राकेश कुमार
ShareChat
click to see wallet page
@3113493412
3113493412
राकेश कुमार
@3113493412
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5 संन्यासयोग श्लोक 8-9 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 3[/8؟ 318414 5 e-ild 8-9 मन्येत तत्त्ववित् नैव किञ्चित्करोमीति ಶ೯ಗ पश्यञ्शृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रन्नश्नन्गच्छन्स्वपञ्श्वसन् || प्रलपन्विसृजन्गृह्नन्नुन्मिषन्निमिषन्नपि 4 इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेषु वर्तन्त इति धारयन् II अनुवाद तत्व को जानने वाला सांख्ययोगी तो देखता हुआ, सुनता हुआ, स्पर्श करता हुआ, सूँघता हुआ, भोजन करता हुआ, गमन करता हुआ, सोता हुआ, श्वास लेता हुआ, बोलता हुआ, त्यागता हुआ, ग्रहण करता हुआ तथा आँखों को खोलता और मूँदता हुआ भी॰ सब इन्द्रियाँ अपने अपने अर्थों में बरत रही हैं- इस प्रकार समझकर निःसंदेह ऐसा 43 भी नहीं करता हूँ। TT f 3[/8؟ 318414 5 e-ild 8-9 मन्येत तत्त्ववित् नैव किञ्चित्करोमीति ಶ೯ಗ पश्यञ्शृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रन्नश्नन्गच्छन्स्वपञ्श्वसन् || प्रलपन्विसृजन्गृह्नन्नुन्मिषन्निमिषन्नपि 4 इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेषु वर्तन्त इति धारयन् II अनुवाद तत्व को जानने वाला सांख्ययोगी तो देखता हुआ, सुनता हुआ, स्पर्श करता हुआ, सूँघता हुआ, भोजन करता हुआ, गमन करता हुआ, सोता हुआ, श्वास लेता हुआ, बोलता हुआ, त्यागता हुआ, ग्रहण करता हुआ तथा आँखों को खोलता और मूँदता हुआ भी॰ सब इन्द्रियाँ अपने अपने अर्थों में बरत रही हैं- इस प्रकार समझकर निःसंदेह ऐसा 43 भी नहीं करता हूँ। TT f - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 31 3ಣ अध्याय 5 श्लोक 6 संन्यासस्तु महाबाहो दुःखमाप्तुमयोगतः ( योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म नचिरेणाधिगच्छति M अनुवाद परन्तु हे अर्जुन ! कर्मयोग के बिना संन्यास अर्थात् मन, इन्द्रिय और शरीर द्वारा होने वाले सम्पूर्ण कर्मों में कर्तापन का त्याग प्राप्त होना कठिन है और भगवत्स्वरूप को मनन करने वाला कर्मयोगी परब्रह्म परमात्मा को शीघ्र ही प्राप्त हो जाता है। 31 3ಣ अध्याय 5 श्लोक 6 संन्यासस्तु महाबाहो दुःखमाप्तुमयोगतः ( योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म नचिरेणाधिगच्छति M अनुवाद परन्तु हे अर्जुन ! कर्मयोग के बिना संन्यास अर्थात् मन, इन्द्रिय और शरीर द्वारा होने वाले सम्पूर्ण कर्मों में कर्तापन का त्याग प्राप्त होना कठिन है और भगवत्स्वरूप को मनन करने वाला कर्मयोगी परब्रह्म परमात्मा को शीघ्र ही प्राप्त हो जाता है। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 31 3ಣ अध्याय 5 श्लोक 7 योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः| सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते II अनुवाद जिसका मन अपने वश में है, जो जितेन्द्रिय विशुद्ध अन्तःकरण वाला है और एवं सम्पूर्ण प्राणियों का आत्मरूप परमात्मा ही जिसका आत्मा है, ऐसा कर्मयोगी कर्म करता हुआ भी लिप्त नहीं होता। 31 3ಣ अध्याय 5 श्लोक 7 योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः| सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते II अनुवाद जिसका मन अपने वश में है, जो जितेन्द्रिय विशुद्ध अन्तःकरण वाला है और एवं सम्पूर्ण प्राणियों का आत्मरूप परमात्मा ही जिसका आत्मा है, ऐसा कर्मयोगी कर्म करता हुआ भी लिप्त नहीं होता। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 3439/ अध्याय 5 श्लोक १० ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्ग त्यक्त्वा करोति यः | लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा II अनुवाद जो पुरुष सब कर्मों को परमात्मा में अर्पण करके और आसक्ति को त्याग कर कर्म करता है, वह पुरुष जल से कमल के पत्ते की भाँति पाप से लिप्त नहीं होता। 