Shree Hari sharnam
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#श्री मंगलनाथ जी उज्जैन मध्यप्रदेश से #श्री मंगलनाथ #मंगलनाथ मंदिर उज्जैन #मंगलनाथ मंदिर #जय मंगलनाथ भगवान
श्री मंगलनाथ जी उज्जैन मध्यप्रदेश से - ShareChat
#Shree RadhaRaman 🙏 ##radharaman #mero radharaman #🙏🌹radhey radhey🌹🙏
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00:39
#premanand Ji Maharaj #Premanand Ji Maharaj 🙏 #premanand ji maharaj🙏 #premanand maharaj ji 🙏
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00:49
#🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 १९ अप्रैल & श्रीभगवानुवाच सन्न्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौ  तयोस्तु 7 कर्मसन्न्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते II २ Il ज्ञेयः स नित्यसन्न्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते II ३ Ik श्रीभगवान् ने उत्तर दिया- मुक्ति के लिए तो कर्म का परित्याग तथा भक्तिमय -कर्म ( कर्मयोग ) दोनों ही उत्तम हैं। किन्तु इन दोनों में से कर्म के  भक्तियुक्त 7 कर्म श्रेष्ठ है। (5.२ ) परित्याग से से घृणा 7 जो पुरुष न तो कर्मफलों  करता है और न की इच्छा करता है, वॅह नित्य संन्यासी जाना ಹಗಯPಗೆ जाता है। हे महाबाहु अर्जुन! ऐसा मनुष्य समस्त द्वन्द्वों से रहित होकर भवबॅन्धन को पार कर पूर्णतया मुक्त हो जाता है। (5.3 ) गीतामृत 3 १९ अप्रैल & श्रीभगवानुवाच सन्न्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौ  तयोस्तु 7 कर्मसन्न्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते II २ Il ज्ञेयः स नित्यसन्न्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते II ३ Ik श्रीभगवान् ने उत्तर दिया- मुक्ति के लिए तो कर्म का परित्याग तथा भक्तिमय -कर्म ( कर्मयोग ) दोनों ही उत्तम हैं। किन्तु इन दोनों में से कर्म के  भक्तियुक्त 7 कर्म श्रेष्ठ है। (5.२ ) परित्याग से से घृणा 7 जो पुरुष न तो कर्मफलों  करता है और न की इच्छा करता है, वॅह नित्य संन्यासी जाना ಹಗಯPಗೆ जाता है। हे महाबाहु अर्जुन! ऐसा मनुष्य समस्त द्वन्द्वों से रहित होकर भवबॅन्धन को पार कर पूर्णतया मुक्त हो जाता है। (5.3 ) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - ரிளா 3 18 3|& তিস্ন স্লানম স্বন মানিষ্টীনিন্ব সমিননল[ন : মংায మRగౌ II శన Il अर्जुन उवाच 9tr सन्न्यासं कर्मूणां कृष्ण " शंससि यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे  মুনিখিলমূ Il ? || ؟؟ हृदय में अज्ञान के कारण जो अतएव उन्हें ज्ञानरूपी शस्त्र से काट মংায तुम यो्ग से समन्चित होकर डालो। हे भारत! खड़े होओ और युद्ध करो। (४.४२ ) ಪಾಜ್ಞಾ್ নক লি< ] पहले आप मुझसे कर्म  aரaa और फिर भक्तिपूर्वक कर्म् ক க क़्या आप अब कृपा करक নিখিল তব ম মুভরী বনাফী ক্ি ভূন ত্রীনী ম ম কীন अधिक लाभप्रद है? (५.१ ) ரிளா 3 18 3|& তিস্ন স্লানম স্বন মানিষ্টীনিন্ব সমিননল[ন : মংায మRగౌ II శన Il अर्जुन उवाच 9tr सन्न्यासं कर्मूणां कृष्ण " शंससि यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे  মুনিখিলমূ Il ? || ؟؟ हृदय में अज्ञान के कारण जो अतएव उन्हें ज्ञानरूपी शस्त्र से काट মংায तुम यो्ग से समन्चित होकर डालो। हे भारत! खड़े होओ और युद्ध करो। (४.४२ ) ಪಾಜ್ಞಾ್ নক লি< ] पहले आप मुझसे कर्म  aரaa और फिर भक्तिपूर्वक कर्म् ক க क़्या आप अब कृपा करक নিখিল তব ম মুভরী বনাফী ক্ি ভূন ত্রীনী ম ম কীন अधिक लाभप्रद है? (५.१ ) - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - ShareChat
00:21
#महाकाल दर्शन
महाकाल दर्शन - ShareChat
#महाकाल दर्शन
महाकाल दर्शन - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - সীনামুন $ १७ अप्रैल & योगसन्न्यस्तकर्माणं ज्ञानसञ्छिन्नसंशयम् आत्मवन्तं न कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय १। ४१ || जो व्यक्ति अपने कर्मफलों का परित्याग करते हुए भक्ति करता है। और जिसके  संशय दिव्यज्ञान द्वारा विनष्ट हो चुके होते हैं , वही वास्तव में आत्पपरायण है। हे धनञ्जय! वह कर्मों के बन्धन से नहीं बँधता (4.41) সীনামুন $ १७ अप्रैल & योगसन्न्यस्तकर्माणं ज्ञानसञ्छिन्नसंशयम् आत्मवन्तं न कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय १। ४१ || जो व्यक्ति अपने कर्मफलों का परित्याग करते हुए भक्ति करता है। और जिसके  संशय दिव्यज्ञान द्वारा विनष्ट हो चुके होते हैं , वही वास्तव में आत्पपरायण है। हे धनञ्जय! वह कर्मों के बन्धन से नहीं बँधता (4.41) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 १६ अप्रैल & अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति नायं लोकोडस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः I1 80 || किन्तु जो अज्ञानी तथा श्रद्धाविहीन व्यक्ति में संदेह करते हैं, वे शास्त्रों अपितु भगवद्भावनामृत नहीं प्राप्त करते , नीचे गिर जाते हैं। संशयात्मा के लिए न तो इस लोक में , न ही परलोक में कोई सुख (4.40) ٤ गीतामृत 3 १६ अप्रैल & अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति नायं लोकोडस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः I1 80 || किन्तु जो अज्ञानी तथा श्रद्धाविहीन व्यक्ति में संदेह करते हैं, वे शास्त्रों अपितु भगवद्भावनामृत नहीं प्राप्त करते , नीचे गिर जाते हैं। संशयात्मा के लिए न तो इस लोक में , न ही परलोक में कोई सुख (4.40) ٤ - ShareChat