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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - लुप्त भी होती है। इसलिए समय के साथ चलने और g हमें सतत् तत्पर रहना चाहिए साक्षी $ चाहिए। बनकर जीना स्वामी आनंद यात्री ओशों आनंद संगम तीर्थ संस्थान बिलासपुर छत्तीसगढ़ 9302078011 ये दबदबा येरुतबा नशा सत्यकी खोज Facobook /osho ये दौलत किरायेदार है Hq लुप्त भी होती है। इसलिए समय के साथ चलने और g हमें सतत् तत्पर रहना चाहिए साक्षी $ चाहिए। बनकर जीना स्वामी आनंद यात्री ओशों आनंद संगम तीर्थ संस्थान बिलासपुर छत्तीसगढ़ 9302078011 ये दबदबा येरुतबा नशा सत्यकी खोज Facobook /osho ये दौलत किरायेदार है Hq - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - भारतीय Kर्व से कहो की सबसे दुनिया सस्ती चीज़ है मशवरा एक से मांगो तो हज़ार देते हैं की सबसे दूनिया महंगी चीज़ है मदद ' हज़ार से मांगो तो एक करता है भारतीय Kर्व से कहो की सबसे दुनिया सस्ती चीज़ है मशवरा एक से मांगो तो हज़ार देते हैं की सबसे दूनिया महंगी चीज़ है मदद ' हज़ार से मांगो तो एक करता है - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - हमे हमेशा कर्म करते रहना चाहिए और साथनसाथ मिलने वाले फल की भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि कर्म हमारा धर्म है और फल हमारा सौभाग्य| साहित्य गुरु रविदास सबका ப1 हमे हमेशा कर्म करते रहना चाहिए और साथनसाथ मिलने वाले फल की भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि कर्म हमारा धर्म है और फल हमारा सौभाग्य| साहित्य गुरु रविदास सबका ப1 - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - नमो बुद्धाय भीम। जय आप सपरिवार सदैव सुखी रहें। [ नमो बुद्धाय भीम। जय आप सपरिवार सदैव सुखी रहें। [ - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇
🙏गुरु महिमा😇 - क्या है १०८ का रहस्य? পৃ্থিরিয়রা  108 मानव शरीर में १०८ মুর্য কা व्यास (Diameter), के व्यास का १०८ गुना पृथ्वी आध्यात्मिक चक्र 108X 108X और चन्द्रमा के बीच की दूरी , और सूर्य के बीच की दूरी, पृथ्वी পৃথ্নী सूर्य के व्यास का १०८ गुना चन्द्रमा के व्यास का १०८ गुना क्या है १०८ का रहस्य? পৃ্থিরিয়রা  108 मानव शरीर में १०८ মুর্য কা व्यास (Diameter), के व्यास का १०८ गुना पृथ्वी आध्यात्मिक चक्र 108X 108X और चन्द्रमा के बीच की दूरी , और सूर्य के बीच की दूरी, पृथ्वी পৃথ্নী सूर्य के व्यास का १०८ गुना चन्द्रमा के व्यास का १०८ गुना - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - सत्यमेव जयेते मेरा भारत महान सत्यमेव जयेते मेरा भारत महान - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - 4+ हमें यही सूत्र जीवन में उतारना होगा बी पाज़िटिव। जिस प्रकार मछली को जल से बाहर निकालने पर वह छटपटाने लगती है और उसका प्राणांत निश्चित हो जाता है ठीक उसी प्रकार पद, 774,4/487,44,4914, ,रूतबा, ये सब व्याधियां ही जानिये।इनके ओहदा , आगोश में खोया हुआ मनुष्य इनका गुलाम हो जाता है,आदी हो जाता है जबकि ये सारी चीजें अस्थायी की है, परिवर्तन शील है।यह बात हमें समझनी प्रकृति पृष्ठभूमि में लागू नहीं होगी कि शाश्वतता का नियम इस होता है। जब हम इन सब बातों पर विचार करते हैं तब बोध और होश का जन्म होता है और हमारी खिलावट आती है। हम तभी अपने वर्तमान का मजा ले पाते हैं और जीवन के सतत् प्रवाह में बहने तत्पर होते हैं। ओशों की देशना यही है कि यहां सब कुछ अस्थायी प्रकृति की है। परिवर्तन शील है और यह बोध हो जाना ही बुद्धत्व की ओर अग्रसर करता है व्यक्ति में साहस और परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करता है।