Shree Hari sharnam
ShareChat
click to see wallet page
@3819013397
3819013397
Shree Hari sharnam
@3819013397
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
##radharaman #राधारमण #जय राधारमण #प्राणधन राधारमण #🌹मेरो राधारमण🌹
#radharaman - ShareChat
00:31
#🙏बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं 🌸
🙏बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं 🌸 - ಕ್ರತಣೆಟರ ಠಣಿಕೊಹಹಪಾದ कि वह सारे संसार में श्रेष्ठ है क्योंकि वह उस कुएं को ही संसार समझता है, कुछ मनुष्य भी जीवन में ऐसा ही करते वह अपने को सर्वश्रेष्ठ मानकर १ हैंकितु को नीचा दिखाते रहते दुसरो ` भुल जाते हैं कि उनसे भी बड़े बहुत है, अहंकार अक्सर अज्ञानता की कोख से जन्म जिसे थोड़ा ज्ञान होता है॰ वही शोर मचाता गहरा समंदर हमेशा शांत रहता है gಹಷೆಳಟರೇvg ಕ್ರತಣೆಟರ ಠಣಿಕೊಹಹಪಾದ कि वह सारे संसार में श्रेष्ठ है क्योंकि वह उस कुएं को ही संसार समझता है, कुछ मनुष्य भी जीवन में ऐसा ही करते वह अपने को सर्वश्रेष्ठ मानकर १ हैंकितु को नीचा दिखाते रहते दुसरो ` भुल जाते हैं कि उनसे भी बड़े बहुत है, अहंकार अक्सर अज्ञानता की कोख से जन्म जिसे थोड़ा ज्ञान होता है॰ वही शोर मचाता गहरा समंदर हमेशा शांत रहता है gಹಷೆಳಟರೇvg - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - সীনামুন $ 1 T 4 [ত্রুঃত্রশীনয  গ্সীমা  ये हि संस्पर्शजा एव ते | आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः II २२ II शक्नोतीहैव यः सोढ़ुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् कामक्रोधोद्भवं वेगंँ स युक्तः स सुखी नरः II २३ II बुद्धिमान् मनुष्य दुख के कारणों में भाग नहीं लेता जो कि भौतिँक इन्द्रियों के संसर्ग से उत्पन्न होते हैं। हे कुन्तीपुत्र! ऐसे भोगों का आदि तथा अन्त होता है, अतः चतुर व्यक्ति उनमें आनन्द नहीं लेता। ( ५.२२ ) यदि इस शरीर को त्यागने के पूर्व कोई मनुष्य इन्द्रियों के वेगों को सहन करने तथा इच्छा एवं क्रोध के वेग को रोकने में समर्थ होता है, तो वह इस में सुखी रह सकता है। (5.२३ ) संसार সীনামুন $ 1 T 4 [ত্রুঃত্রশীনয  গ্সীমা  ये हि संस्पर्शजा एव ते | आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः II २२ II शक्नोतीहैव यः सोढ़ुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् कामक्रोधोद्भवं वेगंँ स युक्तः स सुखी नरः II २३ II बुद्धिमान् मनुष्य दुख के कारणों में भाग नहीं लेता जो कि भौतिँक इन्द्रियों के संसर्ग से उत्पन्न होते हैं। हे कुन्तीपुत्र! ऐसे भोगों का आदि तथा अन्त होता है, अतः चतुर व्यक्ति उनमें आनन्द नहीं लेता। ( ५.२२ ) यदि इस शरीर को त्यागने के पूर्व कोई मनुष्य इन्द्रियों के वेगों को सहन करने तथा इच्छा एवं क्रोध के वेग को रोकने में समर्थ होता है, तो वह इस में सुखी रह सकता है। (5.२३ ) संसार - ShareChat
#🪔नरसिम्हा जयंती 🦁 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🪔नरसिम्हा जयंती 🦁 - Acae नृशिहनयंती अधर्म और हर संकट का अंत ! Acae नृशिहनयंती अधर्म और हर संकट का अंत ! - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 ३० अप्रैल & बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम् ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नरुते ٤ Il ২? || ऐसा मुक्त पुरुष भौतिक इन्द्रियसुख अपितु की ओर आकृष्ट नहीं होता , संदैव समाधि में रहकर अपने अन्तर में आनन्द का अनुभव करता है। इस स्वरूपसिद्ध व्यक्ति परब्रह्म में एकाग्रचित प्रकार होने के कारण असीम सुख भोगता है। 5.21) गीतामृत 3 ३० अप्रैल & बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम् ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नरुते ٤ Il ২? || ऐसा मुक्त पुरुष भौतिक इन्द्रियसुख अपितु की ओर आकृष्ट नहीं होता , संदैव समाधि में रहकर अपने अन्तर में आनन्द का अनुभव करता है। इस स्वरूपसिद्ध व्यक्ति परब्रह्म में एकाग्रचित प्रकार होने के कारण असीम सुख भोगता है। 5.21) - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - ShareChat
#मेहंदी डिजाइन मेहंदी डिजाइन #मेहंदी
मेहंदी डिजाइन मेहंदी डिजाइन - Vog ull fl 1124 8 0 ఊి Add comment Vog ull fl 1124 8 0 ఊి Add comment - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #जय मंगलनाथ भगवान #मंगलनाथ मंदिर उज्जैन #मंगलनाथ मंदिर
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - ShareChat
महाकाल दर्शन 🙏 दिनांक 29/04/2026 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #महाकाल दर्शन
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन 8 6 89 86 % * 0~80 8 % %* % 3 8 64 9 66 % 5 8 0 59 @ 9 Gomtuloin , श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन 8 6 89 86 % * 0~80 8 % %* % 3 8 64 9 66 % 5 8 0 59 @ 9 Gomtuloin , - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - गीतामृत 3 २८अप्रैल < विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः II १८ ।I इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्बह्मणि ते स्थिताः II 2೧ विनम्र साधुपुरुष अपने वास्तविक ज्ञान के विद्वान् तथा विनीत ब्राह्मण, कारण एक गाय , हाथी , कुत्ता तथा चाण्डाल को समान दृष्टि ( समभाव ) से देखते हैं। (5.१8 ) जिनके मन एकत्व तथा समता में स्थित हैं उन्होंने बन्धनों को पहले ही जीत लिया मृत्यु के  जन्म तथा है। वे ब्रह्म के समान निर्दोष हैं और सदा ब्रह्म में ही स्थित रहते हैं। (5.१९ ) गीतामृत 3 २८अप्रैल < विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः II १८ ।I इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्बह्मणि ते स्थिताः II 2೧ विनम्र साधुपुरुष अपने वास्तविक ज्ञान के विद्वान् तथा विनीत ब्राह्मण, कारण एक गाय , हाथी , कुत्ता तथा चाण्डाल को समान दृष्टि ( समभाव ) से देखते हैं। (5.१8 ) जिनके मन एकत्व तथा समता में स्थित हैं उन्होंने बन्धनों को पहले ही जीत लिया मृत्यु के  जन्म तथा है। वे ब्रह्म के समान निर्दोष हैं और सदा ब्रह्म में ही स्थित रहते हैं। (5.१९ ) - ShareChat