3439/ अध्याय 5 श्लोक १० ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्ग त्यक्त्वा करोति यः | लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा II अनुवाद जो पुरुष सब कर्मों को परमात्मा में अर्पण करके और आसक्ति को त्याग कर कर्म करता है, वह पुरुष जल से कमल के पत्ते की भाँति पाप से लिप्त नहीं होता। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 313ಣ' अध्याय 5 श्लोक ११ कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि | योगिनः कर्म कुर्वन्ति सङ्गं त्यक्त्वात्मशुद्धये Il अनुवाद कर्मयोगी ममत्वबुद्धिरहित केवल इन्द्रिय, मन, बुद्धि और शरीर द्वारा भी आसक्ति को त्याग कर लिए अन्तःकरण की शुद्धि के कर्म करते हैं। 313ಣ' अध्याय 5 श्लोक ११ कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि | योगिनः कर्म कुर्वन्ति सङ्गं त्यक्त्वात्मशुद्धये Il अनुवाद कर्मयोगी ममत्वबुद्धिरहित केवल इन्द्रिय, मन, बुद्धि और शरीर द्वारा भी आसक्ति को त्याग कर लिए अन्तःकरण की शुद्धि के कर्म करते हैं। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 313ಣ' अध्याय 5 श्लोक १२ युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम् | अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते II अनुवाद कर्मयोगी कर्मों के फल का त्याग करके भगवत्प्राप्ति रूप शान्ति को प्राप्त होता है और सकामपुरुष कामना की प्रेरणा से फल में आसक्त होकर बँधता है। 313ಣ' अध्याय 5 श्लोक १२ युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम् | अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते II अनुवाद कर्मयोगी कर्मों के फल का त्याग करके भगवत्प्राप्ति रूप शान्ति को प्राप्त होता है और सकामपुरुष कामना की प्रेरणा से फल में आसक्त होकर बँधता है। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 3439/ अध्याय 5 श्लोक १३ सर्वकर्माणि मनसा संन्यस्यास्ते सुखं वशी नवद्वारे पुरे देही नैव कुर्वन्न ক্াংযন Il अनुवाद अन्तःकरण जिसके वश में है, ऐसा सांख्य योग का आचरण करने वाला पुरुष न करता हुआ और न करवाता हुआ ही नवद्वारों वाले शरीर रूप घर में सब कर्मों को मन से त्यागकर आनंदपूर्वक सच्चिदानंदघन परमात्मा के स्वरूप में स्थित रहता है। 3439/ अध्याय 5 श्लोक १३ सर्वकर्माणि मनसा संन्यस्यास्ते सुखं वशी नवद्वारे पुरे देही नैव कुर्वन्न ক্াংযন Il अनुवाद अन्तःकरण जिसके वश में है, ऐसा सांख्य योग का आचरण करने वाला पुरुष न करता हुआ और न करवाता हुआ ही नवद्वारों वाले शरीर रूप घर में सब कर्मों को मन से त्यागकर आनंदपूर्वक सच्चिदानंदघन परमात्मा के स्वरूप में स्थित रहता है। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 313ಣ' अध्याय 5 श्लोक १४ कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य W: মূতনি 7 न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते II अनुवाद परमेश्वर मनुष्यों के न तो कर्तापन की, न कर्मों की और न कर्मफल के संयोग की रचना करते हैं, किन्तु  स्वभाव ही बर्त रहा है। 313ಣ' अध्याय 5 श्लोक १४ कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य W: মূতনি 7 न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते II अनुवाद परमेश्वर मनुष्यों के न तो कर्तापन की, न कर्मों की और न कर्मफल के संयोग की रचना करते हैं, किन्तु  स्वभाव ही बर्त रहा है। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 31 3ಣ' अध्याय 5 श्लोक १५ विभुः नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः Il अनुवाद सर्वव्यापी परमेश्वर भी न किसी के पाप कर्म को और न किसी के शुभकर्म को ही ग्रहण करता है, fa अज्ञान द्वारा ज्ञान ढँका हुआ है, उसी से सब अज्ञानी मनुष्य मोहित हो रहे हैं। 31 3ಣ' अध्याय 5 श्लोक १५ विभुः नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः Il अनुवाद सर्वव्यापी परमेश्वर भी न किसी के पाप कर्म को और न किसी के शुभकर्म को ही ग्रहण करता है, fa अज्ञान द्वारा ज्ञान ढँका हुआ है, उसी से सब अज्ञानी मनुष्य मोहित हो रहे हैं। - ShareChat