Surya Dasi
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Kabir Is Supreme God 🙏🏻❤️😇
In Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 32, Kaal God is saying that I am the enlarged Kaal, the destroyer of the loks/worlds. I have come (appeared) at this time to destroy the worlds/loks. Even without you, these warriors arrayed in the opponent's army will not survive i.e. I will eat them. Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - GIVER OF THE KNOWLEDGE OF GITA DESCRIBEST HIMSELF S KAAL In Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 32, Kaal Godis saying that am the enlarged Kaal the destroyer of the lokslworlds Ihave come (appeared)  at this time to destroy the worldslloks. Even without you, these warriors arrayed in the opponents army will not survive i.e. I will eat them:| Download our Official App To receive free Initiation Sant Rampal Ji Maharaj and spiritual books by Sant Rampal Ji Maharaj Ji, GIOn Google Play +91 7496801823 message us on WhatsApp: GIVER OF THE KNOWLEDGE OF GITA DESCRIBEST HIMSELF S KAAL In Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 32, Kaal Godis saying that am the enlarged Kaal the destroyer of the lokslworlds Ihave come (appeared)  at this time to destroy the worldslloks. Even without you, these warriors arrayed in the opponents army will not survive i.e. I will eat them:| Download our Official App To receive free Initiation Sant Rampal Ji Maharaj and spiritual books by Sant Rampal Ji Maharaj Ji, GIOn Google Play +91 7496801823 message us on WhatsApp: - ShareChat
Chapter 7 Verse 29 जारामरानमोक्षय, मम', अश्रित्य, यतंति, ये, ते, ब्रह्म, तत्', विदुः, क्रतस्न्नम्, आध्याम्, कर्म, च, अखिलम्' ||29|| Saint Rampal Ji Maharaj revealed the secrets of God Geeta Those who know My complete spiritual knowledge and actions take refuge in that Brahman, and try to get rid of old age and death. Geeta is your nectar of knowledge Must read the holy book "Geeta Tera Gyan Amrit" #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - aia झन अमृत CHAPTER 7 VERSE 29 Sant Jaraamaranmokshaay, mam', aashritya, yatanti, ye, BamalJ Brahm, tat', viduH, krtsnnam', adhyaatmm Te, ٥٥٥٥ karm, ch, akhilam' | |29| | unveils thel mysteries of thel Bhhagavad] THDSE WHD KNDW MY 61t& entire spiritual knowledge & actions, resort to that Brahm; strive tol GET RID OF OLD AGE & DEATH. गता 7 م बान अमृत Must read the sacred book Gita Tera Gyan Amrit" eau Download the Official App Get Free Sacred Book SANT RAMPAL Ji MAHARAJ n 01 GITA TERA GYAN AMRIT "o +9174968018251 Google Play { SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ aia झन अमृत CHAPTER 7 VERSE 29 Sant Jaraamaranmokshaay, mam', aashritya, yatanti, ye, BamalJ Brahm, tat', viduH, krtsnnam', adhyaatmm Te, ٥٥٥٥ karm, ch, akhilam' | |29| | unveils thel mysteries of thel Bhhagavad] THDSE WHD KNDW MY 61t& entire spiritual knowledge & actions, resort to that Brahm; strive tol GET RID OF OLD AGE & DEATH. गता 7 م बान अमृत Must read the sacred book Gita Tera Gyan Amrit" eau Download the Official App Get Free Sacred Book SANT RAMPAL Ji MAHARAJ n 01 GITA TERA GYAN AMRIT "o +9174968018251 Google Play { SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat
