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#दुर्लभ_दर्शन_संत_के_करलो_किस्मतवालों #SanatanDharma #Darshan #Blessed #SanatanDharma #Haryana🍀 दर्शन दुर्लभ संत के, कर लो किस्मत वालों महम के पूर्व विधायक बलराज कुंडू ने महान संत रामपाल जी महाराज के दर्शन कर अपनी किस्मत को संवारा। पूर्ण परमात्मा के सच्चे प्रतिनिधि के दर्शन ही मनुष्य जीवन को सफल बनाते हैं। #🙏गुरु महिमा😇 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
🙏गुरु महिमा😇 - दर्शन दुर्लभ के, 2r কর২ লী ad dlcii @9 वाल्मीकि तीर्थ रामसरोवर सेवा ट्रस्ट हरियाणा की टीम ने लिया संत रामपाल जी महाराज जी का आशीर्वाद | SA News Channel YouTube NEWS SA Channel @SatlokAshramNewsChannel 147M subscribers 47K videos C4o दर्शन दुर्लभ के, 2r কর২ লী ad dlcii @9 वाल्मीकि तीर्थ रामसरोवर सेवा ट्रस्ट हरियाणा की टीम ने लिया संत रामपाल जी महाराज जी का आशीर्वाद | SA News Channel YouTube NEWS SA Channel @SatlokAshramNewsChannel 147M subscribers 47K videos C4o - ShareChat
#दुर्लभ_दर्शन_संत_के_करलो_किस्मतवालों #SanatanDharma #Darshan #Blessed #SanatanDharma #Haryana🍀दर्शन दुर्लभ संत के, कर लो किस्मत वालों पूर्णसंत के दर्शन किस्मत वालों को ही मिलते हैं। आज पूरे विश्व में संत रामपाल जी महाराज पूर्ण संत हैं जिनके दर्शन हिसार से सांसद जयप्रकाश जी ने किए। #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🌐 राष्ट्रीय अपडेट - दर्शन दुर्लभ रांत के, कर लो किस्मत वालों Ra पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर ने महान तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पावन दर्शन किए। किस्मत वालों को ही ऐसे सच्चे मार्गदर्शक और पूर्ण संत की शरण और दर्शन प्राप्त होते हैं। SA News Channel YouTube Channel S lloAAshr-nNomnchmnol 71Suocnbora; KAdnos दर्शन दुर्लभ रांत के, कर लो किस्मत वालों Ra पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर ने महान तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पावन दर्शन किए। किस्मत वालों को ही ऐसे सच्चे मार्गदर्शक और पूर्ण संत की शरण और दर्शन प्राप्त होते हैं। SA News Channel YouTube Channel S lloAAshr-nNomnchmnol 71Suocnbora; KAdnos - ShareChat
#दुर्लभ_दर्शन_संत_के_करलो_किस्मतवालों #SanatanDharma #Darshan #Blessed #SanatanDharma #Haryana🍀 दर्शन दुर्लभ संत के, कर लो किस्मत वालों बादली से विधायक कुलदीप वत्स ने पूर्ण संत रामपाल जी महाराज के पावन दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। ऐसे महान संत के दर्शन पाना अत्यंत सौभाग्यशाली लोगों के भाग्य में ही होता #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🙏गुरु महिमा😇
🙏कर्म क्या है❓ - Sunreme Suarve दर्शन दर्लभ संत के॰ कर लो किस्मत वालों भारतीय हैंडबॉल टीम के प्रमुख कोच व गायक नवीन संत रामपाल जी महाराज जी के किसान मजदूर gfauT बचाओ अभियान से प्रभावित होकर उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचे सतलोक आश्रम धनाना धाम में। SA News Channel YouTubel 5 SA Channel @SatlokAshramNewsChannel 147M subscribers ;' A7k vidaos Sunreme Suarve दर्शन दर्लभ संत के॰ कर लो किस्मत वालों भारतीय हैंडबॉल टीम के प्रमुख कोच व गायक नवीन संत रामपाल जी महाराज जी के किसान मजदूर gfauT बचाओ अभियान से प्रभावित होकर उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचे सतलोक आश्रम धनाना धाम में। SA News Channel YouTubel 5 SA Channel @SatlokAshramNewsChannel 147M subscribers ;' A7k vidaos - ShareChat
#Durlabh_Darshan_Sant_Ke Darshan Karlo Kismat Walo #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🌐 राष्ट्रीय अपडेट
