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jai Shree Krishna🙏
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🌞 Good Morning🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
🕉️सनातन धर्म🚩 - बस इस बातका सब्र है कि, ऊपर चाले को सब खबर है...!! सधे राधे बस इस बातका सब्र है कि, ऊपर चाले को सब खबर है...!! सधे राधे - ShareChat
#🕉️सनातन धर्म🚩 #💕 प्यार भरी शुभकामनाएं
🕉️सनातन धर्म🚩 - महादेव के अंश से जन्मा वो वीर है, जो रामभक्ति में लीन है वो हैं ೊ"lc? जिन पर छाया है स्वयं शिव की (gIG जन्मालव ಹ हार्दिक शुभकामनाएँ ೨೯ महादेव के अंश से जन्मा वो वीर है, जो रामभक्ति में लीन है वो हैं ೊ"lc? जिन पर छाया है स्वयं शिव की (gIG जन्मालव ಹ हार्दिक शुभकामनाएँ ೨೯ - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞 #🕉️सनातन धर्म🚩 #JaiHanuman #💕 प्यार भरी शुभकामनाएं
🌞 Good Morning🌞 - 9 हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाए 9 हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाए - ShareChat
#🕉️सनातन धर्म🚩 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌞 Good Morning🌞
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00:14
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🥰Express Emotion #🌸 जय श्री कृष्ण😇
🕉️सनातन धर्म🚩 - श्रीकृष्ण मयूर पंख क्यों धारण करते है? वनवास के दौरान माँ सीता को पानी की प्यास लगी। श्री राम जी ने चारों ओर देखा। तभी वहां एक मयुर ने आ कर श्री रामजी से कहा कि आगे थोड़ी दूर पर एक जलाशय ক্িন मार्ग में हमारी भूल चूक होने की संभावना है। श्री है। रामजी ने पूछा वह क्यों ? तब मयूर ने उत्तर दिया कि मैं उड़ता हुआ जाऊंगा और आप चलते हुए आएंगे। इसलिए मार्ग में मैं अपना एक एक पंख बिखेरता हुआ जाऊंगा। उस के सहारे आप जलाशय तक पहुंच जाओगे। मयूर के पंख॰ एक विशेष ऋतु में ही बिखरते हैं। अगर वह अपनी पंखों को बिखेरेगा तो उसकी मृत्यु हो जाती विरुद्ध इच्छा है। वही हुआ। अंत में जब मयुर अपनी अंतिम सांस ले रहा होता है तो उसने कहा कि वह कितना भाग्यशाली है हैं ऐसे प्रभु की प्यास की जो जगत की प्यास बुझाते का उसे सौभाग्य प्राप्त हुआ। भगवान श्री राम ने बुझाने लिए मयुर से कहा की- मेरे जो मयूर पंख बिखेरकर तुमने ऋणानुबंध चढ़ाया है॰ मैं उस ऋण को अगले जन्म में चुकाऊंगा। फिर अगले जन्म में, भगवान राम ने जरूर कृष्ण का अवतार लिया और अपने सिर पर मोरपंख धारण किया। श्रीकृष्ण मयूर पंख क्यों धारण करते है? वनवास के दौरान माँ सीता को पानी की प्यास लगी। श्री राम जी ने चारों ओर देखा। तभी वहां एक मयुर ने आ कर श्री रामजी से कहा कि आगे थोड़ी दूर पर एक जलाशय ক্িন मार्ग में हमारी भूल चूक होने की संभावना है। श्री है। रामजी ने पूछा वह क्यों ? तब मयूर ने उत्तर दिया कि मैं उड़ता हुआ जाऊंगा और आप चलते हुए आएंगे। इसलिए मार्ग में मैं अपना एक एक पंख बिखेरता हुआ जाऊंगा। उस के सहारे आप जलाशय तक पहुंच जाओगे। मयूर के पंख॰ एक विशेष ऋतु में ही बिखरते हैं। अगर वह अपनी पंखों को बिखेरेगा तो उसकी मृत्यु हो जाती विरुद्ध इच्छा है। वही हुआ। अंत में जब मयुर अपनी अंतिम सांस ले रहा होता है तो उसने कहा कि वह कितना भाग्यशाली है हैं ऐसे प्रभु की प्यास की जो जगत की प्यास बुझाते का उसे सौभाग्य प्राप्त हुआ। भगवान श्री राम ने बुझाने लिए मयुर से कहा की- मेरे जो मयूर पंख बिखेरकर तुमने ऋणानुबंध चढ़ाया है॰ मैं उस ऋण को अगले जन्म में चुकाऊंगा। फिर अगले जन्म में, भगवान राम ने जरूर कृष्ण का अवतार लिया और अपने सिर पर मोरपंख धारण किया। - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌞 Good Morning🌞 #🥰Express Emotion #🕉️सनातन धर्म🚩 #🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - [(op mammnan इनसे मिलिए...ये दो मेरे प्यारे से दोस्त ओर मेरे जीने का सहारा भी।। [(op mammnan इनसे मिलिए...ये दो मेरे प्यारे से दोस्त ओर मेरे जीने का सहारा भी।। - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🥰Express Emotion
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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🥰Express Emotion
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00:08
#🥰Express Emotion #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👩‍🍼माँ बेटी का प्यार 👩‍👦
🥰Express Emotion - कंजक से कंजक तक... कल तक जिन नन्ही हथेलियों में, हम चने और हलवा पाते थे, ओढ़कर, सर पर एक छोटी सी चुनरी देवी का रूप बन जाते थे। वो बचपन की मीठी सी ज़िद , वो गलियों में दौड़ना भागना, पता ही न चला कब बीत गया, वो बेफिक्री में जीना और सोना। आज खुद की रसोई से वही खुशबू आई है, यादें अपने साथ लाई है। वही पुरानी वही पूजा, वही थाली है, বক্ী चुनरी, बस आज मेरी गोद में नन्ही खुशहाली है। कल तक खुद कंजक बनकर रौनक बढ़़ाई थी, आज खुद कंजक बिठाने की बारी आई है। वक्त का ये सफर कितना जल्दी गुजर गया, एक बेटी का आँचल आज ममता से भर गया. कंजक से कंजक तक... कल तक जिन नन्ही हथेलियों में, हम चने और हलवा पाते थे, ओढ़कर, सर पर एक छोटी सी चुनरी देवी का रूप बन जाते थे। वो बचपन की मीठी सी ज़िद , वो गलियों में दौड़ना भागना, पता ही न चला कब बीत गया, वो बेफिक्री में जीना और सोना। आज खुद की रसोई से वही खुशबू आई है, यादें अपने साथ लाई है। वही पुरानी वही पूजा, वही थाली है, বক্ী चुनरी, बस आज मेरी गोद में नन्ही खुशहाली है। कल तक खुद कंजक बनकर रौनक बढ़़ाई थी, आज खुद कंजक बिठाने की बारी आई है। वक्त का ये सफर कितना जल्दी गुजर गया, एक बेटी का आँचल आज ममता से भर गया. - ShareChat