In Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 32, Kaal God is saying that I am the enlarged Kaal, the destroyer of the loks/worlds. I have come (appeared) at this time to destroy the worlds/loks. Even without you, these warriors arrayed in the opponent's army will not survive i.e. I will eat them.
Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गीता ज्ञान🛕
Chapter 7 Verse 29
जारामरानमोक्षय, मम', अश्रित्य, यतंति, ये, ते, ब्रह्म, तत्', विदुः, क्रतस्न्नम्, आध्याम्, कर्म, च, अखिलम्' ||29||
Saint Rampal Ji Maharaj revealed the secrets of God
Geeta
Those who know My complete spiritual knowledge and actions take refuge in that Brahman, and try to get rid of old age and death.
Geeta is your nectar of knowledge
Must read the holy book "Geeta Tera Gyan Amrit" #🙏गीता ज्ञान🛕
🎉गीताजी अध्याय 18 श्लोक 62 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा गीता ज्ञानदाता से भिन्न है।
हे भारत! तू संपूर्ण भाव से उस परमेश्वर की ही शरण में जा। उस परमात्मा की कृपा से ही तू परम शान्ति को तथा सदा रहने वाले अविनाशी स्थान को अर्थात् सतलोक को प्राप्त होगा।”
यही प्रमाण गीता जी अध्याय 18 श्लोक 66 में भी दिया गया है। #🙏गीता ज्ञान🛕
#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता अध्याय 18, श्लोक 66
↪️ गीता ज्ञान दाता काल कहता है, " मेरी सभी धार्मिक पूजाओं को मुझमें त्याग कर, तू केवल उस एक पूर्ण परमात्मा की शरण में जा। मैं तुझे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा; तू शोक मत कर।
Sant Rampal Ji Maharaj 🙏
#SaturdayMotivation . #🙏गीता ज्ञान🛕
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गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5, अध्याय 10 श्लोक 2 में
अपने को नाशवान यानि जन्म-मरण के चक में सदा रहने वाला बताया है। कहा है कि हे अर्जुन ! तेरे और मेरे बहुत जन्म हो चुके है। तू नहीं जानता, मैं जानता हूँ।
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Saint Rampal Ji Maharaj reveals the secrets of the Bhagavad Gita.
Chapter 16, Verse 23: A person who abandons scriptural injunctions and acts arbitrarily attains neither success, nor ultimate salvation, nor happiness. #🙏गीता ज्ञान🛕
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पवित्र गीता अध्याय 9 मंत्र 25 व 23 से 24 तथा अध्याय 7 श्लोक 12 से 15 तथा 20 से 23 में भगवान ने स्पष्ट मना किया है
श्राद्ध करने (पितर पूजा करने), पिण्ड दान करने (भूत पूजा करने) से तथा अन्य देवताओं की पूजा करने से मना किया है। देखें साधना चैनल शाम 7:30 बजे #🙏गीता ज्ञान🛕
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गीता के रहस्यों का महाखुलासा
॥पूर्ण परमात्मा के लाभ का आनंद प्राप्त करने की विधि व व्रत निषेध की जानकारी ॥
न, अति, अश्नतः, तु, योगः, अस्ति, न, च, एकान्तम्, अनश्नतः, न, च, अति, स्वप्नशीलस्य, जाग्रतः, न, एव, च, अर्जुन।
Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गीता ज्ञान🛕
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पवित्र गीता जी अध्याय 9 श्लोक 25 में साफ लिखा है कि भूतों को पूजोगे तो भूतों की योनियों में जाओगे और पितर पूजोगे तो पितर योनि में जाओगे।