🎉गीताजी अध्याय 18 श्लोक 62 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा गीता ज्ञानदाता से भिन्न है। हे भारत! तू संपूर्ण भाव से उस परमेश्वर की ही शरण में जा। उस परमात्मा की कृपा से ही तू परम शान्ति को तथा सदा रहने वाले अविनाशी स्थान को अर्थात् सतलोक को प्राप्त होगा।” यही प्रमाण गीता जी अध्याय 18 श्लोक 66 में भी दिया गया है। #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - SNITTINILuINIIIIIUIIEIS THENYSIERIESOF THE DiDIADGII Gita Chapter18 Verse 62 : O Bharat! You, in every respect go in the refuge of only thot Supreme God By the grace of that Supreme God only you peace and the everlasting will attain thel cupceoemeoce i.e Satlok place Download our Official App To receive free Initiation and spiritual books by Sant Rampal Ji Maharaj Sant Rampal ]i Maharaj ]i; GETITON Play Google WhatsApp: 91 7496801823 message us on SNITTINILuINIIIIIUIIEIS THENYSIERIESOF THE DiDIADGII Gita Chapter18 Verse 62 : O Bharat! You, in every respect go in the refuge of only thot Supreme God By the grace of that Supreme God only you peace and the everlasting will attain thel cupceoemeoce i.e Satlok place Download our Official App To receive free Initiation and spiritual books by Sant Rampal Ji Maharaj Sant Rampal ]i Maharaj ]i; GETITON Play Google WhatsApp: 91 7496801823 message us on - ShareChat
#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता अध्याय 18, श्लोक 66 ↪️ गीता ज्ञान दाता काल कहता है, " मेरी सभी धार्मिक पूजाओं को मुझमें त्याग कर, तू केवल उस एक पूर्ण परमात्मा की शरण में जा। मैं तुझे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा; तू शोक मत कर। Sant Rampal Ji Maharaj 🙏 #SaturdayMotivation . #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीता के रहस्यों का महाखुलासा अन्थ गीता अनुवाद कर्ताओं ने अर्थ आना किथा है 7 व्रज शद्द क वन अर्थ जाना, সা ೯ 3giశగ   'c ಹ7 95] चला जाना आदि होता है। अध्याय १८ का श्लोक ६६ सर्वधर्मान् , परित्यज्य , माम् , एकम् , शरणम् , ब्रज, अहम् , त्वा, सर्वपापेभ्यः, मोक्षयिष्यामि , मा, शुचःIl६६११ मेरी ( सर्वधर्मान् ) सम्पूर्ण पूजाओंको (माम् ) मुझ में (परित्यज्य ) त्यागकर तू केवल ( एकम् ) एक उस अद्वितीय अर्थात् पूर्ण परमात्मा की ( शरणम् ) शरणमें (व्रज ) जा। ((अहम् ) मैं (त्वा ) तुझे ( सर्वपापेभ्यः ) सम्पूर्ण पापोंसे (मोक्षयिष्यामि ) छुड़वा दूँगा तू (मा,शुचः ) शोक मत कर। निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक  अपना नामःपरापता भज ؟٦ ٦٦ +91 7496801823 f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPAUIM SUPREMEGOD ORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ गीता के रहस्यों का महाखुलासा अन्थ गीता अनुवाद कर्ताओं ने अर्थ आना किथा है 7 व्रज शद्द क वन अर्थ जाना, সা ೯ 3giశగ   'c ಹ7 95] चला जाना आदि होता है। अध्याय १८ का श्लोक ६६ सर्वधर्मान् , परित्यज्य , माम् , एकम् , शरणम् , ब्रज, अहम् , त्वा, सर्वपापेभ्यः, मोक्षयिष्यामि , मा, शुचःIl६६११ मेरी ( सर्वधर्मान् ) सम्पूर्ण पूजाओंको (माम् ) मुझ में (परित्यज्य ) त्यागकर तू केवल ( एकम् ) एक उस अद्वितीय अर्थात् पूर्ण परमात्मा की ( शरणम् ) शरणमें (व्रज ) जा। ((अहम् ) मैं (त्वा ) तुझे ( सर्वपापेभ्यः ) सम्पूर्ण पापोंसे (मोक्षयिष्यामि ) छुड़वा दूँगा तू (मा,शुचः ) शोक मत कर। निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक  अपना नामःपरापता भज ؟٦ ٦٦ +91 7496801823 f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPAUIM SUPREMEGOD ORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ - ShareChat
