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10 साल बाद मैं खुद को कहाँ देखता हूँ?
हर व्यक्ति के जीवन में भविष्य को लेकर कुछ सपने, कुछ लक्ष्य और कुछ उम्मीदें होती हैं। “आप 10 साल बाद खुद को कहाँ देखते हैं?” यह सवाल केवल करियर से जुड़ा नहीं होता, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व, सोच और जीवन के उद्देश्य को भी दर्शाता है।
मैं 10 साल बाद खुद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखता हूँ जो अपने क्षेत्र में अनुभव, ज्ञान और विश्वसनीयता के लिए पहचाना जाता हो। मेरा लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से सफल होना नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाला इंसान बनना है। मैं चाहता हूँ कि मेरे काम का प्रभाव लोगों के जीवन में दिखाई दे और लोग मुझे एक जिम्मेदार तथा प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में पहचानें।
करियर के दृष्टिकोण से, मैं खुद को एक स्थिर और सफल पेशेवर के रूप में देखता हूँ। मैं चाहता हूँ कि मैं अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करूँ, नई तकनीकों और विचारों को अपनाऊँ, और निरंतर सीखते हुए आगे बढ़ता रहूँ। आने वाले 10 वर्षों में मैं नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए खुद को तैयार करना चाहता हूँ, ताकि मैं दूसरों को मार्गदर्शन दे सकूँ और टीम के साथ मिलकर बड़े लक्ष्य हासिल कर सकूँ।
व्यक्तिगत जीवन में, मैं संतुलन को बहुत महत्वपूर्ण मानता हूँ। 10 साल बाद मैं खुद को एक खुशहाल परिवार, अच्छे स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली के साथ देखता हूँ। मैं चाहता हूँ कि मेरा जीवन केवल काम तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें सीखना, यात्रा करना, नए अनुभव लेना और समाज के लिए योगदान देना भी शामिल हो।
इसके अलावा, मैं समाज सेवा और जनजागरूकता के क्षेत्र में भी सक्रिय रहना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि आने वाले वर्षों में मैं शिक्षा, जागरूकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए काम करूँ। मेरा विश्वास है कि अगर हम अपने आसपास छोटे-छोटे बदलाव लाते हैं, तो समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है।
अंततः, 10 साल बाद मैं खुद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखता हूँ जो आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और समाज के लिए उपयोगी हो। मेरा लक्ष्य केवल सफलता पाना नहीं है, बल्कि एक अर्थपूर्ण जीवन जीना है — ऐसा जीवन जिसमें मेरी उपलब्धियाँ केवल मेरे लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनें। #🆕 ताजा अपडेट ##india_jankranti_news, #moj_content #📢 ताज़ा खबर 🗞️ ##Samastipur news
मंडल कारा समस्तीपुर में चार कैदी अनशन पर, जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
जेल प्रशासन और जिला प्रशासन में मच गया हड़कंप
समस्तीपुर,बिहार(जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 13 अप्रैल 2026)। मंडल कारा समस्तीपुर में चार कैदियों ने जेल प्रशासन के खिलाफ अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। अनशन पर बैठे कैदियों ने जेलर और जेल प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया है। इस घटना के बाद जेल प्रशासन और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
अनशन कर रहे कैदियों का आरोप है कि जेल में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। बंदी नम्बरदार द्वारा पैसों की मांग की जाती है और रुपये नहीं देने पर कैदियों को कथित रूप से प्रताड़ित किया जाता है तथा शेल में बंद कर दिया जाता है। कैदियों ने भोजन की खराब गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव और कैदियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए हैं।
कैदियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण उन्हें अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा।
कैदियों की प्रमुख मांगें :
भोजन की गुणवत्ता में सुधार किया जाए
चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए।
कैदियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की जांच हो।
दोषी अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।
