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#🙏हनुमान जयंती की शुभकामनाएं🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
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#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - সীনামূন $ १ अप्रैल 4 एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः ক্ব: সর্তন্ব্ব্মনীমধিIা:? {్గౌ II 96 Il किं कर्म किमकर्मेति 0 तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेडशुभात् II १६ ।१ प्राचीन काल में समस्त मुक्तात्माओं ने मेरी दिव्य प्रकृति को जान करके ही कर्म  किया, अतः तुम्हें चाहिए कि उनके पदचिन्हों का अनुसरण करते हुए अपने कर्तव्य का पालन (4.15) करा। कर्म क्या है और अकर्म क्या है , इसे निश्चित करने में बुद्धिमान् व्युक्ति भी मोहग्रस्त हो जाते हैं। अतएव मैं तुमको बताऊँगा कि कर्म क्या है, जिसे जानकर तुम अशुभ से मुक्त हो सकोगे। (४.१६ ) सार সীনামূন $ १ अप्रैल 4 एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः ক্ব: সর্তন্ব্ব্মনীমধিIা:? {్గౌ II 96 Il किं कर्म किमकर्मेति 0 तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेडशुभात् II १६ ।१ प्राचीन काल में समस्त मुक्तात्माओं ने मेरी दिव्य प्रकृति को जान करके ही कर्म  किया, अतः तुम्हें चाहिए कि उनके पदचिन्हों का अनुसरण करते हुए अपने कर्तव्य का पालन (4.15) करा। कर्म क्या है और अकर्म क्या है , इसे निश्चित करने में बुद्धिमान् व्युक्ति भी मोहग्रस्त हो जाते हैं। अतएव मैं तुमको बताऊँगा कि कर्म क्या है, जिसे जानकर तुम अशुभ से मुक्त हो सकोगे। (४.१६ ) सार - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - সীনামূন $ ३१ मार्च & मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः चातुर्वर्ण्यं  तस्य कर्तारमपि मां विद्वयकर्तारमव्ययम् II १३ II न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा  হ্ূনি মাঁ যরীতসিতানানি কর্মসিন ম বরঙ্য়ন Il ?8 স্ক্বুনি ক নীনী  और उनसे सम्बद्ध कर्म गुणों के अनुसार मेरे द्वारा मानव समाज के चार विभाग रचे गये। यद्यपि मैं इस व्यवस्था  # 9=44373 =1=4.135# का स्रष्टा हूँ। (4.13) अव्यय अकर्ता इतने  पर मुझ पर किसी कर्म का प्रभाव नहीं पड़ता , न ही मैं हूँ। जो मेरे सम्बन्ध में कर्मफल की कामना करता इस सत्य को जानता है, वह भी कर्मों के फल के पाश में नहीं बँधता (4.14) সীনামূন $ ३१ मार्च & मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः चातुर्वर्ण्यं  तस्य कर्तारमपि मां विद्वयकर्तारमव्ययम् II १३ II न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा  হ্ূনি মাঁ যরীতসিতানানি কর্মসিন ম বরঙ্য়ন Il ?8 স্ক্বুনি ক নীনী  और उनसे सम्बद्ध कर्म गुणों के अनुसार मेरे द्वारा मानव समाज के चार विभाग रचे गये। यद्यपि मैं इस व्यवस्था  # 9=44373 =1=4.135# का स्रष्टा हूँ। (4.13) अव्यय अकर्ता इतने  पर मुझ पर किसी कर्म का प्रभाव नहीं पड़ता , न ही मैं हूँ। जो मेरे सम्बन्ध में कर्मफल की कामना करता इस सत्य को जानता है, वह भी कर्मों के फल के पाश में नहीं बँधता (4.14) - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓
🙏गुरु महिमा😇 - गीतामृत 3 30 #74 & ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भज़ाम्यहम् मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः Il ?? Il काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा II १२ II जिस भाव से सारे लोग मेरी शरण ग्रहण करते हैं , उसी के अनुरूप मैं उन्हें फल देता ಕ್ಲ हे पार्थ! प्रत्येक व्यक्ति सभी प्रकार से पथ का अनुगमन करता है। (४.११ ) इस संसार में मनुष्य सकाम कर्मों में सिद्धि चाहते हैं, फलस्वरूप वे देवताओं की पूजा करते हैं। निस्सन्देह इस संसार में मनुष्यों को सकाम कर्म का फल शीघ्र प्राप्त होता है। ( ४.१२ ) गीतामृत 3 30 #74 & ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भज़ाम्यहम् मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः Il ?? Il काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा II १२ II जिस भाव से सारे लोग मेरी शरण ग्रहण करते हैं , उसी के अनुरूप मैं उन्हें फल देता ಕ್ಲ हे पार्थ! प्रत्येक व्यक्ति सभी प्रकार से पथ का अनुगमन करता है। (४.११ ) इस संसार में मनुष्य सकाम कर्मों में सिद्धि चाहते हैं, फलस्वरूप वे देवताओं की पूजा करते हैं। निस्सन्देह इस संसार में मनुष्यों को सकाम कर्म का फल शीघ्र प्राप्त होता है। ( ४.१२ ) - ShareChat
मंगलनाथ मंदिर उज्जैन तीर्थ दर्शन #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #मंगलनाथ
