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#🪔बसंत पंचमी की शुभकामनाएं🙏🌸
🪔बसंत पंचमी की शुभकामनाएं🙏🌸 - 23-01-2026 रंगों की मस्ती की   बहार কুলী ) चंदन की खुशबू, अपनों का प्यार सुरज की किरणें , होे अपार खुशीया ) मां सरस्वती बिराजे आपके द्वार शुभकामनाएं हमारी   करें स्वीकार 356 ) बसंत पंचमी का त्यौहार मुबारक हो आपको , ) munna creation IG 4 हैप्पी बसंत पंचमी 23-01-2026 रंगों की मस्ती की   बहार কুলী ) चंदन की खुशबू, अपनों का प्यार सुरज की किरणें , होे अपार खुशीया ) मां सरस्वती बिराजे आपके द्वार शुभकामनाएं हमारी   करें स्वीकार 356 ) बसंत पंचमी का त्यौहार मुबारक हो आपको , ) munna creation IG 4 हैप्पी बसंत पंचमी - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - पीले फूलों की खुशबू , ढलती हुई ठंड और सूरज की सुनहरी किरणें . बसंत सिर्फ एक मौसम नहीं, एक अहसास है कि पतझड़ के बाद फिर से खिलना मुमकिन है। माँ सरस्वती हम सबके जीवन में ज्ञान का प्रकाश भरें और हमारी वाणी में वो मिठास दें जो जोड़ रिश्तों को #I आप सभी को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं! पीले फूलों की खुशबू , ढलती हुई ठंड और सूरज की सुनहरी किरणें . बसंत सिर्फ एक मौसम नहीं, एक अहसास है कि पतझड़ के बाद फिर से खिलना मुमकिन है। माँ सरस्वती हम सबके जीवन में ज्ञान का प्रकाश भरें और हमारी वाणी में वो मिठास दें जो जोड़ रिश्तों को #I आप सभी को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं! - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇
🙏गुरु महिमा😇 - मान्यताओं पुरानी 66 को तोड़ने का साहस ही नए जीवन का जन्म है।१ Follow@Rovi Dhokod ~ओशो मान्यताओं पुरानी 66 को तोड़ने का साहस ही नए जीवन का जन्म है।१ Follow@Rovi Dhokod ~ओशो - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी का जन्म २३ जनवरी १८९७ को उड़िसा के कुट्टक गांव में हुआ था। उनके पिता जानकीनाथ बोस वकील थे। उनकी माता का नाम प्रभावती था। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लिए जापान के सहयोग से ' आजाद हिन्द के লভ্ন फौज' का गठन किया था। नेताजी सुभाष चंद बोस द्वारा दिया गया 'जय हिंद' का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा है। उन्होंने नारा दिया था.... महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी का जन्म २३ जनवरी १८९७ को उड़िसा के कुट्टक गांव में हुआ था। उनके पिता जानकीनाथ बोस वकील थे। उनकी माता का नाम प्रभावती था। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लिए जापान के सहयोग से ' आजाद हिन्द के লভ্ন फौज' का गठन किया था। नेताजी सुभाष चंद बोस द्वारा दिया गया 'जय हिंद' का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा है। उन्होंने नारा दिया था.... - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - g Aarf & स्वाधीनता 'जीवन-मरण' का प्रश्न बन गया था। बस यही श्रद्धा, यही आत्मविश्वास जिसमें ध्वनित हो वही व्यक्ति वास्तविक सृजक है। नेताजी ने पूर्ण स्वाधीनता को राष्ट्र के के सामने