PRAMOD MEHRA
ShareChat
click to see wallet page
@417199920
417199920
PRAMOD MEHRA
@417199920
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
#🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - जिनके साथ रहने से, या मिलने से, साथ बिताने से, या बातें करने से, वक्त ही दुःख खुशियाँ दोगुनी हो जाएं आधा और बस यही अपनों की परिभाषा है। सुप्रभात।  जिनके साथ रहने से, या मिलने से, साथ बिताने से, या बातें करने से, वक्त ही दुःख खुशियाँ दोगुनी हो जाएं आधा और बस यही अपनों की परिभाषा है। सुप्रभात। - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - रिश्तों की माला जब टूटकर गिरती है तो दोबारा जोड़ने पर थोड़ी छोटी हो जाती है, क्योंकि उसमें से भरोसे के कुछ मोती बिखरकर खो जाते है। सुप्रभात। Rche Radhe   रिश्तों की माला जब टूटकर गिरती है तो दोबारा जोड़ने पर थोड़ी छोटी हो जाती है, क्योंकि उसमें से भरोसे के कुछ मोती बिखरकर खो जाते है। सुप्रभात। Rche Radhe - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - शुभप्रभात र्संसारमै वहीसत्य हैजो बिना मुहूर्त के होता है.! जैसे जन्म م प्रेम मृत्यु..! 44-| शुभप्रभात र्संसारमै वहीसत्य हैजो बिना मुहूर्त के होता है.! जैसे जन्म م प्रेम मृत्यु..! 44-| - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🙏गुरु महिमा😇
❤️जीवन की सीख - तुम पापी हो डराया गया है ऐसा कहन्कहकर বদ্ক ताकि तुम मंदिरों की दलाली ्ें फंसे रहो और अपने भीतर की उस शक्ति को कभी न पहचान पाओ जो तुम्हें स्वतंत्र कर सकती है। ओशो लिए ऐसी और जानकारी कै हर्में फॉलो करें @BharatGyan Hub Followi RATHI तुम पापी हो डराया गया है ऐसा कहन्कहकर বদ্ক ताकि तुम मंदिरों की दलाली ्ें फंसे रहो और अपने भीतर की उस शक्ति को कभी न पहचान पाओ जो तुम्हें स्वतंत्र कर सकती है। ओशो लिए ऐसी और जानकारी कै हर्में फॉलो करें @BharatGyan Hub Followi RATHI - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - गलती होने पर साथ छोड़ने वाले तो बहुत मिलते हैं पर गलती ೯1 पर समझा कर साथ निभाने वाले दोस्त कम मिलते हैं..! गलती होने पर साथ छोड़ने वाले तो बहुत मिलते हैं पर गलती ೯1 पर समझा कर साथ निभाने वाले दोस्त कम मिलते हैं..! - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞 #❤️जीवन की सीख
🌞 Good Morning🌞 - आपके जीवन में हरियाली भरा रहे। आपके जीवन में हरियाली भरा रहे। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - सरकारी टंकी की खुदाई के दौरान निकली बुद्ध की प्रतिमा na (afr ಬ541) | आज शुक्रवार को सुबह थाना रिजोर  श्षेत्र के कस्वा रिजोर में पुराने जर्जर किले के नजदीक सरकारी टंकी की खूदाई के दौरान मजदूरों को भगवान बुद्ध की प्रतिमा जमीन ক ওন নিমার্য নন ক পখান बाहर निकली गईहै ! खबर लगते ही करबा रिजोर क्षेत्र के सेकडो लोग एवं भगवान बुद्घ के अनुयायी  भगवान बुद्घ की प्रतिमा को देखने  पहुंच रहे है कुछ लोग उनका जल से अभिषेक कर रहे हं॰ भोगे कुछ लोग उनको मिष्ठान का থানা বিললব ম় নন্ক लगा रहे हें ] সিলন ক বপযান সুলিম সী सूचना के संदर्भ में दूरभाप  पहुंच गई है সুলিম ক ভ্াযা पर पर अवगत कराया गया है ! आगरा के पुरातत्व विभाग को सरकारी टंकी की खुदाई के दौरान निकली बुद्ध की प्रतिमा na (afr