सूत्रों के अनुसार, अनशन की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन ने कैदियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचना दे दी गई है।
जेल प्रशासन की ओर से कहा गया है कि कैदियों के आरोपों की जांच की जाएगी और स्थिति को जल्द सामान्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, अनशन पर बैठे कैदियों के स्वास्थ्य पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।
घटना के बाद मंडल कारा समस्तीपुर में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। जिला प्रशासन भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जल्द समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।
जन-क्रांति हिंदी न्यूज़ बुलेटिन, समस्तीपुर प्रधान कार्यालय द्वारा प्रकाशित व प्रसारित। #📢 ताज़ा खबर 🗞️ ##Samastipur news #moj_content ##india_jankranti_news, #🆕 ताजा अपडेट
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ईरान - इज़राइल -अमेरिका महायुद्ध की रिपोर्ट अरब सागर को कण्ट्रोल सिर्फ औऱ सिर्फ ईरान ही करेगा अमेरिका यदि नहीं मानेगा तो होंगी भयंकर लड़ाई
जनक्रांति कार्यालय से केंद्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा की रिपोर्ट
होर्मूज पर ट्रम्प की नाकाबंदी ईरान को टोल देने बाले जहाज को भी यू एस रोकेगी मिडिल ईस्ट मेंफिर से धधकेगी आग समन्दर में होगी भयानक तबाही
इंडिया जनक्रांति न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 13 अप्रैल 2026)। ११ मिनट २६ सेकंड क़े बाद ईरान होर्मूज में होगा महा बिस्फोट ईरान अमेरिका में फिर से होगा युद्ध शुरू होर्मूज क़े पास अमेरिकन नेवी तैनात हो गया है। ईरान आने जाने बाले जहाज को रोक सकते हैँ यू एस जाँच क़े बाद मेडिकल औऱ अन्य समाग्री को जाने की इज़ाज़त दी जायेगी। होर्मूज पर ट्रम्प की नाकाबंदी ईरान को टोल देने बाले जहाज को भी यू एस रोकेगी मिडिल ईस्ट मेंफिर से धधकेगी आग समन्दर में होगी भयानक तबाही होर्मूज स्ट्रेट की नाकाबंदी का डेड लाइन समाप्त ब्लाकेड पुरे ईरानी समुद्र को कॉवर करती है ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल नहीं बेच सकेगी नाकाबंदी से ईरान क़े आर्थिक स्थिति कमजोर हो जायेगी कई देश अमेरिका से तेल खरीद रहे हैँ ये अमेरिका का जबरन तेल खरीदने की तानाशाही है डोनाल्ड ट्रम्प अब ना घर क़े रहे ना घाट क़े कतर ने होर्मूज नाकेबंदी का बिरोध किया है दबाव क़े लिये होर्मूज का इस्तेमाल नहीं हो ऐसा कतर का कहना है इधर ईरान का कहना है अरब सागर को कण्ट्रोल सिर्फ औऱ सिर्फ ईरान ही करेगा। अमेरिका यदि नहीं मानेगा तो भयंकर लड़ाई होगी आईआरजीसी का कहना है युद्ध का जबाब युद्ध से ही दिया जायेगा। बेनिजूयेला ब्यूह में ईरान क़े साथ अमेरिका वही व्यवहार करेगा जो बेनिजूयेला क़े साथ हुआ नेतनेहायु ने अमेरिका नाकाबंदी का समर्थन किया है नाकाबंदी से ईरान को आर्थिक क्षति होगी जिसका आकलन करना मुश्किल है नाकाबंदी क़े आस पास जहाज आयेंगे तो उसे हम तबाह कर देंगें ईरान से चीन सप्लाई होता है जाहिर है इससे चीन खफा है चूँकि ईरान क़े रूट से ही चीन को तेल सप्लाई होता है ऊर्जा संकट पर विश्व युद्ध हो सकता है ट्रम्प का दोहरा रूप इधर तो ईरान की नाकेबंदी तो दुसरी और चीन पर दबाब परन्तु अब समीकरण बदलता हुआ महसूस हो रहा है पुतिन ने शांति वार्ता की जानकारी ली है जिससे युद्ध में नया मोर होने की सम्भावना है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित। #📢 ताज़ा खबर 🗞️ ##india_jankranti_news, #moj_content ##Eran -israil - America yudh #🆕 ताजा अपडेट
महिला आरक्षण बिल २०२७ वोट लेने की नई तरकीब
जनक्रांति कार्यालय से केंद्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा की रिपोर्ट
समाज शिक्षित होगा औऱ समाज ज़ब शिक्षित होगा तो राजनितिक पार्टियों को वोट पाने में काफ़ी दिक्क़तों का करना पडेगा सामना
इंडिया जनक्रांति न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन 13 अप्रैल 2026)।
