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जेल के भीतर महिला की गर्भावस्था ने उठाए गंभीर सवाल, सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज
जनक्रांति कार्यालय से उजैन्त कुमार की रिपोर्ट
जेल में बंद एक महिला के गर्भवती होने की घटना ने जेल प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पटना/समस्तीपुर, बिहार | जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय, न्यूज़ डेस्क | 24 मई 2026)। एक महिला को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद जेल भेजा जाता है, ताकि वह कानून के दायरे में रहकर अपनी सजा पूरी कर सके। लेकिन यदि उसी जेल के भीतर उसकी सुरक्षा और सम्मान पर प्रश्नचिह्न खड़े हो जाएं, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जेल में बंद एक महिला के गर्भवती होने की घटना ने जेल प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब कोई महिला जेल प्रशासन की निगरानी में रहती है, जहां उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया जाता है, तब ऐसी स्थिति आखिर कैसे उत्पन्न हो जाती है।
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि जेल में बंद महिलाओं की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित व्यवस्था की होती है। यदि किसी महिला के साथ जेल परिसर के भीतर ऐसा कुछ होता है, तो यह केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता माना जाएगा।
इस घटना ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या जेल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही तरीके से कर रहा है?
क्या महिला कैदियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है?
और यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?
सबसे अधिक चिंता उस मासूम बच्चे को लेकर जताई जा रही है, जो किसी अपराध का हिस्सा नहीं है, फिर भी व्यवस्था की लापरवाही के कारण जेल की परिस्थितियों में जन्म लेने को मजबूर हो सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब केवल चर्चा या बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। जरूरत है जेल व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त सुधारात्मक कदम उठाने की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित एवं प्रसारित। ##india_jankranti_news, #📢 ताज़ा खबर 🗞️ ##Bihar politics #moj_content #🆕 ताजा अपडेट
जेल के भीतर महिला की गर्भावस्था ने उठाए गंभीर सवाल, सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज
जनक्रांति कार्यालय से उजैन्त कुमार की रिपोर्ट
जेल में बंद एक महिला के गर्भवती होने की घटना ने जेल प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पटना/समस्तीपुर, बिहार | जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय, न्यूज़ डेस्क | 24 मई 2026)। एक महिला को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद जेल भेजा जाता है, ताकि वह कानून के दायरे में रहकर अपनी सजा पूरी कर सके। लेकिन यदि उसी जेल के भीतर उसकी सुरक्षा और सम्मान पर प्रश्नचिह्न खड़े हो जाएं, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जेल में बंद एक महिला के गर्भवती होने की घटना ने जेल प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब कोई महिला जेल प्रशासन की निगरानी में रहती है, जहां उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया जाता है, तब ऐसी स्थिति आखिर कैसे उत्पन्न हो जाती है।
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि जेल में बंद महिलाओं की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित व्यवस्था की होती है। यदि किसी महिला के साथ जेल परिसर के भीतर ऐसा कुछ होता है, तो यह केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता माना जाएगा।
इस घटना ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या जेल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही तरीके से कर रहा है?
क्या महिला कैदियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है?
और यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?