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - संत रामपाल जी महाराज जी ने जीता जनता का दिल ग्राम पंचायत रोहद, जखौदा ( झज्जर ) व अन्य लोग पहुँचे संत रामपाल जी महाराज जी से आशीर्वाद लेने। गांव में पाइप पहुंचाने पर धन्यवाद किया। SA News Channel 0 YouTubel   SA Channel @SatloKAshramNewsChannel 147M subscribers A7K videos संत रामपाल जी महाराज जी ने जीता जनता का दिल ग्राम पंचायत रोहद, जखौदा ( झज्जर ) व अन्य लोग पहुँचे संत रामपाल जी महाराज जी से आशीर्वाद लेने। गांव में पाइप पहुंचाने पर धन्यवाद किया। SA News Channel 0 YouTubel   SA Channel @SatloKAshramNewsChannel 147M subscribers A7K videos - ShareChat
#Durlabh_Darshan_Sant_Ke Darshan Karlo Kismat Walo #🙏गुरु महिमा😇 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
🙏गुरु महिमा😇 - संत रामपाल जी महाराज संत रामपाल जी महाराज जी ने जीता जनता फाांदिल बीजेपी नेता विजय बाली जब संत रामपाल जी महाराज से मिले तब हुआ है। कहा कि आज मेरा नया जन्म  नहीं पहुंचती , वहां जहां सरकार  महाराज पहुंच रहे हैं।  মন মানপাল নী SA News Channell YouTube SA NEWS @SatlokAshramNewsChannel Channel 147M subscribers 47K videos संत रामपाल जी महाराज संत रामपाल जी महाराज जी ने जीता जनता फाांदिल बीजेपी नेता विजय बाली जब संत रामपाल जी महाराज से मिले तब हुआ है। कहा कि आज मेरा नया जन्म  नहीं पहुंचती , वहां जहां सरकार  महाराज पहुंच रहे हैं।  মন মানপাল নী SA News Channell YouTube SA NEWS @SatlokAshramNewsChannel Channel 147M subscribers 47K videos - ShareChat
#Durlabh_Darshan_Sant_Ke Darshan Karlo Kismat Walo #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🌐 राष्ट्रीय अपडेट - संत रामपाल जी महाराज जो ने जोता जनता का दिल मेहराना (झज्जर) ने ग्राम पंचायत संत रामपाल जी महाराज को किया सम्मानित। कहा कि गेहूं हुए हैं। आपकी নযা ম SA News Channel YouTube ES 4 Channel @Sallok AshramNewsChannel 1,47M/ subscribers A७K vdeos  संत रामपाल जी महाराज जो ने जोता जनता का दिल मेहराना (झज्जर) ने ग्राम पंचायत संत रामपाल जी महाराज को किया सम्मानित। कहा कि गेहूं हुए हैं। आपकी নযা ম SA News Channel YouTube ES 4 Channel @Sallok AshramNewsChannel 1,47M/ subscribers A७K vdeos - ShareChat
#GodNightTuesday #SantRampalJi_Won_Hearts . गुरु दर्श की अभिलाषा सत्संग में समय मिलते ही आने की कोशिश करे तथा सत्संग में मान बड़ाई करने नहीं आवे। अपितु अपने आपको एक बीमार समझ कर आवे। जैसे बीमार व्यक्ति चाहे कितने ही पैसे वाला हो, चाहे उच्च पदवी वाला हो जब हस्पताल में जाता है तो उस समय उसका उद्देश्य केवल रोग मुक्त होना होता है। जहाँ डॉक्टर लेटने को कहे लेट जाता है, बैठने को कहे बैठ जाता है, बाहर जाने का निर्देश मिले बाहर चला जाता है। फिर अन्दर आने के लिए आवाज आए चुपके से अन्दर आ जाता है। ठीक इसी प्रकार यदि हम जन्म मरण का दिव्य रोग खत्म करवाना चाहते है तो आप सतसंग में दिल मे गुरू जी के मिलन की कशिश लिये आते हो तो आपको सतसंग में आने का लाभ मिलेगा अन्यथा आपका आना निष्फल है। सतसंग में जहाँ बैठने को मिल जाए वहीं बैठ जाए, जो खाने को मिल जाए उसे परमात्मा कबीर साहिब की रजा से प्रसाद समझ कर खा कर प्रसन्न चित्त रहे। परमात्मा कबीर साहिब जी कहते है कि दोजग भिस्त स्वर्ग सभी को देखा, राजपाठ के रसिया। तीन लोक से तृप्ति नाही, ए मन भोगी खसिया।। इंद्र कुबेर ईस कि पदवी, ब्रम्हा वरूण धर्मराया। विष्णू नाथ के पुर को जाके, फिर भी वापस आया।। सतगुरू मिले तो इच्छा मिटे, पद मिले पदे समाना। चल हंसा सतलोक पठाऊं, जहाँ आदि अमर स्थाना।। कबीर साहब कहते- मन रूप में काल हमारे अंदर विद्यमान है। इसे यहाँ के सभी सुख सुविधा मिल जाय पुरी पृथ्वी का राज, या स्वर्ग का राज या इंद्र कुबेर ईश अथार्त ब्रम्ह काल भगवान, ब्रम्हा,विष्णू ,शंकर, वरूण, धर्मराज आदि कोई भी पद पदवी मिल जाय तीन लोक राज मिल जाय तो भी संतुष्ट नहीं होता है। हमारा जीव का मन बडा ही चंचल है। परमात्मा कबीर साहिब जी कहते है कि सतगुरु मिले तो यहाँ कि सभी ईच्छाए मिट जाएंगी, कहते है हे हंसआत्मा तुझे उस सतलोक में पहुँचा दुंगा जा आदि अजर अमर अविनासी स्थान है। जहाँ पर जाने के बाद फिर वापस नहीं आना होता है। गरीब, पीछै पीछै हरि फिरैं, आगै संत सुजान। संत करैं सोई साच है, च्यारि जुग प्रवान।। अपने सच्चे भक्त के साथ साथ पीछे-पीछे परमात्मा रहता है। संत जो करते हैं, सच्चा कार्य करते हैं यानि सही करते हैं। कभी किसी का अहित नहीं करते। चारों युगों में प्रमाण रहा है कि संत सही क्रिया करते हैं। भलाई के शुभ कर्म करते हैं। सच्चे साधक परमात्मा के समान आदरणीय हैं। इनके समान अन्य की तुलना नहीं की जा सकती। परमात्मा अपने सच्चे भक्त को अपनी शक्ति प्रदान कर देते हैं। परमात्मा कबीर जी कहते हैं कि मेरी बजाय इन संतों से माँगो। संत परमात्मा से प्राप्त शक्ति से अपने अनुयाईयों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। उनकी रक्षा करते हैं। परमात्मा कबीर जी उनके बीच में कोई दखल नहीं देते। इसलिए कहा है कि :- संत करें सो होत है, साहिब अपनी ठौर। परमात्मा ने भक्तों के लिए पृथ्वी तथा इसके सहयोगी सूर्य, आकाश, हवा, व जल अन्य ग्रह बनाए हैं ताकि वे भक्ति करके अपना कल्याण करवा सकें। तीर्थ स्थान भी भक्तों का साधना स्थल है। दान की परंपरा भी भक्ति में अति सहयोगी है। परंतु दान संत को दिया जाए। कुपात्रा को दिया दान तो रण-रेह अथार्त अन उपजाऊ भूमि में बीज डालकर खराब करने के समान है। परमात्मा कबीर जी ने कहा है कि कबीर, गुरू बिना माला फेरते, गुरू बिना देते दान। गुरू बिन दोनों निष्फल है, भावें देखो वेद पुराण।। साधक को चाहिए कि पहले पूर्ण गुरू से दीक्षा ले। फिर उनको दान करे। उनके बताए मंत्रों का जाप करे। गुरूजी से दीक्षा लिए बिना भक्ति के मंत्रों के जाप की माला फेरना तथा दान करना व्यर्थ है। गुरू बनाना अति आवश्यक है। जै सतगुरू की संगत करते, सकल कर्म कटि जाईं। अमर पुरि पर आसन होते, जहाँ धूप न छाँइ।। सन्त गरीब दास ने परमेश्वर कबीर जी से प्राप्त सूक्ष्मवेद में आगे कहा है कि यदि सतगुरू अथार्त तत्वदर्शी सन्त की शरण में जाकर दीक्षा लेते तो उपरोक्त सर्व कर्मों के कष्ट कट जाते अर्थात् न प्रेत बनते, न गधा, न बैल बनते। अमरपुरी पर आसन होता अर्थात् गीता अध्याय 18 श्लोक 62 तथा अध्याय 15 श्लोक 4 में वर्णित सनातन परम धाम प्राप्त होता, परम शान्ति प्राप्त हो जाती। फिर कभी लौटकर संसार में नहीं आते अर्थात् जन्म-मरण का कष्टदायक चक्र सदा के लिए समाप्त हो जाता। उस अमर लोक (सत्यलोक) में धूप-छाया नहीं है अर्थात् जैसे धूप दुःखदाई हुई तो छाया की आवश्यकता पड़ी। उस सत्यलोक में केवल सुख है, दुःख नहीं है। कबीर, भक्ति बीज विनशै नहीं, आय पड़ो सो झोल। जे कंचन बिष्टा पड़े, घटै न ताका मोल।। कबीर परमेश्वर जी ने संत गरीबदास जी को बताया कि मैं अपनी अच्छी आत्माओं को खोजता फिरता हूँ। स्वर्ग, पृथ्वी तथा पाताल लोक में कहीं भी मिले, मैं वहीं पहुँच जाता हूँ। उनको पुनः भक्ति की प्रेरणा करता हूँ। मनुष्य जन्म के भूले उद्देश्य की याद दिलाकर भक्ति करने को कहता हूँ। वे अच्छी आत्माऐं पूर्व के किसी जन्म में मेरी शरण में आई होती हैं, परंतु पुनः जन्म में कोई संत न मिलने के कारण वे भक्ति न करके या तो धन संग्रह करने में व्यस्त हो जाती हैं या बुराईयों में फँसकर शराब, माँस खाने-पीने