संसद में महिला आरक्षण बिल आने वाला है जिसमें पक्ष औऱ विपक्ष में घमासान होना स्वाभाबिक है, लेकिन महिला आरक्षण बिल पास हो या ना हो दोनों अवस्था में बी जे पी को लाभ मिलना ही मिलना है। ये बिल वास्तविक रूप से महिला हितकारी है। ऐसी बात नहीं है यदि महिला पर सरकार इतना ही मेहरबान है तो रोज आये दिन महिला पर अत्याचार, व्यभिचार औऱ बलात्कार एबं अन्य घटना क्यों होती है ? जाहिर है की महिला क़े हित की चिंता किसी भी पार्टी को नहीं है, वरण सभी अपने अपने वोट बैंक क़े लिये इसका प्रयोग करते रहते हैँ। आये दिन कोई राम राम तो कोई अल्लाह अल्लाह कोई हिन्दू मुस्लिम कोई बैक वार्ड फॉरवर्ड कोई यू जी सी एबं अन्य अन्य फिकरे से वोट बैंक की खरीदारी में लगे हुए हैँ जबकि संसार में मात्र दो किस्म की ही जाती हैँ एक अमीर दूसरे गरीब परन्तु लोगों को इससे भटकना औऱ वोट क़े लिये फिक्रेबाजी करना आम बात है नीतीश जी ने तो एक जबरदस्त कार्ड खेला दलित औऱ महादलित यही तो यहाँ की राजनीति है। आम जन हितैषी कोई भी नहीं है। अब बी जे पी महिला आरक्षण बिल लेकर आ रही है पास हो या ना हो इससे कोई मतलब नहीं है मतलब केवल इस बात पर है कि महिला का वोट २०२७ में कैसे इनके पक्ष में हो जाये ये दीगर बात है की अभी N D A बहुमत में है बिल पास होना ही है यदि नहीं भी पास होता है तो ठीकरा विरोधियों पर ही फोरा जायेगा जिससे विरोधियों को महिला वोट का लाभ नहीं मिल सके वोट खरीदने का बेहतरीन बेहतरीन तरीके इस्तेमाल किये जाते रहे हैँ सभी पार्टियों क़े द्वारा जिससे अमीर औऱ अमीर होता जा रहा है औऱ गरीब औऱ गरीब होता जा रहा है ये क्या तरीका है गरीब को पाँच किलो अनाज देकर कामचोर बना भीखमंगा बना दो या आरक्षण पर आरक्षण देकर भारत की प्रतिभा को ही कुचल डालो बाबा भीमराव अम्बेडकर ने तो मात्र पाँच वर्ष के लिये ही आरक्षण की वकालत की थी लेकिन पीछे वोट की खातिर समाज को बाँटना सिखाया औऱ ये द्रोपदी की चीड़ की तरह बढ़ता ही चला जा रहा है वोट क़े लिये ये सभी पार्टियां लोगों को बिभक्त कर फुट डालो औऱ राज्य करो की नियति औऱ नियत में विश्वास रखती है।
इसका सबसे प्रमुख कारण शिक्षा है। यहाँ शिक्षा क़े नाम पर खिलबाड़ हो रहा है अमीरों क़े लिये अलग शिक्षा औऱ गरीबों क़े लिये अलग शिक्षा, मेरा मानना है भारत सरकार द्वारा शिक्षा बिभाग को ही समाप्त कर देना चाहिये ज़ब स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक शिक्षा पर इतना खर्च किया जा रहा है तो शिक्षा क़े नाम पर कुकुरमुत्ते की तरह प्राइवेट सिक्षा का क्या काम है यह तो अमीर औऱ गरीब को बाँटने बाली शिक्षा है अमीर स्टैंडर्ड शिक्षा हासिल करेंगे औऱ गरीब स्कूली सरकारी शिक्षा इसका क्या मतलब है ? शिक्षा देना ही है तो प्राइवेट शिक्षा बन्द करो या स्कूली शिक्षा बन्द करो, शिक्षा पर सबको समान अधिकार हो चाहे वो अमीर हो या गरीब सबको शिक्षा की जरूरत है औऱ समाज समानता क़े लिये अनाज या कोई भी धन केवल उसे ही मिले जिसके बच्चे पढ़ाई कर रहे हैँ उसे नहीं मिले जिसको पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं हो इससे ये होगा समाज शिक्षित होगा औऱ समाज ज़ब शिक्षित होगा तो राजनितिक पार्टियों को वोट पाने में काफ़ी दिक्क़तों का सामना करना पड़ेगा अभी तो ये हो रहा है चोर डकैत औऱ बाहुबली ही राजनीति करते हैँ, जो जितने घोटालेबाज हैँ वो उतने बड़े राजनीतिज्ञ हैँ सबों को आई ए एस ही नचा रहे हैँ औऱ शिक्षा क़े अभाव में वे विवश नज़र आ रहे हैं सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर इतना खर्च होने क़े बाद भी ये शिक्षा का प्राइवेटी करण क्यों ? फिर मानव संसाधन विकाश मंत्रालय की जरूरत क्यों है ? क्या शिक्षा माफिया क़े आगे शिक्षा बिभाग नतमस्तक है या उसका थैली से संतुष्ट है जो बड़े बड़े लोग पैसे बाले मनमानी फीस औऱ मनमानी ड्रेस और मनमानी किताबों का बोझ छोटे छोटे बच्चे क़े कंधे पर लादकर उसका बचपन छीन रहे हैँ ये कहाँ तक जाइज है ? ये सोचनीय प्रश्न है आज इस सम्बदादाता द्वारा देखा जा रहा है गाँव से लेकर शहर तक मुफ्त में अनाज क़े बदौलत लोग ताश खेलते नज़र आते हैँ कामचोर हो गये हैँ इसका जिम्मेबार ये रसजनितिक पार्टी हैँ जो चाहते हैँ लोग ऐसे ही अशिक्षित औऱ गरीब रहे ताकी वोट क़े समय उनके खाली कटोरे में कुछ देकर या रूपया देकर वोट खरीदा जा सके अतएब सबसे पहला कदम शिक्षा को व्यवस्थित करने की है ताकी कोई अशिक्षित नहीं हो।
