aashiqrabdaa
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मकसद।भलि गल्लां नाल जोडन दा जे भाईकिसी बोडी नालन्ई
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 टेक :- कूड़ी दुनियां में जल कर देख लिया, तेरी याद में जल कर देखेंगे। जिस राह पे अपनी मुक्त होए, उस राह भी चल कर देखेंगे। 3. देखे पी के नशे मजाजी भी, थोड़ी देर के बाद वो उतर गए। जहां हरदम मस्ती चढ़ी रहे, वो मयखाना भी चल कर देखेंगे। कूड़ी दुनियां में...
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 0 33% 12:58 4 0 61-80 रूहानी सवाल जवाब प्र. ६१ क्या इंसान अपना भाग्य बदल सकता है ? उत्तर हां, कर्मयोगी व ज्ञानयोगी बनकर। प्र. ६२ संसार में हर समय और अच्छाई साथ-साथ बुराई क्यों चलती है? प्रभु की रजा से अच्छाई और काल की ताकत से उत्तर बुराई। प्र. ६उजो लोग भगवान को ज्यादा मानते हैं उनके ऊपर ज्यादा कष्ट क्यों आते हैं? ऐसा नहीं है, वो सदा ठीक रहते है। आग से गुजरने पर 37 सोना सुनहरी हो जाता है, उसी तरह भक्त को ज्यादा आनंद प्राप्ति होती है। ६४ बुराई करने वालों को सजा चुपचाप क्यों मिलती है? . क्या ऐसे लोगों को सब के सामने सजा नहीं मिलनी चाहिए? उत्तर सबको पता चल जाता है। प्र. ६५ आज गलत तरह के लोग ही क्यों तरक्की कर रहे हैं। ईमानदार दुखी क्यों है? उत्तर ईमानदार भी तरक्की कर रहे हैं। गलत लोग अंदर से परेशान रहते हैं। ईमानदार के अंदर संतुष्टि हमेशा दुखी व नहीं (जो राम-नाम से आती है) इसलिए दुखी हैं। प्र. ६६ जो देश या सभ्यता , गुरू मार्ग को नहीं मानते उनको आप कैसे समझाएंगे ? उत्तर सत्संगों द्वारा ही संभव है। A 0 0 33% 12:58 4 0 61-80 रूहानी सवाल जवाब प्र. ६१ क्या इंसान अपना भाग्य बदल सकता है ? उत्तर हां, कर्मयोगी व ज्ञानयोगी बनकर। प्र. ६२ संसार में हर समय और अच्छाई साथ-साथ बुराई क्यों चलती है? प्रभु की रजा से अच्छाई और काल की ताकत से उत्तर बुराई। प्र. ६उजो लोग भगवान को ज्यादा मानते हैं उनके ऊपर ज्यादा कष्ट क्यों आते हैं? ऐसा नहीं है, वो सदा ठीक रहते है। आग से गुजरने पर 37 सोना सुनहरी हो जाता है, उसी तरह भक्त को ज्यादा आनंद प्राप्ति होती है। ६४ बुराई करने वालों को सजा चुपचाप क्यों मिलती है? . क्या ऐसे लोगों को सब के सामने सजा नहीं मिलनी चाहिए? उत्तर सबको पता चल जाता है। प्र. ६५ आज गलत तरह के लोग ही क्यों तरक्की कर रहे हैं। ईमानदार दुखी क्यों है? उत्तर ईमानदार भी तरक्की कर रहे हैं। गलत लोग अंदर से परेशान रहते हैं। ईमानदार के अंदर संतुष्टि हमेशा दुखी व नहीं (जो राम-नाम से आती है) इसलिए दुखी हैं। प्र. ६६ जो देश या सभ्यता , गुरू मार्ग को नहीं मानते उनको आप कैसे समझाएंगे ? उत्तर सत्संगों द्वारा ही संभव है। A 0 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - वातावरण स्वच्छ होगा तो ही C भगवान , अल्लाह की याद आएगी ' 5# 5. गुरमीत राम अनमोल वचन रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलयुग में परहित करना   मुश्किल   है। परमार्थ लोग सिर्फ अपने बारे में सोचते रहते हैं, परंतु धन्य हैं वो मां- নাপ   নিনন্দী संतान   परहित के भले के लिए और বুময परमार्थ करती है। पूज्य गुरू जी को भी सा़फ रखें और पेड़  पौधे फरमाते हैं कि॰ अगर   हमारे भी लगाएं। पेड़पौधे आपके आसपास का वातावरण स्वच्छ प्रति सौ प्रतिशत वफादार होंगे ಹ Tr ೫ ಖa, 31 ಕ भले ही आपकी औलाद होना की याद आएगी तथा अंदर से हा। आपजी ने फरमाया कि॰ ஈர்I ஈி से विकार बैक्टीरियां, बीमारियां पैदा होती फैलाओ   इससे गंदगी मत विकार   पैदा होते हैं। शुद्ध है নিমম की इंसान