सबसे अधिक चिंता उस मासूम बच्चे को लेकर जताई जा रही है, जो किसी अपराध का हिस्सा नहीं है, फिर भी व्यवस्था की लापरवाही के कारण जेल की परिस्थितियों में जन्म लेने को मजबूर हो सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब केवल चर्चा या बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। जरूरत है जेल व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त सुधारात्मक कदम उठाने की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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आमजन के लिए कानून, नेताओं के लिए छूट? मुख्यमंत्री आवास में शराब की बोतल मिलने पर उठे सवाल
जनक्रांति न्यूज़ डेस्क
मुख्यमंत्री आवास जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले परिसर में शराब की खाली बोतल मिलना केवल एक सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज्य में आम नागरिकों पर शराबबंदी कानून के तहत सख्त कार्रवाई होती रही है।
पटना,बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन बिहार न्यूज डेस्क 24 मई 2026)। बिहार में लागू शराबबंदी कानून को सरकार ने सामाजिक सुधार और जनहित का बड़ा कदम बताया था। वर्षों से यह दावा किया जाता रहा है कि शराबबंदी से समाज में अपराध कम हुए, परिवार मजबूत हुए और गरीब तबके को राहत मिली। लेकिन जब सत्ता और राजनीति से जुड़े स्थानों पर शराब की खाली बोतल मिलने जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो आम लोगों के मन में कई सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री आवास जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले परिसर में शराब की खाली बोतल मिलना केवल एक सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज्य में आम नागरिकों पर शराबबंदी कानून के तहत सख्त कार्रवाई होती रही है। गांव-शहर में छोटी मात्रा में शराब मिलने पर लोगों की गिरफ्तारी, जुर्माना और जेल तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में जनता पूछ रही है कि क्या कानून केवल आम लोगों के लिए है?
विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है। राजनीतिक दलों का कहना है कि यदि आम नागरिकों पर कठोर कार्रवाई होती है, तो सत्ता से जुड़े लोगों और वीआईपी परिसरों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं सरकार की ओर से इसे विरोधियों द्वारा राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया जा रहा है।
समाज के बुद्धिजीवियों का मानना है कि किसी भी कानून की सफलता उसकी निष्पक्षता पर निर्भर करती है। यदि जनता को यह महसूस होने लगे कि नियम केवल कमजोर और सामान्य वर्ग पर लागू होते हैं, जबकि प्रभावशाली लोग बच निकलते हैं, तो कानून पर भरोसा कमजोर होने लगता है।
शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है कि सरकार पारदर्शिता और समानता का संदेश दे। चाहे मामला आम नागरिक का हो या किसी बड़े राजनीतिक व्यक्ति अथवा सरकारी परिसर का — जांच और कार्रवाई एक समान होनी चाहिए। लोकतंत्र में कानून की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है जब हर व्यक्ति उसके दायरे में समान रूप से आता दिखाई दे।
आज जरूरत इस बात की है कि शराबबंदी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर ईमानदारी से काम किया जाए, ताकि जनता का विश्वास कायम रहे और कानून की गरिमा बनी रहे।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित। ##india_jankranti_news, #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #moj_content ##Bihar politics
जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन (बेव )
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प्रकाशक/सम्पादक
राजेश कुमार वर्मा
8804781897
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पत्रकार होना और पत्रकारिता करना दो अलग-अलग सत्य