दुसरा मुख्य कारण है अमीरी औऱ ग़रीबी यहाँ मात्र दो किस्म की ही जाती हैँ अमीर औऱ गरीब अब हम इस पर विचार करते हैँ क्या कारण है आज अमीर औऱ अमीर होता जा रहा है औऱ गरीब औऱ गरीब इसका प्रमुख कारण है सरकार, सरकार अमीरों का संरक्षण देती है उसका कर्जा चाहे अरबों मेंही क्यों ना हो उसे माफ कर देती है चाहे वो बैंक का बैंक डूबा जाये औऱ गरीब का झोपड़ा उजार देती है थोड़े से पैसे क़े लिये ही क्यों ? आज जो घोटाले क़े नाम पर जेल जाने बाले होते हैँ दबंग होते हैँ उसने यदि संभावित पार्टी का दामन थाम लेते हैँ तो वो स्वच्छ हो जाते हैँ ऐसा क्यों ? क्योंकि जनता जगरूक नहीं है यानी जनता शिक्षित नहीं है शिक्षा एक अहम मुद्दा है तब अमीरी जो गरीबों का धन हड़प लिया है चाहे कोई भी हैँ हमारे द्वारा अदा किये जानेबाले टैक्स से ही सभी पलते हैँ फिर अमीर कैसे अमीर हो जाता है स्वाभाविक है उसे लोन देने में बैंक आनाकानी नहीं करता है जबकि गरीब को साधारण लोन लेने में चप्पल घिस जाते हैँ ये दोहरी व्यवस्था का जिम्मेबार निश्चित तौरपर सरकार पर ही जाती है इसलिये इस देश में मात्र दो जातियों क़े अलाबा कोई जाती नहीं है बाकी सभी फिकरे हैँ वोट लेने क़े लिये या समाज बिभक्त करने क़े लिये अमीर औऱ गरीब क़े अलाबे कोई जाती नहीं कोई धर्म नहीं कोई ऊंच नहीं कोई नीच नहीं ये सभी राजनितिक फिकरे क़े अलाबे कुछ नहीं
तीसरा मुख्य बिंदु है आरक्षण, क्या आरक्षण क़े नाम पर देश की प्रतिभा को कुंठित नहीं किया जा रहा है ? आरक्षण क्यों ? जबसबकी पढ़ाई एक साथ तो जाती पाती व्यवस्था क्यों ? निश्चित है आरक्षण देकर देश की प्रतिभा को कुचला जा रहा है औऱ आरक्षण पाकर भी लोग कुंठित रहते हैँ यह सहने क़े लिये ये आरक्षण कोटा क़े हैँ आरक्षण देना है तो उनको ऐसी कोचिंग सुबिधा दो जिससे वे बिना आरक्षण औऱ कुंठित क़े प्रतियोगिता में भाग लेकर उस मुकाम को हासिल कर सके आज हम पा रहे हैँ एक बार जो आरक्षण का लाभ ले चुके हैँ उनके समस्त परिवार ही इस लाभ को प्राप्त कर रहे हैँ औऱ जिसे लाभ नहीं मिला वो अभीतक वँचित हैँ क्या आरक्षण का अर्थ यही है ? इसका जबाब शायद हो कोई दे सके, सभी को अपने वोट की पड़ी है वोट क़े लिये समाज को हज़ारों टुकड़े में बिभक्त को तैयार हैँ
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है जिसको वोट देकर जीता कर भेजते हैँ कि हमारे हक़ क़े लिये वो काम करेगा ये जनता की सेवा है जनता की सेवा को वो सरकारी सेवा मानते हैँ कारण है कानून बनाने का अधिकार उन्हें है उसलिए समस्त कानून को ताक पर रखकर अपने सुबिधा क़े लिये वे सरकारी सेवा मानकर कानून बनाकर पेंशन दर पेंशन पा रहे हैं औऱ जो वास्तविक रूप से सरकारी सेवा करते हुए उमर गुज़ार देते हैँ उनका बुढ़ापे की लाठी पेंशन पर रोक होता h ऐसा क्यों ? क्या संबिधान में ऐसा प्रावधान पहले से निर्धारित है ? याद है जिस राज्य को भारत में बिलय किया गया उसके राजा को प्रिबी पर्स क़े तौर पर जागीरदारी का हिस्सा दिया जाता था जिसे आईरान लेडी उर्फ़ श्री मति इंदिरा गाँधी ने अपने प्रधनमंत्रित्व काल में बन्द किया था चूँकि देश का आर्थिक अहम हिस्सा उसीमें चला जाता था आज माननीय मोदी जी को हिम्मत है कि राजनीतिक नेताओं का पेंशन औऱ अन्य सुबिधा बन्द करें चूँकि देश का अहम आर्थिक हिस्सा उसी में चला जाता है
इसके अलावे सबसे अहम मुद्दा है भ्रष्टाचार ? भ्रष्टाचार क्यों ? कहावत है यदि राजा चोर होगा तो दरबारी भी चोर होगा राजा ईमानदार होगा तो मजाल नहीं कोई दरबारी चोर हो जाये, ईमानदारी अच्छी नीति है वरण वो ऊपर से हो ऊपर को भ्र्ष्टाचार नहीं कमीशन कहा जाता है या उसे भेंट या सेवा का नाम दिया जाता है ऐसा क्यों होता है इसका प्रमुख कारण है चुनाव औऱ चुनावी सभा में अनाप सनाप पैसा खर्च करना ज़ब सरकार द्वारा चुनाव में इतना पैसा खर्च किया ही जाता है तो ये रेडिओ औऱ टेलीवीज़न किस काम क़े ? क्यों नहीं रेडियो या टेलीविजन क़े माध्यम से ही प्रचार की व्यवस्था की जाती है इस तरह क़े बहुतेरे प्रश्न है जिस पर राज्य करने वाले दृढ़ संकल्पित होकर ठोस निर्णय या कानून बनाबे। जिससे देश में भ्रष्टाचार समाप्त हो जाये लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि मलाई खाने की आदत सबको हो गया है। आज सरकारी कर्मचारी भ्र्ष्टाचार में पकड़े जाते हैँ किसी नेता या मंत्री को घुस लेते पकड़ा जा सका है क्यों ? वे टेबल क़े अंदर से पैसे बटोरते हैँ।
उपरोक्त आलेख प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो चीफ जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन द्वारा संप्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित। #moj_content #📢 ताज़ा खबर 🗞️ ##india_jankranti_news, ##Begusarai_jankranti_News ##Bihar politics