में जीवन नष्ट कर देती हैं या फिर अपराधी बनकर जनता के लिए दुःखदाई बनकर बेमौत मारी जाती हैं। उनको उस दलदल से निकालने के लिए मैं कोई न कोई कारण बनाता हूँ। वे आत्माऐं तत्वज्ञान के अभाव से बुराईयों रूपी कीचड़ में गिर तो जाती हैं, परंतु जैसे कंचन बिष्टा में गिर जाए तो उसका मूल्य कम नहीं होता। बिष्टा से निकालकर साफ कर ले। उसी मोल बिकता है। इसी प्रकार जो जीव मानव शरीर में एक बार मेरी (कबीर परमेश्वर जी की) शरण में किसी जन्म में आ जाता है। प्रथम, द्वितीय या तीनों मंत्रों में से कोई भी प्राप्त कर लेता है। किसी कारण से नाम खंडित हो जाता है, मृत्यु हो जाती है तो उसको मैं नहीं छोडूंगा। कलयुग में सब जीव पार होते हैं। यदि कलयुग में भी कोई उपदेशी रह जाता है तो सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग में उन्हीं की भक्ति से मैं बिना नाम लिए, बिना धर्म-कर्म किए आपत्ति आने पर अनोखी लीला करके रक्षा करता हूँ। उसको फिर भक्ति पर लगाता हूँ। उनमें परमात्मा में आस्था बनाए रखता हूँ। गरीब, राम कहा तो क्या हुआ, उर में नहीं यकीन। चोर मुसें घर लूटहि, पाँच पचीसों तीन।। यदि साधक को परमात्मा पर विश्वास ही नहीं है तो नाम सुमरण का कोई लाभ नहीं। उसके मानव जीवन को काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार रूपी पाँच चोर चुरा रहे हैं। इन पाँचों की पाँच-पाँच प्रकृति यानि 25 ये तथा रजगुण के आधीन होकर कोठी-बंगले बनाने में, कभी कार-गाड़ी खरीदने में जीवन नष्ट कर देता है। सतगुण के प्रभाव से पहले तो किसी पर दया करके बिना सोचे समझे लाखों रूपये खर्च कर देता है। फिर उसमें त्राटि देखकर तमोगुण के प्रभाव से झगड़ा कर लेता है। इस प्रकार तीन गुणों के प्रभाव से मानव जीवन नष्ट हो जाता है। यदि तत्वदर्शी संत से ज्ञान सुनकर विश्वास के साथ नाम का जाप करे तो जीवन सफल हो जाता है। जिन जिन भक्तों ने मर्यादा में रहकर जिस स्तर की भक्ति, दान आदि-आदि किया है, उनको लाभ अवश्य मिला है। कबीर, संत मिलन कूं चालिए, तज माया अभिमान। जो-जो कदम आगे रखे, वो ही यज्ञ समान।। कबीर, संत मिलन कूं जाईए, दिन में कई-कई बार। आसोज के मेह ज्यों, घना करे उपकार।। कबीर, दर्शन साधु का, परमात्मा आवै याद। लेखे में वोहे घड़ी, बाकी के दिन बाद।। कबीर, दर्शन साधु का, मुख पर बसै सुहाग। दर्श उन्हीं को होत हैं, जिनके पूर्ण भाग। #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🙏गुरु महिमा😇
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#GodNightTuesday #SantRampalJi_Won_Hearts . गुरु दर्श की अभिलाषा सत्संग में समय मिलते ही आने की कोशिश करे तथा सत्संग में मान बड़ाई करने नहीं आवे। अपितु अपने आपको एक बीमार समझ कर आवे। जैसे बीमार व्यक्ति चाहे कितने ही पैसे वाला हो, चाहे उच्च पदवी वाला हो जब हस्पताल में जाता है तो उस समय उसका उद्देश्य केवल रोग मुक्त होना होता है। जहाँ डॉक्टर लेटने को कहे लेट जाता है, बैठने को कहे बैठ जाता है, बाहर जाने का निर्देश मिले बाहर चला जाता है। फिर अन्दर आने के लिए आवाज आए चुपके से अन्दर आ जाता है। ठीक इसी प्रकार यदि हम जन्म मरण का दिव्य रोग खत्म करवाना चाहते है तो आप सतसंग में दिल मे गुरू जी के मिलन की कशिश लिये आते हो तो आपको सतसंग में आने का लाभ मिलेगा अन्यथा आपका आना निष्फल है। सतसंग में जहाँ बैठने को मिल जाए वहीं बैठ जाए, जो खाने को मिल जाए उसे परमात्मा कबीर साहिब की रजा से प्रसाद समझ कर खा कर प्रसन्न चित्त रहे। परमात्मा कबीर साहिब जी कहते है कि दोजग भिस्त स्वर्ग सभी को देखा, राजपाठ के रसिया। तीन लोक से तृप्ति नाही, ए मन भोगी खसिया।। इंद्र कुबेर ईस कि पदवी, ब्रम्हा वरूण धर्मराया। विष्णू नाथ के पुर को जाके, फिर भी वापस आया।। सतगुरू मिले तो इच्छा मिटे, पद