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#महाकाल दर्शन
महाकाल दर्शन - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  [ಘುನುನಂ   श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  [ಘುನುನಂ - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - ९ मई & गीतामृत 3 बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः वर्तेतात्मैव शत्रुवत् II ६ अनात्मनस्तु शत्रुत्वे  || जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः ( शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ।l ७ I( जिसने मन को जीत लिया है , उसके लिए मन सर्वश्रेष्ठ मित्र है, किन्तु जो ऐसा नहीं লিৎসন कर पाया उसके सबसे बड़ा शत्रु बना रहेगा। (६.६ ) जिसने मन को जीत लिया है , उसने पहले ही को प्राप्त कर लिया है, क्योंकि उसने परमात्मा शान्ति प्राप्त कर ली है। ऐसे पुरुष के लिए सुख-दुख , सर्दी - गर्मी एवं मान - अपमान एक से 8/ (6.7) ९ मई & गीतामृत 3 बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः वर्तेतात्मैव शत्रुवत् II ६ अनात्मनस्तु शत्रुत्वे  || जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः ( शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ।l ७ I( जिसने मन को जीत लिया है , उसके लिए मन सर्वश्रेष्ठ मित्र है, किन्तु जो ऐसा नहीं লিৎসন कर पाया उसके सबसे बड़ा शत्रु बना रहेगा। (६.६ ) जिसने मन को जीत लिया है , उसने पहले ही को प्राप्त कर लिया है, क्योंकि उसने परमात्मा शान्ति प्राप्त कर ली है। ऐसे पुरुष के लिए सुख-दुख , सर्दी - गर्मी एवं मान - अपमान एक से 8/ (6.7) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - সীনামুন $ 8 मई & यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषजते।  सर्वसङ्कल्पसन्न्यासी योगारूढस्तदोच्यते ।II ४ II उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः M & W कोई पुरुष समस्त भौतिक इच्छाओं  जब का त्याग करके न तो इन्द्रियतृप्ति के लिए में प्रवृत्त कार्य करता है और न सकामकर्मों  होता है। तो वह योगारूढ़ कहलाता है। (6.4) मनुष्य को चाहिए कि अपने मन की सहायता से अपना उद्धार करे और अपने को नीचे न गिरने दे। यह मन बद्धजीव का मित्र भी है और शत्रु भी। (6.5) সীনামুন $ 8 मई & यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषजते।  सर्वसङ्कल्पसन्न्यासी योगारूढस्तदोच्यते ।II ४ II उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः M & W कोई पुरुष समस्त भौतिक इच्छाओं  जब का त्याग करके न तो इन्द्रियतृप्ति के लिए में प्रवृत्त कार्य करता है और न सकामकर्मों  होता है। तो वह योगारूढ़ कहलाता है। (6.4) मनुष्य को चाहिए कि अपने मन की सहायता से अपना उद्धार करे और अपने को नीचे न गिरने दे। यह मन बद्धजीव का मित्र भी है और शत्रु भी। (6.5) - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - মীনামুন $ ७ मई & यं सन्न्यासमिति प्राहुर्योंगं तं विद्धि पाण्डव  न ह्यसन्न्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्चन II २ II आरुरुक्षोर्मुनर्योंगं कर्म कारणमुच्यते  योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते II ३ जिसे संन्यास कहते हैं उसे हे पाण्डुपुत्र  ही तुम योग अर्थात् परब्रह्म 35 हाना इन्द्रियतृप्ति के लिए इच्छा जानो क्योंकि को त्यागे बिना कोई कभी योगी नहीं हो (6.2) सकता | अष्टांगयोग के नवसाधक के लिए कर्म साधन  कहलाता है और योगसिद्ध पुरुष के ٦؟ समस्त भौतिक कार्यकलापों का परित्याग ही साधन कहा जाता है। (6.3 ) মীনামুন $ ७ मई & यं सन्न्यासमिति प्राहुर्योंगं तं विद्धि पाण्डव  न ह्यसन्न्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्चन II २ II आरुरुक्षोर्मुनर्योंगं कर्म कारणमुच्यते  योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते II ३ जिसे संन्यास कहते हैं उसे हे पाण्डुपुत्र  ही तुम योग अर्थात् परब्रह्म 35 हाना इन्द्रियतृप्ति के लिए इच्छा जानो क्योंकि को त्यागे बिना कोई कभी योगी नहीं हो (6.2) सकता | अष्टांगयोग के नवसाधक के लिए कर्म साधन  कहलाता है और योगसिद्ध पुरुष के ٦؟ समस्त भौतिक कार्यकलापों का परित्याग ही साधन कहा जाता है। (6.3 ) - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - गीतामृत 3 6 ాకే < श्रीभगवानुवाच  अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः स सन्न्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः Il १ || श्रीभगवान् ने कहा - जो पुरुष अपने  कर्मफल के प्रति अनासक्त है और जो अपने कर्तव्य का पालन करता है, वही संन्यासी और असली योगी है। वह नहीं , जो न तो अग्नि जलाता है और न कर्म करता है। (६.१ ) गीतामृत 3 6 ాకే < श्रीभगवानुवाच  अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः स सन्न्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः Il १ || श्रीभगवान् ने कहा - जो पुरुष अपने  कर्मफल के प्रति अनासक्त है और जो अपने कर्तव्य का पालन करता है, वही संन्यासी और असली योगी है। वह नहीं , जो न तो अग्नि जलाता है और न कर्म करता है। (६.१ ) - ShareChat
#🌷शुभ सोमवार Mahakal bhasm Aarti Darshan 4/5/2026
🌷शुभ सोमवार - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन 5 1 [ श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन 5 1 [ - ShareChat
##radharaman #राधारमण #जय राधारमण #प्राणधन राधारमण #🌹मेरो राधारमण🌹
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00:31
#🙏बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं 🌸
🙏बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं 🌸 - ಕ್ರತಣೆಟರ ಠಣಿಕೊಹಹಪಾದ कि वह सारे संसार में श्रेष्ठ है क्योंकि वह उस कुएं को ही संसार समझता है, कुछ मनुष्य भी जीवन में ऐसा ही करते वह अपने को सर्वश्रेष्ठ मानकर १ हैंकितु को नीचा दिखाते रहते दुसरो ` भुल जाते हैं कि उनसे भी बड़े बहुत है, अहंकार अक्सर अज्ञानता की कोख से जन्म जिसे थोड़ा ज्ञान होता है॰ वही शोर मचाता गहरा समंदर हमेशा शांत रहता है gಹಷೆಳಟರೇvg ಕ್ರತಣೆಟರ ಠಣಿಕೊಹಹಪಾದ कि वह सारे संसार में श्रेष्ठ है क्योंकि वह उस कुएं को ही संसार समझता है, कुछ मनुष्य भी जीवन में ऐसा ही करते वह अपने को सर्वश्रेष्ठ मानकर १ हैंकितु को नीचा दिखाते रहते दुसरो ` भुल जाते हैं कि उनसे भी बड़े बहुत है, अहंकार अक्सर अज्ञानता की कोख से जन्म जिसे थोड़ा ज्ञान होता है॰ वही शोर मचाता गहरा समंदर हमेशा शांत रहता है gಹಷೆಳಟರೇvg - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - সীনামুন $ 1 T 4 [ত্রুঃত্রশীনয  গ্সীমা  ये हि संस्पर्शजा एव ते | आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः II २२ II शक्नोतीहैव यः सोढ़ुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् कामक्रोधोद्भवं वेगंँ स युक्तः स सुखी नरः II २३ II बुद्धिमान् मनुष्य दुख के कारणों में भाग नहीं लेता जो कि भौतिँक इन्द्रियों के संसर्ग से उत्पन्न होते हैं। हे कुन्तीपुत्र! ऐसे भोगों का आदि तथा अन्त होता है, अतः चतुर व्यक्ति उनमें आनन्द नहीं लेता। ( ५.२२ ) यदि इस शरीर को त्यागने के पूर्व कोई मनुष्य इन्द्रियों के वेगों को सहन करने तथा इच्छा एवं क्रोध के वेग को रोकने में समर्थ होता है, तो वह इस में सुखी रह सकता है। (5.२३ ) संसार সীনামুন $ 1 T 4 [ত্রুঃত্রশীনয  গ্সীমা  ये हि संस्पर्शजा एव ते | आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः II २२ II शक्नोतीहैव यः सोढ़ुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् कामक्रोधोद्भवं वेगंँ स युक्तः स सुखी नरः II २३ II बुद्धिमान् मनुष्य दुख के कारणों में भाग नहीं लेता जो कि भौतिँक इन्द्रियों के संसर्ग से उत्पन्न होते हैं। हे कुन्तीपुत्र! ऐसे भोगों का आदि तथा अन्त होता है, अतः चतुर व्यक्ति उनमें आनन्द नहीं लेता। ( ५.२२ ) यदि इस शरीर को त्यागने के पूर्व कोई मनुष्य इन्द्रियों के वेगों को सहन करने तथा इच्छा एवं क्रोध के वेग को रोकने में समर्थ होता है, तो वह इस में सुखी रह सकता है। (5.२३ ) संसार - ShareChat
#🪔नरसिम्हा जयंती 🦁 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🪔नरसिम्हा जयंती 🦁 - Acae नृशिहनयंती अधर्म और हर संकट का अंत ! Acae नृशिहनयंती अधर्म और हर संकट का अंत ! - ShareChat