aashiqrabdaa
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मकसद।भलि गल्लां नाल जोडन दा जे भाईकिसी बोडी नालन्ई
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 2. इहनां विषियां तों मन नूं हटा के रख तूं। इस दिल जलवे-बाज़ नूं समझा के रख तूं। इक्को गुरू दे निशान नूं बणा के रख तूं। सिर गुरू दे द्वारे ते झुका के रख तूं। तैनूं दीन ते जहान वाली लोड़ नाल की। मुल्लां यार...
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00:47
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:57
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अर्मत वेला होया। तूं ता सोया होया अनपागा। सारी दुनिया जागी। तूं ना जागा।
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01:52
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 रज्जेयां नं वेख के ना राजी होण जी। भुख्खेयां नूं कोई दिन्दा ना छोहण जी। सिआणे इस गल्ल दा करो निखार जी। किसे गल्लों छड्डुदा ना...
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00:50
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 टेकः- किसे गल्लों छड्डदा ना संसार जी।। चंगे चोले पहनिएं विशई दस्सदे। पाटे होण कपड़े तां लोक हस्सदे। जोड़दा है माया तुरे पब्बां भार जी। किसे गल्लों छड्डुदा ना...
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00:46
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 सतगुरू बक्श लो तूसी बक्शन्हार जी। साढि अर्ज सुनो दातार जी। धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:58
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 अनमोल वचन । धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ~ @ X < 7:59 91% ೧241-260 रूहानी सवाल जवाब प्र. २५७ क्या विधि के विधान का उल्लंघन असंभव है? उत्तर नहीं! पर मनुष्य कुछ हद तक नए कर्म बना सकता 81 Rg प्र. २५८ शाम के समय सुमिरन के सबसे सही समय कौन सा है? उत्तर शाम को खाना खाने से पहले सबसे बढ़िया समय है या खाना खाने के ढाई-्तीन घंटे बाद। प्र. २५१ निद्रा, बेहोशी, कोमा और रूह की चढाई में क्या अंतर है? रूह की चढाई साधारण आदमी करता है। कोमा में 37 बीमार जाते हैं और निद्रा सोने के समय आती है। रूहानी चढ़ाई में जीते-जागते , आप पूरे सचेत होते हैं, शरीर बिल्कुल मृत प्रायः होता है। अगर आपने आधा घंटा सोचा है तो आधे घंटे बाद वापिस शरीर में आते हैं जबकि बेहोशी व कोमा का समय निश्चित नहीं होता। रूह की चढ़ाई में कोई परेशानी नहीं आती बल्कि शरीर तरोताजा हो जाता है। प्र. २६० शुभ या अशुभ समय में अच्छा काम शुरू करने से पहले अपने गुरू से परामर्श ले लेना जरूरी है? उत्तर कोई भी समय बुरा नहीं होता। कर्म गलत नहीं करने चाहिएं। जैसी आपकी मर्जी। नेक काम शुरू कर लें , मेहनत करें, भगवान आपका साथ देगा| A 0 ~ @ X < 7:59 91% ೧241-260 रूहानी सवाल जवाब प्र. २५७ क्या विधि के विधान का उल्लंघन असंभव है? उत्तर नहीं! पर मनुष्य कुछ हद तक नए कर्म बना सकता 81 Rg प्र. २५८ शाम के समय सुमिरन के सबसे सही समय कौन सा है? उत्तर शाम को खाना खाने से पहले सबसे बढ़िया समय है या खाना खाने के ढाई-्तीन घंटे बाद। प्र. २५१ निद्रा, बेहोशी, कोमा और रूह की चढाई में क्या अंतर है? रूह की चढाई साधारण आदमी करता है। कोमा में 37 बीमार जाते हैं और निद्रा सोने के समय आती है। रूहानी चढ़ाई में जीते-जागते , आप पूरे सचेत होते हैं, शरीर बिल्कुल मृत प्रायः होता है। अगर आपने आधा घंटा सोचा है तो आधे घंटे बाद वापिस शरीर में आते हैं जबकि बेहोशी व कोमा का समय निश्चित नहीं होता। रूह की चढ़ाई में कोई परेशानी नहीं आती बल्कि शरीर तरोताजा हो जाता है। प्र. २६० शुभ या अशुभ समय में अच्छा काम शुरू करने से पहले अपने गुरू से परामर्श ले लेना जरूरी है? उत्तर कोई भी समय बुरा नहीं होता। कर्म गलत नहीं करने चाहिएं। जैसी आपकी मर्जी। नेक काम शुरू कर लें , मेहनत करें, भगवान आपका साथ देगा| A 0 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 वाहेगुरु जी। वाहेगुरु (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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01:07
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं, बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। - ShareChat