समस्तीपुर जनक्रांति कार्यालय से लेख राजेन्द्र सिंह जादौन की
आज बाजार और सत्ता ने मिलकर पत्रकारिता को एक चमकदार मंच बना दिया है जहाँ खबरों से ज्यादा चेहरे बिकते हैं। बहसें अब जनता के मुद्दों पर कम और टीआरपी के हिसाब से ज्यादा होने लगी हैं।
इंडिया जनक्रांति न्यूज़ डेस्क, भारत (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय 24 मई 2026)। लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल चुनावों से मजबूत नहीं होती, बल्कि उन संस्थाओं से मजबूत होती है जो सत्ता को उसके दायित्वों का लगातार बोध कराती रहती हैं। न्यायपालिका, प्रशासन और सरकार यदि जनता के प्रति जवाबदेह दिखाई देती है तो उसके पीछे एक बड़ी भूमिका जनपक्षीय पत्रकारिता की होती है। पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं है, यह लोकतंत्र की चेतना है। यह वह आईना है जिसमें सत्ता को अपना असली चेहरा दिखाई देता है।
लेकिन आज के समय में सबसे बड़ा संकट यही है कि पत्रकारिता और पत्रकार होने के बीच का अंतर धीरे-धीरे धुंधला किया जा रहा है। हाथ में माइक पकड़ लेना, गले में प्रेस कार्ड टांग लेना, सोशल मीडिया पर लाइव आ जाना या किसी चैनल का लोगो लगा लेना पत्रकारिता नहीं है। पत्रकार होना एक पहचान हो सकती है, लेकिन पत्रकारिता करना एक जिम्मेदारी है। यह जिम्मेदारी सच के पक्ष में खड़े होने की है, उन सवालों को उठाने की है जिनसे व्यवस्था असहज हो जाती है।
आज बाजार और सत्ता ने मिलकर पत्रकारिता को एक चमकदार मंच बना दिया है जहाँ खबरों से ज्यादा चेहरे बिकते हैं। बहसें अब जनता के मुद्दों पर कम और टीआरपी के हिसाब से ज्यादा होने लगी हैं। किसान की आत्महत्या, बेरोजगार युवाओं की पीड़ा, गाँवों की बदहाली, सरकारी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मुद्दे धीरे-धीरे स्क्रीन से गायब होते जा रहे हैं। उनकी जगह शोर, आरोप-प्रत्यारोप और प्रायोजित राष्ट्रवाद ने ले ली है। ऐसे समय में सच्ची पत्रकारिता का महत्व और बढ़ जाता है।
जनपक्षीय पत्रकारिता हमेशा से सत्ता के लिए असुविधाजनक रही है। क्योंकि उसका काम प्रशंसा करना नहीं, सवाल करना होता है। वह सरकार विरोधी नहीं होती, बल्कि जनता के पक्ष में होती है। अगर सड़क टूटी हुई है, अस्पताल में दवाइयाँ नहीं हैं, स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, थानों में रिश्वत चल रही है और सरकारी योजनाएँ भ्रष्टाचार में दब रही हैं, तो पत्रकारिता का काम इन मुद्दों को सामने लाना है। यही लोकतंत्र का असली धर्म है।
इतिहास गवाह है कि हर दौर में कुछ पत्रकार ऐसे रहे जिन्होंने अपने शब्दों को बिकने नहीं दिया। उन्होंने सत्ता के दबाव, विज्ञापनों की राजनीति और धमकियों के बावजूद सच लिखने का साहस किया। कई पत्रकार जेल गए, कई पर मुकदमे हुए, कई की नौकरी छिन गई और कई अपनी जान तक गंवा बैठे। लेकिन उन्होंने कलम नहीं छोड़ी। क्योंकि वे जानते थे कि अगर पत्रकारिता डर गई तो लोकतंत्र धीरे-धीरे अंधा हो जाएगा।
आज पत्रकारिता का एक बड़ा हिस्सा सुविधाओं के करीब खड़ा दिखाई देता है। सत्ता के गलियारों में घूमना, नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवाना और सरकारी विज्ञापनों के लिए समझौते करना अब सामान्य बात बनती जा रही है। लेकिन यह पत्रकारिता नहीं, व्यवस्था का हिस्सा बन जाना है। पत्रकारिता का असली मूल्य तब है जब पत्रकार जनता के बीच खड़ा दिखाई दे, न कि सत्ता के मंच पर।
एक सच्चा पत्रकार वही होता है जो जनता की तकलीफ को अपनी संवेदना से महसूस करे। जिसे यह समझ हो कि उसकी कलम किसी गरीब की आखिरी उम्मीद हो सकती है। गाँव का वह किसान जो तहसील के चक्कर काट-काटकर थक गया है, वह मजदूर जिसकी मजदूरी दबा दी गई है, वह महिला जिसे न्याय नहीं मिल रहा, वह छात्र जिसे व्यवस्था ने बेरोजगार बना दिया इन सबकी आवाज़ अगर कोई बन सकता है तो वह निर्भीक पत्रकारिता है।