मिले पदे समाना। चल हंसा सतलोक पठाऊं, जहाँ आदि अमर स्थाना।। कबीर साहब कहते- मन रूप में काल हमारे अंदर विद्यमान है। इसे यहाँ के सभी सुख सुविधा मिल जाय पुरी पृथ्वी का राज, या स्वर्ग का राज या इंद्र कुबेर ईश अथार्त ब्रम्ह काल भगवान, ब्रम्हा,विष्णू ,शंकर, वरूण, धर्मराज आदि कोई भी पद पदवी मिल जाय तीन लोक राज मिल जाय तो भी संतुष्ट नहीं होता है। हमारा जीव का मन बडा ही चंचल है। परमात्मा कबीर साहिब जी कहते है कि सतगुरु मिले तो यहाँ कि सभी ईच्छाए मिट जाएंगी, कहते है हे हंसआत्मा तुझे उस सतलोक में पहुँचा दुंगा जा आदि अजर अमर अविनासी स्थान है। जहाँ पर जाने के बाद फिर वापस नहीं आना होता है। गरीब, पीछै पीछै हरि फिरैं, आगै संत सुजान। संत करैं सोई साच है, च्यारि जुग प्रवान।। अपने सच्चे भक्त के साथ साथ पीछे-पीछे परमात्मा रहता है। संत जो करते हैं, सच्चा कार्य करते हैं यानि सही करते हैं। कभी किसी का अहित नहीं करते। चारों युगों में प्रमाण रहा है कि संत सही क्रिया करते हैं। भलाई के शुभ कर्म करते हैं। सच्चे साधक परमात्मा के समान आदरणीय हैं। इनके समान अन्य की तुलना नहीं की जा सकती। परमात्मा अपने सच्चे भक्त को अपनी शक्ति प्रदान कर देते हैं। परमात्मा कबीर जी कहते हैं कि मेरी बजाय इन संतों से माँगो। संत परमात्मा से प्राप्त शक्ति से अपने अनुयाईयों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। उनकी रक्षा करते हैं। परमात्मा कबीर जी उनके बीच में कोई दखल नहीं देते। इसलिए कहा है कि :- संत करें सो होत है, साहिब अपनी ठौर। परमात्मा ने भक्तों के लिए पृथ्वी तथा इसके सहयोगी सूर्य, आकाश, हवा, व जल अन्य ग्रह बनाए हैं ताकि वे भक्ति करके अपना कल्याण करवा सकें। तीर्थ स्थान भी भक्तों का साधना स्थल है। दान की परंपरा भी भक्ति में अति सहयोगी है। परंतु दान संत को दिया जाए। कुपात्रा को दिया दान तो रण-रेह अथार्त अन उपजाऊ भूमि में बीज डालकर खराब करने के समान है। परमात्मा कबीर जी ने कहा है कि कबीर, गुरू बिना माला फेरते, गुरू बिना देते दान। गुरू बिन दोनों निष्फल है, भावें देखो वेद पुराण।। साधक को चाहिए कि पहले पूर्ण गुरू से दीक्षा ले। फिर उनको दान करे। उनके बताए मंत्रों का जाप करे। गुरूजी से दीक्षा लिए बिना भक्ति के मंत्रों के जाप की माला फेरना तथा दान करना व्यर्थ है। गुरू बनाना अति आवश्यक है। जै सतगुरू की संगत करते, सकल कर्म कटि जाईं। अमर पुरि पर आसन होते, जहाँ धूप न छाँइ।। सन्त गरीब दास ने परमेश्वर कबीर जी से प्राप्त सूक्ष्मवेद में आगे कहा है कि यदि सतगुरू अथार्त तत्वदर्शी सन्त की शरण में जाकर दीक्षा लेते तो उपरोक्त सर्व कर्मों के कष्ट कट जाते अर्थात् न प्रेत बनते, न गधा, न बैल बनते। अमरपुरी पर आसन होता अर्थात् गीता अध्याय 18 श्लोक 62 तथा अध्याय 15 श्लोक 4 में वर्णित सनातन परम धाम प्राप्त होता, परम शान्ति प्राप्त हो जाती। फिर कभी लौटकर संसार में नहीं आते अर्थात् जन्म-मरण का कष्टदायक चक्र सदा के लिए समाप्त हो जाता। उस अमर लोक (सत्यलोक) में धूप-छाया नहीं है अर्थात् जैसे धूप दुःखदाई हुई तो छाया की आवश्यकता पड़ी। उस सत्यलोक में केवल सुख है, दुःख नहीं है। कबीर, भक्ति बीज विनशै नहीं, आय पड़ो सो झोल। जे कंचन बिष्टा पड़े, घटै न ताका मोल।। कबीर परमेश्वर जी ने संत गरीबदास जी को बताया कि मैं अपनी अच्छी आत्माओं को खोजता फिरता हूँ। स्वर्ग, पृथ्वी तथा पाताल लोक में कहीं भी मिले, मैं वहीं पहुँच जाता हूँ। उनको पुनः भक्ति की प्रेरणा करता हूँ। मनुष्य जन्म के भूले उद्देश्य की याद दिलाकर भक्ति करने को कहता हूँ। वे अच्छी आत्माऐं पूर्व के किसी जन्म में मेरी शरण में आई होती हैं, परंतु पुनः जन्म में कोई संत न मिलने के कारण वे भक्ति न करके या तो धन संग्रह करने में व्यस्त हो जाती हैं