Shree Hari sharnam
ShareChat
click to see wallet page
@3819013397
3819013397
Shree Hari sharnam
@3819013397
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - ShareChat
#महाकाल दर्शन #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
महाकाल दर्शन - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 २५ अप्रैल & युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम् अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते ।I १२ || सर्वकर्माणि मनसा सन्न्यस्यास्ते वशी सुखं नवद्वारे पुरे देही नैव कुर्वन्न कारयन् II १३ I( নিঃল সক্ষ থুভু থালি স্রাম কলো ঔ क्योंकि वह समस्त कर्मफल मुझे अर्पित कर देता है, किन्तु जो व्यक्ति भँगवान् से युक्त नहीं है और जो अपने श्रम का फॅलकामी है , वह बँध जाता है। ( ५.१२ ) जब देहधारी जीवात्मा अपनी प्रकृति को वश में कर लेता है और मन से समस्त कर्मों का परित्याग कर भौतिक शरीर ) देता है तब वह नौ द्वारों वाले नगर में बिना कुछ किये कराये सुखपूर्वक रहता है। (5.13 गीतामृत 3 २५ अप्रैल & युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम् अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते ।I १२ || सर्वकर्माणि मनसा सन्न्यस्यास्ते वशी सुखं नवद्वारे पुरे देही नैव कुर्वन्न कारयन् II १३ I( নিঃল সক্ষ থুভু থালি স্রাম কলো ঔ क्योंकि वह समस्त कर्मफल मुझे अर्पित कर देता है, किन्तु जो व्यक्ति भँगवान् से युक्त नहीं है और जो अपने श्रम का फॅलकामी है , वह बँध जाता है। ( ५.१२ ) जब देहधारी जीवात्मा अपनी प्रकृति को वश में कर लेता है और मन से समस्त कर्मों का परित्याग कर भौतिक शरीर ) देता है तब वह नौ द्वारों वाले नगर में बिना कुछ किये कराये सुखपूर्वक रहता है। (5.13 - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 २१ अप्रैल & यत्सांख्यैः प्राप्यते स्थानं तद्योगैरपि गम्यते एकं सांख्यं च योगं च यः पश्यति स पश्यति II ५ II सन्न्यासस्तु महाबाहो दुःखमातुमयोगतः  योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म न चिरेणाधिगच्छति II ६ || जो यह जानता है कि विश्लेषणात्मक अध्ययन (सांख्य ) द्वारा प्राप्त स्थान भक्ति द्वारा भी प्राप्त किया जा सकता है , और इस तरह जो सांख्ययोग तथा भक्तियोग को एकसमान देखता को यथारूप में देखता है। (५.५ ) है, वही वस्तुओं  भक्ति में लगे बिना केवल समस्त कर्मों का परित्याग करने से कोई सुखी नहीं बन सकता । परन्तु भक्ति में हुआ विचारवान व्यक्ति शीघ्र ही परमेश्वर को लगा लेता है। (५.6 ) प्राप्त कर गीतामृत 3 २१ अप्रैल & यत्सांख्यैः प्राप्यते स्थानं तद्योगैरपि गम्यते एकं सांख्यं च योगं च यः पश्यति स पश्यति II ५ II सन्न्यासस्तु महाबाहो दुःखमातुमयोगतः  योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म न चिरेणाधिगच्छति II ६ || जो यह जानता है कि विश्लेषणात्मक अध्ययन (सांख्य ) द्वारा प्राप्त स्थान भक्ति द्वारा भी प्राप्त किया जा सकता है , और इस तरह जो सांख्ययोग तथा भक्तियोग को एकसमान देखता को यथारूप में देखता है। (५.५ ) है, वही वस्तुओं  भक्ति में लगे बिना केवल समस्त कर्मों का परित्याग करने से कोई सुखी नहीं बन सकता । परन्तु भक्ति में हुआ विचारवान व्यक्ति शीघ्र ही परमेश्वर को लगा लेता है। (५.6 ) प्राप्त कर - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 २२ अप्रैल & योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते II ७  || जो भक्तिभाव से कर्म करता है, जो विशुद्ध आत्मा है और अपने मन तथा इन्द्रियों को वश में रखता है, वह सबों को प्रिय होता है और सभी लोग उसे प्रिय होते हैं। ऐसा व्यक्ति कर्म करता हुआ भी कभी नहीं ঝঁখনা | (5.7) गीतामृत 