लेकिन इसके लिए केवल शब्दों की ताकत काफी नहीं होती। पत्रकारिता में नैतिकता भी उतनी ही जरूरी है। सच्ची बातें तभी प्रभावशाली होती हैं जब उन्हें जीवन में आत्मसात किया जाए। जो पत्रकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखता है, अगर वही निजी स्वार्थों के लिए समझौता कर ले तो उसके शब्द खोखले हो जाते हैं। जो निष्पक्षता की बात करता है, उसे अपने व्यवहार में भी निष्पक्ष होना पड़ेगा। पत्रकारिता केवल दूसरों को आईना दिखाने का काम नहीं है, यह स्वयं को भी लगातार परखने की प्रक्रिया है।
सोशल मीडिया के दौर में सूचना बहुत तेज हो गई है, लेकिन सत्य बहुत कमजोर हो गया है। अब खबरों से ज्यादा अफवाहें फैलती हैं। बिना तथ्यों के आरोप लगाए जाते हैं, भीड़ को भड़काया जाता है और लोगों की भावनाओं का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे समय में जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। क्योंकि लोकतंत्र झूठ के सहारे ज्यादा समय तक नहीं चल सकता।
आज भी देश के छोटे शहरों, कस्बों और गाँवों में ऐसे पत्रकार मौजूद हैं जो बिना संसाधनों के लगातार संघर्ष कर रहे हैं। जिनके पास बड़े स्टूडियो नहीं हैं, बड़ी तनख्वाह नहीं है, सुरक्षा नहीं है, लेकिन फिर भी वे सच लिख रहे हैं। वे जानते हैं कि एक खबर किसी गरीब को न्याय दिला सकती है, किसी भ्रष्ट अधिकारी को बेनकाब कर सकती है और किसी प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए मजबूर कर सकती है। यही पत्रकारिता की असली ताकत है।
पत्रकारिता कभी आसान रास्ता नहीं रही। यह ऐसा रास्ता है जहाँ सम्मान से ज्यादा संघर्ष मिलता है। कई बार अपने ही लोग विरोध में खड़े हो जाते हैं। सत्ता नाराज़ होती है, प्रशासन दबाव बनाता है और समाज का एक हिस्सा भी सच सुनना पसंद नहीं करता। लेकिन इसके बावजूद जो व्यक्ति सच के साथ खड़ा रहता है, वही असली पत्रकार कहलाने का अधिकार रखता है।
पत्रकार होना एक पद हो सकता है, लेकिन पत्रकारिता एक विचार है। पद खत्म हो सकता है, संस्थान बंद हो सकते हैं, चैनल बदल सकते हैं, लेकिन विचार कभी खत्म नहीं होते। सच लिखने वाले लोग हर दौर में पैदा होते रहेंगे। भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ने वाले पत्रकार कल भी थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे। क्योंकि जब तक अन्याय रहेगा, तब तक उसे उजागर करने वाली कलम भी जीवित रहेगी।
लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि उसमें सवाल पूछने की आजादी होती है। और जब तक यह आजादी बची हुई है, तब तक पत्रकारिता भी जीवित रहेगी। क्योंकि पत्रकारिता केवल खबरों का व्यापार नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक नैतिक दायित्व है। यह जनता की आवाज़ है, लोकतंत्र की सांस है और सच को जिंदा रखने की सबसे बड़ी उम्मीद भी।
सनास्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से व्हाट्सप्प ग्रुप सदस्य राजेंद्र सिंह जादौन की लेख प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित। #moj_content #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #भोपाल_जनक्रांति
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हिन्दू -मुस्लिम -सिख -ईसाई हम सब है भाई -भाई "राष्ट्रीय भाई दिवस के अवसर पर जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन (वेव ) प्रकाशन परिवार की ओर से राष्ट्रीय भाई दिवस की राष्ट्र वाशियो को हार्दिक शुभकामनायें..
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जनता बेहाल स्टाम्प वेंडर हो रहे मालामाल
छोटे स्टाम्प की किल्लत से आमजन हो रहें परेशान अवैध राशि लेने का आरोप
समस्तीपुर जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
स्टाम्प वेंडर लगा रहें कोषागार पदाधिकारी व कर्मचारियों पर अवैध राशि लेने का आरोप
समस्तीपुर कोषागार में “स्टांप खेल” पर उठते सवाल, आखिर कब रुकेगी खुलेआम लूट..?