या बुराईयों में फँसकर शराब, माँस खाने-पीने में जीवन नष्ट कर देती हैं या फिर अपराधी बनकर जनता के लिए दुःखदाई बनकर बेमौत मारी जाती हैं। उनको उस दलदल से निकालने के लिए मैं कोई न कोई कारण बनाता हूँ। वे आत्माऐं तत्वज्ञान के अभाव से बुराईयों रूपी कीचड़ में गिर तो जाती हैं, परंतु जैसे कंचन बिष्टा में गिर जाए तो उसका मूल्य कम नहीं होता। बिष्टा से निकालकर साफ कर ले। उसी मोल बिकता है। इसी प्रकार जो जीव मानव शरीर में एक बार मेरी (कबीर परमेश्वर जी की) शरण में किसी जन्म में आ जाता है। प्रथम, द्वितीय या तीनों मंत्रों में से कोई भी प्राप्त कर लेता है। किसी कारण से नाम खंडित हो जाता है, मृत्यु हो जाती है तो उसको मैं नहीं छोडूंगा। कलयुग में सब जीव पार होते हैं। यदि कलयुग में भी कोई उपदेशी रह जाता है तो सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग में उन्हीं की भक्ति से मैं बिना नाम लिए, बिना धर्म-कर्म किए आपत्ति आने पर अनोखी लीला करके रक्षा करता हूँ। उसको फिर भक्ति पर लगाता हूँ। उनमें परमात्मा में आस्था बनाए रखता हूँ। गरीब, राम कहा तो क्या हुआ, उर में नहीं यकीन। चोर मुसें घर लूटहि, पाँच पचीसों तीन।। यदि साधक को परमात्मा पर विश्वास ही नहीं है तो नाम सुमरण का कोई लाभ नहीं। उसके मानव जीवन को काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार रूपी पाँच चोर चुरा रहे हैं। इन पाँचों की पाँच-पाँच प्रकृति यानि 25 ये तथा रजगुण के आधीन होकर कोठी-बंगले बनाने में, कभी कार-गाड़ी खरीदने में जीवन नष्ट कर देता है। सतगुण के प्रभाव से पहले तो किसी पर दया करके बिना सोचे समझे लाखों रूपये खर्च कर देता है। फिर उसमें त्राटि देखकर तमोगुण के प्रभाव से झगड़ा कर लेता है। इस प्रकार तीन गुणों के प्रभाव से मानव जीवन नष्ट हो जाता है। यदि तत्वदर्शी संत से ज्ञान सुनकर विश्वास के साथ नाम का जाप करे तो जीवन सफल हो जाता है। जिन जिन भक्तों ने मर्यादा में रहकर जिस स्तर की भक्ति, दान आदि-आदि किया है, उनको लाभ अवश्य मिला है। कबीर, संत मिलन कूं चालिए, तज माया अभिमान। जो-जो कदम आगे रखे, वो ही यज्ञ समान।। कबीर, संत मिलन कूं जाईए, दिन में कई-कई बार। आसोज के मेह ज्यों, घना करे उपकार।। कबीर, दर्शन साधु का, परमात्मा आवै याद। लेखे में वोहे घड़ी, बाकी के दिन बाद।। कबीर, दर्शन साधु का, मुख पर बसै सुहाग। दर्श उन्हीं को होत हैं, जिनके पूर्ण भाग। #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट
🙏कर्म क्या है❓ - कबीर , गुरू दर्श की चाह में व्याकुल दोनो नेन एक पलक की नींद में तीन लोक का चैन Labi Vachan कबीर , गुरू दर्श की चाह में व्याकुल दोनो नेन एक पलक की नींद में तीन लोक का चैन Labi Vachan - ShareChat
#GodNightTuesday #SantRampalJi_Won_Hearts . गुरु दर्श की अभिलाषा सत्संग में समय मिलते ही आने की कोशिश करे तथा सत्संग में मान बड़ाई करने नहीं आवे। अपितु अपने आपको एक बीमार समझ कर आवे। जैसे बीमार व्यक्ति चाहे कितने ही पैसे वाला हो, चाहे उच्च पदवी वाला हो जब हस्पताल में जाता है तो उस समय उसका उद्देश्य केवल रोग मुक्त होना होता है। जहाँ डॉक्टर लेटने को कहे लेट जाता है, बैठने को कहे बैठ जाता है, बाहर जाने का निर्देश मिले बाहर चला जाता है। फिर अन्दर आने के लिए आवाज आए चुपके से अन्दर आ जाता है। ठीक इसी प्रकार यदि हम जन्म मरण का दिव्य रोग खत्म करवाना चाहते है तो आप सतसंग में दिल मे गुरू जी के मिलन की कशिश लिये आते हो तो आपको सतसंग में आने का लाभ मिलेगा अन्यथा आपका आना निष्फल है। सतसंग में जहाँ बैठने को मिल जाए वहीं बैठ जाए, जो खाने को मिल जाए उसे परमात्मा कबीर साहिब की रजा से प्रसाद समझ कर खा कर प्रसन्न चित्त रहे। परमात्मा कबीर साहिब जी कहते है कि दोजग भिस्त स्वर्ग सभी