aashiqrabdaa
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मकसद।भलि गल्लां नाल जोडन दा जे भाईकिसी बोडी नालन्ई
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 वाहेगुरु जी। वाहेगुरु (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
01:07
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं, बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 4. खाक में रुलाते योद्धे-बलवीर जी। थिर नहीं रहणे बादशाह-वजीर जी। खाक रल गए ने अमीर-कंगले। छड्डू जावें ... 5. उड्डजूगा भौर मार के उडारी नूं। छड्डु जूगा देही खरी ते प्यारी नूं। जम सेला लेके नेड़े ढुक्क जाणगे। कर लै भजन ...
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
00:49
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 0 33% 12:56 4 0 41-60 रूहानी सवाल जवाब प्र. ५१ प्रभु मातलोक में खुद क्यों नहीं आता? वह संतों को ही क्यों भेजता है? मर्जी। gகி 37ಘ प्र. ५२ क्या संत के लिए प्रभु, राम-्नाम प्रचार के लिए कोई क्षेत्र निर्धारित करते हैं? प्रभु करते हैं। उत्तर प्र. ५३ संत गृहस्थ क्यों बसाते हैं? क्या वे अकेले रहकर अधिक लोगों का उद्धार नहीं कर $d? प्रभु की GII R प्र. ५४ अगर भगवान दयालु है तो जुल्मों सितम को क्यों नहीं रोकता? उत्तर वो संतों द्वारा रूकवाता है पर लोग मन के पीछे लग कर संतो के वचनों पर अमल नहीं करते। को दूर प्र. ५५ लोग अपने अंदर की बुराईओं - की बुराईयां क्यों गाते करने की बजाए दूसरों रहते हैं? ताकि खुद की बुराई छुपी रहे। R Al 0 0 33% 12:56 4 0 41-60 रूहानी सवाल जवाब प्र. ५१ प्रभु मातलोक में खुद क्यों नहीं आता? वह संतों को ही क्यों भेजता है? मर्जी। gகி 37ಘ प्र. ५२ क्या संत के लिए प्रभु, राम-्नाम प्रचार के लिए कोई क्षेत्र निर्धारित करते हैं? प्रभु करते हैं। उत्तर प्र. ५३ संत गृहस्थ क्यों बसाते हैं? क्या वे अकेले रहकर अधिक लोगों का उद्धार नहीं कर $d? प्रभु की GII R प्र. ५४ अगर भगवान दयालु है तो जुल्मों सितम को क्यों नहीं रोकता? उत्तर वो संतों द्वारा रूकवाता है पर लोग मन के पीछे लग कर संतो के वचनों पर अमल नहीं करते। को दूर प्र. ५५ लोग अपने अंदर की बुराईओं - की बुराईयां क्यों गाते करने की बजाए दूसरों रहते हैं? ताकि खुद की बुराई छुपी रहे। R Al 0 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:58
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - सुमिरन से कटते हैं बुरे कर्मः पूज्य गुरु जी पूज्य गुरु संत डॉ. তুসৌন  ٦٢ अनमोलवचन रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं ক্ি কানান ন মন নীনী স को   बिल्कुल  मनुष्य अलग बनाया है। इसके अंदर जितना  दिमाग , सोचने समझने की शक्ति है किसी और प्राणी में नहीं। आत्मा को मनुष्य जन्म भगवान को पाने के लिए॰ आत्मा को चाहिए बल्कि आवागमन से आजाद करवाने কনো इन লিব ক मिला। मनुष्य शरीर में से अपने आपको s चाहिए। बचाना अगर   जीवात्मा परमात्मा का पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि নাস ল भक्ति-इबादत प्रभु की करे तो फकीरों के वचनों पर चलना से भयानक कर्म ೯ಕಾ ' बड़ा मुश्किल भी है, क्योंकि कट जाते इन्सान सफलता 77 7؟ ٦؟ अटकाता   है। की सीढ़ियां चढ़ता चला जाता  ऐसे ऐसे लोग जो भक्ति में लगे है। सफलता इन्सान के कदम रहते हैं, बड़े भक्त लगते थे, लेकिन यह तभी है বুসনী  लेकिन जब मन दांव चलाता है संभव है अगर इन्सान सत्संग में तो भक्ति धरी ्धराई रह जाती आकर अमल कर। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि है।क्योंकि निंदा व्यर्थ -चुगली, फिजूल की बातें इन्सान को निंदा टांग इन्सान को चुगली कर्हीं का नहीं छोड़ती। ऐसा जो खिंचाई , किसी का बुरा सोचने करते हैं वो कभी भी रूहानियत या बुरा करने में समय बर्बाद में मालिक, सतगुरु की दया- বাঙ্কিব | नहीं करना काम मोह , मेहर के काबिल नहीं बन पाते। लोभ [4, वासना, নী সন ম লভী 3ঁ মনা- अहंकार , मन-्माया में पड़कर तबाह   नहीं सुमिरन करो। जन्म  को मनुष्य सुमिरन से कटते हैं बुरे कर्मः पूज्य गुरु जी पूज्य गुरु संत डॉ. তুসৌন  ٦٢ अनमोलवचन रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं ক্ি কানান ন মন নীনী স को   बिल्कुल  मनुष्य अलग बनाया है। इसके अंदर जितना  दिमाग , सोचने समझने की शक्ति है किसी और प्राणी में नहीं। आत्मा को मनुष्य जन्म भगवान को पाने के लिए॰ आत्मा को चाहिए बल्कि आवागमन से आजाद करवाने কনো इन লিব ক मिला। मनुष्य शरीर में से अपने आपको s चाहिए। बचाना अगर   जीवात्मा परमात्मा का पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि নাস ল भक्ति-इबादत प्रभु की करे तो फकीरों के वचनों पर चलना से भयानक कर्म ೯ಕಾ ' बड़ा मुश्किल भी है, क्योंकि कट जाते इन्सान सफलता 77 7؟ ٦؟ अटकाता   है। की सीढ़ियां चढ़ता चला जाता  ऐसे ऐसे लोग जो भक्ति में लगे है। सफलता इन्सान के कदम रहते हैं, बड़े भक्त लगते थे, लेकिन यह तभी है বুসনী  लेकिन जब मन दांव चलाता है संभव है अगर इन्सान सत्संग में तो भक्ति धरी ्धराई रह जाती आकर अमल कर। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि है।क्योंकि निंदा व्यर्थ -चुगली, फिजूल की बातें इन्सान को निंदा टांग इन्सान को चुगली कर्हीं का नहीं छोड़ती। ऐसा जो खिंचाई , किसी का बुरा सोचने करते हैं वो कभी भी रूहानियत या बुरा करने में समय बर्बाद में मालिक, सतगुरु की दया- বাঙ্কিব | नहीं करना काम मोह , मेहर के काबिल नहीं बन पाते। लोभ [4, वासना, নী সন ম লভী 3ঁ মনা- अहंकार , मन-्माया में पड़कर तबाह   नहीं सुमिरन करो। जन्म  को मनुष्य - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं। बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:48
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 2. महल अटारियां रहण सुन्नीआं। चलती गड्डी दी लागू कुल दुनियां। कोठियां सर्दखाने जिहड़े रंगले। छड्ड जावें ... 3. उह नहीं दिन याद पुट्ठा तूं लटकदा। दुनियां दी हवा लैण नूं भटकता। जपेंगा जे नाम दूर दुःख जाणगे। कर लै भजन ...
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00:55
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं। बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:38
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 कर लै भजन स्वास मुक्कजाणगे। छड्डु जावें बंदेआ महल रंगले ॥ 1. गाफला तू क्यों नहीं चित्त में विचारदा। कोई रोज़ मेला झूठे संसार दा। बाग जो लगाउणा सारे सुक्क जाणगे। कर लै भजन ...
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00:48