aashiqrabdaa
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@393640616
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मकसद।भलि गल्लां नाल जोडन दा जे भाईकिसी बोडी नालन्ई
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 टेक :- कूड़ी दुनियां में जल कर देख लिया, तेरी याद में जल कर देखेंगे। जिस राह पे अपनी मुक्त होए, उस राह भी चल कर देखेंगे। 3. देखे पी के नशे मजाजी भी, थोड़ी देर के बाद वो उतर गए। जहां हरदम मस्ती चढ़ी रहे, वो मयखाना भी चल कर देखेंगे। कूड़ी दुनियां में...
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00:53
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:58
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 राम जी नू। राम राम जी। राम जी। (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:57
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:53
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 8:38 90% @181-200 रूहानी सवाल जवाब ११३ मनुष्य के शरीर का आत्मा के साथ क्या . रिश्ता है और आत्मा के रिश्ते को किस नजर से देखना चाहिए? उत्तरआत्मा बिना शरीर नहीं और शरीर बिना आत्मा की पहचान नहीं होती। पति-पत्नी का रिश्ता छोडकर बड़ों को माता-पिता , बराबर वालों को बहन-भाई व छोटों को बेटा-बेटी समान ही देखना है। प्र. ११४ चलते फिरते किया गया सुमिरन क्या किये गये सुमिरन से ज्यादा असरदार है? ೩ಕಾ उत्तरजी नहीं, चलते फिरते किया गया सुमिरन লিব आपके मन को टिकाने के एक खुराक है इसका फल मिलता है। अगर बैठकर सुमिरन करो तो सुन्न समाधि में जा सकते हो और साक्षात् मालिक के नूरी स्वरूप के दर्शन कर सकते हो। मैं सुमिरन गिन-गिन कर करता हूं॰ . 195பஎச, I463fa8? उत्तरनहीं , सुमिरन बिना गिनती के करना चाहिए। क्योंकि सुमिरन गिन-गिन कर करोगे तो सुमिरन गिनती में ही अटक जाएगा| जब शब्द जुबान पर बैठ जाएं तो तेजी से सुमिरन करें। उस समय शब्दों की तो बहुत तरफ भी ध्यान नहीं होना चाहिए, गिनती दूर की बात है। Al 0 8:38 90% @181-200 रूहानी सवाल जवाब ११३ मनुष्य के शरीर का आत्मा के साथ क्या . रिश्ता है और आत्मा के रिश्ते को किस नजर से देखना चाहिए? उत्तरआत्मा बिना शरीर नहीं और शरीर बिना आत्मा की पहचान नहीं होती। पति-पत्नी का रिश्ता छोडकर बड़ों को माता-पिता , बराबर वालों को बहन-भाई व छोटों को बेटा-बेटी समान ही देखना है। प्र. ११४ चलते फिरते किया गया सुमिरन क्या किये गये सुमिरन से ज्यादा असरदार है? ೩ಕಾ उत्तरजी नहीं, चलते फिरते किया गया सुमिरन লিব आपके मन को टिकाने के एक खुराक है इसका फल मिलता है। अगर बैठकर सुमिरन करो तो सुन्न समाधि में जा सकते हो और साक्षात् मालिक के नूरी स्वरूप के दर्शन कर सकते हो। मैं सुमिरन गिन-गिन कर करता हूं॰ . 195பஎச, I463fa8? उत्तरनहीं , सुमिरन बिना गिनती के करना चाहिए। क्योंकि सुमिरन गिन-गिन कर करोगे तो सुमिरन गिनती में ही अटक जाएगा| जब शब्द जुबान पर बैठ जाएं तो तेजी से सुमिरन करें। उस समय शब्दों की तो बहुत तरफ भी ध्यान नहीं होना चाहिए, गिनती दूर की बात है। Al 0 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 टेक:-भजन बिन बाँवरे, तैने हीरा सा जन्म गंवाया।। 4. यह संसार माया का लोभी, ममता महल चिनाया। कहत 'कबीर' सुनो भाई साधो, हाथ कछु न आया। भजन बिन...।
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00:51
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - प्रभुनाम से ही बुरे विचार काबू आएंगे : पूज्य गुरु जी पूज्य गुरु संत डॉ॰ गुरमीत राम अनमोल वचन रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में हर कोई अंदर -बाहर से बेचैन है, ೯ और परेशान है அ उसका सबसे बडा कारण है कमजोरी | आत्मिक जब आत्मबल नहीं होगा तक अपने   विचारों इन्सान पर आत्मिक चिंतन के लिए प्रभु काबू नहीं पा सकता| वहीं के ಈ | सुमिरन जिनके अंदर आत्मबल होता H 5 पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि॰ है वो बुलंदियों को छू लेते मोह क्रोध आत्मबल बाहर से ೯ ( कामवासना, यह लोभ, अंहकार मन व माया नहीं लाना पड़ता, इन्सान के में इन्सान उलझा हुआ है अंदर ही सब कुछ है। বলীপথী, होम्योपैथी , काम-्वासना अगर इन्सान और अपने बुरे विचारों आयुर्वेदा, नैच्युरोपैथी किसी ೯7 चाहता   है भी पद्धति में आत्मबल काबू ানা எ जरूरी है कि आत्मबल का टॉनिक नहीं है। इसको గౌ স अपने ম अंदर बढ़ाए। आत्मबल पाया जा कामवासना, विषय विकारों लिए और इसके सकता है पर काबू पाया जा सकता है। आत्मिक चिंतन जरूरी है। प्रभुनाम से ही बुरे विचार काबू आएंगे : पूज्य गुरु जी पूज्य गुरु संत डॉ॰ गुरमीत राम अनमोल वचन रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में हर कोई अंदर -बाहर से बेचैन है, ೯ और परेशान है அ उसका सबसे बडा कारण है कमजोरी | आत्मिक जब आत्मबल नहीं होगा तक अपने   विचारों इन्सान पर आत्मिक चिंतन के लिए प्रभु काबू नहीं पा सकता| वहीं के ಈ | सुमिरन जिनके अंदर आत्मबल होता H 5 पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि॰ है वो बुलंदियों को छू लेते मोह क्रोध आत्मबल बाहर से ೯ ( कामवासना, यह लोभ, अंहकार मन व माया नहीं लाना पड़ता, इन्सान के में इन्सान उलझा हुआ है अंदर ही सब कुछ है। বলীপথী, होम्योपैथी , काम-्वासना अगर इन्सान और अपने बुरे विचारों आयुर्वेदा, नैच्युरोपैथी किसी ೯7 चाहता   है भी पद्धति में आत्मबल काबू ানা எ जरूरी है कि आत्मबल का टॉनिक नहीं है। इसको గౌ স अपने ম अंदर बढ़ाए। आत्मबल पाया जा कामवासना, विषय विकारों लिए और इसके सकता है पर काबू पाया जा सकता है। आत्मिक चिंतन जरूरी है। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 जेडे गुरू दी निन्दिया करदे। पापी नर्का दे विच सडदे। डूबे आप डुबो ले धर दे। निन्दक कूला डुबाई जी।
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00:49
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 वाहेगुरु जी। वाहेगुरु (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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01:07
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं, बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। - ShareChat