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#🤲अल्लाह हु अक़बर #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
🤲अल्लाह हु अक़बर - वह हुज़ूर ( ६) के साथ जन्नत में होगा।  <  रज़ियल्लाहु से रिवायत हज़रत अनस बिन मालिक है कि रसूलुल्लाह ( ५६ ) ने मुझे इर्शाद फ़रमायाः मेरे बेटे ! अगर तुम सुबह व शाम (हर वक़्त) अपने दिल की यह कैफ़ियत बना सकते हो कि तुम्हारे दिल में किसी के बारे में ज़रा - भी खोट न हो, तो ज़रूर ऐसा करो। फिर आप ( ५६ ) ने इर्शाद फ़रमायाः मेरे बेटे ! यह बात मेरी सुन्नत में से है और जिसने मेरी सुन्नत को ज़िन्दा किया, उसने मुहब्बत की 3$77 मुहब्बत की, वह मेरे साथ जन्नत और जिसने मुझसे में होगा | (तिर्मिज़ी) वह हुज़ूर ( ६) के साथ जन्नत में होगा।  <  रज़ियल्लाहु से रिवायत हज़रत अनस बिन मालिक है कि रसूलुल्लाह ( ५६ ) ने मुझे इर्शाद फ़रमायाः मेरे बेटे ! अगर तुम सुबह व शाम (हर वक़्त) अपने दिल की यह कैफ़ियत बना सकते हो कि तुम्हारे दिल में किसी के बारे में ज़रा - भी खोट न हो, तो ज़रूर ऐसा करो। फिर आप ( ५६ ) ने इर्शाद फ़रमायाः मेरे बेटे ! यह बात मेरी सुन्नत में से है और जिसने मेरी सुन्नत को ज़िन्दा किया, उसने मुहब्बत की 3$77 मुहब्बत की, वह मेरे साथ जन्नत और जिसने मुझसे में होगा | (तिर्मिज़ी) - ShareChat
Hazrat abbu hurera raji Allah hu #🤲अल्लाह हु अक़बर #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें
🤲अल्लाह हु अक़बर - अल्लाह के नज़दीक दुआ से ज़्यादा बुलन्द < मर्तबा क्या है? हजरत अबू हुरैराह ( रजि॰ ) रिवायत करते हैं कि नबी करीम (  l६ ) ने इर्शाद फ़रमायाः अल्लाह तआला के नजदीक दुआ से ज़्यादा बुलन्द मर्तबा कोई चीज नहीं है। (तिर्मिज़ी) লিৎ उसके < यक़ीनन जन्नत वाजिब हो जाती है। हज़रत उक़्बा बिन आमिर ২তি০ ম বিামন 6# है कि रसूलुल्लाह (  ६ ) ने इर्शाद फ़रमायाः जो शख़्स भी अच्छी तरह वुज़ू करता है, फिर दो रकस्त इस तरह पढ़ता है कि दिल नमाज़ की तरफ़ मुतवज्जह रहे और आज़ा में भी सुकून हो, तो लिए उसके यक़ीनन जन्नत वाजिब हो जाती है। (अबूदाऊद ) अल्लाह के नज़दीक दुआ से ज़्यादा बुलन्द < मर्तबा क्या है? हजरत अबू हुरैराह ( रजि॰ ) रिवायत करते हैं कि नबी करीम (  l६ ) ने इर्शाद फ़रमायाः अल्लाह तआला के नजदीक दुआ से ज़्यादा बुलन्द मर्तबा कोई चीज नहीं है। (तिर्मिज़ी) লিৎ उसके < यक़ीनन जन्नत वाजिब हो जाती है। हज़रत उक़्बा बिन आमिर ২তি০ ম বিামন 6# है कि रसूलुल्लाह (  ६ ) ने इर्शाद फ़रमायाः जो शख़्स भी अच्छी तरह वुज़ू करता है, फिर दो रकस्त इस तरह पढ़ता है कि दिल नमाज़ की तरफ़ मुतवज्जह रहे और आज़ा में भी सुकून हो, तो लिए उसके यक़ीनन जन्नत वाजिब हो जाती है। (अबूदाऊद ) - ShareChat