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - ef1r मंगल गह जन्म स्थान मंगलनाथ मंविर , उज्जैन ef1r मंगल गह जन्म स्थान मंगलनाथ मंविर , उज्जैन - ShareChat
Mahakal bhasm Aarti Darshan dinank 1 April 2026 #महाकाल दर्शन #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
महाकाल दर्शन - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - हर सनातनी को अवश्य जानना चाहिए श्रीकृष्ण की बांसुरी का नाम : सम्मोहिनी भगवान श्रीकृष्ण के धनुष का नाम : सारंग शिव के धनुष का नाम : पिनाक भगवान श्रीराम के धनुष का नाम : कोदंड अर्जुन के धनुष का नाम : गांडीव कर्ण के धनुष का नाम : विजय रावण की तलवार का नाम : चंद्रहास की गदा का नाम : कौमोदकी विष्णु ` भगवान विष्णु ` की तलवार का नाम : नंदक भगवान श्रीकृष्ण के शंख का नाम : पंचजन्य अर्जुन के शंख का नाम : देवदत्त युधिष्ठिर के शंख का नाम : अनंतविजय uus भीम के शंख का नाम : इंद्रदेव के हाथी का नाम : ऐरावत इंद्रदेव के घोडे का नाम : उच्चैःश्रवा के वाहन ( भैंसे) का नाम : महिष यमराज हर सनातनी को अवश्य जानना चाहिए श्रीकृष्ण की बांसुरी का नाम : सम्मोहिनी भगवान श्रीकृष्ण के धनुष का नाम : सारंग शिव के धनुष का नाम : पिनाक भगवान श्रीराम के धनुष का नाम : कोदंड अर्जुन के धनुष का नाम : गांडीव कर्ण के धनुष का नाम : विजय रावण की तलवार का नाम : चंद्रहास की गदा का नाम : कौमोदकी विष्णु ` भगवान विष्णु ` की तलवार का नाम : नंदक भगवान श्रीकृष्ण के शंख का नाम : पंचजन्य अर्जुन के शंख का नाम : देवदत्त युधिष्ठिर के शंख का नाम : अनंतविजय uus भीम के शंख का नाम : इंद्रदेव के हाथी का नाम : ऐरावत इंद्रदेव के घोडे का नाम : उच्चैःश्रवा के वाहन ( भैंसे) का नाम : महिष यमराज - ShareChat
#महाकाल दर्शन #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
महाकाल दर्शन - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 २९ मार्च 4 जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः | त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोउर्जुन II ९ II वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः I ?0 (( हे अर्जन! जो मेरे आविर्भाव तथा कर्मों की दिव्य प्रकृति को जानता है, वह इस शरीर ೫g೯: को छोड़ने पर इस भौतिक संसार  जन्म नहीं लेता , अपितु मेरे सनातन धाम को प्राप्त होता है। (४.१ ) आसक्ति , भय तथा क्रोध से मुक्त होकर , মুভাম' पूर्णतया तन्मय होकर और मेरी शरण में ऑकर बहुत से व्यक्ति भूत काल में मेरे ज्ञान से पवित्र हो हैं। इस प्रकोर से उन सबों ने मेरे प्रति चक दिव्यप्रेम को प्राप्त किया है। (४०१० ) गीतामृत 3 २९ मार्च 4 जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः | त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोउर्जुन II ९ II वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः I ?0 (( हे अर्जन! जो मेरे आविर्भाव तथा कर्मों की दिव्य प्रकृति को जानता है, वह इस शरीर ೫g೯: को छोड़ने पर इस भौतिक संसार  जन्म नहीं लेता , अपितु मेरे सनातन धाम को प्राप्त होता है। (४.१ ) आसक्ति , भय तथा क्रोध से मुक्त होकर , মুভাম' पूर्णतया तन्मय होकर और मेरी शरण में ऑकर बहुत से व्यक्ति भूत काल में मेरे ज्ञान से पवित्र हो हैं। इस प्रकोर से उन सबों ने मेरे प्रति चक दिव्यप्रेम को प्राप्त किया है। (४०१० ) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 २८ मार्च & यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत (2 अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् II ७ (( परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् 1 धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे II८ II हे भरतवंशी! जब भी और जहाँ भी धर्म का पतन होता है और अधर्म की प्रधानता होने लगती है, तब-्तब मैं / (4.7) अवतार लेता  भक्तों का उद्धार करने , का विनाश दुष्टों - करने तथा धर्म की फिर से स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूँ। (४ ८ ) गीतामृत 3 २८ मार्च & यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत (2 अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् II ७ (( परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् 1 धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे II८ II हे भरतवंशी! जब भी और जहाँ भी धर्म का पतन होता है और अधर्म की प्रधानता होने लगती है, तब-्तब मैं / (4.7) अवतार लेता  भक्तों का उद्धार करने , का विनाश दुष्टों - करने तथा धर्म की फिर से स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूँ। (४ ८ ) - ShareChat