Shree Hari sharnam
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#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #महाकाल दर्शन
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  92 0 (][| श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  92 0 (][| - ShareChat
#📿शनि जयंती🪔🙏 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
📿शनि जयंती🪔🙏 - 9 शनैश्चराय नमः h आप सभी को 9 ತಲd की हार्दिक शुभकामनाएं। 9 शनैश्चराय नमः h आप सभी को 9 ತಲd की हार्दिक शुभकामनाएं। - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - १२ मई & गीतामृत 3 योगी  सततमात्मानं रहसि स्थितः युञ्जीत एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः Il ?0 || योगी को चाहिए कि वह सदैव अपने शरीर, मन तथा आत्मा को परमेश्वर में लगाए, एकान्त स्थान में रहे और बड़ी सावधानी के साथ अपने मन को वश में करे। उसे समस्त आकांक्षाओं तथा संग्रहभाव की इच्छाओं से मुक्त होना चाहिए। 6.10) १२ मई & गीतामृत 3 योगी  सततमात्मानं रहसि स्थितः युञ्जीत एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः Il ?0 || योगी को चाहिए कि वह सदैव अपने शरीर, मन तथा आत्मा को परमेश्वर में लगाए, एकान्त स्थान में रहे और बड़ी सावधानी के साथ अपने मन को वश में करे। उसे समस्त आकांक्षाओं तथा संग्रहभाव की इच्छाओं से मुक्त होना चाहिए। 6.10) - ShareChat
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#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 3 ११   मई & सुहन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु  4 साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धि्विशिष्यते II ९  || जब मनुष्य निष्कपट हितैषियों , प्रिय मित्रों , तटस्थों , मध्यस्थों , ईर्ष्यालुओं , शत्रुओं तथा मित्रों , पुण्यात्माओं एवं पापियों को समान भाव से देखता है, तो वह और भी उन्नत माना जाता है। (६.१ ) गीतामृत 3 ११   मई & सुहन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु  4 साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धि्विशिष्यते II ९  || जब मनुष्य निष्कपट हितैषियों , प्रिय मित्रों , तटस्थों , मध्यस्थों , ईर्ष्यालुओं , शत्रुओं तथा मित्रों , पुण्यात्माओं एवं पापियों को समान भाव से देखता है, तो वह और भी उन्नत माना जाता है। (६.१ ) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - মীনামূন $ 10 #$ & विजितेन्द्रियः ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा ` कूटस्थो 1 योगी समलोष्ट्राश्मकाञ्चनः sgஅர 37 || ৫ वह व्यक्ति आत्म -्साक्षात्कार को प्राप्त तथा योगी कहलाता है, जो अपने अर्जित ज्ञान तथा अनुभूति से पूर्णतया सन्तुष्ट रहता है। ऐसा व्यक्ति अध्यात्म को प्राप्त तथा जितेन्द्रिय कहलाता है। वह सभी वस्तुओं को -चाहे वे कंकड़ हों , पत्थर हों या कि सोना -एक समान देखता है। ( ६.८ ) মীনামূন $ 10 #$ & विजितेन्द्रियः ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा ` कूटस्थो 1 योगी समलोष्ट्राश्मकाञ्चनः sgஅர 37 || ৫ वह व्यक्ति आत्म -्साक्षात्कार को प्राप्त तथा योगी कहलाता है, जो अपने अर्जित ज्ञान तथा अनुभूति से पूर्णतया सन्तुष्ट रहता है। ऐसा व्यक्ति अध्यात्म को प्राप्त तथा जितेन्द्रिय कहलाता है। वह सभी वस्तुओं को -चाहे वे कंकड़ हों , पत्थर हों या कि सोना -एक समान देखता है। ( ६.८ ) - ShareChat
#महाकाल दर्शन
महाकाल दर्शन - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  [ಘುನುನಂ   श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  [ಘುನುನಂ - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - ९ मई & गीतामृत 3 बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः वर्तेतात्मैव शत्रुवत् II ६ अनात्मनस्तु शत्रुत्वे  || जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः ( शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ।l ७ I( जिसने मन को जीत लिया है , उसके लिए मन सर्वश्रेष्ठ मित्र है, किन्तु जो ऐसा नहीं লিৎসন कर पाया उसके सबसे बड़ा शत्रु बना रहेगा। (६.६ ) जिसने मन को जीत लिया है , उसने पहले ही को प्राप्त कर लिया है, क्योंकि उसने परमात्मा शान्ति प्राप्त कर ली है। ऐसे पुरुष के लिए सुख-दुख , सर्दी - गर्मी एवं मान - अपमान एक से 8/ (6.7) ९ मई & गीतामृत 3 बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः वर्तेतात्मैव शत्रुवत् II ६ अनात्मनस्तु शत्रुत्वे  || जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः ( शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ।l ७ I( जिसने मन को जीत लिया है , उसके लिए मन सर्वश्रेष्ठ मित्र है, किन्तु जो ऐसा नहीं লিৎসন कर पाया उसके सबसे बड़ा शत्रु बना रहेगा। (६.६ ) जिसने मन को जीत लिया है , उसने पहले ही को प्राप्त कर लिया है, क्योंकि उसने परमात्मा शान्ति प्राप्त कर ली है। ऐसे पुरुष के लिए सुख-दुख , सर्दी - गर्मी एवं मान - अपमान एक से 8/ (6.7) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - সীনামুন $ 8 मई & यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषजते।  सर्वसङ्कल्पसन्न्यासी योगारूढस्तदोच्यते ।II ४ II उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः M & W कोई पुरुष समस्त भौतिक इच्छाओं  जब का त्याग करके न तो इन्द्रियतृप्ति के लिए में प्रवृत्त कार्य करता है और न सकामकर्मों  होता है। तो वह योगारूढ़ कहलाता है। (6.4) मनुष्य को चाहिए कि अपने मन की सहायता से अपना उद्धार करे और अपने को नीचे न गिरने दे। यह मन बद्धजीव का मित्र भी है और शत्रु भी। (6.5) সীনামুন $ 8 मई & यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषजते।  सर्वसङ्कल्पसन्न्यासी योगारूढस्तदोच्यते ।II ४ II उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः M & W कोई पुरुष समस्त भौतिक इच्छाओं  जब का त्याग करके न तो इन्द्रियतृप्ति के लिए में प्रवृत्त कार्य करता है और न सकामकर्मों  होता है। तो वह योगारूढ़ कहलाता है। (6.4) मनुष्य को चाहिए कि अपने मन की सहायता से अपना उद्धार करे और अपने को नीचे न गिरने दे। यह मन बद्धजीव का मित्र भी है और शत्रु भी। (6.5) - ShareChat