समस्तीपुर
समस्तीपुर में सरकारी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आम जनता की सुविधा के लिए बनाए गए कोषागार कार्यालय में इन दिनों कथित रूप से स्टांप विक्रेताओं की मनमानी चरम पर बताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि 100 रुपये का स्टांप खुलेआम 200 रुपये तक में बेचा जा रहा है, और जब कोई इसका विरोध करता है तो जवाब मिलता है— “कोषागार में घूस देना पड़ता है।”
यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल आम नागरिकों की जेब पर डाका नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था और प्रशासनिक ईमानदारी पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है। आखिर किसके संरक्षण में यह खेल चल रहा है? क्यों आम जनता मजबूर होकर दोगुने दाम पर स्टांप खरीदने को विवश है?
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ “कोरम पूरा” करने तक सीमित हैं। जनता की शिकायतें सुनने वाला कोई नहीं। कार्यालयों में अनुशासन और पारदर्शिता की जगह दलाली और दबाव का माहौल बनता जा रहा है।
स्टांप विक्रेता यदि सरकारी निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली कर रहे हैं, तो यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में संबंधित स्टांप वेंडरों का लाइसेंस तत्काल रद्द होना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यह भी जांच जरूरी है कि कहीं विभागीय मिलीभगत से यह अवैध वसूली तो नहीं चल रही।
प्रशासन को यह समझना होगा कि जनता अब चुप रहने वाली नहीं है। सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए होते हैं, न कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को लूटने के लिए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।
समस्तीपुर के जिलाधिकारी एवं संबंधित विभाग को चाहिए कि कोषागार में चल रही कथित अनियमितताओं की तत्काल जांच कराएं, स्टांप बिक्री की निगरानी बढ़ाएं और दोषियों पर उदाहरणात्मक कार्रवाई करें ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और सरकारी व्यवस्था पर विश्वास कायम रह सके।
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राजद नेताओं ने पूर्व पंचायत अध्यक्ष मोo अनवारूल हक के निधन पर जताया शोक, अहले खाना से की ताज़ियत
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
मरहूम मोo अनवारूल हक राजद के एक मजबूत, वफादार और संघर्षशील सिपाही थे। उन्होंने पार्टी और समाज के लिए हमेशा समर्पण भाव से कार्य किया, जिसकी खिदमात और संघर्ष को कभी भुलाया नहीं जा सकता : मोहम्मद कारी सोहैब
समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 23 मई 2026)। रोसड़ा प्रखंड अंतर्गत चकथात पंचायत के पूर्व पंचायत अध्यक्ष मोo अनवारूल हक का लंबी बीमारी के बाद पिछले दिनों इंतिक़ाल हो गया। उनके निधन की सूचना मिलने पर शनिवार की शाम राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की एक टीम उनके आवास पहुंची और अहले खाना से मुलाकात कर ताज़ियत पेश की।
इस अवसर पर विधान पार्षद मो. कारी सोहैब ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मरहूम मोo अनवारूल हक राजद के एक मजबूत, वफादार और संघर्षशील सिपाही थे। उन्होंने पार्टी और समाज के लिए हमेशा समर्पण भाव से कार्य किया, जिसकी खिदमात और संघर्ष को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने दुआ करते हुए कहा कि अल्लाह मरहूम की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे तथा अहले खाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