को देखा, राजपाठ के रसिया। तीन लोक से तृप्ति नाही, ए मन भोगी खसिया।। इंद्र कुबेर ईस कि पदवी, ब्रम्हा वरूण धर्मराया। विष्णू नाथ के पुर को जाके, फिर भी वापस आया।। सतगुरू मिले तो इच्छा मिटे, पद मिले पदे समाना। चल हंसा सतलोक पठाऊं, जहाँ आदि अमर स्थाना।। कबीर साहब कहते- मन रूप में काल हमारे अंदर विद्यमान है। इसे यहाँ के सभी सुख सुविधा मिल जाय पुरी पृथ्वी का राज, या स्वर्ग का राज या इंद्र कुबेर ईश अथार्त ब्रम्ह काल भगवान, ब्रम्हा,विष्णू ,शंकर, वरूण, धर्मराज आदि कोई भी पद पदवी मिल जाय तीन लोक राज मिल जाय तो भी संतुष्ट नहीं होता है। हमारा जीव का मन बडा ही चंचल है। परमात्मा कबीर साहिब जी कहते है कि सतगुरु मिले तो यहाँ कि सभी ईच्छाए मिट जाएंगी, कहते है हे हंसआत्मा तुझे उस सतलोक में पहुँचा दुंगा जा आदि अजर अमर अविनासी स्थान है। जहाँ पर जाने के बाद फिर वापस नहीं आना होता है। गरीब, पीछै पीछै हरि फिरैं, आगै संत सुजान। संत करैं सोई साच है, च्यारि जुग प्रवान।। अपने सच्चे भक्त के साथ साथ पीछे-पीछे परमात्मा रहता है। संत जो करते हैं, सच्चा कार्य करते हैं यानि सही करते हैं। कभी किसी का अहित नहीं करते। चारों युगों में प्रमाण रहा है कि संत सही क्रिया करते हैं। भलाई के शुभ कर्म करते हैं। सच्चे साधक परमात्मा के समान आदरणीय हैं। इनके समान अन्य की तुलना नहीं की जा सकती। परमात्मा अपने सच्चे भक्त को अपनी शक्ति प्रदान कर देते हैं। परमात्मा कबीर जी कहते हैं कि मेरी बजाय इन संतों से माँगो। संत परमात्मा से प्राप्त शक्ति से अपने अनुयाईयों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। उनकी रक्षा करते हैं। परमात्मा कबीर जी उनके बीच में कोई दखल नहीं देते। इसलिए कहा है कि :- संत करें सो होत है, साहिब अपनी ठौर। परमात्मा ने भक्तों के लिए पृथ्वी तथा इसके सहयोगी सूर्य, आकाश, हवा, व जल अन्य ग्रह बनाए हैं ताकि वे भक्ति करके अपना कल्याण करवा सकें। तीर्थ स्थान भी भक्तों का साधना स्थल है। दान की परंपरा भी भक्ति में अति सहयोगी है। परंतु दान संत को दिया जाए। कुपात्रा को दिया दान तो रण-रेह अथार्त अन उपजाऊ भूमि में बीज डालकर खराब करने के समान है। परमात्मा कबीर जी ने कहा है कि कबीर, गुरू बिना माला फेरते, गुरू बिना देते दान। गुरू बिन दोनों निष्फल है, भावें देखो वेद पुराण।। साधक को चाहिए कि पहले पूर्ण गुरू से दीक्षा ले। फिर उनको दान करे। उनके बताए मंत्रों का जाप करे। गुरूजी से दीक्षा लिए बिना भक्ति के मंत्रों के जाप की माला फेरना तथा दान करना व्यर्थ है। गुरू बनाना अति आवश्यक है। जै सतगुरू की संगत करते, सकल कर्म कटि जाईं। अमर पुरि पर आसन होते, जहाँ धूप न छाँइ।। सन्त गरीब दास ने परमेश्वर कबीर जी से प्राप्त सूक्ष्मवेद में आगे कहा है कि यदि सतगुरू अथार्त तत्वदर्शी सन्त की शरण में जाकर दीक्षा लेते तो उपरोक्त सर्व कर्मों के कष्ट कट जाते अर्थात् न प्रेत बनते, न गधा, न बैल बनते। अमरपुरी पर आसन होता अर्थात् गीता अध्याय 18 श्लोक 62 तथा अध्याय 15 श्लोक 4 में वर्णित सनातन परम धाम प्राप्त होता, परम शान्ति प्राप्त हो जाती। फिर कभी लौटकर संसार में नहीं आते अर्थात् जन्म-मरण का कष्टदायक चक्र सदा के लिए समाप्त हो जाता। उस अमर लोक (सत्यलोक) में धूप-छाया नहीं है अर्थात् जैसे धूप दुःखदाई हुई तो छाया की आवश्यकता पड़ी। उस सत्यलोक में केवल सुख है, दुःख नहीं है। कबीर, भक्ति बीज विनशै नहीं, आय पड़ो सो झोल। जे कंचन बिष्टा पड़े, घटै न ताका मोल।। कबीर परमेश्वर जी ने संत गरीबदास जी को बताया कि मैं अपनी अच्छी आत्माओं को खोजता फिरता हूँ। स्वर्ग, पृथ्वी तथा पाताल लोक में कहीं भी मिले, मैं वहीं पहुँच जाता हूँ। उनको पुनः भक्ति की प्रेरणा करता हूँ। मनुष्य जन्म के भूले उद्देश्य की याद दिलाकर