फिर क्यों आप श्राद्ध कर्म, पिंड दान आदि करते हो? ये मोक्ष मार्ग के विपरीत क्रियाएं
Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गीता ज्ञान🛕
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गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहा है कि अर्जुन पूर्ण परमात्मा के तत्वज्ञान को जानने वाले तत्वदर्शी संतों के पास जा कर उनसे विनम्रता से पूर्ण परमात्मा का भक्ति मार्ग प्राप्त कर, मैं उस पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग नहीं जानता।
संत रामपाल जी महाराज ही वह तत्वदर्शी संत हैं।#SantRampalJiMaharajYouTubeChannel
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![🙏गीता ज्ञान🛕 - SNITTINILuINIIIIIUIIEIS THENYSIERIESOF THE DiDIADGII Gita Chapter18 Verse 62 : O Bharat! You, in every respect go in the refuge of only thot Supreme God By the grace of that Supreme God only you peace and the everlasting will attain thel cupceoemeoce i.e Satlok place Download our Official App To receive free Initiation and spiritual books by Sant Rampal Ji Maharaj Sant Rampal ]i Maharaj ]i; GETITON Play Google WhatsApp: 91 7496801823 message us on SNITTINILuINIIIIIUIIEIS THENYSIERIESOF THE DiDIADGII Gita Chapter18 Verse 62 : O Bharat! You, in every respect go in the refuge of only thot Supreme God By the grace of that Supreme God only you peace and the everlasting will attain thel cupceoemeoce i.e Satlok place Download our Official App To receive free Initiation and spiritual books by Sant Rampal Ji Maharaj Sant Rampal ]i Maharaj ]i; GETITON Play Google WhatsApp: 91 7496801823 message us on - ShareChat 🙏गीता ज्ञान🛕 - SNITTINILuINIIIIIUIIEIS THENYSIERIESOF THE DiDIADGII Gita Chapter18 Verse 62 : O Bharat! You, in every respect go in the refuge of only thot Supreme God By the grace of that Supreme God only you peace and the everlasting will attain thel cupceoemeoce i.e Satlok place Download our Official App To receive free Initiation and spiritual books by Sant Rampal Ji Maharaj Sant Rampal ]i Maharaj ]i; GETITON Play Google WhatsApp: 91 7496801823 message us on SNITTINILuINIIIIIUIIEIS THENYSIERIESOF THE DiDIADGII Gita Chapter18 Verse 62 : O Bharat! You, in every respect go in the refuge of only thot Supreme God By the grace of that Supreme God only you peace and the everlasting will attain thel cupceoemeoce i.e Satlok place Download our Official App To receive free Initiation and spiritual books by Sant Rampal Ji Maharaj Sant Rampal ]i Maharaj ]i; GETITON Play Google WhatsApp: 91 7496801823 message us on - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_213289_2fce2466_1764418207516_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=516_sc.jpg)