ಬ541) | आज शुक्रवार को सुबह थाना रिजोर  श्षेत्र के कस्वा रिजोर में पुराने जर्जर किले के नजदीक सरकारी टंकी की खूदाई के दौरान मजदूरों को भगवान बुद्ध की प्रतिमा जमीन ক ওন নিমার্য নন ক পখান बाहर निकली गईहै ! खबर लगते ही करबा रिजोर क्षेत्र के सेकडो लोग एवं भगवान बुद्घ के अनुयायी  भगवान बुद्घ की प्रतिमा को देखने  पहुंच रहे है कुछ लोग उनका जल से अभिषेक कर रहे हं॰ भोगे कुछ लोग उनको मिष्ठान का থানা বিললব ম় নন্ক लगा रहे हें ] সিলন ক বপযান সুলিম সী सूचना के संदर्भ में दूरभाप  पहुंच गई है সুলিম ক ভ্াযা पर पर अवगत कराया गया है ! आगरा के पुरातत्व विभाग को - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - मगर नहीं मांग सकता तो तू प्रार्थना की कला सीख मैं निश्चित हूं। तुझे प्रार्थना आ गई। प्रार्थना गया अब मांग नहीं है, हालांकि प्रार्थना शब्द का ही अर्थ हमने मांगना कर लिया है। मांगने वाले को प्रार्थी कहते हैं। वह शब्द का अर्थ ही हमने भ्रष्ट कर लिया। प्रार्थी का अर्थ मांगनेवाला नहीं , प्रार्थी का अर्थ झुकनेवाला है। प्रार्थना का अर्थ मांगना नहीं है, प्रार्थना का अर्थ अहोभाव। ओशो मगर नहीं मांग सकता तो तू प्रार्थना की कला सीख मैं निश्चित हूं। तुझे प्रार्थना आ गई। प्रार्थना गया अब मांग नहीं है, हालांकि प्रार्थना शब्द का ही अर्थ हमने मांगना कर लिया है। मांगने वाले को प्रार्थी कहते हैं। वह शब्द का अर्थ ही हमने भ्रष्ट कर लिया। प्रार्थी का अर्थ मांगनेवाला नहीं , प्रार्थी का अर्थ झुकनेवाला है। प्रार्थना का अर्थ मांगना नहीं है, प्रार्थना का अर्थ अहोभाव। ओशो - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - ।वेवकानंद का कहा ।के तू पागल है! तू जा कर मादेर में काली को क्यों नहीं कहता? यहां-वहां क्या भटक रहा है? एक दफा जा कर दे, सब मामला हल हो जाएगा। तू जा प्रार्थना कर। अब रामकृष्ण कहे तो विवेकानंद इनकार कैसे करें? गए। घंटा-भर लग गया। बाहर रामकृष्ण बैठे हैं चबूतरे पर, राह देख रहे हैं। जब निकले विवेकानंद गदगद आंखों से आंसुओं की धार बह रही है, मस्ती की तरंग छाई हुई। तीन दिन के भूखे हैं, यह तो भूल ही गए हैं। बड़े आनंद मग्न हैं। आकर रामकृष्ण के चरणों में गिर बात पीछे होगी , तूने कह पड़े। रामकृष्ण ने कहाः दूसरी दिया न? तूने प्रार्थना कर ली न? विवेकानंद ने कहाः अरे! मैं तो भूल ही गया। मैं प्रार्थना में ऐसा Tಾ೯ ೯ TಾT! रामकृष्ण ने कहाः फिर से जा। ऐसा तीन बार हुआ और तीसरी बार विवेकानंद बाहर आए और रामकृष्ण को देखा और कहा कि माफ करें, यह शायद हो नहीं सकेगा| जैसे ही मैं वहां जाता हूं॰ प्रार्थना ऐसा घेर लेती है कि छोटी छोटी बातें करने का सवाल ही नहीं उठता। और छोटी छोटी बातें करूं, यह बात बेहूदी लगती है, अभद्र लगती है। यह मुझसे नहीं हो सकेगा रामकृष्ण| परमहंसदेव , क्षमा कर दें! यह नहीं मुझसे हो सकेगा | रामकृष्ण ने छाती से लगा लिया विवेकानंद को और कहाः इसीलिए तीन बार भेजा , मैं देखना चाहता था, प्रार्थना में तू कुछ मांग सकता है अब भी या नहीं ? I नहीं मांग सकता तो तू प्रार्थना की कला सीख R ।वेवकानंद का कहा ।