'फिल्मकार ऋत्विक घटक पर महत्वपूर्ण चर्चा और दो पुस्तकों का विमोचन
जाहिद खान एवं जयनारायण प्रसाद द्वारा संपादित पुस्तक ‘ऋत्विक घटक: नव यथार्थवाद सिनेमा का कलात्मक सर्जक’ का हुआ विमोचन
मुंबई,महाराष्ट्र ( जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 13 अप्रैल 2026, )। ऋत्विक घटक (1925 –1976) बांग्ला सिनेमा के उन महान फिल्मकारों में हैं जिन्होंने बंगाल विभाजन की पीड़ा, विस्थापन, शरणार्थी जीवन और सामाजिक विघटन को अपनी फिल्मों में गहरी संवेदना और वैचारिक तीक्ष्णता के साथ चित्रित किया। उनका सिनेमा यथार्थवाद, मेलोड्रामा, ब्रेख्तियन शैली, मिथकीय प्रतीक और अभिव्यक्तिवादी ध्वनि के अनोखे संयोजन के लिए जाना जाता है। उन्होंने केवल आठ फीचर फिल्में बनाईं, पर उनकी विभाजन त्रयी विशेष रूप से चर्चित रही।
जनवादी लेखक संघ एवं स्वर संगम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कल इंदिरा गाँधी हास्पिटल में स्थित विरूंगला केन्द्र, मीरा रोड में आयोजित कार्यक्रम में जाहिद खान एवं जयनारायण प्रसाद द्वारा संपादित पुस्तक ‘ऋत्विक घटक: नव यथार्थवाद सिनेमा का कलात्मक सर्जक’ का विमोचन हुआ। इसी अवसर पर जाहिद खान द्वारा अनुवादित कृष्ण चंदर का उर्दू नाटक ‘दरवाजा खोल दो’ (हिंदी अनुवाद) का भी विमोचन किया गया।
इस कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता पुलक चक्रवर्ती ने बताया कि, ऋत्विक घटक मार्क्सवादी विचारधारा से गहराई से प्रभावित थे। उन्होंने 1948 में भारतीय जन नाट्य संघ (IPTA) से जुड़कर अपनी सांस्कृतिक यात्रा शुरू की, जो उस समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआय) का सांस्कृतिक मोर्चा था। विभाजन, अकाल और सामाजिक अन्याय ने उन्हें मार्क्सवाद की ओर आकर्षित किया। वे आईपीटीए के सक्रिय सदस्य रहे, नाटक लिखे-निर्देशित किए और 1951 में पार्टी के लिए ‘ऑन द कल्चरल फ्रंट’ नामक महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किया, जिसमें उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी की सांस्कृतिक नीति पर जोर दिया कि कला को जनता की पीड़ा और आकांक्षाओं को व्यक्त करना चाहिए। हालांकि उनका जुड़ाव केवल संगठनात्मक नहीं था — वे सच्चे अर्थों में क्रांतिकारी कलाकार थे। मार्क्सवाद उनकी फिल्मों की रीढ़ बना रहा — उनकी रचनाएँ पूंजीवाद की विनाशकारी प्रवृत्तियों, वर्ग संघर्ष, विभाजन की त्रासदी और बौद्धिक संकट के खिलाफ निरंतर विद्रोह का रूप लेती रहीं। घटक ने कला के माध्यम से मानवता और सामाजिक न्याय के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता निभाई।
उनकी प्रसिद्ध फिल्म मेघे ढाका तारा शरणार्थी परिवार की त्रासदी के माध्यम से स्त्री-त्याग और शोषण की मार्मिक कथा कहती है और उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति मानी जाती है। कोमल गांधार थिएटर आंदोलन और सांस्कृतिक पुनर्मिलन की आकांक्षा को राजनीतिक विभाजन के संदर्भ में प्रस्तुत करती है, जबकि सुवर्णरेखा विस्थापन, जाति-वर्ग और नैतिक संकट की दार्शनिक पड़ताल करती है। अजान्त्रिक में मनुष्य और मशीन के संबंध को प्रतीकात्मक ढंग से दिखाया गया है। बांग्लादेश में बनी तितास एक्टी नदीर नाम एक लुप्त होती नदी-सभ्यता की महाकाव्यात्मक कथा है, जबकि जुक्ति, तक्को आर गप्पो राजनीतिक बहस और बौद्धिक संकट पर आधारित अर्ध-आत्मकथात्मक फिल्म है। उनकी प्रारंभिक फिल्म नागरिक और बाड़ी थेके पालिए भी उल्लेखनीय हैं।
कार्यक्रम में अनारकली ऑफ आरा और कागज-2 जैसी सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे पर आधारित फिल्में, और रात बाकी है व शी नामक क्राइम-ड्रामा सीरीज़ बना चुके फिल्म निर्देशक अविनाश दास ने कहा, “ऋत्विक घटक का सिनेमा सबसे ज़्यादा ओरिजिनल सिनेमा है। उन्होंने सिनेमा का पूरा व्याकरण खड़ा किया है। उनका कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ाव केवल संगठनात्मक नहीं था, इसलिए जब उन्हें लगा कि वह इस संगठन के साथ बहुत दूर तक नहीं जा सकते, तो उन्होंने संगठन छोड़ दिया।” अविनाश दास ने एक फिल्म डायरेक्टर की विवशताओं का जिक्र करते हुए बताया कि फिल्म बनाने में कितनी मशक्कत, चिरौरी और तानों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी के हवाले से कहा कि “डायरेक्टर का जन्म अपमानित होने के लिए होता है।” ऐसे में ऋत्विक घटक द्वारा अपनी शर्तों पर सिनेमा बनाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने मीरा रोड के स्वर संगम फाउंडेशन की तुलना कलकत्ता के उस सृजनात्मक माहौल से की, जिसमें ऋत्विक घटक और मृणाल सेन एक-दूसरे को सहयोग देते थे।
