aashiqrabdaa
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मकसद।भलि गल्लां नाल जोडन दा जे भाईकिसी बोडी नालन्ई
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - प्रभु का पैगाम जन-्जन पहुंचाते हैं संत ' dd सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु अनमोलवचन राम रहीम सिंह মন ভাঁ ரி जी इन्सां फरमाते हैं कि संत पीर-फकीर उन्हें कहा जाता है जो इन्सान को सच से जोड़ देते हैं, मालिक का पैगाम जन-्जन पहुंचाते हैं॰ उस प्रभु के तक संदेश की चर्चा करते रहते हैं, जिससे परमपिता आत्मा परमात्मा से मिल जाए। गुरु दुआ के लिए हाथ उठते हैं मुर्शिद-कामिल संत वो गाईड अंदर   सोच लिए 3T = होते   हैं जो जीते-जी  गम चलती है और दुआ के लिए दुःख दर्द चिंता, परेशानियों से ही वो बने होते हैं। मुक्ति का रास्ता बताते हैं और पूज्य गुरु जी फरमाते हैं मरणोपरांत आवागमन से कैसे कि जिस तरह आप घर के आत्मा   मुक्त हो, য   নহীন্দা मुखिया हैं॰ तो आपको घर का ஈர் =1 ஈ = = फिक्र होता है॰ बाल-्बच्चे फरमाते हैं कि संतों का काम परिवार का फिक्र होता है। कोई मेला, तमाशा करना नहीं उसके लिए आप कितना कुछ होता, बल्कि उनके हर कार्य में करते रहते हैं। उसी तरह हर किसी का भला छुपा होता संत, पीर-फकीर पूरी सृष्टि के है। उनका कोई निजी मकसद लिए आते हैं। उनको सारे नहीं होता कि॰वो खुद के लिए समाज का, सारी सृष्टि का कुछ बनाएं। ' तरूवर फल नहीं ٤, फिक्र নমাক্কি रहता खात है॰ सरवर पीव न नीर। भगवान की तरफ से उनकी परमार्थ के कारणे संतन भयो यह ड्यूटी होती है कि पूरी सृष्टि में तालमेल बना रहे और शरीर।। जिस तरह पेड़ पौधों पर जितने भी फल लग जाएं इन्सान के रूप में जो आत्मा वो फल खुद नहीं खाते। समुद्र इस धरती पे है, वो परमपिता नदियां कभी अपना पानी आप परमात्मा से मिल जाए। इसके  नहों पीते। इसलिए संत, पीर- लिए संत सत्संग करते हैं , हर फकीर दुनिया के लिए आते हैं।  कर्म करते हैं, जिससे इन्सान उनका अपना निजी मकसद छोड़कर मालिक की శాకే' खुशियों  नहीं होता | उनका हर कर्म, हर तरफ लग जाए और किसी के भले के लिए होता है। से मालामाल होे जाए। प्रभु का पैगाम जन-्जन पहुंचाते हैं संत ' dd सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु अनमोलवचन राम रहीम सिंह মন ভাঁ ரி जी इन्सां फरमाते हैं कि संत पीर-फकीर उन्हें कहा जाता है जो इन्सान को सच से जोड़ देते हैं, मालिक का पैगाम जन-्जन पहुंचाते हैं॰ उस प्रभु के तक संदेश की चर्चा करते रहते हैं, जिससे परमपिता आत्मा परमात्मा से मिल जाए। गुरु दुआ के लिए हाथ उठते हैं मुर्शिद-कामिल संत वो गाईड अंदर   सोच लिए 3T = होते   हैं जो जीते-जी  गम चलती है और दुआ के लिए दुःख दर्द चिंता, परेशानियों से ही वो बने होते हैं। मुक्ति का रास्ता बताते हैं और पूज्य गुरु जी फरमाते हैं मरणोपरांत आवागमन से कैसे कि जिस तरह आप घर के आत्मा   मुक्त हो, য   নহীন্দা मुखिया हैं॰ तो आपको घर का ஈர் =1 ஈ = = फिक्र होता है॰ बाल-्बच्चे फरमाते हैं कि संतों का काम परिवार का फिक्र होता है। कोई मेला, तमाशा करना नहीं उसके लिए आप कितना कुछ होता, बल्कि उनके हर कार्य में करते रहते हैं। उसी तरह हर किसी का भला छुपा होता संत, पीर-फकीर पूरी सृष्टि के है। उनका कोई निजी मकसद लिए आते हैं। उनको सारे नहीं होता कि॰वो खुद के लिए समाज का, सारी सृष्टि का कुछ बनाएं। ' तरूवर फल नहीं ٤, फिक्र নমাক্কি रहता खात है॰ सरवर पीव न नीर। भगवान की तरफ से उनकी परमार्थ के कारणे संतन भयो यह ड्यूटी होती है कि पूरी सृष्टि में तालमेल बना रहे और शरीर।। जिस तरह पेड़ पौधों पर जितने भी फल लग जाएं इन्सान के रूप में जो आत्मा वो फल खुद नहीं खाते। समुद्र इस धरती पे है, वो परमपिता नदियां कभी अपना पानी आप परमात्मा से मिल जाए। इसके  नहों पीते। इसलिए संत, पीर- लिए संत सत्संग करते हैं , हर फकीर दुनिया के लिए आते हैं।  कर्म करते हैं, जिससे इन्सान उनका अपना निजी मकसद छोड़कर मालिक की శాకే' खुशियों  नहीं होता | उनका हर कर्म, हर तरफ लग जाए और किसी के भले के लिए होता है। से मालामाल होे जाए। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 2. इहनां विषियां तों मन नूं हटा के रख तूं। इस दिल जलवे-बाज़ नूं समझा के रख तूं। इक्को गुरू दे निशान नूं बणा के रख तूं। सिर गुरू दे द्वारे ते झुका के रख तूं। तैनूं दीन ते जहान वाली लोड़ नाल की। मुल्लां यार...
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00:47
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:57
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अर्मत वेला होया। तूं ता सोया होया अनपागा। सारी दुनिया जागी। तूं ना जागा।
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01:52
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 रज्जेयां नं वेख के ना राजी होण जी। भुख्खेयां नूं कोई दिन्दा ना छोहण जी। सिआणे इस गल्ल दा करो निखार जी। किसे गल्लों छड्डुदा ना...
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00:50
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 टेकः- किसे गल्लों छड्डदा ना संसार जी।। चंगे चोले पहनिएं विशई दस्सदे। पाटे होण कपड़े तां लोक हस्सदे। जोड़दा है माया तुरे पब्बां भार जी। किसे गल्लों छड्डुदा ना...
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00:46
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 सतगुरू बक्श लो तूसी बक्शन्हार जी। साढि अर्ज सुनो दातार जी। धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:58
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 वाहेगुरु जी। वाहेगुरु (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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01:07
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं, बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। - ShareChat