के तू पागल है! तू जा कर मादेर में काली को क्यों नहीं कहता? यहां-वहां क्या भटक रहा है? एक दफा जा कर दे, सब मामला हल हो जाएगा। तू जा प्रार्थना कर। अब रामकृष्ण कहे तो विवेकानंद इनकार कैसे करें? गए। घंटा-भर लग गया। बाहर रामकृष्ण बैठे हैं चबूतरे पर, राह देख रहे हैं। जब निकले विवेकानंद गदगद आंखों से आंसुओं की धार बह रही है, मस्ती की तरंग छाई हुई। तीन दिन के भूखे हैं, यह तो भूल ही गए हैं। बड़े आनंद मग्न हैं। आकर रामकृष्ण के चरणों में गिर बात पीछे होगी , तूने कह पड़े। रामकृष्ण ने कहाः दूसरी दिया न? तूने प्रार्थना कर ली न? विवेकानंद ने कहाः अरे! मैं तो भूल ही गया। मैं प्रार्थना में ऐसा Tಾ೯ ೯ TಾT! रामकृष्ण ने कहाः फिर से जा। ऐसा तीन बार हुआ और तीसरी बार विवेकानंद बाहर आए और रामकृष्ण को देखा और कहा कि माफ करें, यह शायद हो नहीं सकेगा| जैसे ही मैं वहां जाता हूं॰ प्रार्थना ऐसा घेर लेती है कि छोटी छोटी बातें करने का सवाल ही नहीं उठता। और छोटी छोटी बातें करूं, यह बात बेहूदी लगती है, अभद्र लगती है। यह मुझसे नहीं हो सकेगा रामकृष्ण| परमहंसदेव , क्षमा कर दें! यह नहीं मुझसे हो सकेगा | रामकृष्ण ने छाती से लगा लिया विवेकानंद को और कहाः इसीलिए तीन बार भेजा , मैं देखना चाहता था, प्रार्थना में तू कुछ मांग सकता है अब भी या नहीं ? I नहीं मांग सकता तो तू प्रार्थना की कला सीख R - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - विवेकानंद के जीवन में उल्लेख है। विवेकानंद के पिता मरे। पिता मौजी आदमी थे। मौजी रहे होंगे , तभी विवेकानंद जैसा बेटा पैदा हो सका। कुछ बचाया नहीं, जिंदगी भर रहे। कमाया बहुत, मगर रहे। লুমান लुटाते जब मरे तो कर्ज छोड़ कर मरे। जो कुछ था वह कर्ज में चला गया। घर की हालत ऐसी हो गई कि खाने को भी दो रोटी जुटाना मुश्किल। विवेकानंद अपनी मां को यह किसी के घर निमंत्रण कहकर चले जाते कि आज मुझे रहते। लौट कर किला है और रास्तों पर भूखे घूमते आते हाथ फेरते हुए, डकार लेते हुए। कहीं कोई मित्र ने निमंत्रण दिया नहीं है। मां को बताने के लिए कि पेट बहुत घर में थोड़ा भी गया है, तू फिकर मत कर, जो है, तू अब भोजन कर ले। क्योंकि वह इतना थोड़ा होता या तो विवेकानंद कर ले या मां कर ले। मस्त तगड़े आदमी थे, काफी भोजन चाहिए पडता। मां यह सोचकर कि बेटा भोजन कर आया है, भोजन कर लेती जो भी रूखा-सुखा होता। रामकृष्ण को खबर लगी तो रामकृष्ण ने एक दिन विवेकानंद को कहा कि तू पागल है! तू जा कर मंदिर विवेकानंद के जीवन में उल्लेख है। विवेकानंद के पिता मरे। पिता मौजी आदमी थे। मौजी रहे होंगे , तभी विवेकानंद जैसा बेटा पैदा हो सका। कुछ बचाया नहीं, जिंदगी भर रहे। कमाया बहुत, मगर रहे। লুমান लुटाते जब मरे तो कर्ज छोड़ कर मरे। जो कुछ था वह कर्ज में चला गया। घर की हालत ऐसी हो गई कि खाने को भी दो रोटी जुटाना मुश्किल। विवेकानंद अपनी मां को यह किसी के घर निमंत्रण कहकर चले जाते कि आज मुझे रहते। लौट कर किला है और रास्तों पर भूखे घूमते आते हाथ फेरते हुए, डकार लेते हुए। कहीं कोई मित्र ने निमंत्रण दिया नहीं है। मां को बताने के लिए कि पेट बहुत घर में थोड़ा भी गया है, तू फिकर मत कर, जो है, तू अब भोजन कर ले। क्योंकि वह इतना थोड़ा होता या तो विवेकानंद कर ले या मां कर ले। मस्त तगड़े आदमी थे, काफी भोजन चाहिए पडता। मां यह सोचकर कि बेटा भोजन कर आया है, भोजन कर लेती जो भी रूखा-सुखा होता। रामकृष्ण को खबर लगी तो रामकृष्ण ने एक दिन विवेकानंद को कहा कि तू पागल है! तू जा कर मंदिर - ShareChat