मानसिकता गिरती है वातावरण से आत्मबल बढ़ेगा इंसान , तो और बढेगा इन्सान न रहकर राक्षस बन आत्मबल चूमेगी| जाता है নিমন্ধা মা সনিহান सफलता आपके कदम संबंध सफाई से है। इसलिए आप जी ने आह्वान किया कि॰ आस पास के वातावरण को तो अपने आसपास के वातावरण स्वच्छ रखना ही चाहिए साथ को साफनसुथरा रखें। अगर ही   ईश्वर, যাস   ক্ষী अपने अल्लाह आप মন সাম-পাম इबादत   करके सफाई  रखोगे तोये आपके भक्ति अपने अंतःकरण से ठगी, भ्रष्टाचार, लिए और आपकी औलाद के 5##, लिए ही फायदेमंद होगा। जिस दहत्को  कन्याभ्रूण  नशे   इत्यादि प्रकार हम अपनी रसोई और मांसाहार, घर को साफ रखते हैं उसी त्यागकर अपने अंदर की भी सफाई रखनी चाहिए। भांति अपने आसपास के क्षेत्र वातावरण स्वच्छ होगा तो ही C भगवान , अल्लाह की याद आएगी ' 5# 5. गुरमीत राम अनमोल वचन रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलयुग में परहित करना   मुश्किल   है। परमार्थ लोग सिर्फ अपने बारे में सोचते रहते हैं, परंतु धन्य हैं वो मां- নাপ   নিনন্দী संतान   परहित के भले के लिए और বুময परमार्थ करती है। पूज्य गुरू जी को भी सा़फ रखें और पेड़  पौधे फरमाते हैं कि॰ अगर   हमारे भी लगाएं। पेड़पौधे आपके आसपास का वातावरण स्वच्छ प्रति सौ प्रतिशत वफादार होंगे ಹ Tr ೫ ಖa, 31 ಕ भले ही आपकी औलाद होना की याद आएगी तथा अंदर से हा। आपजी ने फरमाया कि॰ ஈர்I ஈி से विकार बैक्टीरियां, बीमारियां पैदा होती फैलाओ   इससे गंदगी मत विकार   पैदा होते हैं। शुद्ध है নিমম की इंसान मानसिकता गिरती है वातावरण से आत्मबल बढ़ेगा इंसान , तो और बढेगा इन्सान न रहकर राक्षस बन आत्मबल चूमेगी| जाता है নিমন্ধা মা সনিহান सफलता आपके कदम संबंध सफाई से है। इसलिए आप जी ने आह्वान किया कि॰ आस पास के वातावरण को तो अपने आसपास के वातावरण स्वच्छ रखना ही चाहिए साथ को साफनसुथरा रखें। अगर ही   ईश्वर, যাস   ক্ষী अपने अल्लाह आप মন সাম-পাম इबादत   करके सफाई  रखोगे तोये आपके भक्ति अपने अंतःकरण से ठगी, भ्रष्टाचार, लिए और आपकी औलाद के 5##, लिए ही फायदेमंद होगा। जिस दहत्को  कन्याभ्रूण  नशे   इत्यादि प्रकार हम अपनी रसोई और मांसाहार, घर को साफ रखते हैं उसी त्यागकर अपने अंदर की भी सफाई रखनी चाहिए। भांति अपने आसपास के क्षेत्र - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं। बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं। बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
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00:47
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 12. सदा नहीं मारनी उडारी तोतेया। सदा नहीं बाग दी बहारी तोतेया। होजूगी लाचारी खुस्स जाण फंगले। छड्ड जावें. 13. सदा नहीं फूल्लां दी सुगंधी भौरेआ। पुष्पां च लग्गू तेरे जिन्दी भौरेआ। तेरी जान वाला डण्डा डुक्क जाणगे। कर लै भजन ...
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा, सतगुरू (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 वाहेगुरु जी। वाहेगुरु (रब/रूह), जेडि हर विच, जाहिर होन्दी भले कर्मा ते भलि गल्ला तों। बोडी ते भाषा बस जरिया जी।
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 हर भली ग्ल मेरे रब दी, ओ रूह, ओ एक, ओ हर विच, ओ जाहिर होंदा, भले क्रमा ते भली ग्लां तौं, बॉडी ते भाषा बस जरिया जी।
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। मे बोडी तों किसी नू वी न्ई जानदा ते जानना वी न्ई जे चाहन्दा जी। हां पर रूह तों सारे इक जी। रब्ब जी। सब नाल जुडना चाहन्दा ते सब नू जोडना चाहन्दा जी। - ShareChat