Arvind Bhardwaj
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2️⃣2️⃣💎0️⃣2️⃣💎2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ *🔥 आज की प्रेरणा प्रसंग 🔥* *🌹 अपनी क्षमता को पहचानिए 🌹* एक पत्थर काटने वाला मजदूर अपनी दिहाड़ी करके अपना समय बिता रहा था, पर मन ही मन असंतुष्ट था। एक दिन ऐसे ही उसे लगा कि उसको कोई शक्ति प्राप्त हो गयी है जिससे उसकी सारी इच्छा पूरी हो सकती है। शाम को एक व्यापारी के बड़े घर के सामने से गुजरते हुए उसने व्यापारी के ठाट बाठ देखे, गाड़ी घोड़ा, घर की सजावट देखी। अब उसके मन में इच्छा हुयी कि क्या पत्थर काटते काटते जिन्दगी गुजारनी है। क्यों न वो व्यापारी हो जाए। अचानक उसकी इच्छा पूरी हो गयी, धन प्राप्त हो गया, नया घर, नयी गाडी, सेवक सेविका, मतलब पूरा ठाटबाट। एक दिन एक बड़ा सेनापति उसके सामने से निकला अपने सैनिको के साथ, उसने देखा कि क्या बात है? कोई कितना भी धनी क्यों न हो, इस सेनापति के आगे सर झुकाता है। मुझे सेनापति बनना है। बस शक्ति से वो सेनापति बन गया। अब वो गर्व से बीच में बने सिंहासन पर बैठ सकता था, जनता उसके सामने दबती थी। सैनिको को वो मनचाही का आदेश दे सकता था। पर एक दिन तपती धुप में उसे गरमी के कारण उठना पडा, क्रोध से उसने सूर्य को देखा। पर सूर्य पर उसका कोई प्रभाव नहीं पडा, वो मस्ती से चमकता रहा। ये देखकर उसके मन में आया, अरे सूर्य तो सेनापति से भी ज्यादा ताकतवर है, देखो इस पर कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है। उसने इच्छा की कि वो सूर्य बन जाए। देखते ही देखते वो सूर्य बन गया। अब सूर्य बनकर उसकी मनमानी चलने लगी, अपनी तपन से उसने संसार को बेहाल कर दिया।किसानो की फसल तक जल गयी, इसको देख कर उसे अपनी शक्ति का अहसास होता रहा और वो प्रसन्न हो गया। पर अचानक एक दिन एक बादल का टुकडा आकर उसके और धरती के बीच में खडा हो गया। ओह ये क्या, एक बादल का टुकडा सूर्य की शक्ति से बड़ा है, क्यों न मैं बादल बन जाऊं। अब वो बादल बन गया।बादल बन कर जोर से गरज कर वो अपने को संतुष्ट समझता रहा। जोर से बरसात भी करने लगा।अचानक वायु का झोंका आया और उसको इधर से उधर धकेलने लगा, अरे ये क्या हवा ज्यादा शक्तिशाली, क्यों न मैं हवा बन जाऊं। बन गया वो हवा। हवा बन कर फटाफट पृथ्वी का चक्कर लगाने लगा। पर फिर गड़बड़ हो गयी, एक पत्थर सामने आ गया। उसको वो डिगा नहीं पाया। सोचा चलो पत्थर शक्तिशाली है मैं पत्थर बन जाता हूँ। बन गया पत्थर। पर ये भी ज्यादा देर नहीं चल पाया। क्योंकि एक पत्थर काटने वाला आया और उसे काटने लगा। फिर सोच में पड़ गया कि ओह पत्थर काटने वाला ज्यादा शक्तिशाली है। ओह यह मैंने क्या किया। मैं तो पत्थर काटने वाला ही था !!! इतनी देर में उसकी नींद खुल गयी और स्वप्न भंग हो गया। पर फर्क था – वो अपने से संतुष्ट था। *हमें अपने अन्दर की शक्ति और क्षमता का पता नहीं होता, और जो दिखते किसी काम के नहीं, वही किसी न किसी काम के जरूर होते हैं। अपनी क्षमता को पहचानिए।* *👉शिक्षा* खुद की अहमियत समझिए और आत्मविश्वास रखिए। *"बदलने की नहीं, खुद को पहचानने की ज़रूरत है।"* खुश रहिए, खुद से प्रेम करिए — क्योंकि आप जैसे हैं, वैसे ही अद्वितीय हैं। *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।* *🙏🌹श्री राधे राधे🌹🙏* #🖊 एक रचना रोज़ ✍