#यथार्थ_गीता_ज्ञान #SantRampalJiMaharajYouTubeChannel #bhagavadgita #gita #krishna #arjuna #bhagawadgita #consciousness #vedanta #reincarnation #meditation #lordkrishna #kaal #brahm #om #dailygita #sanatandharma #SantRampalJiMaharaj गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5, अध्याय 10 श्लोक 2 में अपने को नाशवान यानि जन्म-मरण के चक में सदा रहने वाला बताया है। कहा है कि हे अर्जुन ! तेरे और मेरे बहुत जन्म हो चुके है। तू नहीं जानता, मैं जानता हूँ। #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीता ज्ञान दाता ने 2? CnW गीता अध्याय 2 श्लोक १२ अध्याय 4 श्लोक 5 अध्याय १० श्लोक 2 में अपने को नाशवान यानि जन्म- मरण ৯নকঐসন रहने aiII है। कहा है कि हे अर्जुन! तेरे और मेरे बहुत जन्म हो चुके है। तू नही அளள #அள8் जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SPIRITUALLEADER SANT RAMPAL JI 9٥ 0 @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG MAHARAJ SAINT RAMPALJI गीता ज्ञान दाता ने 2? CnW गीता अध्याय 2 श्लोक १२ अध्याय 4 श्लोक 5 अध्याय १० श्लोक 2 में अपने को नाशवान यानि जन्म- मरण ৯নকঐসন रहने aiII है। कहा है कि हे अर्जुन! तेरे और मेरे बहुत जन्म हो चुके है। तू नही அளள #அள8் जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SPIRITUALLEADER SANT RAMPAL JI 9٥ 0 @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG MAHARAJ SAINT RAMPALJI - ShareChat
Saint Rampal Ji Maharaj reveals the secrets of the Bhagavad Gita. Chapter 16, Verse 23: A person who abandons scriptural injunctions and acts arbitrarily attains neither success, nor ultimate salvation, nor happiness. #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - Sant Qompa Jv 1alwwy uNWei४ 0 W@_ Tio Myotouiz QaaGi Bhagavad Gita Chapter 16 Verse 23 He who; abandoning the injunctions of the scriptures; acts according to the whimsical desires; neither attains siddhi/ perfection nor supreme state salvation nor happiness App Download our Official To receive free Initiation and spiritual books by Sant Rampal Ji Maharaj Sant Rampal Ji Maharaj Ji, CETIOr Play Google +917496801823 message us on WhatsApp: Sant Qompa Jv 1alwwy uNWei४ 0 W@_ Tio Myotouiz QaaGi Bhagavad Gita Chapter 16 Verse 23 He who; abandoning the injunctions of the scriptures; acts according to the whimsical desires; neither attains siddhi/ perfection nor supreme state salvation nor happiness App Download our Official To receive free Initiation and spiritual books by Sant Rampal Ji Maharaj Sant Rampal Ji Maharaj Ji, CETIOr Play Google +917496801823 message us on WhatsApp: - ShareChat
#यथार्थ_गीता_ज्ञान पवित्र गीता अध्याय 9 मंत्र 25 व 23 से 24 तथा अध्याय 7 श्लोक 12 से 15 तथा 20 से 23 में भगवान ने स्पष्ट मना किया है श्राद्ध करने (पितर पूजा करने), पिण्ड दान करने (भूत पूजा करने) से तथा अन्य देवताओं की पूजा करने से मना किया है। देखें साधना चैनल शाम 7:30 बजे #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - 1@ श्राद्ध कश्न श क्या हाता हे ? Hಣ ( पवित्र गीता अध्याय 9 मंत्र २५ व २३ से २४ तथा अध्याय 7 श्लोक १२ से १५ तथा २० से २३ में भगवान ने स्पष्ट मना किया है श्राद्ध करने पितर पूजा करने), पिण्ड दान करनेभूत पूजा करने) से तथा अन्य देवताओं की पूजा करने से मना किया है। कहा है किजो पितर पूजा करते हैं अर्थात श्राद्ध निकालते हैं वे पितरों के पास जायेंगे 3থনি এিনয নন আর্যঠী; मुक्त नहीं हो सकते। पिण्ड दान अर्थात भूत पूजने वाले भी भूत बनेंगे तथा देवताओं को पूजने वाले देवताओं के पास जा्येंगे, उनके नौकर लगेंगे | फिर सर्व विष्णु देवताओं (श्री ब्रह्या जी, श्री जी तथा शिव जी) सहित तथा इनके उपासक क्षणिक सुख भोगकर मृत्यु को प्राप्त होंगे मुक्ति नहीं होगी| की पूजा है। मूर्खों यह अधिक जानकारी के लिए देखें Sant Rampal Ji Maharaj YouTube ~0 Chonnel CSಖIRanpak{u; 029100! 