Shree Hari sharnam
ShareChat
click to see wallet page
@3819013397
3819013397
Shree Hari sharnam
@3819013397
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
महाकाल भस्म आरती दर्शन दिनांक 23 फरवरी 2026 #महाकाल महाकालेश्वर #महाकाल दर्शन #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
महाकाल महाकालेश्वर - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 २३ फरवरी <& यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः II ६० Il तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता Il ६१ I( है औिर्ज्वन ! झन्ियाँक्ढीत पनरी प्रबेल तनथकवेगवान किवे उस विवेकी पुरुष के मन को भी लेती हैं, जो उन्हें वश में बलपूर्वक हर करने का प्रयत्न करता है। (२.६० ) जो इन्द्रियों को पूर्णतया वश में रखते हुए इन्द्रियनसंयमन करता है और अपनी चेतना को मुझमें स्थिर कर देता है , वह मनुष्य स्थिरंबुद्धि कहलाता है। (२.6१ ) गीतामृत 3 २३ फरवरी <& यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः II ६० Il तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता Il ६१ I( है औिर्ज्वन ! झन्ियाँक्ढीत पनरी प्रबेल तनथकवेगवान किवे उस विवेकी पुरुष के मन को भी लेती हैं, जो उन्हें वश में बलपूर्वक हर करने का प्रयत्न करता है। (२.६० ) जो इन्द्रियों को पूर्णतया वश में रखते हुए इन्द्रियनसंयमन करता है और अपनी चेतना को मुझमें स्थिर कर देता है , वह मनुष्य स्थिरंबुद्धि कहलाता है। (२.6१ ) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 २२फरवरी & यूदा संहूरते चायं कूर्मोउङ्गानीव सर्वशः इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्येस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता  II ५८ I१ विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः 1 रसवर्जं रसोउप्यस्य परं दृष्ट्ा निवर्तते II ५९ II जिस प्रकार कछुवा अपने अंगों को संकुचित करके खोल के भीतर कर लेता कौ तरह जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों  ड्ैत्िय निषढ़ैता से खींच लेता है, वूह /2.58) में दृढ़तापूर्वक स्थिर होता है। कीले ही निवृन्त हहेत देहधारी जीव इन्द्रियभोग से इन्द्रियभोगों की इच्छा " जाय पर उसमें  रहती है। लेकिन उत्तम रस के अनुभव होने से ऐसे कार्यों को बन्द करने पर वह भक्ति में स्थिर हो जाता है। (२.59 ) गीतामृत 3 २२फरवरी & यूदा संहूरते चायं कूर्मोउङ्गानीव सर्वशः इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्येस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता  II ५८ I१ विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः 1 रसवर्जं रसोउप्यस्य परं दृष्ट्ा निवर्तते II ५९ II जिस प्रकार कछुवा अपने अंगों को संकुचित करके खोल के भीतर कर लेता कौ तरह जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों  ड्ैत्िय निषढ़ैता से खींच लेता है, वूह /2.58) में दृढ़तापूर्वक स्थिर होता है। कीले ही निवृन्त हहेत देहधारी जीव इन्द्रियभोग से इन्द्रियभोगों की इच्छा " जाय पर उसमें  रहती है। लेकिन उत्तम रस के अनुभव होने से ऐसे कार्यों को बन्द करने पर वह भक्ति में स्थिर हो जाता है। (२.59 ) - ShareChat
महाकाल भाजपा के दर्शन दिनांक 22 फरवरी 2026 #महाकाल दर्शन #महाकाल महाकालेश्वर
महाकाल दर्शन - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन 9 श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन 9 - ShareChat
