aashiqrabdaa
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@393640616
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मकसद।भलि गल्लां नाल जोडन दा जे भाईकिसी बोडी नालन्ई
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 वाहेगुरु जी। वाहेगुरु (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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01:07
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं, बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 ओम गन गणपतए नमो नम: गणपतए । (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:24
https://open.spotify.com/episode/4qzrQnQ5EdvbDTaX8eIJxU?si=W_Kp1iRHSGSKsl41BZ6qDQ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
Playing from 2:04 https://open.spotify.com/episode/6vq4XDEOIQp0Nu0fzK8n7h?si=rwdcdD0KROicDdgNELu0aQ&context=spotify%3Ashow%3A7IGZYc1tHqoas2lk6kXNvS&t=124 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 ओ ते दम दम भटक रहे। ओ रह गये मन्ज़िल तों। जेडे राह विच अटक गये।
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00:53
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - K #l [36% 12830 0 21-40 रूहानी सवाल जवाब प्र. २१ क्या परमात्मा को अपनी अंश की देखकर दुख होता है? यदि हां तो दुर्दशा उसके दुःख की अभिव्यक्ति कैसी होती है? Rg यदि नहीं तो वह इतना क्यों है? उसमें संवेदना क्यों नहीं? आत्मा खुद काल के जाल व कार्य में 37 फंस के दुखी है। प्रभु दुखी होता है तभी तो बचाने संत-सतगुरू को भेजता है। प्र॰ ३० जब भगवान का कोई रंग, रूप आकार नहीं तो तो लोगों के हृदय में उसे देखने के प्रति उत्सुकता कैसे जागेगी? एक आकारहीन की क्या सुन्दरता? अपने मूल उत्तर आत्मा प्रभु की अंश है और से मिलने व जन्म-मरण, दुःख, गमों से লিৎ के है। आप नाम जप तड़पती छुटकारे कर देखोगे तो इतनी सुन्दरता है वर्णन नहीं कर पाओगे। Al 0 K #l [36% 12830 0 21-40 रूहानी सवाल जवाब प्र. २१ क्या परमात्मा को अपनी अंश की देखकर दुख होता है? यदि हां तो दुर्दशा उसके दुःख की अभिव्यक्ति कैसी होती है? Rg यदि नहीं तो वह इतना क्यों है? उसमें संवेदना क्यों नहीं? आत्मा खुद काल के जाल व कार्य में 37 फंस के दुखी है। प्रभु दुखी होता है तभी तो बचाने संत-सतगुरू को भेजता है। प्र॰ ३० जब भगवान का कोई रंग, रूप आकार नहीं तो तो लोगों के हृदय में उसे देखने के प्रति उत्सुकता कैसे जागेगी? एक आकारहीन की क्या सुन्दरता? अपने मूल उत्तर आत्मा प्रभु की अंश है और से मिलने व जन्म-मरण, दुःख, गमों से লিৎ के है। आप नाम जप तड़पती छुटकारे कर देखोगे तो इतनी सुन्दरता है वर्णन नहीं कर पाओगे। Al 0 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं। बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
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