aashiqrabdaa
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मकसद।भलि गल्लां नाल जोडन दा जे भाईकिसी बोडी नालन्ई
राधास्वामी जी। राधास्वामी (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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01:16
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 बात यह सुनाई सच्ची 'शाह सतनाम जी'। पड़े चोट खानी बन्दा करे काम जी। अखियों से बहे धार अँसुअन की। राम नाम...॥
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00:36
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन। धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 8*44 ೧ ೧ ೦ 18% @261-280 रूहानी सवाल जवाब प्र. २७४ नाम-दान का धर्म से क्या संबंध है? धर्म से ही पैदा हुई चीज गुरूमंत्र उत्तर नाम, है। धर्म शब्द का अर्थ है धारण कर लो , आदमी को आदमी से, भगवान से जोड़ो। उसी से गुरूमंत्र बना है। #కాఖ प्र. २७५ रूहानी सत्संग व सत्संग अंतर क्या है? उत्तर सत्संग और रूहानी सत्संग एक ही है। लेकिन आज सत्संग करने से पहले लोग पैसा ले लेते हैं कि आपके शहर में आएंगे बताओ कितना पैसा दोगे या बाद में टिकटें लग जाती हैं, चढ़ावा चढ़ता है। जबकि रूहानी सत्संग में पूर्ण संत सभी धर्मों का सत्कार, अपना निजी अनुभव और जो समय चल रहा है उस पर बात करते हैं। रूह मालिक तक कैसे जा सकती है उसे रूहानी सत्संग कहा जाता है। A 0 8*44 ೧ ೧ ೦ 18% @261-280 रूहानी सवाल जवाब प्र. २७४ नाम-दान का धर्म से क्या संबंध है? धर्म से ही पैदा हुई चीज गुरूमंत्र उत्तर नाम, है। धर्म शब्द का अर्थ है धारण कर लो , आदमी को आदमी से, भगवान से जोड़ो। उसी से गुरूमंत्र बना है। #కాఖ प्र. २७५ रूहानी सत्संग व सत्संग अंतर क्या है? उत्तर सत्संग और रूहानी सत्संग एक ही है। लेकिन आज सत्संग करने से पहले लोग पैसा ले लेते हैं कि आपके शहर में आएंगे बताओ कितना पैसा दोगे या बाद में टिकटें लग जाती हैं, चढ़ावा चढ़ता है। जबकि रूहानी सत्संग में पूर्ण संत सभी धर्मों का सत्कार, अपना निजी अनुभव और जो समय चल रहा है उस पर बात करते हैं। रूह मालिक तक कैसे जा सकती है उसे रूहानी सत्संग कहा जाता है। A 0 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन। धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - सूरज के पास से गुजर सकती है आत्मा ' सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु अनमोल वचन संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह  ೩ जी দমোন  इन्सा कि परमात्मा कणन्कण में हैं हर इन्सान के अंदर मौजूद है " कोई ऐसी जगह नहीं जहां वो न हो। बस आदमी की ऐसी निगाह नहीं जिस कारण वह में है। जिस हिस्से से आत्मा उसे देख नहीं पाता। इन्सान उस  सिकुड़ जाती है, वो हिस्सा डैड  परमात्मा को देख सके इसके हो जाता है। इसलिए आत्मा से लिए जरूरी है कि इन आंखों बढ़कर बलवान कोई दिखने में में प्रभु के नाम की दवा डाले। उस  दवा सेये आंखें इस नहीं आता। भगवान तो आत्मा को बनाने वाला है। आत्मा ऐसी काबिल हो जाती हैं, इस फानी  जो सूरज के पास से शक्ति है॰ दुनिया को तरफ से बंद होकर  गुजर सकती है। जब सुमिरन रूहानी दुनिया की तरफ तरक्की  किया जाता है, ध्यान एकाग्र करती हैं और जब रूहानियत किया जाता है तो आत्मबल करती करती 4 4 নক্ষৌ बढ़ता है जैसे-्जैसे आत्मबल निगाहें सतगुरू मौला की उस बढ़ता जाता है आत्मा शरीर से धुन का पीछा करती हैं तो इनका आखिरी पडाव जो होता  4 सिमटकर  గౌగ द्वार पहुंचती है। फिर आत्मा रूहानी  है, वो प्रभु के दर्शन्दीदार होते मंडलों पर चढ़ती है और जैसे हैं। प्रभु के दर्श-्दीदार से इन्सान  ही दसवें द्वार में प्रवेश करती है के तमाम दुःख, दर्द  चिंताएं मिट जाया करती हैं , अंतःकरण  मालिक की अनहद धुन, बांग- में सरूर और चेहरे पर नूर ব-হলানী; कलमा एपाक ক্কী आता है और इन्सान परमात्मा  धुर की वाणी चलना शुरू जाती है। आत्मा उस धुन का नाम लेता हुआ, तमाम जैसे ही पकड़ती है तो आत्मा मंजिलें पार कर जाता है, जो का खुद का प्रकाश तीन सूरजों बेहद मुश्किल होती हैं। जितना हो जाता है।