प्रीपेड मृत्यु Pune के एक बड़े श्मशान घाट में दोपहर के 3 बजे थे। ‘रोहन’ (उम्र 35 वर्ष), जो अमेरिका की एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट था, अभी-अभी फ्लाइट से उतरकर सीधे श्मशान घाट पहुँचा था। उसके पिता, ‘सदाशिवराव’ (उम्र 75 वर्ष), कल रात गुजर गए थे। रोहन के हाथ में महंगा लैपटॉप बैग था और आँखों पर रेबैन का चश्मा। उसे पसीना आ रहा था और वह बार-बार घड़ी देख रहा था। वहाँ ‘मोक्ष इवेंट मैनेजमेंट’ (अंतिम संस्कार करने वाली एजेंसी) का कर्मचारी ‘सुमित’ खड़ा था। सुमित ने सारी तैयारी कर रखी थी। लकड़ियाँ सजा दी थीं, पंडित बुला लिया था, और सदाशिवराव के पार्थिव शरीर को स्नान कराकर तैयार रखा था। रोहन आया। उसने पिता के चेहरे की ओर एक नजर डाली। आँखों से एक-दो आँसू निकल आए। उसने सुमित से पूछा: “मिस्टर सुमित, सब तैयार है ना? मुझे 6 बजे की रिटर्न फ्लाइट पकड़नी है। कल मेरी बहुत जरूरी मीटिंग है। प्लीज़ जल्दी कराइए।” सुमित को आश्चर्य हुआ। जिस पिता ने इस बेटे को पाल-पोशकर बड़ा किया, उस पिता की चिता के पास रुकने के लिए इस बेटे के पास तीन घंटे भी नहीं थे। सुमित ने शांत होकर सिर हिलाया। विधि पूरी हुई। रोहन ने मुखाग्नि दी। धुएँ के गुबार आसमान में उठ गए। रोहन ने सुमित को अलग ले जाकर चेकबुक निकाली। “सुमित, धन्यवाद। आपने अच्छी व्यवस्था की। आपका बिल कितना हुआ? 50 हजार? 1 लाख? राशि बताइए, मैं अभी चेक दे देता हूँ। मैं दोबारा नहीं आ पाऊँगा, अस्थि विसर्जन भी आप ही करवा दीजिए।” सुमित ने रोहन की ओर देखा। उसके चेहरे पर एक अजीब-सी मुस्कान थी। उसने जेब से एक पुरानी फाइल निकाली और रोहन के हाथ में दी। “साहब, बिल देने की जरूरत नहीं है। आपका बिल ‘पेड’ है।” रोहन चौंक गया। “पेड? किसने भरा पैसा? क्या मेरे चाचा ने?” सुमित बोला: “नहीं साहब। पाँच साल पहले सदाशिवराव जी (आपके पिता) हमारे ऑफिस आए थे। वे बहुत बीमार थे, ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। उन्होंने मुझसे पूछा था — ‘आपका पैकेज क्या है? मेरे बेटे को तकलीफ न हो, सब इंतज़ाम कर देंगे ना?’ हमने उन्हें पैकेज बताया। उन्होंने उसी दिन 50,000 रुपये एडवांस जमा कर दिए थे। और यह ‘चिट्ठी’ मुझे देकर कहा था — ‘मेरा बेटा आए तो उसे यह दे देना। और अगर वह न आ सके, तो आप ही मेरा अंतिम संस्कार कर देना।’” सुमित ने वह चिट्ठी रोहन को दी। रोहन ने काँपते हाथों से चिट्ठी खोली। उसमें सदाशिवराव के काँपते अक्षरों में लिखा था: “प्रिय रोहन, बेटा, मुझे पता है तुम बहुत व्यस्त हो। अमेरिका में तुम्हें साँस लेने की भी फुर्सत नहीं होती। मुझे मालूम है कि मेरी मृत्यु की खबर सुनकर तुम्हें चिंता होगी। ‘छुट्टी मिलेगी या नहीं? टिकट मिलेगा या नहीं? मीटिंग का क्या होगा?’ ये सवाल तुम्हारे मन में आएँगे। बेटा, तुम्हारा समय और तुम्हारा करियर बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने तुम्हें इसलिए पाला है कि तुम दुनिया जीत सको। एक बूढ़े की लाश के लिए तुम अपना नुकसान मत करना। इसलिए मैंने अपनी मृत्यु की व्यवस्था पहले ही कर दी है। एजेंसी को पैसे दे दिए हैं। वे सब कर देंगे। तुम आ सको तो अच्छा है, न आ सको तो भी मुझे कोई शिकायत नहीं। बस एक विनती है — जब मैं तुम्हें बचपन में स्कूल छोड़ने जाता था, तो तुम्हारा हाथ कभी नहीं छोड़ा था। आज जब तुम मुझे अग्नि दो, तो तुम्हारा हाथ काँपना नहीं चाहिए। जल्दी वापस चले जाना। तुम्हारी पत्नी इंतज़ार कर रही होगी। तुम्हारा, पापा।” चिट्ठी पढ़ते ही रोहन के हाथ से चेकबुक कीचड़ में गिर गई। उस श्मशान में, जहाँ लकड़ियों के जलने की आवाज आ रही थी… वहाँ अब रोहन का अहंकार और करियर का घमंड जलकर राख हो चुका था। वह घुटनों के बल बैठ गया। चिल्लाया — “पापा…!! मुझे माफ कर दीजिए!” उसने सुमित के पैर पकड़ लिए। “सुमित, मुझे अमेरिका नहीं जाना। मुझे अपने पापा के साथ रहना है! मैंने करोड़ों रुपये कमाए, पर मैं तो असली भिखारी निकला! मेरे पापा ने मरते समय भी मेरी मीटिंग की चिंता की… और मैं उनके अंतिम दर्शन का भी हिसाब लगा रहा था?” उस दिन रोहन फ्लाइट नहीं पकड़ सका। वह वहीं, जलती चिता के सामने रात भर बैठा रहा। क्योंकि उसे समझ आ गया था — ‘प्री-पेड’ सिर्फ सिम कार्ड हो सकता है, पिता का प्रेम नहीं। पिता का प्रेम ‘अनलिमिटेड’ होता है, और उसकी कीमत दुनिया की कोई भी करंसी नहीं चुका सकती। आप दुनिया में कितने भी बड़े बन जाएँ, कितना भी पैसा कमा लें… लेकिन जिन माता-पिता ने आपका बचपन सँवारा, उनके अंतिम सफर में साथ देने से कभी पीछे मत हटिए। एजेंसी अंतिम संस्कार कर सकती है, लेकिन आँसू एजेंसी के नहीं होते — वे अपने खून के रिश्तों के ही होते हैं। ☝️😳😩😭 Father’s Day केवल एक दिन का नहीं होता… 🙏 जय जय सियाराम 🙏 #🖊 एक रचना रोज़ ✍
