राकेश कुमार ॐ भूर्भुवः स्वः।
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राकेश कुमार ॐ भूर्भुवः स्वः।
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ओ३म् भूर्भुवः स्वः।
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - 313ಣ' श्रीमद्भगवद्नीता अध्याय 6 आत्मसंयमयोगः श्लोक ४० श्रीभगवानुवाच [ पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते | न हि कल्याणकृत्कश्चिदुर्गतिं तात गच्छति II अनुवाद श्री भगवान बोले- हे पार्थ! उस पुरुष का न तो इस लोक में नाश होता है और न परलोक में ही क्योंकि हे प्यारे ! लिए आत्मोद्धार के अर्थात भगवत्प्राप्ति লিৎ چ कर्म करने वाला कोई भी मनुष्य को प्राप्त नहीं होता। sff 313ಣ' श्रीमद्भगवद्नीता अध्याय 6 आत्मसंयमयोगः श्लोक ४० श्रीभगवानुवाच [ पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते | न हि कल्याणकृत्कश्चिदुर्गतिं तात गच्छति II अनुवाद श्री भगवान बोले- हे पार्थ! उस पुरुष का न तो इस लोक में नाश होता है और न परलोक में ही क्योंकि हे प्यारे ! लिए आत्मोद्धार के अर्थात भगवत्प्राप्ति লিৎ چ कर्म करने वाला कोई भी मनुष्य को प्राप्त नहीं होता। sff - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - 313ಣ' श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 आत्मसंयमयोगः श्लोक ३८ कच्चिन्नोभयविभ्रष्टश्छिन्नाभ्रमिव नश्यति | अप्रतिष्ठो महाबाहो विमूढो ब्रह्मणः पथि II अनुवाद हे महाबाहो ! क्या वह भगवत्प्राप्ति के मार्ग में मोहित और आश्रयरहित पुरुष छिन्न भिन्न बादल की भाँति दोनों ओर से भ्रष्ट होकर नष्ट तो नहीं हो जाता? | 313ಣ' श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 आत्मसंयमयोगः श्लोक ३८ कच्चिन्नोभयविभ्रष्टश्छिन्नाभ्रमिव नश्यति | अप्रतिष्ठो महाबाहो विमूढो ब्रह्मणः पथि II अनुवाद हे महाबाहो ! क्या वह भगवत्प्राप्ति के मार्ग में मोहित और आश्रयरहित पुरुष छिन्न भिन्न बादल की भाँति दोनों ओर से भ्रष्ट होकर नष्ट तो नहीं हो जाता? | - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌞 Good Morning🌞
🙏गीता ज्ञान🛕 - 3 अर्जून उवाच | अयतिः श्रद्धयोपेतो योगाच्चलितमानसः ] अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां गतिं कृष्ण गच्छति Il अनुवाद अर्जुन बोले- हे श्रीकृष्ण! जो योग में श्रद्धा किन्तु  संयमी नहीं है, इस रखने वाला है, कारण जिसका मन अन्तकाल में योग से विचलित हो गया है, ऐसा साधक योग की सिद्धि को अर्थात् भगवत्साक्षात्कार को न प्राप्त होकर किस गति को प्राप्त होता है। 3 अर्जून उवाच | अयतिः श्रद्धयोपेतो योगाच्चलितमानसः ] अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां गतिं कृष्ण गच्छति Il अनुवाद अर्जुन बोले- हे श्रीकृष्ण! जो योग में श्रद्धा किन्तु  संयमी नहीं है, इस रखने वाला है, कारण जिसका मन अन्तकाल में योग से विचलित हो गया है, ऐसा साधक योग की सिद्धि को अर्थात् भगवत्साक्षात्कार को न प्राप्त होकर किस गति को प्राप्त होता है। - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 313ಣ' श्रीमद्भ गवद्गीता अध्याय 6 आत्मसंयमयोगः श्लोक ३६ असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः | शक्योषवाप्तुमुपायतः वश्यात्मना तु यतता I अनुवाद जिसका मन वश में किया हुआ नहीं है, ऐसे पुरुष द्वारा योग दुष्प्राप्य है और वश किए हुए मन वाले प्रयत्नशील पुरुष ম द्वारा साधन से उसका प्राप्त होना सहज है- यह मेरा मत है। 313ಣ' श्रीमद्भ गवद्गीता अध्याय 6 आत्मसंयमयोगः श्लोक ३६ असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः | शक्योषवाप्तुमुपायतः वश्यात्मना तु यतता I अनुवाद जिसका मन वश में किया हुआ नहीं है, ऐसे पुरुष द्वारा योग दुष्प्राप्य है और वश किए हुए मन वाले प्रयत्नशील पुरुष ম द्वारा साधन से उसका प्राप्त होना सहज है- यह मेरा मत है। - ShareChat
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