ताज़ियत प्रकट करने पहुंचे नेताओं में पूर्व विधान पार्षद सह राजद जिलाध्यक्ष रोमा भारती, प्रधान महासचिव विपीन सहनी, प्रदेश महासचिव राजेन्द्र सहनी, जिला राजद प्रवक्ता राकेश कुमार ठाकुर, राजद दलित सेल के जिलाध्यक्ष सत्यविंद पासवान, प्रखंड अध्यक्ष रामस्वार्थ यादव, राजद शिक्षक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष शत्रुध्न यादव, नगर निकाय प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र यादव, राजद नेता मधुरेश सिन्हा, प्रोफेसर रामाश्रय यादव, दशरथ सहनी, सौरभ सुमन, राहुल कुमार मेहता, मो. जाकिर, करण भास्कर एवं गोविंद राय सहित कई लोग मौजूद थे।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित। #samastipur ##Bihar politics #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #moj_content #🆕 ताजा अपडेट










![moj_content - ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र है बाबजूद ग्रामीण क्राईंटरिया से जोड़कर ४५ दिन में गेस सिलिडर देने के 45 নিন इंतज़ार नहीं खिलाफ आंदोलन में चलेगा! आप सब भाग लेंगे? Rya_inous] ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र है, फिर भी हमें ग्रामीण क्राईटेरिया से 45 ताजपुर जोड़कर ४५ दिन बाद गैस क्यों? दिन का इंतज़ार नगर परिषद यह उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है, क्षतर बंद करो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे! चेितावनी मार्व ३० मई २०२६ दिन : शनिवार समय : सुबह १०:०० बजे जनता मैदान / स्थान RYA _ इनोस कर्बला पोखर , ताजपुर के बैनर तले एकजुट हों हक लेकर रहेंगे! आवाज उठाएं ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र है बाबजूद ग्रामीण क्राईंटरिया से जोड़कर ४५ दिन में गेस सिलिडर देने के 45 নিন इंतज़ार नहीं खिलाफ आंदोलन में चलेगा! आप सब भाग लेंगे? Rya_inous] ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र है, फिर भी हमें ग्रामीण क्राईटेरिया से 45 ताजपुर जोड़कर ४५ दिन बाद गैस क्यों? दिन का इंतज़ार नगर परिषद यह उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है, क्षतर बंद करो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे! चेितावनी मार्व ३० मई २०२६ दिन : शनिवार समय : सुबह १०:०० बजे जनता मैदान / स्थान RYA _ इनोस कर्बला पोखर , ताजपुर के बैनर तले एकजुट हों हक लेकर रहेंगे! आवाज उठाएं - ShareChat moj_content - ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र है बाबजूद ग्रामीण क्राईंटरिया से जोड़कर ४५ दिन में गेस सिलिडर देने के 45 নিন इंतज़ार नहीं खिलाफ आंदोलन में चलेगा! आप सब भाग लेंगे? Rya_inous] ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र है, फिर भी हमें ग्रामीण क्राईटेरिया से 45 ताजपुर जोड़कर ४५ दिन बाद गैस क्यों? दिन का इंतज़ार नगर परिषद यह उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है, क्षतर बंद करो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे! चेितावनी मार्व ३० मई २०२६ दिन : शनिवार समय : सुबह १०:०० बजे जनता मैदान / स्थान RYA _ इनोस कर्बला पोखर , ताजपुर के बैनर तले एकजुट हों हक लेकर रहेंगे! आवाज उठाएं ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र है बाबजूद ग्रामीण क्राईंटरिया से जोड़कर ४५ दिन में गेस सिलिडर देने के 45 নিন इंतज़ार नहीं खिलाफ आंदोलन में चलेगा! आप सब भाग लेंगे? Rya_inous] ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र है, फिर भी हमें ग्रामीण क्राईटेरिया से 45 ताजपुर जोड़कर ४५ दिन बाद गैस क्यों? दिन का इंतज़ार नगर परिषद यह उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है, क्षतर बंद करो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे! चेितावनी मार्व ३० मई २०२६ दिन : शनिवार समय : सुबह १०:०० बजे जनता मैदान / स्थान RYA _ इनोस कर्बला पोखर , ताजपुर के बैनर तले एकजुट हों हक लेकर रहेंगे! आवाज उठाएं - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_617066_85dacb1_1779557615592_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=592_sc.jpg)