1@ श्राद्ध कश्न श क्या हाता हे ? Hಣ ( पवित्र गीता अध्याय 9 मंत्र २५ व २३ से २४ तथा अध्याय 7 श्लोक १२ से १५ तथा २० से २३ में भगवान ने स्पष्ट मना किया है श्राद्ध करने पितर पूजा करने), पिण्ड दान करनेभूत पूजा करने) से तथा अन्य देवताओं की पूजा करने से मना किया है। कहा है किजो पितर पूजा करते हैं अर्थात श्राद्ध निकालते हैं वे पितरों के पास जायेंगे 3থনি এিনয নন আর্যঠী; मुक्त नहीं हो सकते। पिण्ड दान अर्थात भूत पूजने वाले भी भूत बनेंगे तथा देवताओं को पूजने वाले देवताओं के पास जा्येंगे, उनके नौकर लगेंगे | फिर सर्व विष्णु देवताओं (श्री ब्रह्या जी, श्री जी तथा शिव जी) सहित तथा इनके उपासक क्षणिक सुख भोगकर मृत्यु को प्राप्त होंगे मुक्ति नहीं होगी| की पूजा है। मूर्खों यह अधिक जानकारी के लिए देखें Sant Rampal Ji Maharaj YouTube ~0 Chonnel CSಖIRanpak{u; 029100! - ShareChat
#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता के रहस्यों का महाखुलासा ॥पूर्ण परमात्मा के लाभ का आनंद प्राप्त करने की विधि व व्रत निषेध की जानकारी ॥ न, अति, अश्नतः, तु, योगः, अस्ति, न, च, एकान्तम्, अनश्नतः, न, च, अति, स्वप्नशीलस्य, जाग्रतः, न, एव, च, अर्जुन। Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गीता ज्ञान🛕
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#यथार्थ_गीता_ज्ञान पवित्र गीता जी अध्याय 9 श्लोक 25 में साफ लिखा है कि भूतों को पूजोगे तो भूतों की योनियों में जाओगे और पितर पूजोगे तो पितर योनि में जाओगे। फिर क्यों आप श्राद्ध कर्म, पिंड दान आदि करते हो? ये मोक्ष मार्ग के विपरीत क्रियाएं Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीता शा२ মালি; বনম্লনা:; বনান; পিনুন; যানি; পিবল্পনা:; गीता अध्याय 9 श्लोक २५ में श्राद्ध যানি  भतानि  भतेज्याः यान्तिः   मद्याजिनः, अपि॰ माम।। २५ कारण यह नियम ह॰कि॰ व पिंड आदि कर्मकांड को गलत दवताओंको  प्राप्त होते हं यान्ति caadl: पूबनेवाले  मार्कण्डेय पुराण में भी (आर ) कहा है নরনাসসাকা না সুতন दवान मद्याजिनः  करनवाल भक्त प्रमाण है कि वेदों में पितर पूजा भूत प्रप्त हात ह 7 पितराको =7 माम पितृवताः  पूजा यानि श्राद्ध कर्म को अविद्या यानि पजनवाले সণি चितून  पितराको  प्राप्त होते हॅ। का कार्य बताया है। मूर्खों মালি प्राप्त होते हे॰ ( इसोलिय मेर যালি মূনাকা  भक्तोका पूजनेवाले भतज्याः पनजन्म ப नहा ढाता । भताका संत रामपाल जी महाराज जी से Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये नामदीक्षा व निःशुल्क  A:rjor5 संपर्क सूत्र  lIC +91 7496801823 पुस्तक प्राप्त करने के लिये  Ploy  Googlel गीता शा२ মালি; বনম্লনা:; বনান; পিনুন; যানি; পিবল্পনা:; गीता अध्याय 9 श्लोक २५ में श्राद्ध যানি  भतानि  भतेज्याः यान्तिः   मद्याजिनः, अपि॰ माम।। २५ कारण यह नियम ह॰कि॰ व पिंड आदि कर्मकांड को गलत दवताओंको  प्राप्त होते हं यान्ति caadl: पूबनेवाले  मार्कण्डेय पुराण में भी (आर ) कहा है নরনাসসাকা না সুতন दवान मद्याजिनः  करनवाल भक्त प्रमाण है कि वेदों में पितर पूजा भूत प्रप्त हात ह 7 पितराको =7 माम पितृवताः  पूजा यानि श्राद्ध कर्म को अविद्या यानि पजनवाले সণি चितून  पितराको  प्राप्त होते हॅ। का कार्य बताया है। मूर्खों মালি प्राप्त होते हे॰ ( इसोलिय मेर যালি মূনাকা  भक्तोका पूजनेवाले भतज्याः पनजन्म ப नहा ढाता । भताका संत रामपाल जी महाराज जी से Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये नामदीक्षा व निःशुल्क  A:rjor5 संपर्क सूत्र  lIC +91 7496801823 पुस्तक प्राप्त करने के लिये  Ploy  Googlel - ShareChat