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की कथा। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ जाने आखिर क्यों किया था भगवान शिव ने अपने ही भक्त रावण के भाई कुंभकर्ण के पुत्र का वध? अपने भाई लंकापति रावण के समान ही कुम्भकर्ण की भी शिव के प्रति अगाध श्रद्धा थी , ऋषि विश्रवा व कैकसी के दूसरे पुत्र के रूप में कुम्भकर्ण का जन्म हुआ था।राक्षस कुल में जन्म लेने के बावजूद भी कुम्भकर्ण में कोई अप्रवर्ति नहीं थी वह सदैव धर्म के मार्ग में चलने वाला व्यक्ति था उसकी यही विशेषता उसे राक्षस कुल के अन्य राक्षसों से अलग करती थी. कुम्भकर्ण के इस प्रताप को देखकर देवता भी उनसे जलते थे। रावण जब भगवान शिव की तपस्या करने बैठता था तो कुम्भकर्ण भी भाई विभीषण को साथ में लेकर शिव की तपस्या में लीन हो जाता था। रावण के हर धार्मिक कार्यो में कुम्भकर्ण उसके साथ होता था। राक्षस कुल में रावण के बाद भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त होने के बावजूद भी आखिर क्यों भगवान शिव कुम्भकर्ण के पुत्र का वध किया आइये विस्तार से जानते है इस कथा को :- जब कुम्भकर्ण अपने भाई रावण के लिए राम के साथ युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ उस समय कुम्भकर्ण के पत्नी गर्भवती थी। कुम्भकर्ण की मृत्यु के पश्चात उसकी पत्नी कामरूप प्रदेश में रहने लगी तथा वहां उसने कुम्भकर्ण के भीम नामक महाप्रतापी पुत्र को जन्म दिया। भीम अपने पिता कुम्भकरण के समान ही अत्यन्त बलशाली था जब वह थोड़ा बड़ा हुआ तो एक दिन उसने अपनी माँ से उसके पिता के बारे में पूछा। भीम की माँ ने उसे बताया की कैसे भगवान श्री राम के साथ युद्ध के दौरान उसके पिता कुम्भकर्ण वीरगति को प्राप्त हुए। भगवान विष्णु के अवतार श्री राम द्वारा अपने पिता के वध की खबर सुनकर वह महाबली राक्षस अत्यन्त क्रोधित हो गया। अपने पिता के वध का बदला भगवान विष्णु से लेने के लिए भीम हिमालय की उच्ची चोटियों पर गया तथा वहां उसने एक हजार वर्ष तक कठिन तपस्या की।उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्र्ह्मा जी उसके सामने प्रकट हुए तथा उसे लोक विजयी होने का वरदान दिया। ब्र्ह्मा जी से वरदान पाकर वह राक्षस और भी अधिक बलशाली हो गया तथा अब वह निर्दोष प्राणियों पर अत्याचार करने लगा व उन्हें प्रताड़ित करने लगा। उसने देवलोक पर भी अपने अपने वरदान के प्रभाव से विजयी हासिल की तथा देवताओ को मजबूर होकर स्वर्ग से अपने प्राण बचाकर भागना पड़ा। इस प्रकार भीम का पुरे स्वर्गलोक में अधिकार हो गया। इसके बाद उसने भगवान श्री इंद्र से भी युद्ध कर उन्हें युद्ध में परास्त कर दिया। श्रीहरि को पराजित करने के पश्चात उसने कामरूप के परम शिवभक्त राजा सुदक्षिण पर आक्रमण करके उन्हें मंत्रियों-अनुचरों सहित बंदी बना लिया।इस प्रकार धीरे-धीरे उसने सारे लोकों पर अपना अधिकार जमा लिया। उसके अत्याचार से वेदों, पुराणों, शास्त्रों और स्मृतियों का सर्वत्र एकदम लोप हो गया। उसने धरती सभी धार्मिक कार्यो को बंद करवा दिया जिस कारण ऋषि मुनि भी उससे दुखी होकर भगवान शिव के शरण में गए और उन्होंने भगवान शिव से भीम के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की प्राथना करी। भगवान शिव उन सभी की प्राथना सुनी और उन्हें जल्द ही भीम के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया। उधर भगवान शिव के भक्त सुदक्षिण राक्षस भीम के बंदी गृह में भगवान शिव के पार्थिव शिवलिंग को रखकर उनका ध्यान कर रहे थे। भीम ने जब राजा सुदक्षिण को भगवान शिव के पार्थिव शिवलिंग की पूजा करते देखा तो वह गुस्से से आग-बबूला हो गया।