aashiqrabdaa
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मकसद।भलि गल्लां नाल जोडन दा जे भाईकिसी बोडी नालन्ई
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 वाहेगुरु जी। वाहेगुरु (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं, बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - राम-नाम की बरसात से खत्म हो जाती है आत्मा की तपिश ' सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ॰ अनमोल बचन राम रहीम सिंह जी गुरमीत इन्सां फरमाते हैं कि मालिक की खान है। का नाम সুত্রা  जिस तरह बेइंतहा गर्मी में धरती तप उठती है आसमान आग बरसाता है। इसी तर्हे बिना मालिक के H आत्मा का बुरा हाल होता है। करो, उसको भक्ति इबादत करो, उसके लिए शरीर के अंदर ताकि जन्मों जन्मों के पाप कम व बाहर दोनों जगह तपिश अंदर बाहर   को कट   जाएं = =ர47 = = க 4 तपिश खत्म हो जाए और आप संचित कर्मों की। मालिक को दया-्मेहर रहमत पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि॰ के काबिल बनते जाएं। वो ऐसे में अगर घटा घनघोर छाती  तमाम खशियां पाएं जिसको चैले बरसात होती है॰ हवा तेज आपने कल्पना को हो और वो  # =4 मौसम সিল সী ভহািমা तमाम बदल जाता है। ठंडा ठार हो जिसके काबिल आप हं पर जाता है॰ हर किसी को अच्छा आपने कल्पना नकी हो। यह लगता है। शरीर को आंखों को मालिक दे सकता है॰ उसकी க் ஈ =1 -14-55 भक्ति दे सकती है। खुश हो जाते हैं ।उसी तरह अगर  पूज्य गुरु जो फरमाते है वाहेगुरु की  बनें राम-्नाम अल्लाह कि॰ कर्मयोगी भक्ति बरसात हो जाए तो आत्मा का इबादत करें, ज्ञानयोगी बने। अंदर- बाहर का तापमान , तपिश सुमिरन करते हए अगर आगे  वे 9٢ ٤٢  ٤ 3٦٣ बढ़ोगे तो यकीनन मालिक की ख़ूशियों की मालिक होगी   और ؟٤ कृपा 37 मालामाल हाे जातो है। इसलिए बाहर से खुशियों से मालामाल लगातार ईश्वर के नाम का जाप आप हा जाएंग। राम-नाम की बरसात से खत्म हो जाती है आत्मा की तपिश ' सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ॰ अनमोल बचन राम रहीम सिंह जी गुरमीत इन्सां फरमाते हैं कि मालिक की खान है। का नाम সুত্রা  जिस तरह बेइंतहा गर्मी में धरती तप उठती है आसमान आग बरसाता है। इसी तर्हे बिना मालिक के H आत्मा का बुरा हाल होता है। करो, उसको भक्ति इबादत करो, उसके लिए शरीर के अंदर ताकि जन्मों जन्मों के पाप कम व बाहर दोनों जगह तपिश अंदर बाहर   को कट   जाएं = =ர47 = = க 4 तपिश खत्म हो जाए और आप संचित कर्मों की। मालिक को दया-्मेहर रहमत पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि॰ के काबिल बनते जाएं। वो ऐसे में अगर घटा घनघोर छाती  तमाम खशियां पाएं जिसको चैले बरसात होती है॰ हवा तेज आपने कल्पना को हो और वो  # =4 मौसम সিল সী ভহািমা तमाम बदल जाता है। ठंडा ठार हो जिसके काबिल आप हं पर जाता है॰ हर किसी को अच्छा आपने कल्पना नकी हो। यह लगता है। शरीर को आंखों को मालिक दे सकता है॰ उसकी க் ஈ =1 -14-55 भक्ति दे सकती है। खुश हो जाते हैं ।उसी तरह अगर  पूज्य गुरु जो फरमाते है वाहेगुरु की  बनें राम-्नाम अल्लाह कि॰ कर्मयोगी भक्ति बरसात हो जाए तो आत्मा का इबादत करें, ज्ञानयोगी बने। अंदर- बाहर का तापमान , तपिश सुमिरन करते हए अगर आगे  वे 9٢ ٤٢  ٤ 3٦٣ बढ़ोगे तो यकीनन मालिक की ख़ूशियों की मालिक होगी   और ؟٤ कृपा 37 मालामाल हाे जातो है। इसलिए बाहर से खुशियों से मालामाल लगातार ईश्वर के नाम का जाप आप हा जाएंग। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 0 681-700 रूहानी सवाल जवाब प्र. ६८१ क्या आप अपने सम्प्रदाय को श्रेष्ठ मानते हैं? उत्तर भक्तिमय इन्सानियत सबसे श्रेष्ठ है। प्र. ६८२ गरीबी उन्मूलन का आप क्या समाधान बताएंगे? उत्तर कर्मयोगी व ज्ञानयोगी बनो। प्र. ६८३ आप अधिकतर उत्तरों में सेवा और सुमिरन करने को कहते हैं। एक बीमार व्यक्ति মুসিনে? को दवा तंदरूस्त करेगी या उत्तर दवा और दुआ तथा परमार्थी सेवा रोग (कर्म) जल्दी काट देती है। प्र. ६८४ क्या आपका मुख्य आश्रम सदैव सरसा ही रहेगा? हुक्म होगा वैसे ही उत्तर जैसे-जैसे मालिक का FTTTI प्र॰ ६८५ आपने मुख्य आश्रम सरसा में ही क्यों శగfరగె fruT? बेपरवाह शाह मस्ताना जी ने अपने ওনয सतगुरू के ख्यालों से। A a 0 681-700 रूहानी सवाल जवाब प्र. ६८१ क्या आप अपने सम्प्रदाय को श्रेष्ठ मानते हैं? उत्तर भक्तिमय इन्सानियत सबसे श्रेष्ठ है। प्र. ६८२ गरीबी उन्मूलन का आप क्या समाधान बताएंगे? उत्तर कर्मयोगी व ज्ञानयोगी बनो। प्र. ६८३ आप अधिकतर उत्तरों में सेवा और सुमिरन करने को कहते हैं। एक बीमार व्यक्ति মুসিনে? को दवा तंदरूस्त करेगी या उत्तर दवा और दुआ तथा परमार्थी सेवा रोग (कर्म) जल्दी काट देती है। प्र. ६८४ क्या आपका मुख्य आश्रम सदैव सरसा ही रहेगा? हुक्म होगा वैसे ही उत्तर जैसे-जैसे मालिक का FTTTI प्र॰ ६८५ आपने मुख्य आश्रम सरसा में ही क्यों శగfరగె fruT? बेपरवाह शाह मस्ताना जी ने अपने ওনয सतगुरू के ख्यालों से। A a - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं। बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं। बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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https://youtube.com/shorts/rECtp4XOS_M?si=J-7ZNAn9UKp38Q4_ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 कर ले भजन स्वांस मुक जानगें। धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 सद्गुरु नमन, सद्गुरु (रब/रुह), जेडी हर विच, जाहिर होंदी, भले कर्मा, भली ग्लां तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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