मुंबई विश्व विद्यालय के हिन्दी विभाग के भूतपूर्व प्रोफेसर डॉ.हूबनाथ पांडे ने ऋत्विक घटक की फिल्मों को समझने के अपने शोध संस्मरण साझा किए और बताया कि बंगाली न समझने के बावजूद उन्होंने विजुअल्स के सहारे घटक की फिल्मों को देखा। उन्होंने ‘खुद्दार’ फिल्म में अमिताभ बच्चन के सीन का उदाहरण देकर परसानीफिकेशन की घटक की अनोखी अवधारणा पर प्रकाश डाला। डॉ. पांडेय ने हर महीने कम से कम एक फिल्म दिखाने की पेशकश की और कहा कि हमें फिल्में देखना सीखना होगा। उन्होंने फिल्म सोसाइटी की स्थापना की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “बी. शांताराम की फिल्म सोसाइटी बंद हो चुकी है। इसकी शुरुआत मीरा रोड से की जा सकती है। मेरे पास दस हजार फिल्मों का संकलन है।”
पुस्तक के संपादक जाहिद खान ने बताया कि हिंदी पट्टी में ऋत्विक घटक को मुख्यतः ‘मधुमती’ और ‘मुसाफिर’ जैसी फिल्मों के स्क्रिप्ट लेखन के लिए जाना जाता है, जबकि उनका नाम मृणाल सेन और सत्यजीत राय के साथ क्लासिकल डायरेक्टर के रूप में लिया जाता है। उन्होंने ऋत्विक घटक को मूल रूप से नाटककार बताया, जो आईपीटीए से जुड़े रहे और बाद में सिनेमा की ओर मुड़े क्योंकि सिनेमा के पास अधिक दर्शक थे। जाहिद खान ने कहा कि घटक कला के माध्यम से मानवता और मानवीय मूल्यों को क्षरण से बचाने के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे। उन्होंने श्रोताओं से अपील की कि ऋत्विक घटक के पूरे व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने के लिए यह पुस्तक अवश्य पढ़ें।
जलेस के केन्द्रीय कमिटी सदस्य संजय भिसे ने कहा कि, ऋत्विक घटक का महत्व इस बात में है कि उन्होंने सिनेमा को मात्र मनोरंजन नहीं माना, बल्कि उसे इतिहास, राजनीति और मानवीय संवेदना का माध्यम बनाया। उनकी फिल्मों में विभाजन की त्रासदी निजी जीवन की कहानियों से जुड़कर व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय संदर्भ ग्रहण करती है। उन्होंने सिनेमा की भाषा को नए ढंग से गढ़ते हुए दर्द को विद्रोह और कविता में रूपांतरित किया, जिससे उनका सिनेमा आज भी गहरे प्रभाव के साथ याद किया जाता है। मराठी फिल्म उद्योग क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने अपने बच्चों के नाम ऋत्विक घटक से प्रभावित होकर ऋत्विक रखा है।
कलकत्ता से विशेष रूप से आए जयनारायण प्रसाद ने सत्यजीत राय, मृणाल सेन और ऋत्विक घटक के बीच के संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ‘मेघे ढाका तारा’ फिल्म का विशेष उल्लेख किया और कहा कि विभाजन की पीड़ा और शरणार्थियों की समस्या को इस फिल्म में अद्भुत रूप से प्रस्तुत किया गया है।
कार्यक्रम में रंगमंच और सिनेमा अभिनेता अजय रोहिल्ला ने ऋत्विक घटक के सिनेमा की स्ट्रांग विजुअल सेंस की तारीफ की। सिने पत्रकार हरि मृदुल ने बताया कि घटक बड़े कथाकार भी थे और उनकी कहानियों का अनुवाद ‘संभावना प्रकाशन’ से आया है। सिने जगत से जुड़े फरीद खान ने भी ‘मेघ ढके तारा’ का उल्लेख करते हुए ऋत्विक घटक को यथार्थवादी सिनेमा का महत्वपूर्ण हस्ताक्षर बताया।
हृदयेश मयंक, चेयरमैन, स्वर संगम फाउंडेशन एवं अध्यक्ष, विरूंगला केन्द्र, मीरा रोड ने बताया कि प्रो. हूबनाथ पांडेय के प्रस्ताव पर स्वर संगम फाउंडेशन शीघ्र ही कमेटी की बैठक बुलाकर फिल्म सोसाइटी संबंधी विचार करेगी।
कार्यक्रम का संचालन रमन मिश्र ने किया। हरिप्रसाद राय ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए इस समृद्ध करने वाला अनुभव बताया।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित। #📚कविता-कहानी संग्रह #🆕 ताजा अपडेट ##india_jankranti_news, #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #moj_content
स्नेह का ज़ब बन्धन टूट जाये ,
अपने पराये भेद ज़ब मिट जाये,
उतरता है तब स्वं वह ह्रदय में ,
खिलता हुआ फुल स्वं हो जाये ,
स्नेह का.......
🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी
स्नेह का ज़ब बन्धन टूट जाये ,
अपने पराये भेद ज़ब मिट जाये,
उतरता है तब स्वं वह ह्रदय में ,
खिलता हुआ फुल स्वं हो जाये ,
स्नेह का.......
