#🙏गीता ज्ञान🛕 #GodMorningFriday
परमेश्वर कबीर जी
ने कभी जन्म नहीं लिया।
उनका स्वरूप (शब्द स्वरूपी) अविनाशी है। वचन की शक्ति युक्त है।
कबीर परमात्मा की शक्ति से प्रत्येक प्राणी बोल रहा है, चल रहा है।
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नम्रता भी एक गुण है जो एक अच्छे
भक्त द्वारा अच्छे आचरण से दिखाया जाता है, शील संतोष और विवेक एक भक्त के लिए महत्वपूर्ण गुण है।
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गुरूजी का उपदेश उस समय लेना चाहिए जब आप जी उनके ज्ञान से पूर्ण रुप से संतुष्ट हो जायें। फिर आप जी गलताना अर्थात् गुरूजी पर मस्त होकर न्यौछावर हो जाओगे।
~ जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज
अवश्य देखें साधना चैनल प्रतिदिन शाम 07:30 बजे
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कबीर,
इन्द्री तत्त्व प्रकृति से, आत्म जानपार।
जाप एकपल नहीं छूटे, टूट न पावै तार।।
भावार्थ- आत्मा को पाँचों तत्त्वों से भिन्न जानै।शरीर आत्मा नहींहै।निरंतर सतनाम का जाप करे।
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गुरु चरणों की धूल वही प्राप्त करता है जो सच्चे गुरु को धारण करता है। पूर्ण गुरु से सत्य मंत्र और साधना मिलने पर जीव को मुक्ति मिलती है तथा जीवन को सच्चा कल्याण मार्ग प्राप्त होता है।
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मीरा बाई पहले कृष्ण जी की पूजा करती थी।
एक दिन संत रविदास जी तथा परमात्मा कबीर जी का सत्संग सुना तो पता चला कि कृष्णजी नाशवान है।समर्थ अविनाशी परमात्मा अन्य है।
संत रविदासजी को गुरु बनया।फिर अंत में कबीर जी को गुरु बनया। तब मीराबाई जी का सत्य भक्ति बीज बोया गया।
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आस्था
दीक्षा प्राप्ति के पश्चात् परमेश्वर में कैसी
आस्था होनी चाहिए?
परमेश्वर कबीर जी ने बताया है कि जैसे मृग (हिरण) शब्द पर आसक्त होता है, वैसे साधक परमात्मा के प्रति लग्न लगावै।
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कबीर साहेब जी कहते हैं कि गुरु नाम उसका है, जो सत्य का ज्ञान कराए और शिष्य नाम उसका है, जो गुरु से शिक्षा ग्रहण करे।
गुरु-शिष्य की पद-मर्यादा के बिना न कोई गुरु है और न कोई शिष्य, अतः गुरु और शिष्य दोनों को ही अपने-अपने पद-धर्म को सत्यता से निभाना चाहिए।
#🙏गीता ज्ञान🛕 #परमात्मा_का_विधान
🧾परमात्मा बड़ी से बड़ी आपत्ति टाल देता है
संत शरण में आने से,आई टलै बला।
जै भाग्य में सूली हो,कांटे में टल जाय।।
भावार्थ: कबीर जी बताते हैं कि सच्चे गुरु की शरण में आने के बाद यदि किसी के भाग्य में भयंकर संकट है,तो परमात्मा उसे एक छोटा सा कष्ट बना देता है।
#GodNightWednesday
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True God
A true devotee never
worships other deities in
place of their original God.
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