उसने क्रोध में अपनी तलवार निकालकर जैसे ही शिव के पार्थिव शिवलिंग प्रहार करना चाहा उसी समय उस शिवलिंग से साक्षात शिव प्रकट हुए। उन्होंने अपने हुंकार मात्र से ही राक्षस भीम को अग्नि में भष्म कर दिया।भगवान शिवके इस अद्भुत कृत्य को देखकर सभी ऋषि मुनि और देवता वहां प्रकट हुए व भगवान शिव की स्तुति करने लगे। उन्होंने भगवान शिव से प्राथना करी की आप लोक-कल्याण के लिए सदा यही निवास करें। यह क्षेत्र शास्त्रों के अनुसार अपवित्र बताया गया है परन्तु आपके निवास से यह परम पवित्र और पूण्य क्षेत्र बन जाएगा। भगवान शिव ने उन सभी की प्राथना सुन ली तथा वहां ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा के लिए स्थापित हो गए। उनका यह ज्योतिर्लिंग भीमेश्वर के नाम से विख्यात हुआ तथा इस ज्योतिर्लिंग का वर्णन शिवपुराण में भी मिलता है। इस ज्योतिर्लिंग की महिमा अमोघ है।इसके दर्शन का फल कभी व्यर्थ नहीं जाता। भक्तों की सभी मनोकामनाएं यहां आकर पूर्ण हो जाती हैं। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *🌹🙏जय महाकाल🌹🙏* #🖊 एक रचना रोज़ ✍
🙏🙏 हर हर महादेव 🙏🙏           🌹🙏*गौ माता की विशेषता*🙏🌹            (ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र की दृष्टि से) 🔱👉 *ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र में गौ (गाय) की महिमा बताई गई है। आइए जानते हैं: ⤵️                  🌹👇👇👇🌹 🍄 01) *ज्योतिषमें गोधूलिका समय विवाहके लिये सर्वोत्तम माना गया है। 🍄 02) *यदि यात्रा के प्रारम्भ में गाय सामने पड़ जाय अथवा अपने बछड़े को दूध पिलाती हुई सामने पड़ जाय तो यात्रा सफल होती है। 🍄 03) *जिस घर में गाय होती है, उसमें वास्तुदोष स्वतः ही समाप्त हो जाता है। 🍄 04) *जन्मपत्री में यदि शुक्र अपनी नीच राशि कन्या पर हो, शुक्र की दशा चल रही हो या शुक्र अशुभ भाव (6,8,12)-में स्थित हो तो प्रात:काल के भोजन में से एक रोटी सफेद रंग की गाय को खिलाने से शुक्र का नीचत्व एवं शुक्र सम्बन्धी कुदोष स्वत: ही समाप्त हो जाता है। 🍄 05) *पितृदोष से मुक्ति :👉 *सूर्य, चन्द्र, मंगल या शुक्र की युति राहु से हो तो पितृदोष होता है।         *यह भी मान्यता है कि सूर्य का सम्बन्ध पिता से एवं मंगल का सम्बन्ध रक्त से होने के कारण सूर्य यदि शनि, राहु या केतु के साथ स्थित हो या दृष्टि सम्बन्ध हो तथा मंगल की युति राहु या केतु से हो तो पितृदोष होता है।         *इस दोष से जीवन संघर्षमय बन जाता है। यदि पितृदोष हो तो गाय को प्रतिदिन या अमावास्या को रोटी, गुड़, चारा आदि खिलाने से पितृदोष समाप्त हो जाता है। 🍄 06) *किसी की जन्मपत्री में सूर्य नीच राशि तुला पर हो या अशुभ स्थिति में हो अथवा केतु के द्वारा परेशानियाँ आ रही हों तो गाय में सूर्य-केतु नाड़ी में होने के फल स्वरूप गाय की पूजा करनी चाहिये, दोष समाप्त हों जातें हैं। 🍄 07) *यदि रास्ते में जाते समय गोमाता आती हुई दिखायी दें तो उन्हें अपने दाहिने से जाने देना चाहिये, यात्रा सफल होगी। 🍄 08) *यदि बुरे स्वप्न दिखायी दें तो मनुष्य गो माताका नाम ले, बुरे स्वप्न दिखने बन्द हो जायेंगे। 🍄 09) *गाय के घी का एक नाम आयु भी है-                    👉 'आयई घृतम्'👈      *अत: गाय के दूध-घी से व्यक्ति दीर्घायु होता है। हस्तरेखा में आयु रेखा टूटी हुई हो तो गाय का घी काम में लें तथा गाय की पूजा करें। 🍄 10) *देशी गाय की पीठ पर जो ककुद् (कूबड़) होता है, वह 'बृहस्पति' है।         *अत: जन्मपत्रिका में यदि बृहस्पति अपनी नीच राशि मकर में हों या अशुभ स्थिति में हों तो देशी गाय के इस बृहस्पति भाग एवं शिवलिंग रूपी ककुद् के दर्शन करने चाहिये। गुड़ तथा चने की दाल रखकर गाय को रोटी भी दें। 🙏🙏 *गोमाता के नेत्रों में प्रकाश स्वरूप भगवान् सुर्य तथा ज्योत्स्ना के अधिष्ठाता चन्द्रदेव का निवास होता है।         *जन्म पत्री में सूर्य-चन्द्र कमजोर हो तो गो नेत्र के दर्शन करें, लाभ होगा।            🌷*वास्तुदोषों का निवारण*🌷                     (गौ माता करती है) 🌋 *जिस स्थान पर भवन, घर का निर्माण करना हो, यदि वहाँ पर बछड़े वाली गाय को लाकर बाँधा जाय तो वहाँ सम्भावित वास्तु दोषों का स्वत: निवारण हो जाता है। कार्य निर्विघ्न पूरा होता है और समापन तक आर्थिक बाधाएँ नहीं आतीं। 🌋 *गाय के प्रति भारतीय आस्था को अभिव्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि गाय सहज रूप से भारतीय जनमानस में रची-बसी है। गोसेवा को एक कर्तव्य के रूप में माना गया है। गाय सृष्टि मातृका कहीं जाती है। 🌋 *गाय के रूप में पृथ्वी की करुण पुकार और विष्णु से अवतार के लिये निवेदन के प्रसंग पुराणों में बहुत प्रसिद्ध हैं। 'समरांगणसूत्रधार'-जैसा प्रसिद्ध बृहद्वास्तुग्रन्थ गोरूप में पृथ्वी-ब्रह्मादि के समागम-संवाद से ही आरम्भ होता है। 🌋 *वास्तुग्रन्थ 'मयमतम्' में कहा गया है कि भवन निर्माणका शुभारम्भ करनेसे पूर्व उस भूमि पर ऐसी गाय को लाकर बाँधना चाहिये, जो सवत्सा (बछड़ेवाली) हो। नवजात बछडे को जब गाय दुलारकर चाटती है तो उसका फेन भूमिपर गिरकर उसे पवित्र बनाता है और वो समस्त दोषों का निवारण हो जाता है। यही वास्तु प्रदीप, अपराजित पृच्छा आदि ग्रन्थों में है। 🌋 *महाभारत के अनुशासन पर्व में कहा गया है कि गाय जहां बैठकर निर्भयता पूर्वक सांस लेती है तो उस स्थान के सारे पापों को खींच लेती है।      👉*निविष्टं गोकुलं यत्र श्वासं मुञ्चति निर्भयम।          विराजयति तं देशं पापं चास्यापकर्षति ।। 🌋 *यह भी कहा गया है कि जिस घर में गाय की सेवा होती है, वहाँ पुत्र-पौत्र, धन, विद्या आदि सुख जो भी चाहिये, मिल जाता है। यही मान्यता अत्रि संहिता में भी आयी है। महर्षि अत्रि ने तो यह भी कहा है कि जिस घर में सवत्सा धेनु नहीं हो, उसका मंगल-मांगल्य कैसे होगा? 🌋 *गाय का घर में पालन करना बहुत लाभकारी है। इससे घरों में सर्वबाधाओं और विघ्नों का निवारण हो जाता है। *बच्चों में भय नहीं रहता। विष्णुपुराण में कहा गया है कि जब श्रीकृष्ण पूतना के दुग्धपान से डर गये तो नन्द-दम्पती ने गाय की पूँछ घुमाकर उनकी नजर उतारी और भयका निवारण किया। 🌋 *सवत्सा गाय के शकुन लेकर यात्रा में जाने से कार्य सिद्ध होता है। 🌋 *पद्मपुराण और कूर्मपुराण में कहा गया है कि कभी गाय को लाँघकर नहीं जाना चाहिये। 🌋 *किसी भी साक्षात्कार, उच्च अधिकारी से भेंट आदि के लिये जाते समय गाय के रँभाने की ध्वनि कान में पड़ना शुभ है। 🌋 *संतान-लाभ के लिये गाय की सेवा अच्छा उपाय कहा गया है। 🌋*शिवपुराण एवं स्कन्दपुराण में कहा गया है कि गो सेवा और गोदान से यम का भय नहीं रहता। गाय के पाँवकी धूलिका भी अपना महत्त्व है। यह पापविनाशक है, ऐसा गरुड़ पुराण और पद्म पुराण का मत है। 🌋 *ज्योतिष एवं धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि गोधूलि वेला विवाहादि मंगलकार्यों के लिये सर्वोत्तम मुहूर्त है। जब गायें जंगल से चरकर वापस घर को आती हैं, उस समयको गोधूलि वेला कहा जाता है। गायके खुरों से उठने वाली धूलराशि। समस्त पाप-तापों को दूर करनेवाली है। 🌋 *पंचगव्य एवं पंचामृत की महिमा तो सर्व विदित है ही। 🙏🙏 *गोदान की महिमा से कौन अपरिचित है ! ग्रहों के अरिष्ट-निवारण के लिये गो ग्रास देने तथा गौ के दान की विधि ज्योतिष-ग्रन्थों में विस्तार से निरूपित है। इस प्रकार गाय सर्वविध कल्याणकारी ही है।    🌹🙏 सनातन धर्म से जुड़े                          एवं पाप का नाश करें 🙏🌹       🙏🙏सनातन धर्म की जय हो🙏🙏                  !🙏धन्यवाद।🙏                   🌹🙏*जयश्री राम*🙏🌹         🙏🏵️🍄💐🌹💐🍄🏵️🙏  #🖊 एक रचना रोज़ ✍