![🙏गीता ज्ञान🛕 - गीता के रहस्यों का महाखुलासा अन्थ गीता अनुवाद कर्ताओं ने अर्थ आना किथा है 7 व्रज शद्द क वन अर्थ जाना, সা ೯ 3giశగ 'c ಹ7 95] चला जाना आदि होता है। अध्याय १८ का श्लोक ६६ सर्वधर्मान् , परित्यज्य , माम् , एकम् , शरणम् , ब्रज, अहम् , त्वा, सर्वपापेभ्यः, मोक्षयिष्यामि , मा, शुचःIl६६११ मेरी ( सर्वधर्मान् ) सम्पूर्ण पूजाओंको (माम् ) मुझ में (परित्यज्य ) त्यागकर तू केवल ( एकम् ) एक उस अद्वितीय अर्थात् पूर्ण परमात्मा की ( शरणम् ) शरणमें (व्रज ) जा। ((अहम् ) मैं (त्वा ) तुझे ( सर्वपापेभ्यः ) सम्पूर्ण पापोंसे (मोक्षयिष्यामि ) छुड़वा दूँगा तू (मा,शुचः ) शोक मत कर। निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नामःपरापता भज ؟٦ ٦٦ +91 7496801823 f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPAUIM SUPREMEGOD ORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ गीता के रहस्यों का महाखुलासा अन्थ गीता अनुवाद कर्ताओं ने अर्थ आना किथा है 7 व्रज शद्द क वन अर्थ जाना, সা ೯ 3giశగ 'c ಹ7 95] चला जाना आदि होता है। अध्याय १८ का श्लोक ६६ सर्वधर्मान् , परित्यज्य , माम् , एकम् , शरणम् , ब्रज, अहम् , त्वा, सर्वपापेभ्यः, मोक्षयिष्यामि , मा, शुचःIl६६११ मेरी ( सर्वधर्मान् ) सम्पूर्ण पूजाओंको (माम् ) मुझ में (परित्यज्य ) त्यागकर तू केवल ( एकम् ) एक उस अद्वितीय अर्थात् पूर्ण परमात्मा की ( शरणम् ) शरणमें (व्रज ) जा। ((अहम् ) मैं (त्वा ) तुझे ( सर्वपापेभ्यः ) सम्पूर्ण पापोंसे (मोक्षयिष्यामि ) छुड़वा दूँगा तू (मा,शुचः ) शोक मत कर। निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नामःपरापता भज ؟٦ ٦٦ +91 7496801823 f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPAUIM SUPREMEGOD ORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ - ShareChat 🙏गीता ज्ञान🛕 - गीता के रहस्यों का महाखुलासा अन्थ गीता अनुवाद कर्ताओं ने अर्थ आना किथा है 7 व्रज शद्द क वन अर्थ जाना, সা ೯ 3giశగ 'c ಹ7 95] चला जाना आदि होता है। अध्याय १८ का श्लोक ६६ सर्वधर्मान् , परित्यज्य , माम् , एकम् , शरणम् , ब्रज, अहम् , त्वा, सर्वपापेभ्यः, मोक्षयिष्यामि , मा, शुचःIl६६११ मेरी ( सर्वधर्मान् ) सम्पूर्ण पूजाओंको (माम् ) मुझ में (परित्यज्य ) त्यागकर तू केवल ( एकम् ) एक उस अद्वितीय अर्थात् पूर्ण परमात्मा की ( शरणम् ) शरणमें (व्रज ) जा। ((अहम् ) मैं (त्वा ) तुझे ( सर्वपापेभ्यः ) सम्पूर्ण पापोंसे (मोक्षयिष्यामि ) छुड़वा दूँगा तू (मा,शुचः ) शोक मत कर। निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नामःपरापता भज ؟٦ ٦٦ +91 7496801823 f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPAUIM SUPREMEGOD ORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ गीता के रहस्यों का महाखुलासा अन्थ गीता अनुवाद कर्ताओं ने अर्थ आना किथा है 7 व्रज शद्द क वन अर्थ जाना, সা ೯ 3giశగ 'c ಹ7 95] चला जाना आदि होता है। अध्याय १८ का श्लोक ६६ सर्वधर्मान् , परित्यज्य , माम् , एकम् , शरणम् , ब्रज, अहम् , त्वा, सर्वपापेभ्यः, मोक्षयिष्यामि , मा, शुचःIl६६११ मेरी ( सर्वधर्मान् ) सम्पूर्ण पूजाओंको (माम् ) मुझ में (परित्यज्य ) त्यागकर तू केवल ( एकम् ) एक उस अद्वितीय अर्थात् पूर्ण परमात्मा की ( शरणम् ) शरणमें (व्रज ) जा। ((अहम् ) मैं (त्वा ) तुझे ( सर्वपापेभ्यः ) सम्पूर्ण पापोंसे (मोक्षयिष्यामि ) छुड़वा दूँगा तू (मा,शुचः ) शोक मत कर। निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नामःपरापता भज ؟٦ ٦٦ +91 7496801823 f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPAUIM SUPREMEGOD ORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_189404_ae676ec_1764418084312_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=312_sc.jpg)