3 २२ अप्रैल & योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते II ७  || जो भक्तिभाव से कर्म करता है, जो विशुद्ध आत्मा है और अपने मन तथा इन्द्रियों को वश में रखता है, वह सबों को प्रिय होता है और सभी लोग उसे प्रिय होते हैं। ऐसा व्यक्ति कर्म करता हुआ भी कभी नहीं ঝঁখনা | (5.7) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत २३ अप्रैल & 3 नैव किञ्चित्करोमीति मन्येत तत्त्ववित् युक्तो पश्यञ्शृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रन्नश्नन्गच्छन्स्वपन्श्वसन् II ८ प्रलपन्विसृजन्गृह्नन्नुन्मिषन्निमिषन्नपि  1 इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेषु वर्तन्त इति धारयन् II ९ || दिव्य भावनामृत युक्त पुरुष देखते , सुनते , स्पर्श करते , सूँघते , खाते , चलते - फिरते , सोते तथा श्वास लेते हुए भी अपने अन्तर में सदैव यही जानता रहता है कि वास्तव में वह कुछ भी नहीं करता | बोलते , त्यागते , ग्रहण करते या आँखें खोलते - बन्द करते हुए भी वह यह जानता रहता है भौतिक इन्द्रियाँ अपने-अपने विषयों " में प्रवृत्त  हैं और वह इन सबसे पृथक् है। (5.8-9 ) गीतामृत २३ अप्रैल & 3 नैव किञ्चित्करोमीति मन्येत तत्त्ववित् युक्तो पश्यञ्शृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रन्नश्नन्गच्छन्स्वपन्श्वसन् II ८ प्रलपन्विसृजन्गृह्नन्नुन्मिषन्निमिषन्नपि  1 इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेषु वर्तन्त इति धारयन् II ९ || दिव्य भावनामृत युक्त पुरुष देखते , सुनते , स्पर्श करते , सूँघते , खाते , चलते - फिरते , सोते तथा श्वास लेते हुए भी अपने अन्तर में सदैव यही जानता रहता है कि वास्तव में वह कुछ भी नहीं करता | बोलते , त्यागते , ग्रहण करते या आँखें खोलते - बन्द करते हुए भी वह यह जानता रहता है भौतिक इन्द्रियाँ अपने-अपने विषयों " में प्रवृत्त  हैं और वह इन सबसे पृथक् है। (5.8-9 ) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - সীনামূন $ २४ अप्रैल & ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा II १० Il कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि योगिनः कर्म कुर्वन्ति सङ्गं त्यक्त्वात्मशुद्धये II ११  I( जो व्यक्ति कर्मफलों को परमेश्वर को समर्पित करके आसक्तिरहित होकर अपना कर्म करता है, वह पापकर्मों से उसी प्रकार  अप्रभावित रहता है , जिस प्रकार कमलपत्र से अस्पृश्य रहता है। (५.१० ) जल योगीजन आसक्तिरहित होकर शरीर , मन, बुद्धि  इन्द्रियों के द्वारा भी केवल शुद्धि के लिए कर्म T ಹಾಗ ಣI (5.11) সীনামূন $ २४ अप्रैल & ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा II १० Il कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि योगिनः कर्म कुर्वन्ति सङ्गं त्यक्त्वात्मशुद्धये II ११  I( जो व्यक्ति कर्मफलों को परमेश्वर को समर्पित करके आसक्तिरहित होकर अपना कर्म करता है, वह पापकर्मों से उसी प्रकार  अप्रभावित रहता है , जिस प्रकार कमलपत्र से अस्पृश्य रहता है। (५.१० ) जल योगीजन आसक्तिरहित होकर शरीर , मन, बुद्धि  इन्द्रियों के द्वारा भी केवल शुद्धि के लिए कर्म T ಹಾಗ ಣI (5.11) - ShareChat
#🙏🌹radhey radhey🌹🙏 #बांके बिहारी लाल #बांके बिहारी #बांके बिहारी जी के दर्शन 🙏🙏
🙏🌹radhey radhey🌹🙏 - Bankel Bankel - ShareChat
#जय मंगलनाथ भगवान
जय मंगलनाथ भगवान - शरृंगार मगल यह णन्म स्थान मंगलनाय मविर , उज्णेन शरृंगार मगल यह णन्म स्थान मंगलनाय मविर , उज्णेन - ShareChat
#🤝अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं🫂 #🔔अक्षय तृतीया Status⏳
🤝अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं🫂 - चरण दर्शन ೯ चरण दर्शन ೯ - ShareChat