ईश्वर हमसे दूर नहीं पास पास है ,
नज़दीक जैसे पैर तले घास है ,
उपमा ही नहीं दी जा सकती है ,
शब्द भेद रहित जैसे सन्यास है ,
स्नेह का.....
हो नहीं पाता है होना मुश्किल है ,
राहें काँटों डगर की मुक़्क़मल है,
कोई कोई चलते सुनसान डगर पे ,
ईशा मीरा कबीर विजय शामिल है,
स्नेह का.......
मूसा नानक ओशो की बात और है,
बाबा बिजय बत्स ही यहाँ ठौर है ,
देख सको तो देख लो आँखों से,
ठहराव नहीं सब जगह दौर - दौर है,
स्नेह का.....
प्रमोद को मिला है ठिकाना यहीं से ,
विनती है आ जाओ जल्दी कहीं से,
जबतक गद्दीनशीन शरण में आओ,
मिले कुछ नहीं पछताओगे वहीं से,
👆उपरोक्त पद प्रकाशन हेतु प्रेषित प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो चीफ द्वारा संप्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित। #🆕 ताजा अपडेट #📚कविता-कहानी संग्रह ##Begusarai_jankranti_News ##suvichar
ईरान - इज़राइल -संयुक्त राज्य अमेरिका महायुद्ध की रिपोर्ट
होर्मूज को घेराबंदी का प्लान है जिसमें कई देश अमेरिका का साथ देने का वचन दे रहे हैँ समुद्र शील करेगा अमेरिका
जनक्रांति कार्यालय से केन्द्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा की रिपोर्ट
शांति वार्ता में हाथा पाई की नौबत भी आ गयी जे डी वेन्स को बिना समझौता छोड़कर वापस आना पड़ा होर्मूज पर ज्योहीं नाकेबंदी अमेरिका करेगा जिसका कराड़ा जबाब से ईरान पीछे नहीं रहेगा
इंडिया जनक्रांति न्यूज डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय न्यूज डेस्क 13 अप्रैल 2026)। ईरान अपनी समप्रभूता की रक्षा क़े लिये कृत संकल्पित है जिसके कारण अमेरिका औऱ ईरान की बातचीत की मध्यस्था क़े बाबजूद सफलीभुत नहीं हो सका। ईरान अपनी शर्तो क़े आगे झुकने को तैयार नहीं है औऱ अमेरिका उसकी शर्तो को मानने क़े लिये तैयार नहीं है।अमेरिका राष्ट्रपति ट्रम्प का ताज़ा व्यान क़े अनुसार यदि ईरान नहीं झुकेगा तो हम किसी भी कार्रबाई करने को मजबूर हैँ । ट्रम्प ने कहा हम हार्मोज खोल देंगें चाहे इसका जो भी परिणाम हो लगता है खाड़ी देश फिर धधकेगा ईरान ने कहा us का नियत औऱ नियति में फर्क है एक तरफ होर्मूज खोलने की जिद औऱ औऱ युद्ध नहीं करने की कोई गारंटी नहीं थी। ईरान ने कहा हमले का जबाब हम हमले से देते रहेंगें, फ्रीज़ संपत्ति औऱ प्रतिबन्ध पर नहीं बात बनी ईरान का दाबा है, अमेरिका यूरिनियम चोरी क़े लिये आया था जो सफलीभुत नहीं हुआ अमेरिका का बिमान बहरीन पहुँच चुका है ट्रम्प ने ईरान को बेंजूयाला याद दिलाया है। ईरान ने कहा जंग शांति समझौता एक ही बैठक में होना संभव नहीं है यदि ऐसा हुआ तो एक वर्ल्ड वार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है शांति वार्ता बिफल होने पर होर्मूज को घेराबंदी का प्लान है जिसमें कई देश अमेरिका का साथ देने का वचन दे रहे हैँ समुद्र शील करेगा अमेरिका किसी भी ईरानी जहाज की अनुमति नहीं है। ईरान को पुरी तरह तबाह कर देंगे ये ट्रम्प का दाबा है, ईरान अमेरिका का वार्ता बिफल मुनीर पुरी तरह फेल नज़र आ रहे हैँ। मुनीर ने मुजताबा को धोखा दिया है खाड़ी में तबाही का दुसरा राउंड चालू हो गया h ट्रम्प होर्मूज में दोनों तरफ से नकाबन्दी करेंगे होर्मूज में टोलबाजी विश्व युद्ध करायेगी। लेबनान में आजतक ६००० लोग घायल हैँ तुर्कीये ने भरकाया अब इज़राइल छोड़ेगा नहीं नेतनयाहू ने नया टारगेट सेट कर लिया है इज़राइल इंसानियत क़े नाम पर कलंक है यह आम नागरिकों,, बच्चे औऱ हॉस्पिटल को निशाना बनाता रहा है दुनियाभर में हाहाकार तेल का संकट हो गया बिकराल, nato देश अमेरिका को होर्मूज खोलने में मदद करेगा ऐसा व्यान ट्रम्प दे रहे हैँ।
धोखेबाज निकला पाकिस्तान नहीं छोड़ेगा ईरान, होर्मूज मुद्दे पर कभी भी युद्ध हो सकता है २१घंटे तक चली शांति वार्ता नतीजा सिफर रहा।