गीता का ज्ञान श्लोक 2.54 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - সীনামূন $ १९ फरवरी < SKCONe अर्जुन उवाच BHOPAL स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव  किम् स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत  l (8 || अर्जुन ने कहा - हे कृष्ण! अध्यात्म में लीन चेतना वाले व्यक्ति ( स्थितप्रज्ञ ) के क्या लक्षण हैं ? वह कैसे बोलता है तथा उसकी  भाषा क्या है? वह किस तरह बैठता और चलता है ? (2.54) ISKCON Bhopal 8108834508 সীনামূন $ १९ फरवरी < SKCONe अर्जुन उवाच BHOPAL स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव  किम् स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत  l (8 || अर्जुन ने कहा - हे कृष्ण! अध्यात्म में लीन चेतना वाले व्यक्ति ( स्थितप्रज्ञ ) के क्या लक्षण हैं ? वह कैसे बोलता है तथा उसकी  भाषा क्या है? वह किस तरह बैठता और चलता है ? (2.54) ISKCON Bhopal 8108834508 - ShareChat
गीता का ज्ञान #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 १८ फरवरी & यदा ते मोहकलिलं बुद्धि्व्यतितरिष्यति तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ।I ५२ ।I श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि II ५३ समाधावचला || जब तुम्हारी बुद्धि मोह रूपी सघन वन को पार कर जायेगी तो तुम सुने हुए तथा योग्य सब के प्रति अन्यमनस्क মুনন  हो जाओगे। (2.5२ ) जब तुम्हारा मन वेदों की अलंकारमयी भाषा से विचलित न हो और वह आत्म -् साक्षात्कार की समाधि में स्थिर हो जाय , तब तुम्हें दिव्य चेतना प्राप्त हो जायेगी। (२.५३ गीतामृत 3 १८ फरवरी & यदा ते मोहकलिलं बुद्धि्व्यतितरिष्यति तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ।I ५२ ।I श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि II ५३ समाधावचला || जब तुम्हारी बुद्धि मोह रूपी सघन वन को पार कर जायेगी तो तुम सुने हुए तथा योग्य सब के प्रति अन्यमनस्क মুনন  हो जाओगे। (2.5२ ) जब तुम्हारा मन वेदों की अलंकारमयी भाषा से विचलित न हो और वह आत्म -् साक्षात्कार की समाधि में स्थिर हो जाय , तब तुम्हें दिव्य चेतना प्राप्त हो जायेगी। (२.५३ - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏सुविचार📿
☝अनमोल ज्ञान - कैसे कह दूँ कि भगवान मेरी नहीं सुनते, उन्होंने वो सारी बाज़ियाँ पलटी है, जहाँ मेरी हार पहले से ही लिख दी गई थी कैसे कह दूँ कि भगवान मेरी नहीं सुनते, उन्होंने वो सारी बाज़ियाँ पलटी है, जहाँ मेरी हार पहले से ही लिख दी गई थी - ShareChat
राधारमण लाल जू वृन्दावन #🌹मेरो राधारमण🌹 #प्राणधन राधारमण #जय-जय प्यारे राधारमण जी 🪷🙏🪷 #जय राधारमण #💖श्री राधारमण बिहारी 💞
🌹मेरो राधारमण🌹 - प्रभु संग प्रभु संग - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #☝अनमोल ज्ञान
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत  १७ फरवरी & बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदृष्कृते तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मेसु कौशलम् II ५०  || कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम् II ५१ || भक्ति में संलग्न मनुष्य इस जीवन में ही अच्छे নথা ব্রুই কার্যী মী 3বন ক্রী মুক্ ক্ং লীনা है। अतः योग के लिए प्रयत्न करो क्योंकि सारा कार्य~्कौशल यही है। (२.५० ) भगवद्भक्ति में लगे रहकर बड़े-बड़े इस तरह ऋषि , मुनि अथवा भक्तगण अपने आपको इस भौतिक संसार में कर्म के फलों से मुक्त कर लेते हैं। इस प्रकार वे जन्म - मृत्यु के चक्र से छूट जाते हैं और भगवान् के पास जाकर उस अवस्था को प्राप्त करते ி#4781 (2.51) ঔ, লী মমম गीतामृत  १७ फरवरी & बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदृष्कृते तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मेसु कौशलम् II ५०  || कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम् II ५१ || भक्ति में संलग्न मनुष्य इस जीवन में ही अच्छे নথা ব্রুই কার্যী মী 3বন ক্রী মুক্ ক্ং লীনা है। अतः योग के लिए प्रयत्न करो क्योंकि सारा कार्य~्कौशल यही है। (२.५० ) भगवद्भक्ति में लगे रहकर बड़े-बड़े इस तरह ऋषि , मुनि अथवा भक्तगण अपने आपको इस भौतिक संसार में कर्म के फलों से मुक्त कर लेते हैं। इस प्रकार वे जन्म - मृत्यु के चक्र से छूट जाते हैं और भगवान् के पास जाकर उस अवस्था को प्राप्त करते ி#4781 (2.51) ঔ, লী মমম - ShareChat