aashiqrabdaa
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मकसद।भलि गल्लां नाल जोडन दा जे भाईकिसी बोडी नालन्ई
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 राधे-राधे राधारानी, ​​ राधारानी (रब/रुह), जेडि हर विच, जाहिर होंदी भले कर्मा, भली ग्लां तौं । बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 8*43 ೧ ೧ ೦ 18% @261-280 रूहानी सवाल जवाब प्र. २६४ अवतार, प्रकट और पैदा में अंतर स्पष्ट करें जी। उत्तर अवतार -मालिक जिन भक्तों , संतों को भेजते हैं और शरीर धारण करते हैं उसे अवतार कहा जाता है। प्रकट होना उसे कहते हैं कि कोई Tಾhe सेवा-सुमिरन, भक्ति करता है तो मालिक उसे दिव्य रूप में दर्शन देता है और कहा जाता है मालिक प्रकट हो गए। किसी भी जीव-जंतु का जन्म होना या पैदा F पैदा होना काल की त्रिलोकी की आम प्रक्रिया भेजे हुए है। मालिक स्वरूप जो संत आते हैं वो पैदा तो उसी तरह से होते हैं परन्तु जननी को कोई भी कष्ट नहीं आता। उसी से पता चल जाता है कि आने वाली औलाद कोई ख़ास है। प्र. २६५ आत्मा धीरे-धीरे लेकिन मन जल्दी बलवान हो जाता है। क्या यह उलटा नहीं हो সব্ধনা? सुमिरन करने से ऐसा हो RR जाएगा | Al 0 8*43 ೧ ೧ ೦ 18% @261-280 रूहानी सवाल जवाब प्र. २६४ अवतार, प्रकट और पैदा में अंतर स्पष्ट करें जी। उत्तर अवतार -मालिक जिन भक्तों , संतों को भेजते हैं और शरीर धारण करते हैं उसे अवतार कहा जाता है। प्रकट होना उसे कहते हैं कि कोई Tಾhe सेवा-सुमिरन, भक्ति करता है तो मालिक उसे दिव्य रूप में दर्शन देता है और कहा जाता है मालिक प्रकट हो गए। किसी भी जीव-जंतु का जन्म होना या पैदा F पैदा होना काल की त्रिलोकी की आम प्रक्रिया भेजे हुए है। मालिक स्वरूप जो संत आते हैं वो पैदा तो उसी तरह से होते हैं परन्तु जननी को कोई भी कष्ट नहीं आता। उसी से पता चल जाता है कि आने वाली औलाद कोई ख़ास है। प्र. २६५ आत्मा धीरे-धीरे लेकिन मन जल्दी बलवान हो जाता है। क्या यह उलटा नहीं हो সব্ধনা? सुमिरन करने से ऐसा हो RR जाएगा | Al 0 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - बुराई व बुरे लोगों का संग मत करोः पूज्य गुरु जी सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत अनमोलवचन राम रहीम सिंह जी गुरमीत 5. इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में बहुत  तरह के नशे हैं जैसे कि चरस हेरोइन स्मैक  भांग धतूरा अफीम   शराब, माननबड़ाई का राज ्पहुंच  TSTT . ಹ नशा अक्ल-चतुराई का नशा, जवानी का नशा और कामन्वासना का उठाओ औरलोगों को बरगलाओ। नशा जिनमें कई सारा दिन इसी के बहाने ही घूमते रहते हैं। कहीं पर उनसे गुनाह करवाओ बुरे काम  इसलिए बुरा कर्म तो रहते हैंतोयही मकसद बनाकर करवाओ बुरा कर्म है। करता कौन है इससे  रहते हैं और अपना सारा कुछ गुल  कोई लेना ्देना नहीं है। यह कर्म लेतेहैं।जब व्यक्ति अल्लाह- करच की धरती है इसलिए कर्म बुरा न मालिक को दरगाह में शामिल हो पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि॰ है या वहां से जुड़ जाता है I जाता बुरा कर्म कभी न करो। इस मामले तो उसे मालूम होने लगता है कि॰ में कभी किसी की न सुनो। चाहे क्या गलत है और क्या सही है। किसी के कहने परहाया किसी फिर वह दूसरे के कंधे पर तीर के साथ हो, बुरा कर्म कभी मत खखकर नर्ही चला सकता कि फलां   करो॰ वरना दोनों जहां में ठोकरें आदमी ने कहा इसलिए खाते फिरोगे , कुलों को बर्बाद कर किया। इसलिए वहजिम्मेवार आप  लोगे ।इसलिए बुरा कर्म नहीं करना  होे जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि॰ चाहिए। नेकन्अच्छे कर्म पर आगे बढते जाओ, मंजिलें आपके लिए अगर इन्सान वचनों पर चले तो ,दरवाजे खूले हुए हैं।कोई  तैयार हैं उसका जिम्मेवार दयाल हो जाता लॉक ( ताला ) नहों है। बस कदम  है।वो उसके हर कर्म को काट बढ़ातेजाओ तो मालिक केरहमो- देता है॰ हर कर्म को बदल कर कर्म  को  हासिल खख देता है।कोई भो आदमी किसी कर जरूर पाओगे। इसलिए ध्यान दो कर्मों को गलत करने को कहता है, चाहे की तरफ ध्यान दो उन विचारों को भी पूजनीय हो तोवो वह कितना तरफ जो संत आपके दिलो दिमाग गुनाहगार है। अगर कोई  बहत बड़ा में जहन मेंपैदा करते हैं।