इसलिए वो रूहानी मंजिलों पर चलना भी सूरज  कोई आसान बात नहीं है। आत्मा किसी 95, ब्रह्मंड के पास से पार होती क्योकि दसवें द्वार पर जब तक नहीं, रूहानी  चली जाती है | और सारे ब्रह्मंड पहुंचती  आत्मा को पार कर जब पारब्रह्म होती मंडलों पर जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पूज्य गुरु जी - है॰  तो  निजधाम কা रास्ता फरमाते हैं कि आत्मा पूरे जिस्म  खुलता है। सूरज के पास से गुजर सकती है आत्मा ' सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु अनमोल वचन संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह  ೩ जी দমোন  इन्सा कि परमात्मा कणन्कण में हैं हर इन्सान के अंदर मौजूद है " कोई ऐसी जगह नहीं जहां वो न हो। बस आदमी की ऐसी निगाह नहीं जिस कारण वह में है। जिस हिस्से से आत्मा उसे देख नहीं पाता। इन्सान उस  सिकुड़ जाती है, वो हिस्सा डैड  परमात्मा को देख सके इसके हो जाता है। इसलिए आत्मा से लिए जरूरी है कि इन आंखों बढ़कर बलवान कोई दिखने में में प्रभु के नाम की दवा डाले। उस  दवा सेये आंखें इस नहीं आता। भगवान तो आत्मा को बनाने वाला है। आत्मा ऐसी काबिल हो जाती हैं, इस फानी  जो सूरज के पास से शक्ति है॰ दुनिया को तरफ से बंद होकर  गुजर सकती है। जब सुमिरन रूहानी दुनिया की तरफ तरक्की  किया जाता है, ध्यान एकाग्र करती हैं और जब रूहानियत किया जाता है तो आत्मबल करती करती 4 4 নক্ষৌ बढ़ता है जैसे-्जैसे आत्मबल निगाहें सतगुरू मौला की उस बढ़ता जाता है आत्मा शरीर से धुन का पीछा करती हैं तो इनका आखिरी पडाव जो होता  4 सिमटकर  గౌగ द्वार पहुंचती है। फिर आत्मा रूहानी  है, वो प्रभु के दर्शन्दीदार होते मंडलों पर चढ़ती है और जैसे हैं। प्रभु के दर्श-्दीदार से इन्सान  ही दसवें द्वार में प्रवेश करती है के तमाम दुःख, दर्द  चिंताएं मिट जाया करती हैं , अंतःकरण  मालिक की अनहद धुन, बांग- में सरूर और चेहरे पर नूर ব-হলানী; कलमा एपाक ক্কী आता है और इन्सान परमात्मा  धुर की वाणी चलना शुरू जाती है। आत्मा उस धुन का नाम लेता हुआ, तमाम जैसे ही पकड़ती है तो आत्मा मंजिलें पार कर जाता है, जो का खुद का प्रकाश तीन सूरजों बेहद मुश्किल होती हैं। जितना हो जाता है।इसलिए वो रूहानी मंजिलों पर चलना भी सूरज  कोई आसान बात नहीं है। आत्मा किसी 95, ब्रह्मंड के पास से पार होती क्योकि दसवें द्वार पर जब तक नहीं, रूहानी  चली जाती है | और सारे ब्रह्मंड पहुंचती  आत्मा को पार कर जब पारब्रह्म होती मंडलों पर जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पूज्य गुरु जी - है॰  तो  निजधाम কা रास्ता फरमाते हैं कि आत्मा पूरे जिस्म  खुलता है। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन। धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:52
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन। धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:47
