राकेश कुमार ॐ भूर्भुवः स्वः।
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राकेश कुमार ॐ भूर्भुवः स्वः।
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ओ३म् भूर्भुवः स्वः।
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩
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🙏गीता ज्ञान🛕 - (31439/ श्रद्धात्रयविभागयोग श्लोक 2 श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय १७ श्रीभगवानुवाच 4 त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा | सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां शृणु II अनुवाद श्री भगवान् बोले- मनुष्यों की वह शास्त्रीय संस्कारों से रहित केवल स्वभाव से उत्पन्न श्रद्धा ( अनन्त किए हुए कर्मों के सञ्चित जन्मों में संस्कार से उत्पन्न हुई श्रद्धा " स्वभावजा" श्रद्धा कही जाती है।) सात्त्विकी और ऐसे तीनों प्रकार যাতমী নথা নামমী की ही होती है। उसको तू सुन। मुझसे (31439/ श्रद्धात्रयविभागयोग श्लोक 2 श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय १७ श्रीभगवानुवाच 4 त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा | सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां शृणु II अनुवाद श्री भगवान् बोले- मनुष्यों की वह शास्त्रीय संस्कारों से रहित केवल स्वभाव से उत्पन्न श्रद्धा ( अनन्त किए हुए कर्मों के सञ्चित जन्मों में संस्कार से उत्पन्न हुई श्रद्धा " स्वभावजा" श्रद्धा कही जाती है।) सात्त्विकी और ऐसे तीनों प्रकार যাতমী নথা নামমী की ही होती है। उसको तू सुन। मुझसे - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
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🙏गीता ज्ञान🛕 - 9[8: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय १७ श्रद्धात्रयविभागयोग श्लोक 1 अर्जुन उवाच | शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः 4 41 तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः Il अनुवाद अर्जुन बोले- हे कृष्ण! जो मनुष्य शास्त्र विधि को त्यागकर श्रद्धा से युक्त T೯i  देवादिका पूजन करते हैं, उनकी फिर कौन-्सी है? सात्त्विकी है अथवा যাতমী ব্িণা নামমী ? | 9[8: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय १७ श्रद्धात्रयविभागयोग श्लोक 1 अर्जुन उवाच | शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः 4 41 तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः Il अनुवाद अर्जुन बोले- हे कृष्ण! जो मनुष्य शास्त्र विधि को त्यागकर श्रद्धा से युक्त T೯i  देवादिका पूजन करते हैं, उनकी फिर कौन-्सी है? सात्त्विकी है अथवा যাতমী ব্িণা নামমী ? | - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - 9[8: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय १८ मोक्षसंन्यासयोग श्लोक ७८ योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः | यत्र श्रीर्विजयो भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम Il तत्र अनुवाद हे राजन! जहाँ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गा़ण्डीव धनुषधारी अर्जुन है, वहीं पर श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है ऐसा मेरा मत है। 9[8: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय १८ मोक्षसंन्यासयोग श्लोक ७८ योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः | यत्र श्रीर्विजयो भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम Il तत्र अनुवाद हे राजन! जहाँ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गा़ण्डीव धनुषधारी अर्जुन है, वहीं पर श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है ऐसा मेरा मत है। - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - 3 श्रीमद्भगबद्गीता अध्याय १८ मोक्षसंन्यासयोग श्लोक ७८ योगेश्वरः यत्र पार्थो धनुर्धरः | कृष्णो 0ా तत्र श्रीर्विजयो भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम II अनुवाद हे राजन! जहाँ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गाण्डीव धनुषधारी अर्जुन है, वहीं पर श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है ऐसा मेरा मत है। 3 श्रीमद्भगबद्गीता अध्याय १८ मोक्षसंन्यासयोग श्लोक ७८ योगेश्वरः यत्र पार्थो धनुर्धरः | कृष्णो 0ా तत्र श्रीर्विजयो भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम II अनुवाद हे राजन! जहाँ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गाण्डीव धनुषधारी अर्जुन है, वहीं पर श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है ऐसा मेरा मत है। - ShareChat
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#🙏गीता ज्ञान🛕 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - 9[8: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय १८ मोक्षसंन्यासयोग श्लोक ७७ संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः  तच्च = विस्मयो मे महानराजन्हष्यामि च पुँनः पुनः ll अनुवाद हे राजन् ! श्रीहरि (जिसका स्मरण करने से पापों का नाश होता है उसका नाम ' हरि' है) भी पुनः के उस अत्यंत विलक्षण रूप को पुनः स्मरण करके मेरे चित्त में महान आश्चर्य होता है और मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ। 9[8: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय १८ मोक्षसंन्यासयोग श्लोक ७७ संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः  तच्च = विस्मयो मे महानराजन्हष्यामि च पुँनः पुनः ll अनुवाद हे राजन् ! श्रीहरि (जिसका स्मरण करने से पापों का नाश होता है उसका नाम ' हरि' है) भी पुनः के उस अत्यंत विलक्षण रूप को पुनः स्मरण करके मेरे चित्त में महान आश्चर्य होता है और मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ। - ShareChat