Shree Hari sharnam
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#जय मंगलनाथ भगवान
जय मंगलनाथ भगवान - शरृंगार मगल यह णन्म स्थान मंगलनाय मविर , उज्णेन शरृंगार मगल यह णन्म स्थान मंगलनाय मविर , उज्णेन - ShareChat
#🤝अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं🫂 #🔔अक्षय तृतीया Status⏳
🤝अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं🫂 - चरण दर्शन ೯ चरण दर्शन ೯ - ShareChat
#🤝अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं🫂
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#🤝अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं🫂
🤝अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं🫂 - Lin ,ll *5ll 7:47 शास्त्रों के अनुसार ये 4 सरल उपाय पर जरूर करे तृतीया अक्षय सबसे पहले, अपने घर के आटे वाले उपाय डिब्बे में २५ का एक सिक्का डाल दें , जो आपके भंडार को हमेशा भरा रखेगा| दूसरा, चीनी वाले डिब्बे में दालचीनी के कुँछ जो घर में मिठास और टुकड़े रखें, जों सकारात्मकता बढ़ाते हैं। तीसरा उपाय यह है कि नमक के डिब्बे में चार घर की नकारात्मक लौंग डालकर रखेंफ, इससे " है। / ऊर्जा दूर होती है और बरकत बनी रहती  अंत में , अपने घर में ' गजकेसरी योगू' क्ा फल प्राप्त प्राप्त करने के लिए चावल के डिब्बे में एक की गांठ डाल दें। ೯೯ಕೆ साबुत साबुत जीवन में बड़ी आपके ये छोटे छोटे बदलाव खशहाली ला सकते हैं Add comment.. Lin ,ll *5ll 7:47 शास्त्रों के अनुसार ये 4 सरल उपाय पर जरूर करे तृतीया अक्षय सबसे पहले, अपने घर के आटे वाले उपाय डिब्बे में २५ का एक सिक्का डाल दें , जो आपके भंडार को हमेशा भरा रखेगा| दूसरा, चीनी वाले डिब्बे में दालचीनी के कुँछ जो घर में मिठास और टुकड़े रखें, जों सकारात्मकता बढ़ाते हैं। तीसरा उपाय यह है कि नमक के डिब्बे में चार घर की नकारात्मक लौंग डालकर रखेंफ, इससे " है। / ऊर्जा दूर होती है और बरकत बनी रहती  अंत में , अपने घर में ' गजकेसरी योगू' क्ा फल प्राप्त प्राप्त करने के लिए चावल के डिब्बे में एक की गांठ डाल दें। ೯೯ಕೆ साबुत साबुत जीवन में बड़ी आपके ये छोटे छोटे बदलाव खशहाली ला सकते हैं Add comment.. - ShareChat
#🤝अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं🫂
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#श्री मंगलनाथ जी उज्जैन मध्यप्रदेश से #श्री मंगलनाथ #मंगलनाथ मंदिर उज्जैन #मंगलनाथ मंदिर #जय मंगलनाथ भगवान
श्री मंगलनाथ जी उज्जैन मध्यप्रदेश से - ShareChat
#Shree RadhaRaman 🙏 ##radharaman #mero radharaman #🙏🌹radhey radhey🌹🙏
Shree RadhaRaman 🙏 - ShareChat
00:39
#premanand Ji Maharaj #Premanand Ji Maharaj 🙏 #premanand ji maharaj🙏 #premanand maharaj ji 🙏
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00:49
#🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 १९ अप्रैल & श्रीभगवानुवाच सन्न्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौ  तयोस्तु 7 कर्मसन्न्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते II २ Il ज्ञेयः स नित्यसन्न्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते II ३ Ik श्रीभगवान् ने उत्तर दिया- मुक्ति के लिए तो कर्म का परित्याग तथा भक्तिमय -कर्म ( कर्मयोग ) दोनों ही उत्तम हैं। किन्तु इन दोनों में से कर्म के  भक्तियुक्त 7 कर्म श्रेष्ठ है। (5.२ ) परित्याग से से घृणा 7 जो पुरुष न तो कर्मफलों  करता है और न की इच्छा करता है, वॅह नित्य संन्यासी जाना ಹಗಯPಗೆ जाता है। हे महाबाहु अर्जुन! ऐसा मनुष्य समस्त द्वन्द्वों से रहित होकर भवबॅन्धन को पार कर पूर्णतया मुक्त हो जाता है। (5.3 ) गीतामृत 3 १९ अप्रैल & श्रीभगवानुवाच सन्न्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौ  तयोस्तु 7 कर्मसन्न्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते II २ Il ज्ञेयः स नित्यसन्न्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते II ३ Ik श्रीभगवान् ने उत्तर दिया- मुक्ति के लिए तो कर्म का परित्याग तथा भक्तिमय -कर्म ( कर्मयोग ) दोनों ही उत्तम हैं। किन्तु इन दोनों में से कर्म के  भक्तियुक्त 7 कर्म श्रेष्ठ है। (5.२ ) परित्याग से से घृणा 7 जो पुरुष न तो कर्मफलों  करता है और न की इच्छा करता है, वॅह नित्य संन्यासी जाना ಹಗಯPಗೆ जाता है। हे महाबाहु अर्जुन! ऐसा मनुष्य समस्त द्वन्द्वों से रहित होकर भवबॅन्धन को पार कर पूर्णतया मुक्त हो जाता है। (5.3 ) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - ரிளா 3 18 3|& তিস্ন স্লানম স্বন মানিষ্টীনিন্ব সমিননল[ন : মংায మRగౌ II శన Il अर्जुन उवाच 9tr सन्न्यासं कर्मूणां कृष्ण " शंससि यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे  মুনিখিলমূ Il ? || ؟؟ हृदय में अज्ञान के कारण जो अतएव उन्हें ज्ञानरूपी शस्त्र से काट মংায तुम यो्ग से समन्चित होकर डालो। हे भारत! खड़े होओ और युद्ध करो। (४.४२ ) ಪಾಜ್ಞಾ್ নক লি< ] पहले आप मुझसे कर्म  aரaa और फिर भक्तिपूर्वक कर्म् ক க क़्या आप अब कृपा करक নিখিল তব ম মুভরী বনাফী ক্ি ভূন ত্রীনী ম ম কীন अधिक लाभप्रद है? (५.१ ) ரிளா 3 18 3|& তিস্ন স্লানম স্বন মানিষ্টীনিন্ব সমিননল[ন : মংায మRగౌ II శన Il अर्जुन उवाच 9tr सन्न्यासं कर्मूणां कृष्ण " शंससि यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे  মুনিখিলমূ Il ? || ؟؟ हृदय में अज्ञान के कारण जो अतएव उन्हें ज्ञानरूपी शस्त्र से काट মংায तुम यो्ग से समन्चित होकर डालो। हे भारत! खड़े होओ और युद्ध करो। (४.४२ ) ಪಾಜ್ಞಾ್ নক লি< ] पहले आप मुझसे कर्म  aரaa और फिर भक्तिपूर्वक कर्म् ক க क़्या आप अब कृपा करक নিখিল তব ম মুভরী বনাফী ক্ি ভূন ত্রীনী ম ম কীন अधिक लाभप्रद है? (५.१ ) - ShareChat