हिंदू कायर नहीं हुआ है!! बल्कि हिंदू आधुनिक हो चुका है।। घर तो खाली पड़े है, खेत बंजर हो चुके है।। घरों में बस बुजुर्ग दिखते है,, ये वन चाइल्ड पॉलिसी ने हिंदू समाज को बर्बाद कर दिया है।। सारे पार्क खाली रहते है, गलियों में भी बच्चे नहीं दिखते,, तालाब जोहड़ खाली पड़े है, रोड या खेतों की गलियों में लड़के दौड़ लगाते नहीं दिखते। बड़े बुजुर्ग के कंधे खाली है , कोई बच्चा उन पर बैठा हुआ नहीं दिखता!! हालात ऐसे है कि बुजुर्ग मर जाए तो कंधा देने के लिए 4 लड़के इक्कठे करने भारी हो जाते है,, शादी में घोड़ी के आगे नाचने वाले बच्चे और युवा लड़के नहीं दिखाई देते!! आस पड़ोस में बच्चा पैदा होने की खुशी में गीत गाने वाले प्रोग्राम खत्म हो चुके है,, पर हर गांव शहर में मृत्यु की ratio बहुत बढ़ चुकी है।। 1. मेरी लाइफ , मेरी चॉइस,, 2. मेरी लाइफ, इंडिपेंडेंट life,, 3. महिला बच्चे पैदा करने की मशीन नहीं है,,( पता नहीं ऐसे कितने पैदा कर दिए) 4.शादी एक बोझ है,, 5. क्या करेंगे अभी शादी करके,, 6. लड़की क्या लड़कों से कम है,, हमे तो अपनी एक लड़की ही लड़के से प्यारी है, हमे नहीं करना दूसरा बच्चा,, 7. एक ही लड़का बहुत है,, पार लगानी होगी तो यही लगा देगा,, 8. दो लड़के करेंगे तो जमीन बंटेगी,, झगड़े होगे।। 9. ऐसी महंगाई में एक ही बच्चा पाल ले वही बहुत है, इसी को पढ़ा लेगे,, 10. बच्चों में 3 से 4 साल का गैप करो,, 11. जब तक 30 के ना हो जाओ,, तब तक शादी मत करो,, इन 11 प्रकार की विचारधाराओं ने हिंदुओं के हालात ऐसे कर दिए कि मुगल लोग तुम्हारे घरों में घुस कर ह*त्या कर दे रहे हैं और तुम छाती पीट रहे हो कि न्याय दो,, सच तो ये है कि मर्द नामर्द नहीं हुए है,, बल्कि महिलाओं ने मर्द पैदा करने बंद कर दिए है।। अब इन हिंदू लड़कियों या महिलाओं के साथ मुगल लोग घर में घुस कर बलात्कार करना, लव जिहाद करना,, चौड़े में करने लगे है,, क्युकी मुगल जानते है कि अपने एक लड़के को मरने के लिए कौन बाहर भेजेगा?? मर्द इन महिलाओं के घर में रहे नहीं,, क्युकी बच्चे पैदा करना नहीं चाहती। जब माँ देवकी के ऊपर अत्याचार हुआ था,, उनके पुत्र मारे जा रहे थे,, तब क्या किसी समाज के इंसान ने उन माँ देवकी को छुड़वाया?? या उसकी सहायता की?? जी नहीं बिल्कुल नहीं की । क्या उसने समाज पर तंज़ कसा की क्या कोई मर्द वीर नहीं जो मेरी रक्षा कर सके,, नहीं कसा ,, क्योंकि वो जानती थी,, ऐसे वीर तो हमें ही पैदा करने है,, आखिर कार उसने अपने गर्भ से ही 8 वा पुत्र पैदा किया, जो अपने मां बाप और मारे गए सभी भाइयों का बदला ले सके। परन्तु अफसोस ,, वर्तमान मे हिंदुओं में ऐसी वीरांगनाएं नहीं रही जो वीर पुरुषों को पैदा कर सके,, वंश बेल , और राष्ट्र धर्म की रक्षा के लिए कम से कम 2 पुत्र पैदा कर सके,, बस रील में नंगापन फैलाना,, या एक कुतरी या कुटरू को पैदा करके बांझ होने से बचती है,, हिंदुओं में सावित्री वीरांगनाएं नहीं रही,, इसीलिए वीर मर्द नहीं रहे,, अब वीर पुरुष ऊपर से तो टपकेंगे नहीं ।। एक बात और,, मुगलों का इतिहास रहा है,, की ये महिलाओं ,, बच्चों और इकलौती औलाद पर हमला सबसे पहले करते है,, इनका सबसे पहला टारगेट इकलौता लड़का होता है। इसीलिए केवल एक लड़का पैदा करने वाली महिलाएं आज नहीं तो कल,, बांझ जरूर बनेगी।। कब तक भागेगी?? मुगल है वो, एक एक के लड़के को काटेंगे,, और तुम्हे मारकर भी तुम्हारे शरीर का क्या करेंगे ये मुझे बताने की आवश्यकता नहीं है.. साभार 🙏🏻 *राधे राधे 🌹🙏* #🖊 एक रचना रोज़ ✍