एक gqT3it 'मिशन' के रूप में प्रस्तुत किया। नेताजी ने युवाओं से आह्वान किया कि जो इस मिशन में आस्था रखता है वह सच्चा भारतवासी है। बस, उनके इसी आह्वान पर ध्वजा उठाए आजादी के दीवानों की आजाद हिन्द फौज बन गई। उन्होंने अपने भाषण में कहा था विचार व्यक्ति को लिए कार्य करने के धरातल प्रदान करता है। उन्नतिशील, शक्तिशाली जाति और पीढ़ी की उत्पत्ति g چ हमें बेहतर विचार वाले पथ का अवलंबन करना होगा, क्योंकि जब विचार महान, साहसपूर्ण और राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत होंगे तभी हमारा संदेश अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा | g Aarf & स्वाधीनता 'जीवन-मरण' का प्रश्न बन गया था। बस यही श्रद्धा, यही आत्मविश्वास जिसमें ध्वनित हो वही व्यक्ति वास्तविक सृजक है। नेताजी ने पूर्ण स्वाधीनता को राष्ट्र के के सामने एक gqT3it 'मिशन' के रूप में प्रस्तुत किया। नेताजी ने युवाओं से आह्वान किया कि जो इस मिशन में आस्था रखता है वह सच्चा भारतवासी है। बस, उनके इसी आह्वान पर ध्वजा उठाए आजादी के दीवानों की आजाद हिन्द फौज बन गई। उन्होंने अपने भाषण में कहा था विचार व्यक्ति को लिए कार्य करने के धरातल प्रदान करता है। उन्नतिशील, शक्तिशाली जाति और पीढ़ी की उत्पत्ति g چ हमें बेहतर विचार वाले पथ का अवलंबन करना होगा, क्योंकि जब विचार महान, साहसपूर्ण और राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत होंगे तभी हमारा संदेश अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा | - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - g 'किसी राष्ट्र के स्वाधीनता सर्वोपरि है' इस महान मूलमंत्र को शैशव और नवयुवाओं की नसों में प्रवाहित करने, तरुणों की सोई आत्मा को जगाकर देशव्यापी आंदोलन देने और युवा वर्ग की शौर्य शक्ति उद्भासित लिए के आजादी को आत्मप्रतिष्ठा कर राष्ट्र के युवकों का प्रश्न बना देने वाले नेताजी सुभाष चंद बोस ने पुरोहित की स्वाधीनता महासंग्राम के महायज्ञ में प्रमुख HISI भूमिका सुभाषचंद्र बोस के जीवन का प्रेरक प्रसंग. नेताजी ने आत्मविश्वास, भाव-प्रवणता, कल्पनाशीलता और नवजागरण के बल पर युवाओं में राष्ट्र के प्रति मुक्ति व इतिहास की रचना का मंगल निश्चित, शंखनाद किया। मनुष्य इस संसार में एक निहित उद्देश्य की प्राप्ति, किसी संदेश को प्रचारित लिए जन्म लेता है। जिसकी जितनी शक्ति, करने के आकांक्षा और क्षमता है वह उसी के अनुरूप अपना कर्मक्षेत्र निर्धारित करता है। g 'किसी राष्ट्र के स्वाधीनता सर्वोपरि है' इस महान मूलमंत्र को शैशव और नवयुवाओं की नसों में प्रवाहित करने, तरुणों की सोई आत्मा को जगाकर देशव्यापी आंदोलन देने और युवा वर्ग की शौर्य शक्ति उद्भासित लिए के आजादी को आत्मप्रतिष्ठा कर राष्ट्र के युवकों का प्रश्न बना देने वाले नेताजी सुभाष चंद बोस ने पुरोहित की स्वाधीनता महासंग्राम के महायज्ञ में प्रमुख HISI भूमिका सुभाषचंद्र बोस के जीवन का प्रेरक प्रसंग. नेताजी ने आत्मविश्वास, भाव-प्रवणता, कल्पनाशीलता और नवजागरण के बल पर युवाओं में राष्ट्र के प्रति मुक्ति व इतिहास की रचना का मंगल निश्चित, शंखनाद किया। मनुष्य इस संसार में एक निहित उद्देश्य की प्राप्ति, किसी संदेश को प्रचारित लिए जन्म लेता है। जिसकी जितनी शक्ति, करने के आकांक्षा और क्षमता है वह उसी के अनुरूप अपना कर्मक्षेत्र निर्धारित करता है। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - आज युवा वर्ग में विचारों की कमी नहीं है। लेकिन इस लिए க 94 विचार जगत में क्रांति के को आदर्श विद्युत की भांति हमारी सामने रखना ही होगा , जो और कार्ययोजना को मूर्तरूप दे सकें। शक्ति, आदर्श नेताजी ने युवाओं में स्वाधीनता का अर्थ केवल राष्ट्रीय बंधन से नहीं, बल्कि आर्थिक समानता, जाति, মু্নি भेद, सामाजिक अविचार का निराकरण, सांप्रदायिक संकीर्णता त्यागने का विचार मंत्र भी दिया। नेताजी के विचार विश्वव्यापी थे। वे समग्र मानव g समाज को उदार बनाने के प्रत्येक जाति को विकसित बनाना थे। उनका स्पष्ट मानना था कि चाहते विश्व जो जाति उन्नति करना नहीं चाहती, रंगमंच पर विशिष्टता पाना नहीं चाहती , उसे जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं| नेताजी की आशा के अनुरूप इस g जरा जीर्ण होते देश का यौवन लौटाने के प्रत्येक व्यक्ति को आज दृढ़ संकल्प लेना होगा। आज युवा वर्ग में विचारों की कमी नहीं है। लेकिन इस लिए க 94 विचार जगत में क्रांति के को आदर्श विद्युत की भांति हमारी सामने रखना ही होगा , जो और कार्ययोजना को मूर्तरूप दे सकें। शक्ति, आदर्श नेताजी ने युवाओं में स्वाधीनता का अर्थ केवल राष्ट्रीय बंधन से नहीं, बल्कि आर्थिक समानता, जाति, মু্নি भेद, सामाजिक अविचार का निराकरण, सांप्रदायिक संकीर्णता त्यागने का विचार मंत्र भी दिया। नेताजी के विचार विश्वव्यापी थे। वे समग्र मानव g समाज को उदार बनाने के प्रत्येक जाति को विकसित बनाना थे। उनका स्पष्ट मानना था कि चाहते विश्व जो जाति उन्नति करना नहीं चाहती, रंगमंच पर विशिष्टता पाना नहीं चाहती , उसे जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं| नेताजी की आशा के अनुरूप इस g जरा जीर्ण होते देश का यौवन लौटाने के प्रत्येक व्यक्ति को आज दृढ़ संकल्प लेना होगा। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - आज युवा वर्ग में विचारों की कमी नहीं है। लेकिन इस लिए க 94 विचार जगत में क्रांति के को आदर्श विद्युत की भांति हमारी सामने रखना ही होगा , जो और कार्ययोजना को मूर्तरूप दे सकें। शक्ति, आदर्श नेताजी ने युवाओं में स्वाधीनता का अर्थ केवल राष्ट्रीय बंधन से नहीं, बल्कि आर्थिक समानता, जाति, মু্নি भेद, सामाजिक अविचार का निराकरण, सांप्रदायिक संकीर्णता त्यागने का विचार मंत्र भी दिया। नेताजी के विचार विश्वव्यापी थे। वे समग्र मानव g समाज को उदार बनाने के प्रत्येक जाति को विकसित बनाना थे। उनका स्पष्ट मानना था कि चाहते विश्व जो जाति उन्नति करना नहीं चाहती, रंगमंच पर विशिष्टता पाना नहीं चाहती , उसे जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं| नेताजी की आशा के अनुरूप इस g जरा जीर्ण होते देश का यौवन लौटाने के प्रत्येक व्यक्ति को आज दृढ़ संकल्प लेना होगा। आज युवा वर्ग