उन लोगों आदमी   गलत है वो पूजनीय  की छोड़ो जो आपको गुमरह करने -बेइंतहा गुनाहगार हो जाता  बइंतहा पर तुले हैं। उनका संग न करो, है॰ तो वह भी नरक भोगता है। मजबूरी में करना पडे़े तो सुमिरन इसलिए न किसी को बरगलाओ  करो,   भक्ति-इबादत करो ताकि न किसो को अपनी बातों में लेकर उनके संग का रंग आप पर न चढ़े आओ, न गुनाह करो और न ही और आप मालिक की दया ्दृष्टि किसी से करवाओ। यह नहीं कि॰ के लायक बन सको। आप अपनी पदवी का फायदा बुराई व बुरे लोगों का संग मत करोः पूज्य गुरु जी सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत अनमोलवचन राम रहीम सिंह जी गुरमीत 5. इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में बहुत  तरह के नशे हैं जैसे कि चरस हेरोइन स्मैक  भांग धतूरा अफीम   शराब, माननबड़ाई का राज ्पहुंच  TSTT . ಹ नशा अक्ल-चतुराई का नशा, जवानी का नशा और कामन्वासना का उठाओ औरलोगों को बरगलाओ। नशा जिनमें कई सारा दिन इसी के बहाने ही घूमते रहते हैं। कहीं पर उनसे गुनाह करवाओ बुरे काम  इसलिए बुरा कर्म तो रहते हैंतोयही मकसद बनाकर करवाओ बुरा कर्म है। करता कौन है इससे  रहते हैं और अपना सारा कुछ गुल  कोई लेना ्देना नहीं है। यह कर्म लेतेहैं।जब व्यक्ति अल्लाह- करच की धरती है इसलिए कर्म बुरा न मालिक को दरगाह में शामिल हो पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि॰ है या वहां से जुड़ जाता है I जाता बुरा कर्म कभी न करो। इस मामले तो उसे मालूम होने लगता है कि॰ में कभी किसी की न सुनो। चाहे क्या गलत है और क्या सही है। किसी के कहने परहाया किसी फिर वह दूसरे के कंधे पर तीर के साथ हो, बुरा कर्म कभी मत खखकर नर्ही चला सकता कि फलां   करो॰ वरना दोनों जहां में ठोकरें आदमी ने कहा इसलिए खाते फिरोगे , कुलों को बर्बाद कर किया। इसलिए वहजिम्मेवार आप  लोगे ।इसलिए बुरा कर्म नहीं करना  होे जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि॰ चाहिए। नेकन्अच्छे कर्म पर आगे बढते जाओ, मंजिलें आपके लिए अगर इन्सान वचनों पर चले तो ,दरवाजे खूले हुए हैं।कोई  तैयार हैं उसका जिम्मेवार दयाल हो जाता लॉक ( ताला ) नहों है। बस कदम  है।वो उसके हर कर्म को काट बढ़ातेजाओ तो मालिक केरहमो- देता है॰ हर कर्म को बदल कर कर्म  को  हासिल खख देता है।कोई भो आदमी किसी कर जरूर पाओगे। इसलिए ध्यान दो कर्मों को गलत करने को कहता है, चाहे की तरफ ध्यान दो उन विचारों को भी पूजनीय हो तोवो वह कितना तरफ जो संत आपके दिलो दिमाग गुनाहगार है। अगर कोई  बहत बड़ा में जहन मेंपैदा करते हैं।उन लोगों आदमी   गलत है वो पूजनीय  की छोड़ो जो आपको गुमरह करने -बेइंतहा गुनाहगार हो जाता  बइंतहा पर तुले हैं। उनका संग न करो, है॰ तो वह भी नरक भोगता है। मजबूरी में करना पडे़े तो सुमिरन इसलिए न किसी को बरगलाओ  करो,   भक्ति-इबादत करो ताकि न किसो को अपनी बातों में लेकर उनके संग का रंग आप पर न चढ़े आओ, न गुनाह करो और न ही और आप मालिक की दया ्दृष्टि किसी से करवाओ। यह नहीं कि॰ के लायक बन सको। आप अपनी पदवी का फायदा - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 कुछ सोच ले उठ नादान जरा, कर ले सुमिरन भगवान जरा। पुण्य पाप की गठरी जो बांधी, उस पर भी करले ध्यान जरा। वक्त अमोलक जीवन का, फिर लोट के हाथ न आना है। ओ भोले पंछी...।।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 टेकः- इस जगत् सराए में क्यों दिल को लगा बैठा ? दो दिन का बसेरा है, जिसे अपना बना बैठा ॥ न जान इसे अपना, दो दिन के लिए आया। न साथ तेरा देगी, बन्दे जिस में तूं भरमाया। फंस माया के चक्कर में, सतगुरु को भुला बैठा। दो दिन का...
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
01:00
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 टेकः- इस जगत् सराए में क्यों दिल को लगा बैठा ? दो दिन का बसेरा है, जिसे अपना बना बैठा ॥ न जान इसे अपना, दो दिन के लिए आया। न साथ तेरा देगी, बन्दे जिस में तूं भरमाया। फंस माया के चक्कर में, सतगुरु को भुला बैठा। दो दिन का...
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 वाहेगुरु जी। वाहेगुरु (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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01:07
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं, बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। - ShareChat