2️⃣1️⃣❗0️⃣3️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️* *!! व्यवस्था !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° जंगल में शेर ने एक फैक्ट्री डाली... उसमें एकमात्र काम करने वाली चींटियाँ थी जो समय से आती जाती थीं और फैक्ट्री का सारा काम करती थी। शेर का व्यसाय बहुत ही व्यवस्थित ढंग से चल रहा था। एक दिन शेर ने सोचा कि ये चींटियां इतना सुंदर काम कर रही है, अगर इसको किसी विशेषज्ञ के निगरानी में रख दूँ तो और बेहतर काम कर सकती है। ये ख्याल मन में आते ही शेर ने एक मधुमक्खी को मैनेजर नियुक्त कर दिया। मधुमक्खी को कार्य का बहुत अनुभव था और वह रिपोर्ट्स लिखने में भी बहुत होशियार थी। मधुमक्खी ने शेर से कहा कि सबसे पहले हमें चींटियों का काम करने का समय सारणी बनाना होगा। फिर उसके काम का सारा रिकार्ड अच्छी तरह रखने के लिए मुझे एक अलग से सेक्रेटरी चाहिए होगा। शेर ने खरगोश को सेक्रेटरी के रूप में नियुक्त कर दिया। शेर को मधुमक्खी का कार्य पसंद आया। उसने कहा कि चींटियों के अब तक पूरे हुए सारे कार्यों की रिपोर्ट दो और जो प्रगति हुई है उसको एक सुंदर ग्राफ बनाकर निर्देशित करो। मधुमक्खी ने कहा ठीक है, मगर मुझे इसके लिए कंप्यूटर, लेज़र प्रिंटर और प्रोजेक्टर चाहिए होगा। इस सबके लिए शेर ने एक कंप्यूटर डिपार्टमेंट बना दिया और बिल्ली को वहां का सर्वेसर्वा नियुक्त कर दिया। अब चींटी अपना काम करने के बजाय सिर्फ कागज़ी रिपोर्ट बनाने में ध्यान देने लगी, जिससे उसका काम पिछड़ता गया और अंततः प्रोडक्शन कम हो गया। शेर ने सोचा कि कंपनी में एक तकनीकी विशेषज्ञ रखा जाय जो मधुमक्खी की सलाहों पर अपनी राय दे सके। ऐसा सोंचकर उसने बंदर को तकनीकी विशेषज्ञ नियुक्त कर दिया। अब चींटी को जो भी काम दिया जाता वह उसको पूरी सामर्थ्य से करने की कोशिश करती लेकिन अगर काम कभी पूरा नहीं होता तो वह विवश होकर उसको अपूर्ण छोड़कर घर चली जाती। शेर को लगातार नुकसान होने लगा तो वह बहुत बेचैन हो उठा। कोई उपाय न देख मजबूरी में उसने उल्लू को नुकसान का कारण पता लगाने के लिए नियुक्त कर दिया। तीन महीने बाद उल्लू ने शेर को अपनी विस्तृत व बेहद गोपनीय रिपोर्ट सौंप दी; जिसमें उसने बताया कि फैक्ट्री में काम करने वालों की संख्या ज्यादा है औऱ कंपनी के घाटे को कम करने के लिए कर्मचारियों को सस्पेंड, नोटिस, बर्खास्त करना होगा... *शिक्षा:-* अब आप गंभीरता से सोचिए; किसको सस्पेंड, नोटिस, बर्खास्त किया जाएगा..?? चींटियों को... क्योंकि वास्तव में वही एक मात्र वर्कर थी। "यही व्यवस्था इन्सान करता है।" *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है, उसके पास समस्त है।।* ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ *राधे राधे🌹🙏* #🖊 एक रचना रोज़ ✍
12 ज्योतिर्लिंग और 12 राशियों के बीच सम्बन्ध 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ भगवान शिव के यूं तो कई ज्योतिर्लिंग हैं लेकिन 12 ज्योतिर्लिंग की प्रसिद्धि अधिक है। यह सभी ज्योतिर्लिंग उस स्थान पर बने हैं या स्थित हैं जिस स्थान का कोई न कोई ज्योतिष और खगोलीय महत्व है। जैसे महाकाल ज्योतिर्लिंग कर्क रेखा पर स्थित है और यहां से संपूर्ण धरती का समय निर्धारित होता है। इस प्रकार 12 ज्योतिर्लिंग का 12 राशियों से भी गहरा संबंध है। आओ जानते हैं। 12 ज्योतिर्लिंग और 12 राशियों के बीच सम्बन्ध 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 1. मेष 👉 इस राशि का संबंध रामेश्वर ज्योतिर्लिंग है। मेष राशि सूर्य की उच्च राशि है और सौरमास का प्रथम माह भी है। रामेश्वर को सूर्य का उच्च स्थान माना जाता है। सूर्य का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना त्रेतायुग में सूर्यवंशी भगवान श्रीराम ने की थी। सूर्य हमारी आत्मा, यश, मान सम्मान, पद और जीवन ऊर्जा का प्रतीक है। 