Hazrat abbu umama Raji #🤲अल्लाह हु अक़बर #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें
🤲अल्लाह हु अक़बर - अल्लाह को दो क़तरे और दो निशानों से < ज़्यादा कोई चीज़ महबूब नहीं। हज़रत अबू उमामा रजि॰ से रिवायत है कि नबी करीम ( ५६ ) ने इर्शाद फ़रमाया : अल्लाह तआला को दो क़तरे और दो निशानों से ज़्यादा कोई चीज़ महबूब नहीं एक आंसू का क़तरा जो अल्लाह तआला के ख़ौफ़ से निकले , दूसरा ख़ून का क़तरा  जो अल्लाह तआला के रास्ते में बह जाए और दो निशानों में एक अल्लाह तआला का कोई निशान (जैसे ज़ख़्म या अल्लाह तआला के रास्ते में चलने निशान) और एक वह निशान जो अल्लाह CT तआला के किसी फ़रीज़े की अदाइगी में पड़ गया हो (जैसे सज्दा या सफ़रे हज वगैरह का कोई निशान) (तिर्मिज़ी) अल्लाह को दो क़तरे और दो निशानों से < ज़्यादा कोई चीज़ महबूब नहीं। हज़रत अबू उमामा रजि॰ से रिवायत है कि नबी करीम ( ५६ ) ने इर्शाद फ़रमाया : अल्लाह तआला को दो क़तरे और दो निशानों से ज़्यादा कोई चीज़ महबूब नहीं एक आंसू का क़तरा जो अल्लाह तआला के ख़ौफ़ से निकले , दूसरा ख़ून का क़तरा  जो अल्लाह तआला के रास्ते में बह जाए और दो निशानों में एक अल्लाह तआला का कोई निशान (जैसे ज़ख़्म या अल्लाह तआला के रास्ते में चलने निशान) और एक वह निशान जो अल्लाह CT तआला के किसी फ़रीज़े की अदाइगी में पड़ गया हो (जैसे सज्दा या सफ़रे हज वगैरह का कोई निशान) (तिर्मिज़ी) - ShareChat
Hadees pado #🤲अल्लाह हु अक़बर #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें
🤲अल्लाह हु अक़बर - वुज़ू के बाद जो शख़्श ये कलिमा पढ़ेगा। < रजि॰ से रिवायत है कि अबू सईद ತ್೯್ಗ हज़रत ूलुल्लाह ( l६ ) ने इर्शाद फ़रमायाः जो शख़्स वुज़ू के बाद ( सुब्हा - न - कल्लाहुम - म व बिहम्दि क ला इला - ह इल्ला अन - त अस्तफ़्फ़िरु कव अतूबु अलैक॰ ) पढ़ता है तो उन कलिमों को एक काग़ज़ पर लिखकर उस पर मुहर लगा दी जाती है यानी उसके जो क़ियामत तक नहीं तोड़ी जाएगी , লিব ज़ख़ीरा कर दिया सवाब को आख़िरत के (मुस्तदरक हाकिम) जाएगा वुज़ू के बाद जो शख़्श ये कलिमा पढ़ेगा। < रजि॰ से रिवायत है कि अबू सईद ತ್೯್ಗ हज़रत ूलुल्लाह ( l६ ) ने इर्शाद फ़रमायाः जो शख़्स वुज़ू के बाद ( सुब्हा - न - कल्लाहुम - म व बिहम्दि क ला इला - ह इल्ला अन - त अस्तफ़्फ़िरु कव अतूबु अलैक॰ ) पढ़ता है तो उन कलिमों को एक काग़ज़ पर लिखकर उस पर मुहर लगा दी जाती है यानी उसके जो क़ियामत तक नहीं तोड़ी जाएगी , লিব ज़ख़ीरा कर दिया सवाब को आख़िरत के (मुस्तदरक हाकिम) जाएगा - ShareChat
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