भक्ति करने को कहता हूँ। वे अच्छी आत्माऐं पूर्व के किसी जन्म में मेरी शरण में आई होती हैं, परंतु पुनः जन्म में कोई संत न मिलने के कारण वे भक्ति न करके या तो धन संग्रह करने में व्यस्त हो जाती हैं या बुराईयों में फँसकर शराब, माँस खाने-पीने में जीवन नष्ट कर देती हैं या फिर अपराधी बनकर जनता के लिए दुःखदाई बनकर बेमौत मारी जाती हैं। उनको उस दलदल से निकालने के लिए मैं कोई न कोई कारण बनाता हूँ। वे आत्माऐं तत्वज्ञान के अभाव से बुराईयों रूपी कीचड़ में गिर तो जाती हैं, परंतु जैसे कंचन बिष्टा में गिर जाए तो उसका मूल्य कम नहीं होता। बिष्टा से निकालकर साफ कर ले। उसी मोल बिकता है। इसी प्रकार जो जीव मानव शरीर में एक बार मेरी (कबीर परमेश्वर जी की) शरण में किसी जन्म में आ जाता है। प्रथम, द्वितीय या तीनों मंत्रों में से कोई भी प्राप्त कर लेता है। किसी कारण से नाम खंडित हो जाता है, मृत्यु हो जाती है तो उसको मैं नहीं छोडूंगा। कलयुग में सब जीव पार होते हैं। यदि कलयुग में भी कोई उपदेशी रह जाता है तो सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग में उन्हीं की भक्ति से मैं बिना नाम लिए, बिना धर्म-कर्म किए आपत्ति आने पर अनोखी लीला करके रक्षा करता हूँ। उसको फिर भक्ति पर लगाता हूँ। उनमें परमात्मा में आस्था बनाए रखता हूँ। गरीब, राम कहा तो क्या हुआ, उर में नहीं यकीन। चोर मुसें घर लूटहि, पाँच पचीसों तीन।। यदि साधक को परमात्मा पर विश्वास ही नहीं है तो नाम सुमरण का कोई लाभ नहीं। उसके मानव जीवन को काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार रूपी पाँच चोर चुरा रहे हैं। इन पाँचों की पाँच-पाँच प्रकृति यानि 25 ये तथा रजगुण के आधीन होकर कोठी-बंगले बनाने में, कभी कार-गाड़ी खरीदने में जीवन नष्ट कर देता है। सतगुण के प्रभाव से पहले तो किसी पर दया करके बिना सोचे समझे लाखों रूपये खर्च कर देता है। फिर उसमें त्राटि देखकर तमोगुण के प्रभाव से झगड़ा कर लेता है। इस प्रकार तीन गुणों के प्रभाव से मानव जीवन नष्ट हो जाता है। यदि तत्वदर्शी संत से ज्ञान सुनकर विश्वास के साथ नाम का जाप करे तो जीवन सफल हो जाता है। जिन जिन भक्तों ने मर्यादा में रहकर जिस स्तर की भक्ति, दान आदि-आदि किया है, उनको लाभ अवश्य मिला है। कबीर, संत मिलन कूं चालिए, तज माया अभिमान। जो-जो कदम आगे रखे, वो ही यज्ञ समान।। कबीर, संत मिलन कूं जाईए, दिन में कई-कई बार। आसोज के मेह ज्यों, घना करे उपकार।। कबीर, दर्शन साधु का, परमात्मा आवै याद। लेखे में वोहे घड़ी, बाकी के दिन बाद।। कबीर, दर्शन साधु का, मुख पर बसै सुहाग। दर्श उन्हीं को होत हैं, जिनके पूर्ण भाग। #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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#SantRampalJi_Won_Hearts #VisitSaNewsChannel #SanatanDharma #HonorAward #Haryana♦️ ग्राम पंचायत पेनघोर और लखन, डीग (राजस्थान) पहुँची संत रामपाल जी महाराज से आशीर्वाद लेने। कहा कि पानी में डूबते किसानों की मदद की। भगवान हैं आप। संत रामपाल जी महाराज जी ने जीता जनता का दिल। #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
🙏गुरु महिमा😇 - संत रामपाल जी महाराज जी ने जीता 5[6[([[ কা নিল गांव के ggeifஎ 6 कि आपने मांडोठी गांव बचा लिए। गांव के लोगों ने संत रामपाल जी महाराज को किया सम्मानित | SA News Channel YouTube LE S 5 Channell @SatlokAshramNewsChannel 147M subscnibers A7/ videos संत रामपाल जी महाराज जी ने जीता 5[6[([[ কা নিল गांव के ggeifஎ 6 कि आपने मांडोठी गांव बचा लिए। गांव के लोगों ने संत रामपाल जी महाराज को किया सम्मानित | SA News Channel YouTube LE S 5 Channell @SatlokAshramNewsChannel 147M subscnibers A7/ videos - ShareChat