2. वृष 👉 इस राशि का संबंध सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से है। वृषभ राशि चंद्र की राशि है। चंद्र को सोम भी कहते हैं। यहां पर चंद्र अपनी उच्च अवस्था में होता है। कहां जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग का निर्माण सतयुग में चंद्रदेव ने किया था। चंद्र हमारे मन और अच्छी सेहत का प्रतीक है। 3. मिथुन 👉 इस राशि का संबंध नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से है, जो गुजरात के द्वारिका में स्थित है। नागेश्‍वर को नागों का राजा कहा गया है। यह राशि कन्या और राहु की राशि है। इस इस राशी को राहु के लिए उच्च माना जाता है। राहु रहस्य, शक्ति और पराक्रम बढ़ाता है। 4. कर्क 👉 इस राशि का संबंध ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से है। यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा तट पर मन्धाता व शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है। कर्क चंद्र की राशि है। यह राशी बृहस्पति का उच्च स्थान है। ये ज्योतिर्लिंग *•ॐ"* के नाद से उत्पन्न हैं। बृहस्पति हमारे जीवन में आयु, ज्ञान और सौभाग्य देता है। 5. सिंह 👉 इस राशि का संबंध औरंगाबाद स्थित गिरीशनेश्वर ज्योतिर्लिंग से है। इन्हें धुशनेश्वर भी कहते हैं। इसकी पूजा से पापों का नाश होता है। ये तपस्वियों के राजा के नाम पर है। यह सूर्य का स्थान है। 6. कन्या 👉 इस राशि का संबंध मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग है जो आन्ध्र प्रदेश में है। यह बुध ग्रह का उच्च स्थान है। बुध ग्रह हमारे जीवन में नौकरी और व्यापार के साथ ही बुद्धि एवं वाणी को भी संचालित करता है। 7. तुला 👉 इस राशि का संबंध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से है जो अवंतिका उज्जैन में स्थित है। यह स्थान शनिदेव का उच्च स्थान है, जो समय का संचालन करते हैं। यहां हमें न्याय और ज्ञान के साथ ही वैराग्य प्राप्त होता है। यहां पर देवता भी काल के वश में रहते हैं। 8. वृश्चिक 👉 इस राशि का संबंध बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग से है जो झरखंड में स्थित है। यहां आकर शारीरिक और मानसिक रोगों का निदान होता है। कुण्डलिनी के उत्थान के लिए इस ज्योतिर्लिंग की आराधना आवश्यक है। 9. धनु 👉 इस राशि का संबंध काशी विश्‍वनाथ ज्योतिर्लिंग से है। यह केतु का उच्च स्थान है जहां आत्मा को मुक्ति मिलती है। यहां आकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। 10. मकर 👉 इस राशि का संबंध भीमाशंकर या मोटेश्वर ज्योतिर्लिंग से है जो पुणे के पास स्थित है। यह मंगल का उच्च स्थान है। मंगल हमारे जीवन में पराक्रम, शौर्य और अभय प्रदान करते हैं और साथ ही जीवन को मंगलमय बनाते हैं। 11. कुम्भ 👉 इस राशि का संबंध केदारनाथ ज्योतिर्लिंग से है। यह राहु और शनि का स्थान है जो जीवन से अंधकार को दूर कर दुविधा का अंत करते हैं। गलत कर्म करो तो जीवन को अंधकारमय बना देते हैं। 12. मीन 👉 इस राशि का संबंध त्रयम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग से है। यह शुक्र का उच्च स्थान है। यहां पर सभी दोषों से मुक्ति मिलती है और जातक जन्म एवं मरण के चक्र से छूट जाता है। मृत्युंजय मंत्र इस ज्योतिर्लिंग से सम्बंधित है। नोट👉 उल्लेखनीय है कि कुछ विद्वानों के अनुसार मेष के सोमनाथ, वृषभ के मल्लिकार्जुन, मिथुन के महाकालेश्वर, कर्क के ओंकारेश्वर, सिंह के वैद्यनाथ, कन्या के भीमाशंकर, तुला के रामेश्वर, वृश्चिक के नागेश्वर, धनु के काशी विश्‍वनाथ, मकर के त्रयंबकेश्वर, कुंभ के केदारनाथ और मीन के घुष्मेश्वर या गिरीशनेश्वर ज्योतिर्लिंग को मानते हैं। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *जय महाकाल🌹🙏* #🖊 एक रचना रोज़ ✍