#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहा है कि अर्जुन पूर्ण परमात्मा के तत्वज्ञान को जानने वाले तत्वदर्शी संतों के पास जा कर उनसे विनम्रता से पूर्ण परमात्मा का भक्ति मार्ग प्राप्त कर, मैं उस पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग नहीं जानता। संत रामपाल जी महाराज ही वह तत्वदर्शी संत हैं।#SantRampalJiMaharajYouTubeChannel #bhagavadgita #gita #krishna #arjuna #bhagawadgita #consciousness #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीता अध्याय 4 का श्लोक ३४ तत् विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानम् ज्ञानिनः तत्त्वदर्शिनः।।३४।। 33| अनुवादः पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा हे कि उपरोक्त नाना प्रकार की साधना तो मनमाना आचरण हे। मेरे तक की साधना की अटकल लगाया ज्ञान हे परन्तु पूर्ण परमात्मा के पूर्ण मोक्ष मार्ग का मुझे भी ज्ञान नहीं है। उसके लिए इस मंत्र ३४ में कहा है कि उस  (विद्धि) समझ उन पूर्ण परमात्मा के (तत) तत्वज्ञान को वास्तविक ज्ञान व समाधान को जानने वाले संतों को गीता अध्याय 4 श्लोक ३४ में गीता (प्रणिपातेन) भलीभाँति दण्डवत् प्रणाम करनेसे उनकी ज्ञानदाता ने कहा है कि तत्वज्ञान (सेवया) सेवा करनेसे ओर कपट छोड़कर ( परिप्रश्नेन) सरलतापूर्वक प्रश्न करनेसे (त) वे (तत्वदर्शिनः ) पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति के लिए तत्वदर्शी संत की को तत्व से जानने वाले अर्थात् तत्वदर्शी (ज्ञानिनः ) ज्ञानी যানি নিনা যুড় ক महात्मा तुझे उस ( ज्ञानम् ) तत्वज्ञानका (उपदेक्ष्यन्ति  शरण में जाओ उपदेश करेंगे। (३४) इसी का प्रमाण गीता अध्याय 2 ज्ञान और भक्ति अधूरी है। श्लोक १५१६ में भी है। तत्वदर्शी संत , सतगुर रामपल जी मठाराज Sant Rampal Ji Maharaj মন যাসপালসী সমাযাস সী ম Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये [য নিঃথুল্ক निःशुल्क नामदीक्षा  { पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : +91 7496801823 OSan RampalJManara GoossPsy 2.27M subscribers * T7K videos गीता अध्याय 4 का श्लोक ३४ तत् विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानम् ज्ञानिनः तत्त्वदर्शिनः।।३४।। 33| अनुवादः पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा हे कि उपरोक्त नाना प्रकार की साधना तो मनमाना आचरण हे। मेरे तक की साधना की अटकल लगाया ज्ञान हे परन्तु पूर्ण परमात्मा के पूर्ण मोक्ष मार्ग का मुझे भी ज्ञान नहीं है। उसके लिए इस मंत्र ३४ में कहा है कि उस  (विद्धि) समझ उन पूर्ण परमात्मा के (तत) तत्वज्ञान को वास्तविक ज्ञान व समाधान को जानने वाले संतों को गीता अध्याय 4 श्लोक ३४ में गीता (प्रणिपातेन) भलीभाँति दण्डवत् प्रणाम करनेसे उनकी ज्ञानदाता ने कहा है कि तत्वज्ञान (सेवया) सेवा करनेसे ओर कपट छोड़कर ( परिप्रश्नेन) सरलतापूर्वक प्रश्न करनेसे (त) वे (तत्वदर्शिनः ) पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति के लिए तत्वदर्शी संत की को तत्व से जानने वाले अर्थात् तत्वदर्शी (ज्ञानिनः ) ज्ञानी যানি নিনা যুড় ক महात्मा तुझे उस ( ज्ञानम् ) तत्वज्ञानका (उपदेक्ष्यन्ति  शरण में जाओ उपदेश करेंगे। (३४) इसी का प्रमाण गीता अध्याय 2 ज्ञान और भक्ति अधूरी है। श्लोक १५१६ में भी है। तत्वदर्शी संत , सतगुर रामपल जी मठाराज Sant Rampal Ji Maharaj মন যাসপালসী সমাযাস সী ম Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये [য নিঃথুল্ক निःशुल्क नामदीक्षा  { पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : +91 7496801823 OSan RampalJManara GoossPsy 2.27M subscribers * T7K videos - ShareChat