Shree Hari sharnam
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#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - २१ जून & गीतामृत * अधिभूतं क्षरो भावः पुरुषश्चाधिदैवतम् 1 अधियज्ञोड़हमेवात्र देहे देहभृतां वरII ४ I( Ra हे देहधारियों में श्रेष्ठ! परिवर्तनशील यह भौतिक प्रकृति अधिभूत ( भौतिक अभिव्यक्ति ) कहलाती है। भगवान् का विराट रूप , जिसमें सूर्य तथा चन्द्र जैसे समस्त देवता सम्मिलित हैं , अधिदैव कहलाता है। तथा प्रत्येक देहधारी के हृदय में परमात्मा स्वरूप स्थित मैं परमेश्वर अधियज्ञ ( यज्ञ का स्वामी ) कहलाता हूँ। (8.४ ) २१ जून & गीतामृत * अधिभूतं क्षरो भावः पुरुषश्चाधिदैवतम् 1 अधियज्ञोड़हमेवात्र देहे देहभृतां वरII ४ I( Ra हे देहधारियों में श्रेष्ठ! परिवर्तनशील यह भौतिक प्रकृति अधिभूत ( भौतिक अभिव्यक्ति ) कहलाती है। भगवान् का विराट रूप , जिसमें सूर्य तथा चन्द्र जैसे समस्त देवता सम्मिलित हैं , अधिदैव कहलाता है। तथा प्रत्येक देहधारी के हृदय में परमात्मा स्वरूप स्थित मैं परमेश्वर अधियज्ञ ( यज्ञ का स्वामी ) कहलाता हूँ। (8.४ ) - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - २० जून & गीतामृत 3 श्रीभगवानुवाच  LSK BHC अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोषध्यात्ममुच्यते भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः Ik 3 || भगवान् ने कहा - अविनाशी और दिव्य जीव ब्रह्म कहलाता है और उसका नित्य स्वभाव अध्यात्म या आत्म कहलाता है। जीवों के भौतिक शरीर से सम्बन्धित गतिविधि कर्म या सकाम कर्म कहलाती है। (8.३) २० जून & गीतामृत 3 श्रीभगवानुवाच  LSK BHC अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोषध्यात्ममुच्यते भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः Ik 3 || भगवान् ने कहा - अविनाशी और दिव्य जीव ब्रह्म कहलाता है और उसका नित्य स्वभाव अध्यात्म या आत्म कहलाता है। जीवों के भौतिक शरीर से सम्बन्धित गतिविधि कर्म या सकाम कर्म कहलाती है। (8.३) - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - १९ जून & गीतामृत 3 अर्जुन उवाच  किं तद्बह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम  अधिभूर्त च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते II १ || अधियज्ञः कर्थं कोउत्र देहेडस्मिन्मधुसूदन प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोउसि नियतात्मभिः II ?Il हे पुरुषोत्तम  अर्जुन ने कहा - हे भगवान् ब्रह्म क्या है? आत्मा क्या है? सकाम कर्म क्या है? यह भौतिक जगत् क्या है? तथा देवता क्या हैं? कृपा करके यह सब मुझे बताइये। (8.१ ) हे रीधुसँद्ैस्  स्वामी कौन है और वह ! यज्ञ का रहता है ? और मृत्यु के समय भक्ति में लगे रहने वाले आपको कैसे जान पाते ೩? (8.2) १९ जून & गीतामृत 3 अर्जुन उवाच  किं तद्बह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम  अधिभूर्त च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते II १ || अधियज्ञः कर्थं कोउत्र देहेडस्मिन्मधुसूदन प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोउसि नियतात्मभिः II ?Il हे पुरुषोत्तम  अर्जुन ने कहा - हे भगवान् ब्रह्म क्या है? आत्मा क्या है? सकाम कर्म क्या है? यह भौतिक जगत् क्या है? तथा देवता क्या हैं? कृपा करके यह सब मुझे बताइये। (8.१ ) हे रीधुसँद्ैस्  स्वामी कौन है और वह ! यज्ञ का रहता है ? और मृत्यु के समय भक्ति में लगे रहने वाले आपको कैसे जान पाते ೩? (8.2) - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - १८ जून & गीतामृत 3 साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः IS प्रयाणकालेउपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः I 30 || जो मुझ परमेश्वर को मेरी पूर्ण चेतना में रहकर मुझे जगत् का, देवताओं का तथा यज्ञविधियों का नियामक जानते हैं , समस्त भी मुझ  वे अपनी मृत्यु के समय " भगवान् को जान और समझ सकते हैं। (७.३० ) १८ जून & गीतामृत 3 साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः IS प्रयाणकालेउपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः I 30 || जो मुझ परमेश्वर को मेरी पूर्ण चेतना में रहकर मुझे जगत् का, देवताओं का तथा यज्ञविधियों का नियामक जानते हैं , समस्त भी मुझ  वे अपनी मृत्यु के समय " भगवान् को जान और समझ सकते हैं। (७.३० ) - ShareChat
दिनांक 25/6/2026 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #श्री मंगलनाथ जी उज्जैन मध्यप्रदेश से #मंगलनाथ मंदिर उज्जैन
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - ShareChat
दिनांक25/6/2026#महाकाल दर्शन #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
महाकाल दर्शन - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन - ShareChat
घर में बनी पाव भाजी #food #🍞 पाव भाजी #🍞🍞🍞पाव भाजी🍞🍞🍞 #पाव भाजी
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Narmada Maiya #नर्मदा मैय्या #नर्मदा #नर्मदा जी #
नर्मदा मैय्या - ShareChat
00:21
#महाकाल दर्शन #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
महाकाल दर्शन - महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - 17 লুন $ শীনামূন $ जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये | तद्विदुः ते ब्रह्म कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम् II २९ II जो जरा तथा मृत्यु से मुक्ति पाने के लिए यत्नशील रहते हैं, वे बुद्धिमान व्यक्ति मेरी भक्ति की शरण ग्रहण करते हैं वे वास्तव में ब्रह्म हैं क्योंकि वे दिव्य कर्मों के विषय में पूरी तरह से जानते हैं। (७.२९ ) 17 লুন $ শীনামূন $ जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये | तद्विदुः ते ब्रह्म कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम् II २९ II जो जरा तथा मृत्यु से मुक्ति पाने के लिए यत्नशील रहते हैं, वे बुद्धिमान व्यक्ति मेरी भक्ति की शरण ग्रहण करते हैं वे वास्तव में ब्रह्म हैं क्योंकि वे दिव्य कर्मों के विषय में पूरी तरह से जानते हैं। (७.२९ ) - ShareChat