![moj_content - बेहाल जनता 40 ७ Lannas Rs: रु॰ १० आारत रूपवे 5.10 स्टाम्प वेंडर हो रहे मालामाल JUDICIAL NON INDIA छोटे स्टाम्प की किल्लत से आमजन हो रहें परेशान अवैध राशि लेने का आरोप CIR समस्तीपुर ं जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट बंद करो जिला कोषागार स्टाम्प वेंडर लगा रहें कार्यालय समस्तीपुर कोषागार पदाधिकारी व कर्मचारियों पर अवैध राशि लेने का आरोप के लिए स्टाम्प लंबी लाइन जनता परेशान समस्तीपुर कोषागार में जिला कोषागार समस्तीपुर 0 ४स्टांप खेल पर उठते सवाल, आखिर कब रुकेगी खुलेआम लूट..? भ्रष्टाचार पर रोक पारदर्शिता लाओ न्याय चाहिए ] जनता का हक जनता को दो न्याय की ओर भरोसा चाहिए व्यवस्था बचाओ बेहाल जनता 40 ७ Lannas Rs: रु॰ १० आारत रूपवे 5.10 स्टाम्प वेंडर हो रहे मालामाल JUDICIAL NON INDIA छोटे स्टाम्प की किल्लत से आमजन हो रहें परेशान अवैध राशि लेने का आरोप CIR समस्तीपुर ं जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट बंद करो जिला कोषागार स्टाम्प वेंडर लगा रहें कार्यालय समस्तीपुर कोषागार पदाधिकारी व कर्मचारियों पर अवैध राशि लेने का आरोप के लिए स्टाम्प लंबी लाइन जनता परेशान समस्तीपुर कोषागार में जिला कोषागार समस्तीपुर 0 ४स्टांप खेल पर उठते सवाल, आखिर कब रुकेगी खुलेआम लूट..? भ्रष्टाचार पर रोक पारदर्शिता लाओ न्याय चाहिए ] जनता का हक जनता को दो न्याय की ओर भरोसा चाहिए व्यवस्था बचाओ - ShareChat moj_content - बेहाल जनता 40 ७ Lannas Rs: रु॰ १० आारत रूपवे 5.10 स्टाम्प वेंडर हो रहे मालामाल JUDICIAL NON INDIA छोटे स्टाम्प की किल्लत से आमजन हो रहें परेशान अवैध राशि लेने का आरोप CIR समस्तीपुर ं जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट बंद करो जिला कोषागार स्टाम्प वेंडर लगा रहें कार्यालय समस्तीपुर कोषागार पदाधिकारी व कर्मचारियों पर अवैध राशि लेने का आरोप के लिए स्टाम्प लंबी लाइन जनता परेशान समस्तीपुर कोषागार में जिला कोषागार समस्तीपुर 0 ४स्टांप खेल पर उठते सवाल, आखिर कब रुकेगी खुलेआम लूट..? भ्रष्टाचार पर रोक पारदर्शिता लाओ न्याय चाहिए ] जनता का हक जनता को दो न्याय की ओर भरोसा चाहिए व्यवस्था बचाओ बेहाल जनता 40 ७ Lannas Rs: रु॰ १० आारत रूपवे 5.10 स्टाम्प वेंडर हो रहे मालामाल JUDICIAL NON INDIA छोटे स्टाम्प की किल्लत से आमजन हो रहें परेशान अवैध राशि लेने का आरोप CIR समस्तीपुर ं जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट बंद करो जिला कोषागार स्टाम्प वेंडर लगा रहें कार्यालय समस्तीपुर कोषागार पदाधिकारी व कर्मचारियों पर अवैध राशि लेने का आरोप के लिए स्टाम्प लंबी लाइन जनता परेशान समस्तीपुर कोषागार में जिला कोषागार समस्तीपुर 0 ४स्टांप खेल पर उठते सवाल, आखिर कब रुकेगी खुलेआम लूट..? भ्रष्टाचार पर रोक पारदर्शिता लाओ न्याय चाहिए ] जनता का हक जनता को दो न्याय की ओर भरोसा चाहिए व्यवस्था बचाओ - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_410539_2f54a6a4_1779552409008_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=008_sc.jpg)