ट्रम्प को सही समय का इंतज़ार है रूस औऱ चीन ने उलझा दिया है us ईरान क़े खिलाफ हमले को तैयार है us ईरान को धमकी पर धमकी दे रहे हैँ होर्मूज स्ट्रेट में कोई बदलाव नहीं होगा होर्मूज की सुरक्षा क़े लिये ईरान कृत संकलपित है। शांति वार्ता में हाथा पाई की नौबत भी आ गयी जे डी वेन्स को बिना समझौता छोड़कर वापस आना पड़ा होर्मूज पर ज्योहीं नाकेबंदी अमेरिका करेगा जिसका कराड़ा जबाब से ईरान पीछे नहीं रहेगा ट्रम्प सुपर पॉवर होने क़े बाद भी असहाय नजर आ रहे हैँ औऱ अनाप शनाप बोल रहे हैँ लगता है ईरान को गुप्त रूप से चीन औऱ रूस का साथ मिल रहा है सीज़ फायर होने क़े बाद भी इज़राइल ने ईरान पर हमला किया इसका क्या मतलब है ? एक तरफ शांति वार्ता तो दुसरी तरफ लगातार हमले क्या ये शांति वार्ता क़े स्वरूप हैँ ? ईरान का ऐसा कहना है ईरान ने होर्मूज क़े रास्ते समुद्र में बारूदी सुरेंगे बिछा रखी है जो सैकरों फ़ीट समुद्र क़े अन्दर है उसको भेदकर किसी भी जहाज को होर्मूज से निकलना मुश्किल है बिना टोल टैक्स दीये कोई भी जहाज इधर से उधर नहीं जा सकता है जिसको भेद पाना अमेरिका क़े लिये आसान नहीं है एक तो अमेरिका को युद्ध क़े लिये लम्बी रास्ता औऱ दुगुना तिगुना खर्च से दबा जा रहा है क्योंकि लगभग अमेरिका क़े १७वेश को ईरान नष्ट कर चुका है अब आगे आगे देखना है यह मामला किस करवट बैठता है। 👆उपरोक्त महायुद्ध रिपोर्ट प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो चीफ द्वारा संप्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित। #moj_content #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ ##india_jankranti_news, ##Eran -israil - America yudh
प्राईवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन जिला इकाई समस्तीपुर के द्वारा किया गया प्रेस वार्ता आयोजित
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
अभिभावकों द्वारा सस्ती सोशल मीडिया का प्रयोग कर गलत बयान बाजी कर निजी विद्यालयों के छवि को धुमिल करने का प्रयास किया जा रहा है : एसोसिएशन
समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 12 अप्रैल 2026 )। प्राईवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन जिला इकाई समस्तीपुर के द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद समायल अहमद के आवाहन पर आदर्श बल विद्यालय कोरबध्धा समस्तीपुर के प्रांगण में जिला अध्यक्ष सदन कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया। जिसमें वर्तमान में कुछ सोशल मीडिया के द्वारा कुछ अभिभावकों को दिग्भ्रमित कर निजी विद्यालयों के संबंध में गलत प्रचार प्रसार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस संबंध में सर्वसम्मति से जिला अध्यक्ष उक्त वक्तव्य का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि हम लोगों के द्वारा पुनः नामांकन शुल्क नहीं लिया जाता है एवं अभिभावक के मांग पर विद्यालय के द्वारा किताब कॉपी एवं अन्य आवश्यक शिक्षण सामग्री सुविधा अनुकूल उपलब्ध कराया जाता है। वैसे विद्यालय जो हमारे संगठन से नहीं जुड़े हुए हैं तथा कारपोरेट जगत द्वारा विद्यालय संचालित किया जाता है। उनके द्वारा री- एडमिशन शुल्क आदि लिया जाता होगा ।साथ ही वैसे अभिभावक जिनके यहां विद्यालय का मोटा शुल्क बकाया हो जाता है वहीं अभिभावक सस्ती सोशल मीडिया का प्रयोग कर गलत बयान बाजी कर निजी विद्यालयों के छवि को धुमिल करने का प्रयास किया जा रहा है ।जबकि हम निजी विद्यालय सरकारी गाइडलाइन का अक्षरसह पालन करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर शिक्षित समाज का निर्माण करते हुए सरकार के उद्देश्य को पूर्ण करने में सहयोग करते हैं। बैठक को जिला सचिव के.के. सिंह, कोषाध्यक्ष डॉक्टर जेके शर्मा, मीडिया प्रभारी ब्रज किशोर कुमार, शिवाजी नगर प्रखंड अध्यक्ष संजय कुमार झा, दलसिंहसराय प्रखंड अध्यक्ष देवेंद्र प्रसाद साह, संयुक्त जिला सचिव नवीन कुमार झा, कृष्ण मोहन राय, शंकर शाह, रजनीश कुमार विवेक कुमार, दिनेश प्रसाद शाह, छोटे कुमार, अमरजीत कुमार, राजकुमारी देवी एवं सानू कुमार आदि लोगों ने अपना विचार व्यक्त किया तथा मीडिया में हो रहे निजी विद्यालय के प्रति वायरस समाचार का निंदा करते हुए इसका खंडन किया।
अंत में विद्यालय के निदेशक दिनेश प्रसाद शाह के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभा समाप्ति की घोषणा की गई।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित। ##Samastipur news #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🆕 ताजा अपडेट ##education #moj_content













