति अद्वितीय है। तुलना करना छोड़ दो प्रकूति के साथ समय बिताओ| OSHO प्रेन करो, क्षमा करो और कृतज्ञ रहो। ध्यान करो और साक्षी भाव में जियो। जब भीतर जागरूकता का दीपक जलता है॰ निरासा धीरे धीरे आनंद में बदल जाती है। নন - ShareChat