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन। धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - सुमिरन से मिलती हैं ढेरों खुशियां : पूज्य गुरु जी सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत अनमोलवचन राम रहीम सिंह जी ভাঁ Ha इन्सां फरमाते हैं कि॰ ব্ধী दूसरों गलतियां देखने को बजाय इन्सान को अपने अंदर निगाह जरूर 7 मारनी चाहिए। इन्सान दूसरों तरफ तो हर समय निगाह मारता है और उनको गलतियां देखता है जबकि उसे चाहिए कि वह अपने সানতমন্ধনা হম নান ক্ষী ট ক্ি अंदर निगाह मारकर देखे। अगर वह अपनो इस रूहानी ताकत करने की को बुराई  दूसरों इन्सान को पहचाने और ईश्वर सुमिरन अपने बुरे विचारों को त्याग  बजाय में अपना ध्यान लगाए। आप जो दे॰ तो मालिक जरूर उसे खुशियों फरमाते हैं कि मनुष्य को रोटी से मालामाल कर देता है। आप खाने में तो मेहनत करनी पड़ती जी फरमाते हैं कि बुराई आपको # जबकि सुमिरन   करने ೯ हमेशा मुश्किलों , बीमारियों टेंशन  लिए तो कुछ भी॰  करने आदि को ओर ले जाने का काम नहीं   होती। मन 57 करती है। भक्तजनों को चाहिए कि॰ केवल विचार आएं और जीभा वे अपनी हर बुरी आदत को त्यागें  को राम की तरफ हिलाएं॰ यही तथा   मालिक से नाता   जोड़ें। पर्याप्त है। यह नहीं हो सकता मालिक को प्राप्त करने के लिए तो केवल ख्यालों से ही सुमिरन भक्त अपनी हर प्रिय वस्तुको करें तो भी उत्तम है।हर भक्त छोड़ देता है। पूज्य गुरु जी फरमाते  को ক্ষা আাভিব ক্ি वह हैं कि ईश्वर का नाम बुराइयों सुखों का लिए বাভ  दृढ़ संकल्प इसक खजाना है। की जरूरत है।एक दिन आएगा इन्सान में इतनी ताकत है कि॰ जब ईश्वर के नाम, सुमिरन से वह सही तरीके से ईश्वर का नाम  ही मनुष्य के सभी दुःख दूर स्वयं   इन्सान   से I कर होकर वह खुशियों से मालामाल  भगवान बन सकता है और यह होे जाएगा | ताकत प्रत्येक व्यक्ति के पास हैे। सुमिरन से मिलती हैं ढेरों खुशियां : पूज्य गुरु जी सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत अनमोलवचन राम रहीम सिंह जी ভাঁ Ha इन्सां फरमाते हैं कि॰ ব্ধী दूसरों गलतियां देखने को बजाय इन्सान को अपने अंदर निगाह जरूर 7 मारनी चाहिए। इन्सान दूसरों तरफ तो हर समय निगाह मारता है और उनको गलतियां देखता है जबकि उसे चाहिए कि वह अपने সানতমন্ধনা হম নান ক্ষী ট ক্ি अंदर निगाह मारकर देखे। अगर वह अपनो इस रूहानी ताकत करने की को बुराई  दूसरों इन्सान को पहचाने और ईश्वर सुमिरन अपने बुरे विचारों को त्याग  बजाय में अपना ध्यान लगाए। आप जो दे॰ तो मालिक जरूर उसे खुशियों फरमाते हैं कि मनुष्य को रोटी से मालामाल कर देता है। आप खाने में तो मेहनत करनी पड़ती जी फरमाते हैं कि बुराई आपको # जबकि सुमिरन   करने ೯ हमेशा मुश्किलों , बीमारियों टेंशन  लिए तो कुछ भी॰  करने आदि को ओर ले जाने का काम नहीं   होती। मन 57 करती है। भक्तजनों को चाहिए कि॰ केवल विचार आएं और जीभा वे अपनी हर बुरी आदत को त्यागें  को राम की तरफ हिलाएं॰ यही तथा   मालिक से नाता   जोड़ें। पर्याप्त है। यह नहीं हो सकता मालिक को प्राप्त करने के लिए तो केवल ख्यालों से ही सुमिरन भक्त अपनी हर प्रिय वस्तुको करें तो भी उत्तम है।हर भक्त छोड़ देता है। पूज्य गुरु जी फरमाते  को ক্ষা আাভিব ক্ি वह हैं कि ईश्वर का नाम बुराइयों सुखों का लिए বাভ  दृढ़ संकल्प इसक खजाना है। की जरूरत है।एक दिन आएगा इन्सान में इतनी ताकत है कि॰ जब ईश्वर के नाम, सुमिरन से वह सही तरीके से ईश्वर का नाम  ही मनुष्य के सभी दुःख दूर स्वयं   इन्सान   से I कर होकर वह खुशियों से मालामाल  भगवान बन सकता है और यह होे जाएगा | ताकत प्रत्येक व्यक्ति के पास हैे। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन। धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:28
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 वाहेगुरु जी। वाहेगुरु (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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01:07
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं, बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। - ShareChat