में विचारों की कमी नहीं है। लेकिन इस लिए க 94 विचार जगत में क्रांति के को आदर्श विद्युत की भांति हमारी सामने रखना ही होगा , जो और कार्ययोजना को मूर्तरूप दे सकें। शक्ति, आदर्श नेताजी ने युवाओं में स्वाधीनता का अर्थ केवल राष्ट्रीय बंधन से नहीं, बल्कि आर्थिक समानता, जाति, মু্নি भेद, सामाजिक अविचार का निराकरण, सांप्रदायिक संकीर्णता त्यागने का विचार मंत्र भी दिया। नेताजी के विचार विश्वव्यापी थे। वे समग्र मानव g समाज को उदार बनाने के प्रत्येक जाति को विकसित बनाना थे। उनका स्पष्ट मानना था कि चाहते विश्व जो जाति उन्नति करना नहीं चाहती, रंगमंच पर विशिष्टता पाना नहीं चाहती , उसे जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं| नेताजी की आशा के अनुरूप इस g जरा जीर्ण होते देश का यौवन लौटाने के प्रत्येक व्यक्ति को आज दृढ़ संकल्प लेना होगा। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - जातिवाद , गिरते मूल्यों और परंपराओं, बढ़ते टूटती सभ्यताओं को सहेजना होगा। एक व्यापक राष्ट्रीय संगठन की स्थापना करनी होगी , अच्छे और बुरे की प्रचलित धारणा को बदलना होगा। नेताजी के इन शब्दों को हमें पुनः दोहराना और स्वीकारना होगा कि 'स्मरण रखें, अपनी समवेत चेष्टा द्वारा हमें भारत में नए शक्ति-संपन्न राष्ट्र का निर्माण करना है। पाश्चात्य हमारे समाज में गहराई तक घुसकर धन-्जन सभ्यता का संहार कर रही है। हमारा व्यवसायन्वाणिज्य, धर्म-कर्म , शिल्पकला नष्टप्राय हो रहे हैं इसलिए जीवन के सभी क्षेत्रों में पुनः मृत संजीवनी का संचार करना है। यह संजीवनी कौन लाएगा?' ऐसे स्वाधीनता महासंग्राम के महायज्ञ में प्रमुख पुरोहित की भूमिका निभाने वाले नेताजी की मृत्यु १८ अगस्त १९४५ को बैंकॉक से टोकियो जा रहे विमान # కెక్షI दुर्घटना  आप सभी देशवासियों को नेताजी की जयंती के शुभ हार्दिक बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं। अवसर पर जातिवाद , गिरते मूल्यों और परंपराओं, बढ़ते टूटती सभ्यताओं को सहेजना होगा। एक व्यापक राष्ट्रीय संगठन की स्थापना करनी होगी , अच्छे और बुरे की प्रचलित धारणा को बदलना होगा। नेताजी के इन शब्दों को हमें पुनः दोहराना और स्वीकारना होगा कि 'स्मरण रखें, अपनी समवेत चेष्टा द्वारा हमें भारत में नए शक्ति-संपन्न राष्ट्र का निर्माण करना है। पाश्चात्य हमारे समाज में गहराई तक घुसकर धन-्जन सभ्यता का संहार कर रही है। हमारा व्यवसायन्वाणिज्य, धर्म-कर्म , शिल्पकला नष्टप्राय हो रहे हैं इसलिए जीवन के सभी क्षेत्रों में पुनः मृत संजीवनी का संचार करना है। यह संजीवनी कौन लाएगा?' ऐसे स्वाधीनता महासंग्राम के महायज्ञ में प्रमुख पुरोहित की भूमिका निभाने वाले नेताजी की मृत्यु १८ अगस्त १९४५ को बैंकॉक से टोकियो जा रहे विमान # కెక్షI दुर्घटना  आप सभी देशवासियों को नेताजी की जयंती के शुभ हार्दिक बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं। अवसर पर - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - भीम जय 4 संविधान| आप सपरिवार सदैव सुखी रहें। भीम जय 4 संविधान| आप सपरिवार सदैव सुखी रहें। - ShareChat