आज जो रूतबा, धन, यश,पद, प्रतिष्ठा है कल वह नहीं रहेगी, कम हो सकती है और 4+ हमें यही सूत्र जीवन में उतारना होगा बी पाज़िटिव। जिस प्रकार मछली को जल से बाहर निकालने पर वह छटपटाने लगती है और उसका प्राणांत निश्चित हो जाता है ठीक उसी प्रकार पद, 774,4/487,44,4914, ,रूतबा, ये सब व्याधियां ही जानिये।इनके ओहदा , आगोश में खोया हुआ मनुष्य इनका गुलाम हो जाता है,आदी हो जाता है जबकि ये सारी चीजें अस्थायी की है, परिवर्तन शील है।यह बात हमें समझनी प्रकृति पृष्ठभूमि में लागू नहीं होगी कि शाश्वतता का नियम इस होता है। जब हम इन सब बातों पर विचार करते हैं तब बोध और होश का जन्म होता है और हमारी खिलावट आती है। हम तभी अपने वर्तमान का मजा ले पाते हैं और जीवन के सतत् प्रवाह में बहने तत्पर होते हैं। ओशों की देशना यही है कि यहां सब कुछ अस्थायी प्रकृति की है। परिवर्तन शील है और यह बोध हो जाना ही बुद्धत्व की ओर अग्रसर करता है व्यक्ति में साहस और परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करता है।आज जो रूतबा, धन, यश,पद, प्रतिष्ठा है कल वह नहीं रहेगी, कम हो सकती है और - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇
🙏गुरु महिमा😇 - र्तीय 8 नविधान 0 8 8 हम आदि से अंत तक HRf8 डॉ.भीमराव अंबेडकर र्तीय 8 नविधान 0 8 8 हम आदि से अंत तक HRf8 डॉ.भीमराव अंबेडकर - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - संसार अपनी ही गति से चल रहा है। यहां पल प्रति पल परिवर्तन की बयार बह रही है। गतिमान होना ही जीवंतता की निशानी है। हमारी मूल व्यथा यही है कि हम अपने भविष्य की चिंता करते हैं और वर्तमान को खो देते हैं यही हमारे दुःख का मूल कारण है।हम वर्तमान समय को उसके महत्व को पहचान ही नहीं पाते हैं या उसकी कदर नहीं करते।हम चिंता घर हो गये है। चिंता चिता समान है। यह हमारे वर्तमान को लील जाती है और हमारी खिलावट की सबसे बड़ी बाधा है। हमें विधायक सोच रखनी चाहिए क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा तब ही हमसे दूर रहेगी। शायद इसी वजह से शोधकर्ताओं ने रक्त समूह को नाम दे दिया संसार अपनी ही गति से चल रहा है। यहां पल प्रति पल परिवर्तन की बयार बह रही है। गतिमान होना ही जीवंतता की निशानी है। हमारी मूल व्यथा यही है कि हम अपने भविष्य की चिंता करते हैं और वर्तमान को खो देते हैं यही हमारे दुःख का मूल कारण है।हम वर्तमान समय को उसके महत्व को पहचान ही नहीं पाते हैं या उसकी कदर नहीं करते।हम चिंता घर हो गये है। चिंता चिता समान है। यह हमारे वर्तमान को लील जाती है और हमारी खिलावट की सबसे बड़ी बाधा है। हमें विधायक सोच रखनी चाहिए क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा तब ही हमसे दूर रहेगी। शायद इसी वजह से शोधकर्ताओं ने रक्त समूह को नाम दे दिया - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🌞 Good Morning🌞
🙏गुरु महिमा😇 - धम्म प्रभात नमो बुद्धाय अभिमान कहता है किसी की जरूरत 6 !! अनुभव कहता है धूल की भी जरूरत uತಗ ! Shrikant धम्म प्रभात नमो बुद्धाय अभिमान कहता है किसी की जरूरत 6 !! अनुभव कहता है धूल की भी जरूरत uತಗ ! Shrikant - ShareChat